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Blog: मन के कोने से...

Blogger: mantu kumar
उस दिन आसमान पर धूसर रंग का कब्ज़ा नीले रंग से कुछ ज्यादा था बाकि दिन पहले जैसा ही। बस स्टॉप पर भीड़ थी,पर कोई भी कुर्सी पर बैठना नहीं चाहता था।फिर एक लड़की आई और भीड़ को चीरते हुए एक कुर्सी पर खुद को कपड़ों के साथ समेटते हुए बैठ गई। वह घर से उस दिन जल्दी आ गई थी जो उसे बस के ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   11:00am 12 Oct 2014
Blogger: mantu kumar
ज़िन्दगी !अजनबी राहेंदो राहीहाथ पकड़साथ-साथ चलनापरअंधेरों के दस्तक देते हीहाथ की पकड़ ढीला होते जानायहीं ज़िन्दगी है?एक नदीदो किनाराकोई तिनका नहींदोनों एक-दूजे के लिए मांझीपरलहर के दस्तक देते हीदोनों इस उम्मीद में किकोई तो आगे होके हाथ थामेगादोनों हांफने लगेकिना... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   1:23pm 28 Sep 2014
Blogger: mantu kumar
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की आज 106वीं जयंती हैं। उन्हें अलविदा कहे हुए 40 साल से अधिक का वक़्त बीत चूका है मगर उनकी रचनाएं आज भी उनके 'चाहने वालों'की जुबां पर बनी हुई हैं।इनका जन्म बिहार के बेगुसराय(तत्कालीन मुंगेर)जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। यह गाँव मिथिला-भूमि... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   11:38am 23 Sep 2014
Blogger: mantu kumar
सभी के लिए ज़िन्दगी अलग मायने लीये हुए हैं।सभी के जीने के तौर-तरीके अलग है।हमें ये देखना चाहिए कि जो ज़िन्दगी हमें ऊपर वाल... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   3:32am 17 Sep 2014
Blogger: mantu kumar
लड़के की ज़िन्दगीगुजरता हुआ वक़्तउस वक़्त की परत मेंदबती जा रही एक लड़कीजो लड़के के सपनों में,आधे की हक़दार थी...जमाने ने उस लड़के &... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   11:27am 8 Sep 2014
Blogger: mantu kumar
वह लड़का हमेशा मुस्कुराता रहता था।19 बसंत देख चूका था।उसके पहनावे से वह नई पीढ़ी के लड़कों में गिना जाता पर उसे पुराने गाने स&#... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   7:18am 17 Aug 2014
Blogger: mantu kumar
कुछ लोग इक रोज जो बिछड़ जाते हैं वो हजारों के आने से मिलते नहीं"जी हाँ ये गाना है फिल्म "आप की कसम"से जो किशोर दा काका(राजेश खन... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   11:17am 4 Aug 2014
Blogger: mantu kumar
हमारे लिए सभी चीझें आसान हुआ करती थी | मुश्किलों का वास्ता बड़ों से होता था,हम बस उनकी उदासी पढकर अंदाजा लगा लेते थे कि मुश्किलें बड़ी हैं या छोटी | खुश रहना,हमसे ज्यादा बेहतरी से कोई नहीं जानता था और हमें खुश देखकर न जाने कितने चेहरों को मुस्कुराने का मौका मिलता था | छोटी-... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:05am 15 Jun 2014
Blogger: mantu kumar
जहाँ खुद ही खुद से जिरह होफिर हिस्से में आए खामोशीजहाँ कुछ यकीन करनेऔर न करने के दरम्यानखुद से मिलना न पड़ेजहाँ खुली आँखों के सामनेधुँधली दिखने लगे दुनियाजहाँ कुछ खोने के डर सेबेतरतीब होते जाएँ सपनेजहाँ अपने करीबी के पासवजह हो,दूर हो जाने काजहाँ पसंद-नापसंदमायने न र... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   7:17am 16 Jun 2013
Blogger: mantu kumar
