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नूतन रामायण

हे रघुवर !आपको सर्वस्व अर्पितहे रघुवर ! आपके चरणों  में प्राण हैं समर्पित !तन समर्पित मन समर्पित आपको सर्वस्व अर्पित !...................................................................वाटिका में मधुर भेंट , हुआ था प्रेम अंकुरित ,प्रथम दर्शन में ही मेरा उर हुआ था झंकृत ,भूल बैठी थी मैं सुध-बुध , चंचल भय था शांत चि...
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  February 20, 2015, 9:58 pm
 श्री राम ने क्यों लिया एक पत्नी व्रत ?-एक विवेचनमर्यादा पुरुषोतम  श्री राम का जीवन चरित युगों-युगों से सम्पूर्ण मानव-जाति  के लिए अनुकरणीय रहा है .श्री राम के चरित का हर पक्ष उज्ज्वल है .एक पुत्र ,पति ,भ्राता  और राजा  को किन जीवन मूल्यों , आदर्शो , व् मर्यादाओं का प...
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  January 21, 2015, 4:08 pm
चौदह बरस कब पूर्ण होंगे ?आयेंगें कब राम ?चौदह बरस कब पूर्ण होंगे ?आयेंगें कब राम ?पथ पर टिके नयनों को कब मिल पायेगा विश्राम ?.....................................................................................कौशल्या उर रहता सशंकित , है विपत्ति का समय ,बस द्वार ही निहारती आंखियों में आंसू थाम !चौदह बरस कब पूर्ण होंगे ?आयेंगे...
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  April 18, 2014, 8:45 pm
है रावण की हार अटल और श्री राम की जीत !मयतनया का कहा हुआ सच होने लगा प्रतीत ,अजर-अमर-पावन है जग में सियाराम की प्रीत ,सिया-हरण का पाप उसे अब करता है भयभीत ,है रावण की हार अटल और श्री राम की जीत !..............................................................सीता के अश्रु अंगारे बनाकर उसे जलावेंगें ,पतिव्रता के श्रा...
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  March 17, 2014, 9:57 am
पिछली एक पोस्ट[समर -भूमि से वीर नहीं करते हैं कभी पलायन] पर श्री दुली चंद करेल जी की ये टिप्पणी प्राप्त हुई -बारम्बार बनावट ने सत्य को रौंदा है।रावण नीच तो सीता पवित्र कैसे?अब ऐसे कुत्सित -विचारों का क्या उत्तर दिया जाये ?माता सीता की पवित्रता पर इस प्रकार के लांछन लगान...
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  March 5, 2014, 10:38 pm
घाव  लगें जितनें भी तन पर कहलाते आभूषण ,वीर का लक्ष्य  करो शीघ्र ही शत्रु -दल  का मर्दन ,अडिग -अटल हो करते रहते युद्ध -धर्म का पालन ,समर -भूमि से वीर नहीं करते हैं कभी पलायन !................................................................युद्ध सदा लड़ते हैं योद्धा बुद्धि -बाहु  बल से ,कापुरुषों की भाँति न लड़...
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  March 4, 2014, 4:54 pm
रघुकुल के उज्ज्वल भाल पर कालिख न लगने पायेगी !कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!...............................................................मेरे ह्रदय में हर घड़ी मेरे प्रभु का वास है ,मेरे प्रभु को भी मेरी शुद्धि पर विश्वास है ,बस ये तसल्ली उर में ले वनवास सीता जायेगी !कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!......
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  January 28, 2014, 10:25 pm
विषमयी जीवन राम कर रहा वहन ,पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !...................................................स्नेहमयी कैकेयी माता कैसे विषैली हो गयी ?राम से बढ़कर प्रिय राज्य -लक्ष्मी हो गयी !!प्रेम से कह देती माँ करता मैं वनगमन !पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !.........................................................पुत्र-प्रेम ...
