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गर्द-ए-रहगुज़र : View Blog Posts
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गर्द-ए-रहगुज़र

क्या इंसाफ है तेरा भी ऐ खुदा अपने गुनाहों का जुर्माना पूछा था देना था तो बैराग ही दे देता क्यों बेवजह इश्क़ की राह थमा दी ?...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  March 26, 2017, 12:14 am
डोर मेरी तेरे हाँथ में जो हैतु भी तो बंध गया मुझसे छूट न पायेगी तुझसे ये डोर कैसे करेगा खुद को दूर मुझसे नाचती हूँ मैं तेरी थिरकन पे मीरा तो नहीं पर मैं हूँ हीर तेरी इश्क़ के रोग ने किया बावला इसमें तेरा कोई कसूर नहीं आग का मतलब जानकरअंगारो पे चलना मजबूरी मे...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  March 10, 2017, 8:52 pm
चल चलें कहीं दूर, जहाँ बस तू और मैंथमे  क़दमों को रोक न ,मेरे पास आने देजिन दीवारों में दरारें हैं  उन दीवारों को तोड़ देंजिन बेड़ियों से जकड़े हैं उन बेड़ियों को तोड़ देंअब देर कैसी ,क्यों किसलिए सोचना इतनातेरे दिल में जो आशियाना ,चल वहीँ जा बसेंजीना है तुझे मेरे स...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  October 18, 2016, 12:18 pm
हम अक्सर शोहरत की चाह में जिंदगी के छोटे छोटे पलों में छुपी खुशियों को नज़रअंदाज़ कर दिया करते हैं , आगे बढ़ने की चाहत में कुछ ऐसा पीछे छूटता है जिसे हम चाह कर भी वापस नहीं पा सकते । ...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  December 15, 2014, 6:01 pm
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गर्द-ए-रहगुज़र...
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  November 6, 2014, 12:44 pm
मचलती हैं मन में हज़ारों तितलियाँ वहम ही सही तुमने मुझसे इश्क़ तो किया ...
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  September 1, 2014, 6:31 pm
खो गया है कहीं तो बचपन ढूँढने निकला उसे उन गलियों में आंकने को ज़मी नहीं मिली तराशने को आसमाँ न मिला रौंद रहे थे एक दुसरे के साये भी एक दूसरे को पैर फसा मैं गिरा, रास्तों पे गढ्ढे तक दिखते नहीं क्या नन्हे क़दमों को मिलगा रास्ता चलने को या हवा में रस्ते बन चुके ह...
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  August 11, 2014, 5:17 pm
मांगी है दुआ सभी यार दोस्तों के लिए खुदा-ए -रहमत बरसे उनके घर पे दिलों में जज़्बा हो दिलों में जूनून हो अल्लाह उनके सारे ख्वाब पूरे करेअमन और सुकून हो पूरी दुनिया में  बस यही दुआ मेरी हर इबादत में रहे. सभी दोस्तों को ईद मुबारक़  !!! ...
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  July 29, 2014, 12:37 pm
जब जिंदगी रूठ जाया करती हैं हमसे बिछड़ जाती हैं राहें और मुँह फेर लेते हैं लोग अंधेरों में जब मेरे ही अपने दो साए होते हैं उस बेरहम वक़्त में अपने भी पराये होते हैं अपनों  से लगने वाले बेगानों की भीड़ में कभी एक बेगाना अपना बन हाँथ थाम लेता है  अंधेरों स...
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  September 2, 2013, 2:40 pm
पूछती है जिंदगी एक रोज मुझसे क्यों हो तुम इतने हैरान परेशान क्यों इतने सवालों से घेर रखा है खुद को क्यों नहीं कर लेते खुद को इनसे आज़ाद ज़िन्दगी से बस इतना ही कहा मैंने कभी खुद को जानोगी तो समझोगी ये मेरे नहीं तेरे ही हैं सवाल आज़ाद तो मैं हूँ जाने कब से तल...
