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आँसू

कही कोई तो तडापता तो होगा हीआखिर ये दिल यूँ ही क्यूँ उदास हो जाता है?किसी को तो, य़ा किसी से, मिलने की चाहत सुलगी होगी ?क्यूँ कोई यूँ ही मायूस हो जाता है एकाएक?ये गणित ज़रा मुश्किल तो है, वरना समझ गया होतावैसे भी ये  प्रमेय मुझसे कब हल हुये है, जो आज होंगेबस मेरा दिल कहता कही &nbs...
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  August 7, 2017, 12:08 pm
इस जामाने में, मेरे लिये कौन आया है मेरे पास ?ज़रूरततों के लिबास में हर कोई आया मेरे पासलोग कहते है कि चाहतों की भीड है मेरे पास,(ये दिल ही ज़ानता है कि बस....)आरजू के चेहरे में जुस्तजू के साथ आया मेरे पासगुनाह होगा अगर कहूँ कि खाली हाथ आया मेरे पासकुछ लाता नहीं तो लब्ज कहा से हो...
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  July 18, 2017, 3:57 pm
हमेशा रोया बहुत इन नज़रों की बेबसी पर अपनेफिरभी अंधों के शहर में आईना बेचने लाया हूँपूरी शिद्दत से जानता अपने इस कारोबार के फायदेनाउम्मीदी में ही सही काफिरों को खुदा बाटने आया हूँतुम हँसते हो या रोते, मेरी अक्ल पर तुम्हारी रजा हैखुश हूँ की जो करने आया था वही करने आया हू...
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  May 30, 2017, 1:34 pm
तुम तो अगाज थे मेरे,  अंजाम भी थे मेरे किरदार केख्वाबो के टूटे हर आईनों मे उभरे अक्स थे मेरेवजुद को तुमने ही ऊकेरा था हाकीकत कि ज़मी परमेरी ख्वाइसो को दुआवों मे सम्हाले फनकार थे मेरेफिजाओं मे बिखरी हँसी ने कितना सफर तय कियाकि उन्ही की खुसबू मे साँस लेती हुई ज़िन्दगी थे म...
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  February 27, 2017, 2:40 pm
आँसू: काफियों मे काटी है: वो गजल आज तक मुकाम्मल न हुई  उम्र ज़िसके लिये काफियों मे काटी है वजूद के इतने चेहरे नजर आये मुझे  जाने कितने सवालों मे ये ज़िन्द......
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  December 24, 2016, 1:14 pm
वो गजल आज तक मुकाम्मल न हुई उम्र ज़िसके लिये काफियों मे काटी हैवजूद के इतने चेहरे नजर आये मुझे जाने कितने सवालों मे ये ज़िन्दगी बाटी हैहर मंझर पर ठहरता है दिल कि मंजिल है शक्ल जाने कितनी तस्वीरों मे ऊतारी हैज़रा समहल के रखो इस आईने को य़ारों बडी मुश्किल से उनकी तस्व...
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  December 24, 2016, 1:12 pm
ज़िन्दगी मे इसी मंझर का मुझे इंतजार अर्से से था शायद हजारो तुफान ज़िहन मे फिर भी ज़िक्र करने का जी नहींये शायद इसलिये भी हैं कि हर अक्स पर धुंध ही छाई हैं इस शोरगुल मे भी खुद के सन्नाटे से निकलने का जी नहीं कुछ काशिस तो हैं जो इस ज़िन्दगी से अब भी जोडे हैं मुझे वर्ना इस सफर मे ख...
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  August 22, 2016, 11:50 pm
मुझे मंजिलों की जुस्तजू न रही मेरी आरजुएं है वेवफासरे राह बनगया मेरा हमसफर ये ठोकरें ही फलसफाचाहो तो इसका इलज़ाम सफर की थकन को दे दोइस पल का सच यही, ये ही है मेरा है हमनवांचाहे जितना भी हो बदशक्ल मेरे वजूद का है चेहराइस सफर से ही इश्क मुझे, नही मुझे है वस्ले आहजुस्तजू ने द...
