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सुनो, गर्मी बहुत है अपने अहसासों की हवा को जरा और बहने दो यादों के पसीनों को और सूखने दो सुनो, गर्मी बहुत है गुलमोहर के फूलों से सड़कें पटी पड़ी हैं ये लाल रंग फूल का सूरज का अच्छा लगता है अपने प्यार की बरसात को बरसने दो बहुत प्यासी है धरती बह...
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  July 21, 2017, 6:45 pm
कुछ सपने केवल सपने ही रह जाते हैं बिना पूरे हुये, बिना हकीकत हुये और हमे वो ही अच्छे लगते हैं अधूरे सपने, बिना अपने हुये हम जी लेते हैं उसी अधूरेपन कोउसी खालीपन कोसपने की चाहत मेंजानते हुये भी ....सपने तो सपने हैंसपने कहाँ अपने हैंयथार्थ को छोड़करपरिस्थिति से मुह ...
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  October 23, 2016, 7:13 am
रात की चादर ओढ़े चुपचाप सोयी है वो पगडण्डी जो शहर से गाँव की ओर आती है पगडण्डी पर उगी घासें नाम हैं, भीगी हैं जैसे सुबक कर कोई चुप हो गया हो बहुत रोई होगी उस राहगीर के लिए जो लौट के न आया उसका घर छुटा वो भीतर से टुटा सन्नाटा है पसरा पगडण्डी अभी भी चुप है सुबक रही है ...... इंतज़ार ...
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  September 2, 2016, 7:21 pm
यूँ ही सिकोड़ कर आलमारी के एक कोने में कहीं ... पुराने अखबार सी हो गयी है जिंदगी तिरस्कारित कल की खबर जिसको कोई पढता ही नहीं चिमुड़  गया है हर पेज चाहो तो भी खोल न पाओ .... उन्ही सीले हुए पेजों पर कही कही चमकते इश्तहार भी हैं जिसका वजूद धरातल पर कहीं नहीं है...
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  June 14, 2016, 11:36 am
जाने कितने बार मुझे तुमने इस धरती पर जन्म दिया जाने कितने बार मुझे तुमने ये स्वरुप  दिया जाने कितने बार मुझे इस नाव पर चढ़ा दिया जानते कितने बार मुझे इस भवसागर से पार किया जाने कितने बार मुझे इस मृत्यु ने आलंगन किया जानते कितने बार मैंने इस मृत्यु का वरन किया&nbs...
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  November 10, 2015, 11:25 am
कुछ भूली -बिसरी यादें हैं कुछ ताज़ी तरीन बातें हैं कुछ यादें मीठी मीठी हैं कुछ करेले सी कडवी हैं कुछ को भूलना चाहा  में कुछ यादों को में भूल गया कुछ को भुला कर भुला दिया कुछ यादों को मिटा दिया कुछ यादें पल दो पल की थीं कुछ यादें चिपक कर बैठी हैं में हरपल ...
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  November 10, 2015, 11:20 am
आज बुरा है !!!तो क्या हुआ ... कल अच्छा होगा … बहुत सुना है बहुत गुना है कल जरूर अच्छा होगा और हम भागते रहे उसी कल की  ओर उसी अच्छे की ओर रोज सपने देखते रहे सँजोते रहे बुनते रहे,गुनते रहे ... उस अच्छे के लिए एक एक दिन गुजरता रहा हम इत्ते से उत्ते भी हो गए और कल हमेशा कल ही रहा .... दौड़...
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  October 1, 2015, 10:21 pm
  जीवन के आपाधापी मे अच्छा और अच्छा होने की ललक मे “अम्मू”से “आमोद”बनने के सफर मे जो भी मिला उन हमसफर को मेरा धन्यवाद !साथ साथ चलते हुये न जाने कितने स्नेह कितने आत्मीयजन मिले जिनका प्रतिबिंब आँखों मे मेरी साँसों मे,खून मे धमनियों मेंअविरल गतिमान है उन हमसफर को मेरा...
