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साझा संसार

वैश्विक बदलाव और तकनीकी उन्नति ने जहाँ एक तरफ जीवन को सरल और सुविधापूर्ण बनाया है वहीं समाज में कुछ ऐसे भी बदलाव हुए हैं जिसके कारण जीवन की सहजता खो गई है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है दुनिया एक-एक कदम आगे नहीं बढ़ रही बल्कि लम्बी-लम्बी छलाँग लगा रही है। यह परिवर्तन बेहद ...
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  August 5, 2016, 10:30 pm
यमुना कोठी की जेन्नी (पहला भाग)*******यादों के बक्से में रेत-से सपने हैं जो उड़-उड़ कर अदृश्य हो जाते हैं और फिर भस्म होता है मेरा मैं, जो भाप की तरह शनै-शनै मुझे पिघलाता रहा है। न जाने खोने पाने का यह कैसा सिलसिला है जो साँसों की तरह अनवरत मेरे साथ चलता है। टुकड़ों में मिला प्रे...
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  November 16, 2015, 11:53 pm
आरक्षण के मुद्दे पर देश के हर प्रांत में उबाल है। आरक्षण के समर्थन और विरोध दोनों पर ही चर्चा नए विवादों को जन्म देती है। सभी को आरक्षण चाहिए। इससे मतलब नहीं कि वास्तविक रूप से कोई ख़ास जाति आरक्षण की हकदार है। मतलब बस इतना है कि सभी जातियाँ खुद को आरक्षण की श्रेण...
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  October 7, 2015, 11:54 pm
बरसात का मौसम, सावन-भादो का महीना और ऐसे में बारिश। चारो तरफ हरियाली, बागों में बहार, मन में उमंग जाने क्या है इस मौसम में। रिमझिम बरसात… अहा! मन भींगने को करता है। बरसात के मौसम में उत्तर भारत में कजरी गाने की परम्परा रही है। सावन ऐ सखी सगरो सुहावन रिमझ...
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  August 20, 2015, 6:51 pm
जीना है तो मरना सीखो*******''काम किए बिना पेट नहीं भरता है मलकिनी । इस घर के सब आदमी का पेट नहीं कोठी है, कितना भी भरो भरता ही नहीं है । एगो अपना पेट त पलता नहीं है उस पर से बुढवा-बुढ़िया अमर होके आया है, काम काज त कौनो करता नहीं ऊपर से मेरे मरद को बोल के रोज़ महाभारत करवाता है । ...
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  March 8, 2015, 9:03 pm
यह ह्त्या नहीं स्त्रियों का सामूहिक नरसंहार है *******छत्तीसगढ़ में नसबंदी के दौरान 14 स्त्रियों की मौत ने एक बार फिर सोचने को मजबूर किया कि हमारे देश में आम स्त्रियों की कीमत क्या है। न उनकी ज़िन्दगी का कोई मोल है न उनकी मृत्यु का कोई अर्थ ! हम ज़बरदस्त गैरबराबरी से जूझ ...
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  December 1, 2014, 11:30 pm
मेरे गाँधी, अपने गाँधी  *******महात्मा गाँधी के बारे में जब भी सोचती हूँ तो एक अजीब सा आकर्षण होता है। उन्हें जितना पढ़ती हूँ और भी ज्यादा जानने-समझने की उत्कंठा होती है। न जाने क्यूँ गाँधी जी का व्यक्तित्व सदैव चुम्बकीय लगता है मुझे। इतना सहज और सरल जीवन यापन करने व...
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  October 7, 2014, 10:57 pm
18 जुलाई 2014 को मंडेला की 96वीं जयन्ती के मौके पर मेरे पिता स्वर्गीय डॉ.के.एम.प्रसाद की पुस्तक 'सर्वोदय ऑफ़ गाँधी'के नवीन संस्करण का लोकार्पण गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली में हुआ । गौरतलब है कि 18 जुलाई को मेरे पिता जो भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर थे, की 36 वीं पु...
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  July 24, 2014, 10:54 pm
18 जुलाई 2014 को मंडेला की 96वीं जयन्ती के मौके पर मेरे पिता स्वर्गीय डॉ.के.एम.प्रसाद की पुस्तक 'सर्वोदय ऑफ़ गाँधी'के नवीन संस्करण का लोकार्पण गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली में हुआ । गौरतलब है कि 18 जुलाई को मेरे पिता जो भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर थे, की 36 वीं ...
