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मेरी डायरी के पन्‍ने

स्‍वरचित अप्रकाशितफिर खड़ी हुई अंगड़ाई लेकरशाखों पर बहार आ गई।रूप का लावण्‍ययूं बिखर गया धरती परसितारों में भी चमक आ गई।झुकी नजरों से देखायूं बिखरे सितारों कोफूलों को भी हंसी आ गई।सांझ के धुधलकेतेरी यादों के यादों में घुल जाएं।बलखाती सी देख देह तुम्‍हारीशिराओं म...
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  August 7, 2013, 10:15 pm
तू हाथ फैला फिरउस प्रकाश को पाने के लिएजिसने अपने को जलादूसरों को उजाले परोसे हैं।दिया है भरोसाउस प्रकाश नेजीवन में हौसला जगाने के लिए।हर सुबह उठता हैनई रौशनी लेकरऔर दिन भरबांटता फिरता हैऔर अस्‍ताचल कोखाली हाथ लौट जाता हैफिर एकनई सुबह के लिए।...
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  June 15, 2013, 11:38 pm
धूप पीले रंग में रंगी हुईसमय को थामे चला जाता हूँहर तरफ बिखरा एकप्‍यार का अहसासएक तरफ खड़ा है गुल्मोहरऔर दूसरी तरफ है अमलतास।---- कदमों की आहट परझनक उठे तेरी पायलबांधे रहती है हमें।बिखर जाते हैं हम भीपायल के घुंघरू के टूटने पर ।।----- इस जमाने के दरमियां हम थेप्‍यार की तला...
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  March 18, 2013, 7:09 pm
तुम्‍हारा रूप हीमेरे प्‍यार को परिभाषित करता है।तुम्‍हारा रूप ही मेरे नयनों को प्रचुरता प्रदान करता है।तुम्‍हारे रूप की प्रचुरताएक ठंढक के रूप मेंमेरे हृदयांगन में शीतल चांदनी के रूप मेंउतरती है।तुम्‍हारे ही रूप की प्रचुरता से आलोकितहोता हृदयांगन औरसैंकड़ों दी...
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  March 10, 2013, 9:24 pm
उलझनों के भँवर मेंफँसी जिन्‍दगी कोआज फिर एक सहारा मिल गया।हकीकत से दूरभागती उम्‍मीदों कोएक मुकाम मिल गया,अपनों से जिन्‍दगी को आज फिर एक उपहार मिल गया।नश्‍तर चुभतेजिस्‍म मेंकोई अनचाहा जख्‍म दे गया,बहती अश्रुधाराकराहती जिन्‍दगी मेंआज फिर कोई मरहम दे गया।पुल्कित से...
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  February 21, 2013, 8:06 pm
नीम तलेरेशमी जुल्‍फों की छांव मेंछनती सुनहरी धूपतुम्‍हारी बाहों में।बहतीपुरवाई नरम धूव परएक सुकूनकी तलाशतुम्‍हारे मखमली आंचल में।पल-पल गुजरता गयाअनजानी सी चाह लिएएक सन्‍नाटाघड़ी की चाल में।सुलगती सी दोपहरमुरझाई सी शामनहला गई चांदनीसियाह रात में।न सुर सजेन सा...
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  February 19, 2013, 7:39 pm
लो आया बसंतझूंम उठा अमलतासफिजाओं की मिठासलो आया रंगों का त्‍यौहार।फाल्‍गुनी बयार नेबिखेरा अबीर-गुलालतन-मन रंग लोन रहे कोई मलाललो आया रंगों का त्‍यौहार।ये गलियां और चौबारारंगों से है सराबोरमस्‍तानों की टोलीखड़ी है तेरे द्वारलिए अबीर-गुलाललो आया रंगों का त्‍यौहा...
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  February 18, 2013, 8:31 pm
रूमानी हुई लेखनी कलम खूब रोईआंसूओं सी बिखर गईस्‍याही कागज से कोरे आंचल पर।रूक गई आहिस्‍ता सेफिर चली बंजर जमीं परघबराई सी कोरे कागज पर।दृवित हुआ मनसदाएं देती खामोश सीशुष्‍क अधरों पर वाणी भी कपकापाई सी।पुलक्ति  हुआ मनआंखों में रूलाई सीइबारत को दोष देतीउठी निगाह रोई-...