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  January 28, 2013, 6:42 am
हर रूप में तुम्हें  मैंने पाया है बचपन में माता-पिता कह कर पुकारा पाठशाला में तुम्हे अपना शिक्षक पाया है दोस्तों में भी तुम्हारे अस्तिस्त्व का अहसास जिंदगी में मिले हर इंसानी साए में तुम्हारे रूप का आभास समाया है मासूम से दिल की ख्वाहिशों में तुम्हे जी...
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  September 6, 2012, 1:16 am
तन्हाई मैं भी तुम मेरे पास होभीड़ में भी एक ख्याल बन आस पास होजब भी गुजरें हम उन गलियों सेआज भी तुम वहाँ करते हमारा इंतज़ार होठहरा है आज भी हर एक पल वहांजैसे जिंदगी बाँध ली वक़्त ने संग अपने मैं जिंदगी के साथ आगे बढ़ तो गयीपर साँसें जैसे उन्ही पलों में थम के रह गयींतुम ही ब...
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  September 2, 2012, 3:03 am
साँसे उलझी उलझी सी अंखियों मैं नमी नमी सीजाने कौन अजब सी बात की हम अब तक उन्हें भूले नहींकभी हंसूं नाम आँखों से तो कभी गम में भी मुस्काऊँकिस राह चल के जाऊं की तेरे कदमों के निशां पा जाऊंजिंदगी के रास्ते अनजाने कभी एक पल को दिल सहमे ऐसेजैसे मेरे जीवन से साँसों की डोर रूठ ग...
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  September 2, 2012, 3:01 am
ना जाने कब कैसे क्यों  तेरी मौजूदगी को नजरअंदाज  किया मेरी साँसों में तेरी ही खुशबु  इस बात से भी इनकार किया तेरे न होने से बेचैनी तो थी फिर भी तुझे खुद से जुदा किया तेरे दूर होने पर भी तुझे महसूस किया फिर भी दिल की दस्तक पे सवाल कियाखोजा वजूद का निशाँ न जाने कहाँ कहाँ ...
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  August 31, 2012, 11:53 am
उस पल ठहरा रहा तू मेरी साँसों पे  जैसे पत्तों की कोर पे एक बूँद ओस की  गुजारिश मेरी इस चंचल हवा से बस इतनी  की ले न जाए वो तुझे संग अपने उड़ा के कहीं  गुजारिश वक़्त से ये लम्हा थम जाए अभी यहीं  ये एक लम्हा एक पल एक सांस ऐसी जिसमें  समंदर से उठकर समंदर में सिमटत...
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  July 24, 2012, 8:01 pm
हाँ  तुम ही तो हो मेरा एक अधूरा हिस्सा लगे अब भी बाकी है लिखने को इश्क की किताब में  एक किस्सा न जाने कैसे कब कहाँ मिल जाते हो तुम मुझे बन के जोगी जला जाते हो दीप मेरे मन में अपने इश्क का जोगन हो गयी रोगन हो गयी जी के तेरे साथ रिश्ता एक पल का और क्या क...
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  July 24, 2012, 12:52 pm
एकराहऐसीजिसकीकोईमजिलनहींएकदरख़्तऐसीजिसकीकोईशाखेंनहींआसमनमेंदिखतेतोहैंसितारेकहींकहींपरउनसितारोंमेंरास्तेउजालेकरनेकोरोशनीनहींठहराहुआहैदरियाकापानीजैसेसमंदरसेमिलनामुनासिबनहींपत्तोंमेंकोईहलचलसरसराहठनहींजैसेउसकाहोनाउनदरख्तोंमेंबेमानीकभीकरत...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  April 16, 2012, 12:10 pm
क्या जाना है कभी किसी ने की उसे तलाश क्या लापता अनजान राहें मंजिलों की किसे है खबर बहता दरिया ये जीवन आखिरी मंजिल है बस सागर सागर से मिलने खातिर कितना जुदा जुदा सा ये रास्ता कभी धरा पे बहना कभी मौजौ के संग अठखेलियाँ तो कभी धरा से गिर फिर धरा में सिमट जाना ठोकर लगे फिर भी ह...