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  July 24, 2014, 10:54 pm
''ओ अमृता ! देख, तेरे शाह की कंजरी मेरे घर आ गई है । तेरी शाहनी तो खुश होगी न ! उसका शाह अब उसके पास वापस जो आ गया है । वो देख उस बदजात को तेरे शाह से ख़ूब ऐंठे और अब मेरे शाह की बाँहें थाम ली है । नहीं-नहीं तेरी उस कंजरी का भी क्या दोष, मेरे शाह ने ही उसे पकड़ लिया है । वो करम...
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  March 8, 2014, 11:56 pm
'जय हो'की जय हो !*******सलमान खान के फिल्मों की एक ख़ास विशेषता है कि इसे हर आम व ख़ास आदमी अपने परिवार के साथ देख सकता है । सलमान द्वारा अभिनीत हर फिल्म से हमें उम्मीद होती है - धाँसू डायलॉग, हँसते गुदगुदाते हुए डायलॉग, जोरदार एंट्री, जबरदस्त फाइट, नायिका के साथ स्वस्थ प्रेम दृ...
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  January 30, 2014, 11:03 pm
जब से होश सँभाला तब से फैज़ की यह नज़्म सुनती और गुनगुनाती रही हूँ...''हम मेहनतकश जगवालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे इक खेत नहीं इक देश नहीं हम सारी दुनिया माँगेंगे...''उन दिनों सोचती थी कि आखिर मेहनत तो सभी करते हैं, फिर कौन किससे हिस्सा माँग रहा ? ये दुनिया आखिर है किसकी ?...
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  May 1, 2013, 7:15 pm
जब से होश सँभाला तब से फैज़ की यह नज़्म सुनती और गुनगुनाती रही हूँ...''हम मेहनतकश जगवालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे इक खेत नहीं इक देश नहीं हम सारी दुनिया माँगेंगे...''उन दिनों सोचती थी कि आखिर मेहनत तो सभी करते हैं, फिर कौन किससे हिस्सा माँग रहा ? ये दुनिया आखिर है किसकी ? द...
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  May 1, 2013, 7:15 pm
सोचते-सोचते जैसे दिमाग शून्य हो जाता है । सदमे में मन ही नहीं आत्मा भी है । मन में मानो सन्नाटा गूँज रहा है । कमजोर और असहाय होने की अनुभूति हर वक़्त डराती है और नाकाम होने का क्षोभ टीस देता है । हताशा से जीवन जीने की शक्ति ख़त्म हो रही है । आत्मबल तो मिट ही चुका है आत्मा रक...
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  April 21, 2013, 5:29 pm
अक्सर सोचती हूँ कि औरतों के पास इतना हौसला क्यों होता है? कहाँ से आती है इतनी ताकत कि हार-हार कर भी उठ जाती है; फिर से दुनिया का सामना करने के लिए । अजीब विडम्बना है स्त्री-जीवन ! न जीवन जीते बनता है न जीवन से भागते ! औरत जानती है कि उसकी जीत उसके अपने भी बर्दाश्त नहीं कर सकते ...
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  March 8, 2013, 10:50 pm
वो मुक्त हो गई । इस समाज इस देश इस संसार से उसका चला जाना ही उचित था । मगर दुःखद पहलू यह है कि उसे प्रतिघात का न मौक़ा मिला न पलटवार करने के लिए जीवन । उसे अलविदा होना ही पड़ा । अब एक ऐसी अनजान दुनिया में वो चली गई है, जहाँ उसे न कोई छू सकेगा न, उसे दर्द दे सकेगा । न कोई खौफ़ न...
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  January 21, 2013, 3:27 pm
अजीब होती है हमारी ज़िंदगी । शांत सुकून देने वाला दिन बीत रहा होता है कि अचानक ऐसा हादसा हो जाता कि हम सभी स्तब्ध हो जाते हैं । हर कोई किसी न किसी दुर्घटना के पूर्वानुमान से सदैव सशंकित और आतंकित रहता है । कब कौन सा वक्त देखने को मिले कोई नहीं जानता न भविष्यवाणी कर सकता...