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  February 17, 2013, 7:16 pm
पथराई सी थकी आंखों कोएक नज़र का सहारा दे दो।भँवर में फंसी कश्‍ती कोएक पतवार का सहारा दे दो।बह न जाएं मझधार में हमएक किनारे का सहारा दे दो।समय रू गया है तेरे इन्‍तजार मेंएक पल का सहारा दे दो।लड़खड़ा न जाएं गर कदम तेरी चाहत मेंअपनी खमोश बाहों का सहारा दे दो।सांझ ढले उतरत...
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  February 10, 2013, 11:22 am
वक्‍त काली स्‍याहीकुछ लिख गईजीन के कोरे कागज परकिताबों को संवारते-संवारतेगुजर गया दो जवां दिलों कोमिलने का वो साल....फिर चमके जुगनूंगहराई अंधेरी रात मेंभोर हुई फैला उजियाराामिटा तिमिर जीवन का कुछ नया लिखने को....फिर उठी अंगुलियांतेरे शाने परबिखरी जुल्‍फें संवारने को...
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  January 13, 2013, 7:41 pm
अधरों पर रखे पैमानेमौन क्‍यों हैंअश्‍कों से पिला दे साकीमयखाने किसके लिए हैं?बयां यू करते हैं,हम दिले दास्‍तां किताबों में लगे पन्‍नेमौन क्‍यों हैसूखे फूल इसमेंआखिर रखे किसके लिए हैं?पतंगों के जलने का सबबहमसे न पूछो यारोंजल रही बाती मौन क्‍यों है? मन मंदिर के गलियार...
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  January 11, 2013, 7:03 pm
व्‍यस्‍तता में लीनखनकती कलाओं का संगीतपुकार रहा मुझेकौन सा प्रणय गीत।आभास दिलाताहो कहीं आस-पासबज रहा तन्‍हाइयों का संगीतपुकार रहा मुझेकौन सा प्रणय गीत।न रुनझुंन न वो झन्‍कारचलता है पता नउसके आने कालिए बिन घुंघरू की पायल का संगीतपुकार रहा मुझेकौन सा प्रणय गीत।-------...
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  January 10, 2013, 7:00 pm
विक्षिप्‍त मन से शीशे कोकितना और तोड़ोगे।बिखरे इन टुकड़ों परऔर कितना चलोगे।मत रौंदो अब इतना इन्‍हेंजुबां से ये कुछ न बोलेंगे।हो सके तो इन्‍हें अब बिनवा दोगर जोड़ न सको तो इन्‍हें अब फिंकवा दो।-------...
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  January 9, 2013, 7:37 pm
अब सार्थक होंगी ये सदाएंदी थी जो अकेलेपन की वीरान गलियों से।अब आएगी फिर नए अन्‍दाज से बहार,उजड़ गई थी जो पतझड़ से।आ रहा बासन्‍ती मौसमबन कर पूर्वाई अतृप्‍त धरा की प्‍यास बुझाने।काली घटा बनकर ले अपनी बदलीउड़ चलेगा पछुवाई बनकरचीरती बयार इन्‍द्रधनुषी पथ से।-----...
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  December 27, 2012, 8:22 pm
बह रही जीवन नैयाअश्‍कों की धार परबिन आंचल के पाल के।किराना कर किनारे सेफंस गए मझदार में,बिन बांहों की पतवार के।चल रही आंधियांलौट गा बसन्‍त भीसूरज की तपती तेज किरणेंहो गई चंदा की चांदनी भीबिन शरद की छावं के।तन्‍हाइयों से जज्‍ब अंधेरों सेगुज रही जिन्‍दगीजला रही रोशन...
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  December 25, 2012, 6:28 pm
आ जाओविरह के मौसम ने चकरोर बना दिया।तुम चंदा की चांदनी बनकर आ जाओ।मिन की प्‍यास ने चातक बना दियातुम बिन बादल की बरसात बन कर आ जाओ।तुन्‍हाई की रात सोने नहीं देती,तुम बिन ख्‍वाब कीनिंदिया बन कर आ जाओ।तुम्‍हारी खुरबत शिकस्‍त दे रही रही हैतुम जीत मेरी‘’विजय’’ बन कर आ जाओ।...
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  December 22, 2012, 9:11 am
सांस लेना भूल गएतुम्‍हारी यादों के आंचल में।सब कुछ खो जाए गर,पा लूंगातुम्‍हारी जुल्‍फ केघने साए में।मूँह मोड़ लूंगर दुनियां से बाबस्‍ता,सिर्फ एक तेरे दीदार के लिए।-------...
