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वीर बहुटी

होली के तरही मुशायरे मे आद पंकज सुबीर जी के ब्लाग http://subeerin.blogspot.in/देखिये मुहब्बत ने ज़िन्दगी छ्ली जैसेलुट गया चमन गुल की लुट गयी हंसी जैसेअक्स हर  जगह उसका ही नजर मुझे आयाहर घडी  तसव्‍वुर  मे  घूमता  वही  जैसेकोई तो जफा से खुश और कोई वफा में दुखीसोचिये वफा को भी  बद्...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  March 23, 2016, 10:07 am
बहिनो भाईओ सब से पहले सब को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ्कामनायें1 उसके बाद  सब के भाजी स बी एस पावला जी का धन्यवाद जिन्हों ने मेरी समस्या का समाधान किया 1पूरी कहानी तो वही बता सकते हैं लेकिन मुझे इतना पता है कि वो शरारत किसने की नाम बताने की मजबूरी ये है कि वहां कुछ ...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  August 15, 2015, 9:44 am
बहुत दिनो बाद आना हुया1 मेरी रूह का शहर कितना सुनसान  पडा है! असल मे जब से इसका टेमलेट बदल गया है तब से यहाण आना अच्छा नही लगता सजावट न हो तोक्या करें इतनी लायक नही हूँ कि खुद इसका टेम्लेट बदल लूँ दूसरी जब पिछली बार खुद कोशिश की तो ब्लाग लिस्ट उड गयी1 उसके बिना भी मुश्किल ...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  August 14, 2015, 11:30 am
रिश्तेये रिश्तेअजीब रिश्ते कभी आग तो कभीठंडी बर्फ्नहीं रह्तेएक से सदाबदलते हैं ऐसेजैसे मौसम के पहरउगते हैंसुहाने लगते हैंवैसाख के सूरज् कीलौ फूट्ने सेपहले पहर जैसेबढते हैंभागते हैंजेठ आशाढ कीचिलचिलाती धूप कीसाँसों जैसेफिरपड जाती हैं दरारेंमेघों जैसेकडकते बरस...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  May 5, 2015, 9:25 am
गज़लदर्द के कुछ कौर खा कर भूख मिटा लेते रहे हैंप्यास अपनी आंसुओं से ही बुझा लेते रहे हैंइस जमाने ने दिया क्या है सिवा बस ठोकरों केबिन ठिकाने ज़िन्दगी फिर भी बिता लेते रहे हैंआसमा है छत जमीं बिस्तर नसीबों मे हमारेपी गमों के जाम हम तो लडखडा लेते रहे हैंवो हिसाब किताब क्यों&...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  April 15, 2015, 11:06 am
दिव्य अनुभूति ये कैसी है अनुभूति कैसा है अनुराग मेरे अंतस मे तेरे सौरभ की रजत किरणों का आभास मुझे लिये जाता है अनन्त आकाश की ओर जहां मै तू है और तू मै हू सब एक हो जाता हैहां यही है दिव्य अनुभूती दिव्य अनुराग तेरे सौरभ की रजत किरणों का आभास ...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  August 23, 2014, 9:06 am
सब से अपने गम छुपाते ज़िन्दगी की शाम मेंचुपके से आँसू बहाते ज़िन्दगी की शाम मेंदोष किसका है जो बदतर जिंदगी है मौत सेवक्त का मातम मनाते ज़िन्दगी की शाम मेंख्वाब सारे टूट जायें, साथ छोड़े जिस्म भीआँखें अपने ही चुराते ज़िन्दगी की शाम मेंबेटी घर मे मौज करती फर्ज लादे है बहूआस...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
Tag :ग़ज़ल
  July 2, 2012, 8:56 am
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वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  June 14, 2012, 10:30 am