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  January 19, 2014, 11:18 am
देख कर उर्मिल का मुख ,माँ का ह्रदय व्यथित हुआ ,दैव ने नव-वधु कोक्यूँ ये दारुण दुःख दिया ?.......................................भर आये अश्रु नयनों में ,जननी लखन की हुई विकल ,मन में उठे ये भाव थे ,होनी ही होती है प्रबल !......................................लाये थे भ्रात चारो जब ,ब्याह कर वधू साकेत में ,आनंद छा गया था तब ,दशरथ ...
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  January 15, 2014, 10:27 pm
नाभि का अमृत सुखा राम ने लंकेश शीश को काटा है !वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!.................................................................भूमि पर गिरा दशानन जब स्तब्ध रह गए त्रिलोक ,सहसा कैसे विश्वास करें मिट गया पाप का मूल स्रोत ,ध्वजा कटी अन्याय की फहरी धर्म-पताका है !वानर दल में उत्साह अप...
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  January 8, 2014, 12:28 am
हे अनुज मेरे ! मेरे लक्ष्मण ! एक व्यथा ह्रदय को साल रही ,साकेत कहाँ साकेत रहा जिसमे स्नेही तात नहीं !................................................................जब चला था वचन निभाने मैं कितने थे व्यथित पितु मेरे !एक पल सोचा था रुक जाऊँ पर धर्म का संकट था घेरे !रघुकुल की रीत निभाना ही उस वक्त लगा था मुझे सही !साक...
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  December 24, 2013, 11:36 pm
यह एक आश्चर्य का विषय है कि लोक में प्रचलित कुछ उक्तियाँ आमजन सहित महान रचनाकारो द्वारा वास्तविक अर्थों को ग्रहण किये बिना शब्दशः अर्थ लेकर अगली पीढ़ी तक पहुंचा दिए जाते हैं . ''रामायण' के 'सीता-हरण' प्रसंग के सम्बन्ध में श्री लक्ष्मण द्वारा पंचवटी में एक रेखा खींचकर मात...
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  November 12, 2013, 11:06 pm
७९-कपि पूंछ में आग लगाओलंका में आने काइसको मजा चखाओ !.......................................८०-देकर क्रूर ये आदेशहुआ निश्चिन्तअधम लंकेश !.............................८१-हनुमत पूंछ में आग लगाईं''जय श्री राम ''का उच्चारण करहनुमत निज शक्ति दिखलाई !........................................८२-लंका दहन किये हनुमानचूड़ामणि सिया से लेकरकिया उन...
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  October 13, 2013, 9:01 pm
५२-शूर्पनखा तब लंका धाईजनस्थान की दुर्दशारावण को बतलाई !.................................५३-रावण अधम पापी व् नीचसिया हरण षड्यंत्र रचाबना स्वर्ण मृग मारीच !...............................५४-स्वर्ण मृग सीता को भायाचले राम जब पकड़नेउसने बहुत दूर भगाया !.................................५५-सुन छली मारीच पुकारभ्रमित भई माता सीतालक्...
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  October 12, 2013, 9:51 pm
२५-पहुंचे भरद्वाज आश्रम परसिया लखन के संगप्रभु करुनाकर !......................................२६-चित्रकूट पथ मुनि बतायेसिया लखन के संग राम नेवाल्मीकि के दर्शन पाए !..............................२७-लक्षमण एक पर्णशाला बनाईवास्तु शांति करसिया सहित कुटि पधारे रघुराई !.....................................२८ -इधर सुमंत्र अयोध्या आयेश्...
नूतन रामायण ...
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  October 12, 2013, 12:10 am
नूतन रामायण सुनो ,भक्ति-भाव के साथ ,नयन बसा लो युगल छविऔर जोड़ लो हाथ !.......................................श्री गणेश को नमन है ,दें महादेव आशीष ,सिया राम के चरणों मेंझुक रहे निज शीश !                                                                  नूतन रामायण१-पावन धामराज...
नूतन रामायण ...