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  March 17, 2016, 4:44 pm
कभी सोचता उन तमाम खवाइसो को क्या नाम दू?जो जली तो जी भर के पर कभी दिखी ही नही दिल में ही सुलगती रही जी भरके भठ्ठी की तरहपर कभी भी किन्ही अल्फाजो में दर्ज नही हुईयक़ीनन ‘अल्फाजो से बेरुखी’ शहादत का चेहरा रहाकभी वक्त, कभी हालत के जंजीरों को तोड़ नही पाईदफन होगयी माझी का एक खु...
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  October 15, 2015, 2:58 pm
चंद लब्ज़ों में कैसे कह दूं मै तुमसे क्या चहता हूँ? चाहता हूँ कि तुम्हे कहीं बहुत दूर ले जाऊं ज़माने की निगाहों से तुमको छुपा के तुम्हारे ख्वाबो के अस्मा के तले तुम्हारी ख़्वाइसों के घनेरे बादलों की जमी पर जहाँ तुम जी भर के जी सको एक पल में सारी जिंदगीखुश हो सको जि...
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  October 10, 2015, 10:33 pm
मुझे जीने ही नही आता ये कह मुझे हर बार जगाती रही माँ .आज के बाद फिर कभी नही भूलूंगाये कह के खुद को सुलता रहा माँ आज की रात आँखों की आखिरी बरसात है, रातों के पंछी ये गीत गुनगुनाते गये सुबह की लालिमा कही आँखों को सुर्ख न कर ये कहते कहते पलक मेरे बुझते गये हर रात बुन...
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  September 11, 2015, 11:47 pm
तरन्नुम बिखरी है फ़िज़ाओं में फिर भीफिसल रहे है जाने क्यों अल्फ़ाज़ होठों सेनिगाहों को अश्कों से मोहब्बत सी होगईनही फिसल रहे जाने क्यों अश्क आँखों सेचेहरा आईना न हुआ फ़िज़ाओं की रौनक काकशिश जाने कैसी रोके है इसे बिखर जाने सेस्याह समुन्दर के किनारों पर उभरा अक्स कैसाकुछ त...
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  August 22, 2015, 1:21 am
मैंने अपने हाथों की लकीरों से बनाई है शबीह तेरी माझी में ऐसा खुबसूरत तस्स्ब्बुर नजर आये कहाँ से?मुस्कुराते देखा है हमने नागफनियों को तपती धुप में पर गुलाबों के चमन में हम ये चलन लाये कहाँ से ?माना की कोई बर्क सा अल्फाज़ नही है हिकायत में पर बिना तेरे अपनी तस्ब्बुर-ए...
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  August 14, 2015, 11:55 pm
बड़ा अजीब सा मंझर है ये मेरी जिन्दगी की उलझन का गहरी ख़ामोशी में डूबा हुआ है सजर ये मेरे अपनों का सिले होठों के भीतर तूफानों की सरसराहट से टूटते सब्र लगता है जहर बो दिया हो किसीने अपने अरमानों का आवाजों को निगलते मेरी बातों के अंजाम का खौफ खुली हवाओं में घुला हो ज...
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  July 10, 2015, 11:00 pm
प्रेम शब्द का सन्धि विग्रह यूँ होता हैप्रेम=परा +ई +म। अर्थात जो शक्ति हमे उर्ध्व की ओर ले जाये वो 'प्रेम'है। आजकल की प्रचलित भाषा में हम जिसे प्रेम कहते है वो वास्तव में आशक्ति का ही एक स्वरूप है. जिसके तीन भेद होते है. वासना - क्षणिक एवं तीव्र आवेगित होती हैकामना - सामान ...
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  June 21, 2015, 2:56 pm
आँसू: अब तो सपनों के भी भावार्थ बदल गए: एक अरसे से खुद को समझाता आ रहा हूँ  धीर धरो एक बार शकु से बैठ कर बात करेंगे गुजरे वक़्त का सलीके से हिसाब करेंगे  सबका हक हिस्......