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  December 20, 2012, 7:29 pm
ले आया फागुनरंगों का त्‍यौहारहोलिका तो जल गईअहम् की होली मेंलेकिन दहक रही मन की होली।रह रहकर चटकती हैअतीत की चिंगारियांले जाते हैं लोगकुछ चुन-चुन करदहकते अंगारे तुम्‍हारी याद में।छुपा रखे हैं पहले ही सीने में दहकते अंगारे तुम्‍हारी याद केबुझ न सकेंगे न ठंडे हो सके...
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  December 18, 2012, 6:22 pm
तुम जहां होमैं वहां कहांसमय की दीवार खड़ीइन्‍तजार की बेडि़या डाल।दूरियों की पराधिनता में कैदहर पल रूका हुआ,पर जारी है जिन्‍दगी का सफरफांसले कम हो रहे हर पलपर युग-युग से बीत रहे हैं।मंजिल पास है पर करीब नहींराहें हैं पर साथी नहीं,कट न सकेगा यूं सफरपर ऐसे में कहां मिलेग...
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  December 17, 2012, 7:44 pm
रात कितना रोई तुम्‍हें ना पाकरमन को घरोदें में छिपे क्‍यों रहते हो तुमदिन बीत गया निशा के द्वार तकख्‍वाब अस किसके लिए चुराऊं।रात भी बीत गई अखियों के झरोखे से भी न आए तुमशयन शैया तुम्‍हारे स्‍वप्‍नों से भरी कहांजो अपनी आंखों में बसाऊं।तरसा दिया-तड़पा दियामोहताज कर दि...
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  December 15, 2012, 6:55 pm
शबनम् के शीतल मोतीयाद में तुम्‍हारी जलाते रहेमरहम ही नहीं जख्‍मों पर लगाने के लिए।घुट-घुट कर रही जाती हैतुम्‍हारे अहसास की वो किरणबन्‍द कमरे के किसी कोने में।तुम्‍हारी याद फिर भ्रम पैदा करती हैतुम्‍हारे करीब होने की,दुनिया के रास्‍तों से न सहीएक पल के लिए चले आओख्‍...
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  December 12, 2012, 8:36 pm
लजरते आंसूओं सेभीगे दामन में पनाह दे दोसूरज की सुनहरीबनकर गर्म किरणेंसमाने दो भीगे दामन में।सोख लूंगा बहनेसभी आंसूओं कोरोक लूंगा बहते आंसूओं कोनयनों में अपने पनाह दे दो।अपने मन मंदिर मेंआसरा दे मुझे दो,हम भी दु:खों में हमसफर हो लेंगेअपने आंचल में पनाह दे दो।बचा लूं...
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  December 7, 2012, 7:39 pm
खामोश पड़ी इन्‍तजार की चिताअब धधक उठी है।इन्‍ही के शोलो में सुलग रहा हूं मैं,एक मिलन की आस लिए।उठ चल अपने सावन के साथकाली घटा बनकर,आंचल में तुम जो समेट लाई होबरसा दे वो शबनम के मोतीअब तो कुछ राहत मिले।---- ...
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  December 5, 2012, 6:38 pm
वो आई थी रात बनकरदिल बहलाने कोदिल तो बहल गयाछोड़ गई रात तड़पाने को।चुभते रहे तेरी यादों के वो नश्‍तरदर्द दिल के छिपाने को।आरजू थी एक पल साथ रहने की,छोड़ गई दुनिया के मैंदा में,शिकस्‍त खाने को।खड़ा इन्‍तजार बनकरदेख रहा राहउस अजनबी के लौट आने की।-----...
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  November 26, 2012, 8:00 pm
एक बाररूप अपना फिर संवार लो।कंगना फिर वो पहनलो,बिंदिया हक की वो मेरीमाथे पर सजालोरूप अपना फिर संवार लो।केश वही फिर खोल दोशाम फिर यूं ही गुजर जाने दो,काजल न सही आंखों में मुझको बसा लोरूप अपना फिर संवार लो।लाली न सहीहोठो पर मेरा नाम रख लोरचने कुछ नहीं कृतिहाथों मे नाम ही ...
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  November 24, 2012, 2:58 pm
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