ज़िंदगी,आसान क्यों नहीं है ? और अगर आसान नहीं है तो इसे मुश्किल बनाता कौन है ?             हम आज में जो कुछ भी कर रहे होते हैं,कल वही हमारे सामने आने वाला है...अगर सबकुछ आसान है तो खुद के साथ सबका शुक्रगुजार होना और अगर मुश्किलें आयेंगी तो दूसरों पर ऊँगली उठाना आसान है और सही भी ह... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   10:26am 12 Jun 2013
Blogger: mantu kumar
बेवजह खुश रहने के पीछे भी एक वजह होती है...चाहे वजह,वक्त की परतों में दब गई हो या फिर मुस्कुराने का सबब उस वजह को भुला देना चाहता हो...कुछ भी हो,अगर गम के लिए वजह हमारी ज़िंदगी बनती है तो हमारे चेहरे पर हर छोटी सी मुस्कुराहट को लेकर हमारी ज़िंदगी ही आती है...ख़ुशी के लिएज़िंदग... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   4:04pm 7 Jun 2013
Blogger: mantu kumar
उन्होंनेहर बातहर समयहर किसी कोबताई नहींउन्हेंऔर उनकी बातों कोसमझने वालेजरुरत से कुछ कम मिलेंउन्होंनेएक कल छोड़ आया थाएक कल के इंतजार मेंउन्हेंभरोसा था खुद परअपने करीबी से भी ज्यादाउन्होंनेयादों को पलकों पर रखकरजाने दिया था लोगों कोवक्त के साथन चाहते हुए भीउन्ह... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   12:44pm 3 Jun 2013
Blogger: mantu kumar
रोज की तरहदिन के एक ओर से,रात के सो जाने तकज़िंदगी के हक़ में आता है,पलकों का बोझिल भी हों जानाकुछ सपनों से,कुछ अपनों सेतो कुछ ठिठके हुए पानी की बूंदों सेकुछ गुजरे हुए लम्हों सेतो कुछ साँस लेती हुई यादों से...मगर मुस्कुराते हुए लबसोख लेते हैं उन बूंदों को भीजिन्होंने पना... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:51pm 26 May 2013
Blogger: mantu kumar
कुछ भी सहीऔरकुछ भी गलतकभी नहीं होता...कभी नहीं,नज़रिए की बात हैहमारे लिए जो सही हैवो कतई जरुरी नहीं,औरों के लिए भी सही होऔरगलत के साथ भी यही है |दुनिया वैसी नहीं हैजैसा हम सोचते हैं...औरजैसा और जितना सोचते हैं,दुनिया बिल्कुल वैसी ही हैहाँ,सोच-जरुरत-जज़्बात को लेकर,कोई पहल... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   11:51am 21 May 2013
Blogger: mantu kumar
जैसा कि लगभग हर 'प्यार' में होता है | लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे से बेहिसाब मोहब्बत करते थे,फिर वक्त के आगे दोनों की न चली और दोनों के बीच अब बेहिसाब दूरियाँ ने जगह ले ली थी |                    ऐसा नहीं था कि वह लड़का अब उस लड़की को भुला देने की तमाम कोशिशें कर चूका... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:02pm 16 May 2013
Blogger: mantu kumar
जैसा कि लगभग हर 'प्यार' में होता है...लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे से बेहिसाब मोहब्बत करते थे...फिर वक्त के आगे दोनों की न चली और दोनों के बीच अब बेहिसाब दूरियों ने जगह ले लिया...                    ऐसा नहीं था कि वह लड़का अब उस लड़की को भुला देने की तमाम कोशिशें कर चूका हो...वह अभी भी अ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   1:02pm 16 May 2013
Blogger: mantu kumar
जैसा कि लगभग हर 'प्यार'में होता है | लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे से बेहिसाब मोहब्बत करते थे,फिर वक्त के आगे दोनों की न चली और दोनों के बीच अब बेहिसाब दूरियाँ ने जगह ले ली थी |                    ऐसा नहीं था कि वह लड़का अब उस लड़की को भुला देने की तमाम कोशिशें कर चूका ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   1:02pm 16 May 2013
Blogger: mantu kumar