गज़ल  हाज़िर जी कह कर फिर गैर हाज़िर हो गयी जिसके लिये क्षमा चाहती हूँ । आप सब की दया से अब ठीक हूँ।एक आध घंटा रोज़ बैठने की कोशिश करूँगी। बहुत समय से कुछ लिखा भी नही है लगता है जैसे कुछ लिख ही नही पाऊँगी। एक हल्की सी गज़ल प्रस्तुत कर रही हूँ। --- हाँ कोई अगर बता सके तो बहुत आभारी ह...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
Tag :गज़ल
  May 14, 2012, 9:50 am
 बहुत दिन से अस्वस्थ रहने के कारण ब्लाग जगत से दूर रही। लेकिन ध्यान हर वक्त ब्लाग जगत मे ही रहा। आप सब की दुआ मेरे साथ थी, कितने लोगों के मेल और टेलिफोन आये सच कहूँ तो जब भी किसी का फोन आता तो आँखें नम हो जाती। सेहत की चिन्ता और चल फिर न पाने की वजह से शायद दिमाग मे कोई शब्...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  October 25, 2011, 8:53 am
गज़ल कुछ पा लिया कुछ खो लिया फिर बेतहाशा रो लियाआंखों से जब आंसू गिरेतो ज़ख्म दिल का धो लियाफिर भी हुयी मुश्किल अगरआँचल मे माँ की सो लियादुश्वारियों का बोझ भी जैसे हुया बस ढो लियाजिसने बुलाया प्यार से मै तो उसी का हो लियाबेकार कर दी ज़िन्दगीबस खा लिया और सो लि...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  July 25, 2011, 9:04 am

गज़ल आज फिर से ब्लाग पर आते हुये खुशी सी महसूस हो रही है\ मै तो उमीद छोड बैठी थी कि अब शायद ऊँगली काटनी ही पडेगी । लेकिन एक दिन श्रीमति संगीता पुरी जी , [गत्यात्मक ज्योतिश वाले ]से अपनी तकलीफ कही तो उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसा गम्भीर कुछ नही है आप जल्दी ठीक हो जायेंगी । उनके ...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  June 7, 2011, 9:04 am
होली पर एक हास्य कवितामहमान होली पर जब कभी महमान घर आते पत्नी खुश होती  पति मुँह फुलातेपत्नी को उनका रुख  कभी न भाया एक दिन उसने  पति को समझाया एजी! अगर आप यूँ  मुँह फुलायोगे तो मेरी होली कैसे मन पायेगी? मेरी सहेलियों मे मेरी इज्जत क्या रह जायेगी?होली पर मह...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  March 18, 2011, 8:44 am
 दोहेसूरत से सीरत भली सब से मीठा बोलकहमे से पहले मगर शब्दों मे रस घोलरिश्ते नातों को छोड कर चलता बना विदेशडालर देख ललक बढी फिर भूला अपना देशखुशी गमी तकदीर की भोगे खुद किरदारबुरे वक्त मे हों नही साथी रिश्तेदारहैं संयोग वियोग सब  किस्मत के ही हाथ जितना उसने लिख दिय...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  March 7, 2011, 8:13 am
यूँ तो आज बेटे का जन्मदिन होता है 29 फरवरी। लेकिन 3 साल तो 1 मार्च को ही मनाते थे,बस लीप के साल मे ही 29 फरवरी को मनाया जाता था। शायद उस ने पहले ही आदत डाल दी थी जन्मदिन न मनाने की। \अभी पहले गये हुये भूले नही थे कि ये भी हमे छोड कर चला गया।ये गज़ल उन 7 अपनो के नाम है जो भरी जवानी मे हम...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
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  March 1, 2011, 8:39 am
श्री नवीन चतुर्वेदी जी के ब्लाग -- http://samasyapoorti.blogspot.com/ दोहा के बारे मे पढा तो सोचा यहाँ भी हाथ आजमा लिया जाये। पहली बार दोहे लिखे हैं। सही गलत आप लोग देख लें। दोहे1जीवन मे माँ से बडा और नही वरदानमाँ चरणों की धूल लेखुश होंगे भगवान।2भारत की गरिमा बचा कर के सोच विचारभगत सिंह,आज़ा...
वीर बहुटी...
निर्मला कपिला
Tag :
  February 26, 2011, 8:02 am
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