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  October 1, 2015, 10:18 pm
बड़े पापा के जाने के बाद भी मैं सुन सकता हूँ उनकी खाँसती आवाज और उस आवाज के साथ रेल की  आवाज भी वह मरफ़ी का ट्रांजिस्टर आलमारी मे लगा हुआ और उनका उसपर आकाशवाणी का समाचार बाहर आँगन मे लगे पौधे पीछे उगी कुछ सब्जियाँ,पपीते के पेड़ अमरूद मे पानी लगाने की चिंता सुबह सुबह अखबार क...
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  October 1, 2015, 10:14 pm
यूं हींसड़क के किनारे पुलिया पर बैठे बैठे आते जाते लोगों को देखता अपनी मगन मे मस्त बैठा जिंदगी के तमाम सवालों पर खुद ही मुस्कराता कभी इठलाता सोचता, तभी अचानक साइकिल सवार आता दिखालिया था कुछ समान पीछे था तेल का कनस्तर चला जा रहा था अपनी मस्ती मे&...
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  July 12, 2015, 8:02 am
जीवन के आपाधापी मे सृष्टि के अनुपम चित्र में उस महान चित्रकार की तूलिका से खत्म होता जा रहा रंग .... बेस्वाद होते टमाटर रोज चटकीले लाल नज़र आते हैं बैगनी रंग और चटकदार होता जा रहा है मगर स्वाद खत्म हो रहा है बैगन में अधरों पर मोहित मुस्कान लिए जो बाला बैठ...
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  July 12, 2015, 7:33 am
तीन दिन पहले से ही सच कहूँ तो एक हफ्ते पहले से ही पच्चईयाँ (नाग पंचमी) का इंतजार रहता था .... एक एक दिन किसी तरह से काटते हुये आखिर, पच्चईयाँ आ ही जाती थी पच्चईयाँ वाले दिन सुबह ही सुबह अम्मा पूरा घर धोती थी, हम सब को कपड़े पहनाती थी सुबह सुबह ही गल...
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  June 28, 2015, 12:36 pm
सुनो, गर्मी बहुत है अपने अहसासों की हवा को जरा और बहने दो यादों के पसीनों को और सूखने दो सुनो, गर्मी बहुत है गुलमोहर के फूलों से सड़कें पटी पड़ी हैं ये लाल रंग फूल का सूरज का अच्छा लगता है अपने प्यार की बरसात को बरसने दो बहुत प्यासी है धरती बह...
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  June 25, 2015, 8:29 pm
 शाम हो रही है सूरज का तेज अब मध्यम होता जा रहा है शाम और खेल का बड़ा अनूठा सायोंग है अब बस याद ही है खेल और उसका खेला की एक खेल था ऊंच-नीच समान्यतः यह खेल घरके आँगन मे ही खेलते थे, चबूतरे पर नाली की पगडंडियों पर हम सब ऊपर रहते थे और चोर नीचे हमे अप...
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  June 24, 2015, 6:46 am
हम छोटे छोटे थे जब माँ कोयले की राख़ से गोले बनाती थी हम भी बैठे बैठे गोले बनाते थे ये वाला मेरा ये वाला तेरा मेरा गोला ज्यादा मोटा तेरा वाला पतला गोला धूप मे गोले फैला दिये जाते सूरज अपनी तपन से हवा अपने वेग से गोले को सूखा देते शाम को अम्मा उ...
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  April 9, 2015, 8:53 pm
उम्मीद तो मुझे अपने आप से भी थी उम्मीद तो मुझे अपनों से भी थी ... सोचता तो अपने के लिए भी था सोचता तो दूसरों के लिए भी था सुधार की गुंजाईश अपने आप से भी थी सुधार की गुंजाईश दूसरों से भी थी इन्हीं ... उहापाहो मेंसफर काटता रहा ... जब उम्मीद अपनी पूरी नह...
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  March 11, 2015, 8:40 pm
जीवन कठिनाईयों मे गुजर रहा है ऐ मौला रात गुजर रही है बगैर नींद के ऐ मौला बेपरवाह एक जुगनू खलल डाल रहा ऐ मौला सफर मे चला जा रहा हूँ मंजिल की तलाश मे ऐ मौलाकहता बहुत हूँ, चीखता बहुत हूँ सुनता कोई नहीं ऐ मौला काली रात कटेगी, सुबह तो होगी इंतजार मे हूँ ऐ मौला&nb...