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  October 11, 2013, 12:31 am
श्री राम का वाण लगा जाकर ,नाभि का अमृत गया सूख ,फिर कटे दश-आनन् एक एक कर ,गिरा राम चरण में दम्भी -मूर्ख !**************************************अंतिम श्वासें भरता-भरताकरता प्रायश्चित बोला रावण ,श्री राम किया उपकार बड़ा ,मैं हाथ जोड़ता इस कारण !************************वध आज हुआ पर हे भगवन !मृत उस दिन से है मेरा मन ,जब पं...
नूतन रामायण ...
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  October 4, 2013, 12:00 am
चौदह  बरस की देर रामराज में न होतीसर्वाधिकार सुरक्षित चौदह  बरस की देर रामराज में न होती ,जो कैकेयी के मंथरा सी दासी न होती !*****************************राम के वियोग में दशरथ का प्राण-त्याग ,तीनों रानियों का लुट गया सुहाग ,आज अवध में यूँ उदासी न  होती !जो कैकेयी के मंथरा सी दासी न होत...
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  August 1, 2013, 10:02 pm
सर्वाधिकार सुरक्षित संकट !में हैं  प्राण   ,  हमको कष्ट महान ,आओ कृपानिधान  ! संकटमोचन श्री हनुमान*********************************श्रीराम -सुग्रीव मित्रता आपने करवाई थी ,बाली- वध कर श्रीराम ने मित्रता निभाई थी ,महावीर तुम कर देते हो हर मुश्किल आसान !आओ कृपानिधान  ! संकटमोचन श्री हनुमान !*************...
नूतन रामायण ...
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  June 26, 2013, 4:18 pm
फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !फहरती रहे फहरती रहे सनातन धर्म पताका !करती रहे करती रहे कल्याण मानवता का !भगवा रंग पताका लगती हम सबको मनभावन , भक्ति रस उर में भर देती निर्मल है अति पावन ,मध्य में अंकित ॐ का  दर्शन सारे पाप मिटाता ! ...
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  June 12, 2013, 4:43 pm
      पल  भर न करते तनिक विश्राम  ,तत्पर  प्रभु  सेवा  को हनुमान  ,रहे अधरों पे हनुमत के राम जी का  नाम  !!अर्णव पर किया क्षण भर में सीता माँ को खोजा ,राम मुद्रिका संग प्रभु का दिया उन्हें संदेसा ,राम भक्त होने का पाया माता से वरदान !रहे अधरों पे हनुमत के राम जी का  नाम  !!  नागपाश ...
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  June 11, 2013, 2:36 pm
  शूल बने फूल हैं , चुभन में भी  मिठास है ,है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !जिस शीश सजना किरीट था उस शीश पर जटा बंधी चौदह बरस वनवास पर चले प्रिय महारथी  , मैं भी चली उस पथ पे ही जिस पथ पे प्राणनाथ हैं !है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !ये है मेरा सौभाग्य  श्री र...
नूतन रामायण ...
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  June 3, 2013, 3:04 pm
जानकी जयंती [१९ मई २०१३ ]पर विशेष जनकनंदनी  की महिमा का आओ हम गुणगान करें !श्री राम की प्राण प्रिया के चरणों में निज शीश धरें !!बड़े भाग मिथिला पति के सीता सम पुत्री पाई ,सुनयना की शिक्षा जिसने पल भर को न बिसराई ,त्याग-तपस्या की मूर्ति जानकी का  हम ध्यान करें !श्री राम की प्र...
नूतन रामायण ...
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  May 20, 2013, 1:55 pm
'हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है 'हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है ,मीठी निंदिया के अर्णव में खुद को डुबोता है .हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !मखमल सा कोमल है लल्ला नाम है इसका राम ,मैं कौशल्या वारी जाऊं सुत मेरा  भगवान ,ऐसा सुत पाकर हर्षित मेरा मन होता है !हौल...
नूतन रामायण ...
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  April 21, 2013, 2:30 pm
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