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  June 21, 2015, 2:55 pm
एक अरसे से खुद को समझाता आ रहा हूँ धीर धरो एक बार शकु से बैठ कर बात करेंगेगुजरे वक़्त का सलीके से हिसाब करेंगे सबका हक हिस्सा उसके नाम करेंगेसाल दर साल गुजर गए, एहसास बदल गए अब तो सपनों के भी भावार्थ बदल गएपर आज तक वो वक़्त नही आया अब तक खुद के इतने करीब नही आया।--------------- ...
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  June 21, 2015, 2:48 pm
न गीत साथ दे रहें न, ही ये शाम साथ दे रही शबनम से इतनी धुंध है नजर रौशनी को खो रही आगे अँधेरी डगर है ये सोच कर भी चल रहे कदम मेंरे है बढ़ रहे  साँस जो ये चल रहीइस बात की खबर नही सहर कहाँ  पे हो इस बात की कसक नही शाम छोड़ आये फलक कफन कर देना जो रात मेंही सो गये ये खबर उन...
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  June 19, 2015, 2:28 am
आँसू: समेत लेते वो "सब"जो नहीं था हाथ की लकीरों में: अगर तोड़  लेते हम खुदाई से अपने रिश्ते सारे  समेत लेते वो "सब"जो नहीं था हाथ की लकीरों में  वो चाहते दम तोड़ गयी थीं तस्व्व......
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  April 20, 2015, 2:30 am
अगर तोड़  लेते हम खुदाई से अपने रिश्ते सारे समेत लेते वो "सब"जो नहीं था हाथ की लकीरों में वो चाहते दम तोड़ गयी थीं तस्व्वरो फकत जो होते वो भी मेरे आशना कर आये जिसे उसके हवाले बचा रखे है उसने तेरे सारे हक रहनुमा कहते है अदा कर देगा वो सब तेरी बेताब ख्वाइशों को क्य...
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  April 20, 2015, 2:28 am
मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की तरह तुम्हारी मुश्किलें भी सुलझा लूंगा बस इन आँधियों के बीच मेरे हुनर का इम्तिहान न लो। मै तुम्हारी बेरुखी को भी तुम्हारी हक़ीक़त मान लूंगा बस ज़रा इस तूफानों में मेरे वफाओं का इम्तिहान न लो साहिल पे पहुचने तक मै हमसफ़र हूँ फिर ये सफर तुम्हार...
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  March 10, 2015, 1:30 pm
तूफां  को कभी तुमने सरगोशी से दबे पैरों से आते हुए देखा है?मासूम कदमो को तन्हाइयों के तार बजाते हुए देखा है?बीती किरदारों की उलझे शक्लों में अपनेपन की गवाहीतजुर्वों को छुए बिन नन्हे ख़्वाबों को पलको में आते हुए देखा है?रिसते हुए जज्बातों से पिघलती मेरे वसूलों की दीवार...
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  March 9, 2015, 2:50 pm
अंधेरे को तेजी से बढ़ने दोबढ़ते रहने दो और फिरसघनतम होने दो। …क्यूंकि उससे ही प्रस्फुटित होगा प्रकाशजो सनातन होगा, शाश्वत होगा, चिरंतम् होगाऔर सिर्फ वो ही होगा सिर्फ 'वो'आलोक ...
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  October 21, 2014, 6:13 pm
आज जो मेरे पास है, जब वो ही मेरा हक़ है,वो ही मेरे माझी के दरख्त पर लगा फल … फिर मै जो भी कर रहा हूँ वही मेरा सच है. मै कहाँ से क्यूँ मुड़ गया, कहाँ आगया, ये कोई और कैसे बता पायेगा मुझे ?कोई यूँ भी तो नही जिसने मुझे देखा हो पूराउसकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नही हिलता फिर ,मेरी ...
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  October 11, 2014, 5:34 pm
वो जो जलता रहा उम्र भर चिराग बन कर उसके वफाओं का कुछ तो सिला दे पाता लहूलुहान जज्बातों का दर्द समाये पलकों पे सहमे आंसू, उंगलियों का किनारा तो दे पाता  जिसका हाल जल रहा हो माझी के ख्यालों में उसके मुस्तकबिल की आरज़ू क्या करे ?तमाम उम्र के दर्दो को हम क्या समहल ...
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  April 29, 2014, 3:24 pm
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