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  February 25, 2015, 8:45 pm
सुनो ,है ईश्वर ऐसा करोमुझे पागल कर दोशरीर से दिमाग कासंपर्क खत्म कर दोमेरे एहसासमेरी प्यासमेरी तृष्णामेरा प्यारमेरी लालसासे मेरा नाता खत्म कर दोन मर्म रहेन भावनान दर्द रहेन रोग . . . .सुनो . . . .है ईश्वर ऐसा करोमुझे पागल कर दोजीवन तो तब भी रहेगादौड़ेगा रगों मे खूनदेखुंगा, स...
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  February 2, 2015, 7:17 pm
ईतनी घुटन क्यूँ हैं ... घर मे खिड़कियों के बावजूद जिंदगी उदास क्यूँ हैं खुशियों के बावजूद हमें बांटने वालों तुम्हें मालूम हों आकाश कायम रहेगा दीवारों के बावजूद हमने उसका दामन तक छुआ नहीं था कभी वो मेरे सबसे निकट था फ़ासलों के बावजूद ... ...
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  December 21, 2014, 3:32 pm
हर रोज दुआएं मांगता हूँ रब से ....घोसला टूट जाता है हवाओं से ...जब होना है जो मुकद्दर में हैतो दिमाग की कलम हांथ मे क्यूँ हैंकैसे कहूँ, ये तो होना ही है4 के बाद 5  तो आना ही हैकिस कदर गुजारी है ये तमाम उम्रबरगद की जटाएँ खुद बयां करती हैंहर रोज बस एक ही दुआ होती हैशाम होती है सुब...
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  October 15, 2014, 1:54 pm
जीवन के आपाधापी मे अच्छा और अच्छा होने की ललक मे “अम्मू”से “आमोद”बनने के सफर मे जो भी मिला उन हमसफर को मेरा धन्यवाद !साथ साथ चलते हुये न जाने कितने स्नेह कितने आत्मीयजन मिले जिनका प्रतिबिंब आँखों मे मेरी साँसों मे,खून मे धमनियों मेंअविरल गतिमान है उन हमसफर को मेरा धन्...
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  September 26, 2014, 6:38 am
आज बुरा है !!!तो क्या हुआ ... कल अच्छा होगा … बहुत सुना है बहुत गुना है कल जरूर अच्छा होगा और हम भागते रहे उसी कल की  ओर उसी अच्छे की ओर रोज सपने देखते रहे सँजोते रहे बुनते रहे,गुनते रहे ... उस अच्छे के लिए एक एक दिन गुजरता रहा हम इत्ते से उत्ते भी हो गए और कल हमेशा कल ही रहा .... दौड़...
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  August 10, 2014, 12:29 am
डरी, सहमी सी लगती हैअंदर जो आवाज हैजिसे अन्तरात्मा कहते हैंवो चुप हैइस निःशब्द वातावरण मेवह चीख बनकेनिकलेंगे कब ?जिंदगी, आखिर ....शुरू होगी कब ?खुले मन से हँसीआएगी कब ?कब खिलखिलाकरसच सच कहूँ तोदाँत निपोर करआखिर हँसेंगे कब ?बरसों से इस जाल मे बंधीउसी राह पर चलते – चलतेआखिर...
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  August 3, 2014, 10:28 pm
धूल में दबी हुयी ये डायरीजिसकी एक एक परत की हैं ये यादेंहर एक सफा तुम्हारी याद है.... न जाने कहाँ कहाँ रखा उसे..... आलमारी मे ठूसा..... बक्से में दबाया.... ऊपर टाँड़ पर रखाअटैची मे रखा ....उसके पन्नों के रंग उतर गएमगर लिखावट वही रहीआज भी देखकर उन सफ़ों कोऔर आपके उन हिसाबों को देखकरउन ह...
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  August 1, 2014, 7:43 am
याद आता है वो अपना दो कमरे का घर जो दिन मे पहला वाला कमरा बन जाता था बैठक .... बड़े करीने से लगा होता था तख़्ता, लकड़ी वाली कुर्सी और टूटे हुये स्टूल पर रखा होता था उषा का पंखाआलमारी मे होता था बड़ा सा मरफ़ी का रेडियो ... वही हमारे लिए टी0वी0 था सी0डी0 था और था हो...
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  July 29, 2014, 8:53 am
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