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गीत मेरे ........

राजनीतिकी चौसर पर बिछती हैं बिसातें नैतिकशास्त्र की बलिवेदी पर गृहविज्ञान का समीकरण गड़बड़ाता है  रिश्तों  का रसायन नफा नुकसान के गणितमें उलझ कर स्वार्थपरकता के अर्थशास्त्र से परिभाषित हो समाजशास्त्र के निर्देशों पर  देह के भूगोलतक सिमटता है तब भौतिकीके मा...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :प्रेम के विषय
  July 6, 2012, 9:42 am
मृगतृष्णातपते मरुस्थल मेंरेत के फैले समंदर परप्यासे पथिक कोमृगतृष्णा  भरमाती है शहरों मेंकोलतार सनी सड़कें भीभरी दुपहरी मेंभ्रम का संसार रचाती है ...प्रकृति का कोई खेल या भ्रमयूँ ही नहीं होता ...प्रकृति रच कर मायासचेत रहना सिखाती है ...सीख सके मानव इनसेजीवन के दुष्कर प...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :आशु कविता
  June 8, 2012, 7:13 am
वह एक नदी थीजब तुमसे मिली थीबहती थी अपनी रौ मेंकल-कल करती....कूदती फांदती ...प्यार की फुहारों से भिगोतीइठलाती थी इतराती थीचंचल शोख बिजली सी बल खाती थीपर...तब तुम्हे कहाँ भाती थीराह में इसके कंकड़ पत्थर भी तो थेकुछ सूखे हुए फूल कुछ गली हुई शाखाएं भी तो थीकु...
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वाणी गीत
Tag :डेली न्यूज़
  May 27, 2012, 5:14 am
सुपात्र होने पर भी  जिनकी जीभ नहीं लपलापायीमुफ्त का सामान देखकर किया हो जिन्होंने न्याय पर विश्वास मुफ्त बांटे जाने वाली लाईन में बिना धक्का मुक्की किये अगली पंक्ति  को लंगड़ी मार कर गिराए बिना अपनी बारी का करते इंतज़ार रह गये जो सबसे पीछे ...उनका नंबर आने तक खाली ...
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वाणी गीत
Tag :विसंगति
  May 23, 2012, 7:29 am
कही किसी छोटे से घर में नन्हे हाथों से बनाये  कार्ड बगिया से तोड़ लिया गया एक फूल गुल्लक के पैसों से खरीदी चॉकलेट या माँ के बालों के लिए क्लचरगले में बाहें डाल कर गालों से गाल सटाकर गीली छाती से गर्वोंन्मत नन्हे मुन्नों को दुलारते निहाल हुई जायेगी कोई माँ !ऐसे ही कि...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :माँ
  May 13, 2012, 5:10 am
प्रेमके विस्तृत आकाश में खुशियों की पींगे झूलताकुलांचे भरता मन ठिठक जाता है ...जब उसकी आँखों में प्रेम के बदले नजर आता है सिर्फ एक जानवर !! जिसे उसकी काया के भीतर पलते मन की ना खबर , ना फिक्र ...ढूंढता है सिर्फ एक शरीर बिना कीमत चुकाए पा सकता है जिसे बार -बार !!उसकी काया में चुभ...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :दर्द की अनुभूति
  April 13, 2012, 6:46 am
क्या हम मात्र ब्लॉगर हैं या भावनाओं के अनुभवों के सूत्रधार भी !हम आपस में मिलते हैं जिन एहसासों को जीते हैं दो शब्दों का रिश्ता जोड़ते हैं वह ईश्वर का आशीष है निरर्थक गौण साथ नहीं बस समझना है एक दूसरे को बारीकी से और थाम लेना है हाथ फिर ...अकेलापन नहीं होगा दर्द को नया आयाम...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :अनुगूँज
  March 15, 2012, 6:02 am
खूबसूरत स्मृतियाँ तो अंगराग -सी ही हैं जो छूट जाने पर भी खुशबू और रंगत ही देती हैं ...फिर भी कभी किसी शाम तन्हाई आकर करीब बैठ जाए तो फिर तन्हाई , शाम , उदासी और हम ...फिर तन्हारहा कौन !!हर रोज क्षितिजपर जब धरती आसमान से गले मिल कर जुदा होती है ...आसमान में घिर रहा हल्का अँधेरा शाम ...
गीत मेरे ...........
वाणी गीत
Tag :उदास तन्हा शाम
  February 22, 2012, 7:43 am
कोयल कुहुक मधुर कानों में पवन छेड़े आँचल लहराएकहीं लबों पर दहके पलाश कही मन आलापिनी ना हो जाए !सूरज महुए -सा महका है धरा पीले आँचल शरमाये नीले बादल ओस झर रही कहीं मन हरी दूब ना हो जाए!कहीं कुसुमित कानन नयनों मेंमन कहीं तितली बन जाए !पल्लवित वृक्ष सा मौन आमंत्रण कहीं मन व...
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वाणी गीत
Tag :गीत
  January 30, 2012, 6:54 am
रोज एक झूठ कितने बहाने विजयी मुस्कान असत्य के हिंडोले मेंझूलते कई बार तड से ताड़ लेती हैं आँखें मन की मन की बातें !दन से मुस्कुरा देती है... इस अमृतमयी मुस्कान को ही तो पिया जाता है हर रोज गरल असत्य का ...बुद्धू बनाया!बुद्धू कही का! दो चेहरे आमने -सामने मुस्कुराते हैं एक दूसर...
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वाणी गीत
Tag :प्रेम
  December 28, 2011, 7:57 am
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