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  December 13, 2011, 5:39 pm
मेरे दिल में है पीर इतना की नैनो में समंदर समायातुफानो से डरे क्या जिसने दिल में तुफानो का भंवर बनायापल पल में बीतते हुए एहसास और लम्हों में शोर कितनालफ्ज़ों में दबी ख़ामोशी कर रही हो जैसे हाल-ए-दिल बयानमंजिल है सामने पर दिल को अब राहों से कोई गुजारिश नहींतेरे क़दमों के न...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  December 7, 2011, 9:31 am
इंतज़ार किया है तेरा सदियों तकतू आया भी तो झलक दिखाने मुझ पर सितम ढाने या आजमानेमुझपे सितम न ढा ज़ालिम की सदियाँ बितायीं है तेरी राह मेंआजमाले मुझे चाहे जितना की मेरी चाहत में भी खुदाई है...
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  November 24, 2011, 6:51 pm
उनबारिशकीबूंदोंसेपूछामैंनेकहाँगयीउनकीताजगीवोदिललुभातीसादगीमासूमसाचेहरानज़रोंसेहोतीसंजीदगीबयांसादगीकीमूरतकहूंयासूरतमैंभोलापनबेपनाहएकदिनयूँहीजबमिलेएकअपनापनसामहसूसकियापरबारिशमैंभीगकेभीदिलथामेरासूखाहुआऐसालगाजैसेअकेलेमुसाफिरकोएकपड़ावमिलगय...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  November 21, 2011, 9:28 am
कहाँ हुआ गुम तू सजना की अब बस मेरी ही आवाज है गूँजे दिल में हुआ सूनापन इतना बेताब सी नजरें राहों पे टीकी की जैसे तलाशती हो गुजरा हुआ कल अपना बेबस से लब ये मेरे सिये हुए जैसे भावनाओं के दरिया में तलाशते हों शब्द अपना तुम्हें शायद इस बात का अहसास नहीं जाते जाते ले ...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  August 20, 2011, 4:13 pm
आपसे मेरा नाता पुराना था कुछ जाना पहचाना थान रही आप अब हमारे बीच इस कमी का हम सबको अहसास हैखोया है आज वो पेड पुराना जिसमें अब सिर्फ यादें साथ हैं रह गयीं हैं सिर्फ उसकी अधूरी शाखें परमात्मा में विलीन आपकी आत्मा हो मिले आपके मन को सुख शांती अश्रुओं के फूल समर्पित आपको यह...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  March 30, 2011, 9:09 am
मेरा दिल ले जाए जहाँ बस वहीँ मंजिल मेरीमिलते रहेंगे इस सफ़र में हर मोड़ पे हमसफ़र कई हर किस को मंजिल की तलाश और रास्तों की कमी नहीं चलते चलते जो हो जाए साँझ कभी कहीं थामना पड़ेगा एक रात को बस उसी मोड़ पे वहीँ ये ठहराव सिर्फ एक पल का है जिंदगी कभी थमती नहीं लगता है जैसे कभी म...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  March 27, 2011, 3:37 pm
सुबह सुबह से शोर गुल … नींद टूट गयी और बस हो गया दिन शुर .... वही रोज की भागदौड़ , रास्ते चलते भागते लोग … भूल चुके जिंदगी का मतलब … एक जोर का धक्का लगा और में गिर पड़ी …उठ के देखा एक नयी जगह , क्या कर रही हूँ यहाँ ?? कैसे आई ?? ये तो वही जगह है जो मैं रोज सपनों में देखा करती हूँ ….वही सम...
गर्द-ए-रहगुज़र...
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  March 10, 2011, 9:39 am
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