जब रात,आँखों से गुजरते हुए,दिन के करीब पहुँच जाए...जब पलकों के झपकने से ज्यादा,बदलने लगूँ करवटें...जब जीने की वजह,रातों में भी धुँधली दिखे...जब जज्बात बेबस होकर,उसूलों की परवाह न करें...जब मुस्कुराने की हर छोटी कोशिश,उदासी में गुम हों जाए...जब खुद की बनाई दुनिया ही,अजनबी-सी लगे... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:23am 12 May 2013
Blogger: mantu kumar
तुम्हें लिखने की कोशिश-भर मेंलफ़्जों का दूर तलक चले जानाबोझिल पलकों से इंतजार,उन रूठे लफ़्जों कापर अफ़सोस किजज्बात,चढ़ते नहीं कलम परऔर फिर...अधूरी रह जाती हैतुम्हें याद करके लिखी जाने वाली,एक कविता-सा कुछ...उम्मीद है कितुम महसूस करोगेमेरी लिखी हुई अधूरी कविता से,उन ढे... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:38am 8 May 2013
Blogger: mantu kumar
कहते हैं कि वक्त के साथ सभी चीझों का बदलना तय है,पर यादें कभी नहीं बदलती | हम चाहे ज़िंदगी के जिस किसी भी दौर से गुजर रहें हों,हमारी या हमसे जुड़ी किसी शख्स की यादें हमारा साथ देने आ ही जाती है | कभी उन्हें याद करके आँखों में नमी महसूस करते हैं तो अगले ही पल उन्हीं आँखों में ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:37pm 11 Apr 2013
Blogger: mantu kumar
हर कोई जो कुछ सीखना चाहता है,वो गलतियाँ करता है या हो जाती है | गलतियाँ करके ही हम यह अनुभव कमाते हैं कि कोई काम किस हद तक सही या गलत है | हम कोई काम यह सोचकर करते हैं कि 'यह काम हमारे लिए सही होगा' तो उस काम में गलतियाँ हो जाने की भी उतनी ही गुंजाइश होनी चाहिए | फिर यह हम पर निर्भ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:53am 6 Apr 2013
Blogger: mantu kumar
"आँसू" अजीब होते हैं,हर ख़ुशी...हर ग़म में इनका आना तय होता है...इनके साथ होने से हमारी ख़ुशी और बढ़ जाती है और ग़म को भूल जाने का जरिया भी यहीं बनते हैं...आँसू,जब आँखों से बेदखल हो जाते हैं तब हमें केवल वहीँ सब दिखता है जो हम देखना चाहते हैं ? पर इनके पीछे की कहानी कुछ भी हों,हमें... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:57pm 3 Apr 2013
Blogger: mantu kumar
"हम जैसा चाहते हैं,ज़िंदगी उसी तरह आगे बढ़ती चली जाती है" पर यह बात शायद हर वक्त,हर जगह लागू न हों | कभी-कभी हमें अपने हिसाब से न चलाकर ज़िंदगी,जिस राह पर ले जाना चाहती है उसी तरफ चलना पड़ता है...पर कहीं न कहीं उस सही या गलत राह के लिए हम खुद ही जिम्मेदार होते हैं,यह बात हम खुद स... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:36am 30 Mar 2013
Blogger: mantu kumar
मुंशी प्रेमचंद जी कहते हैं कि "जीवन का वास्तविक सुख,दूसरों को सुख देने में है,उनका सुख लूटने में नही"सबके पास अपनी-अपनी ज़िंदगी है,वक्त भी बहुत है पर शायद,दूसरों के लिए नही | जहाँ एक ओर हम कहते हैं कि ज़िंदगी के इस सफ़र में खुद से बड़ा कोई हमसफ़र नही होता वहीँ दूसरी तरफ कि ह... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:03pm 25 Mar 2013
Blogger: mantu kumar
कभी खुद का दीदार किए हों,कभी समझे हों,इस जहाँ मेंतुम्हारे होने का मतलबकभी सोचे हों,उम्मीद के कई धागे तुमसे जुड़े हैंतुम्हारा बस होना भर ही,किसी के लिए ज़िंदगी है...और तुम्हें इसकी खबर तक नही |कभी किए हों,कुछ सुलझाने की एक पहलखुद से उलझते जाते हों...फिर सामने होती है एक और प... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   12:01pm 20 Mar 2013
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