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  December 19, 2012, 8:36 pm
*******समय में न जाने कौन सा पहिया लगा होता है कि वो पलक झपकते कई वर्ष घूम आता है, और कई बार ऐसा भी कि धकेलते रहो धकेलते रहो पर सब कुछ स्थिर...तटस्थ... समय का पहिया शायद हमारे मन के द्वारा संचालित होता है । सबका अपना-अपना मन और अपना-अपना समय... कभी उड़न्तु घोड़ा तो कभी अड़ियल मगरमच्...
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  December 12, 2012, 10:21 pm
आज एक ग़ज़ल बार-बार गुनगुनाने को मन कर रहा है "एक ब्राह्मण ने कहा है कि साल अच्छा है !" ज्योतिषियों के अनुसार आज की तिथि यानि 10.11.12 अंक के बढ़ते क्रम के अनुसार होने के कारण बहुत शुभ है। उनके अनुसार यह दिन उनके लिए ज्यादा सौभाग्यशाली है जिनका जन्म आज हुआ है या आज होगा। यह ...
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  November 12, 2012, 12:04 am
आज एक ग़ज़ल बार-बार गुनगुनाने को मन कर रहा है "एक ब्राह्मण ने कहा है कि साल अच्छा है !" ज्योतिषियों के अनुसार आज की तिथि यानि 10.11.12 अंक के बढ़ते क्रम के अनुसार होने के कारण बहुत शुभ है। उनके अनुसार यह दिन उनके लिए ज्यादा सौभाग्यशाली है जिनका जन्म आज हुआ है या आज होगा। यह ...
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  November 12, 2012, 12:04 am
एक बार फिर रोई अमृता, फूट फूट कर रोई । इमरोज़ के कुर्ते को दोनों हाथों से पकड़ कर झिंझोड कर पूछा ''क्यों नहीं बचाए मेरा घर? क्यों नहीं लड़ सके तुम मेरे लिए?'' ''बोलो इमा, क्यों नहीं रोका तुमने उन लोगों को, जो मेरी ख्वाहिशों को उजाड़ रहे थे, हमारे प्रेम के महल को ध्वस्त ...
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  June 21, 2012, 11:57 pm
''न चल सकते हैं, न सो सकते हैं, न बैठ सकते हैं, कैसे जीवन काटें?'' कहते कहते आँसू भर आते हैं गीता देवी की आँखों में । मेरे पास कोई जवाब नहीं, क्या दूँ इस सवाल का जवाब? मैं पूछती हूँ ''कब से आप बीमार हैं?'' 50 वर्षीया शान्ति देवी जो विकलांग हो चुकी है रो-रो कर बताती है ''ज...
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  June 8, 2012, 9:13 pm
रात के लगभग 8 बजे थे । प्राइवेट नर्सिंग होम में एक महिला को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया और उसका अल्ट्रासाउंड हो रहा था । औरत लगातार दर्द से रो रही थी और बीच बीच में अंग्रेजी में डॉक्टर से कुछ-कुछ पूछ रही थी । डॉक्टर ने कान में आला लगा कर बच्चे की धड़कन सुनने की कोशिश की । ...
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  May 14, 2012, 12:02 am
शायद 21 वीं सदी का सबसे बड़ा आश्चर्य है कि विकास के तमाम आयामों को प्राप्त करने और सामाजिक-पारिवारिक व्यवस्था को निरंतर मज़बूत बनाए रखने की सफल कोशिशों के बावजूद स्त्री-विमर्श ज़िंदा है । ये न सिर्फ किताबों, कहानियों, कविताओं तक ही सीमित है बल्कि हर पढ़े लिखे और अनपढ़ ...
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  March 8, 2012, 2:17 am
प्रकृति का प्राकृत सुन्दर रूप, हर तरफ हरियाली, जीवन्तता, भारतीय कला-संस्कृति की अनुगूँज, सहज और सरल जीवन शैली, विचार में मौलिकता, आपसी प्रेम-सौहार्द आदि कितनी ही विशेषताओं का सम्मिलित स्वरुप 'शान्तिनिकेतन' है । शिक्षित और विचारशील लोग, जिनके जीवन में वैसे ही ...
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  February 15, 2012, 12:42 am
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