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पुरक़ैफ-ए-मंज़र

30 सितम्बर 2010,आज के दिन आने वाला था अयोध्या के विवादित स्थल का ऐतिहासिक फैसला । सुबह सुबह गांव से पिता जी का और मेरे ससुराल से मेरी सासू मां का फोन आ गया। दोनों लोगों का मुझसे फोन पर पहला यही सवाल था कि आज ऑफिस जाओगें। मैं बिस्तर पर नींद में ही बोला, हां जरूर जाऊंगा। क्यों ? स...
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  October 6, 2010, 11:42 pm
तमाम उम्र गुजारी तो घरौंदा था बना,उम्र के साथ उसने, साथ मेरा छोड दिया । नोट- ये तस्वीर मैंने अपने गांव से उतारी है।...
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  April 26, 2010, 6:10 pm
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  August 15, 2009, 3:28 pm
दोनों हाथ से बजती तालियां उनका औजार हैउनका संगीत हैउनका वाद्ययंत्र हैंउनकी पहिचान हैसंबोधन है उनकी नपुंसकता काजिसके दम पर वो चलाते हैं अपनी रोजी रोटीपालते हैं अपने पापी पेट कोआज मुंबई की लोकल ट्रेन से गिरकरएक किन्नर का, दाहिना हाथ कट गयामैं उसे देखकर सोच रहा थाहाय... ...
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  June 8, 2009, 5:41 pm
सूरते हाल बताओ यारो,क्या हुआ हमको दिखाओ यारोंवहां पे सिसकिया थीं रेला थाहमें भी कुछ तो सुनाओं यारों।गुबार गम के, धुंआ आंसू सेजल रहे लोग, वहां सांसो सेसिमट के जिंदगी है सहमी सीउसको एतबार दिलाओ यारों।कराह, आह सब लिपट से गयेलाखों थे लोग सब सिमट से गयेसामने दरिया है, उफनता ...
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  December 26, 2008, 7:25 pm
जब आने लगे घर से गलियों में वो,आना जाना भी अपना शुरू हो गया।अब तलक सिर्फ तकते थे हम देखकर,देखकर मुस्कुराना शुरू हो गया।।वो हमें देखकर भाग जाते है क्यों ,क्यों नही देखकर पास आते है वोजब से एहसास होने लगा प्यार का,घर से कोई बहाना शुरू हो गया।।क्यो हमें देखकर भाग जाते है वो,...
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  September 30, 2008, 3:05 pm
मकड़ियों के जालो से बंधी किताबों की पोटली कोआज मैंने देखा धूल भरे कमरे की उन अलमारियों में।सूरज की एक रोशनी खपड़ैले छत के सुराख से झांक रही थीदेख रही थी मुझे, या फिर कोशिश पहचानने कीजो मुझे रोज जगाती थी बरसो पहले।दबे पांव , जाना चाहता था कमरे के भीतरदबे हाथ, छूना चाहता थ...
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  September 15, 2008, 1:35 pm
मेहरबान कदरदान....सुनाते हैं, बताते हैंहम फरमाते हैं, दास्तानउंगली गुरू की।डुगडुगी की थाप के साथवो बजाते हैं , खबरो कोलब्बो लुआब के साथफरमाते हैं, खबरों कोलेकिन हर खबर पर,हर बात पर,उंगली जरूर करते हैउंगली गुरू।पांव टिकते नहीं हैं तुम्हारें सनम...........में।की तर्ज पर,सुबह- ए...
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  August 28, 2008, 5:29 pm
तमाम टेढ़ी मेढ़ी लकीरे हैं हथेली पर.......भविष्य को बनाती बिगाड़तीकिसी की किस्मत......किसी का लिखा है लकीरों पर नाम.....जो इश्क को परवाज देती हैं।उनके हाथों में हैं मुरझायें फूलकिसी के इंतजार में..........मुकाम की आस में दम तोड़तेतेरी हथेली पर मेरा हाथगर्म सांसे.........मोहताज चंद लम्ह...
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  August 21, 2008, 4:13 pm
कुछ तौर तरीके भी हैं बदनाम गली केकुछ अपने सलीके भी है बदनाम गली केतुम को उछालना है तो पत्थर उछाल दोशीशे नही टूटेंगें बदनाम गली के।हमको भी नजाकत की अदा खूब पता हैउनको भी अदावत की अदा खूब पता हैकुदरत की कायनात में दुश्मन भी, दोस्त भीरिश्ते नहीं टूटेंगे बदनाम गली के।उनकी ...
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  July 9, 2008, 6:19 pm
फोन पर बजती कई बार पूरी पूरी रिंगफोन करने पर सुविज्ड ऑफ का संकेतमोबाइल पर मैसेज का अनसेंड वाली खबरजानकर, सुनकर, सचमुच.....जिया जले.......।रेस्टोंरेंट में एक कोने मेंचेयर पर अकेले बैठे किसी का इंतजारशहर वाले पार्क में पेड़ की छांव तलेबार बार कलाई पर बंधी घड़ी को देखनामहसूस क...
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  July 3, 2008, 2:20 pm
गोरी इतराती हैखूब बलखाती हैझूलों की पेंग संगझूम झूम जाती हैसावन के महीने में।मायका महकाई हैसुसरे से आई हैवो नवेली दुल्हनजो मेंहदी रचवाईं हैसाथ में भौजाई हैसावन के महीने में।बदरों की बेला हैपानी का रेला हैझप झप का खेला हैसावन का मेला हैबजती पिपिहरी मेंलोगों का रेला...
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  June 30, 2008, 9:00 pm
तुम गजल बन गई….मीठी मीठी तन्हाईं मेंघर की अपनी अंगनाई मेंसपनों की इस पुरवाई मेंजब तुम आईगजल बन गईरेत के कोरे कागज परप्यार उकेरें पांव तेरेथकी दोपहरीभीगी रात मेंजब तुम आईगजल बन गई।बोल पड़े जब होंठ तुम्हारेसोन चिरईयां जैसी तुमखुली तेरी चब दो दो चोटीघिरे बादलों जैसी त...
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  June 28, 2008, 3:35 pm
नदिया कहे मोरे साजन का घर किस पारबहती जाउं एक दिशा में कहा है मोरा घर - बारजागू नो सोऊ, न मैं रोऊशरम से पानी पानी न होऊसजना का मिला न संसारकहा है मोरा घर - बारनदिया कहे.....संग न खेले मोरे सहेलीकोई करे न मोसे ठिठोलीबहे नही कजरे की धारकहा है मोरा घर – बारनदिया कहे....बाबुल का घर म...
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  June 27, 2008, 4:56 pm
मार्च का महीना बीतने के बादइंतजार रहता है इस लेटर काहर कम्पनी के हर शख्स को।प्रेमिका प्रेमी से पूछती हैलेटर मिला क्या ?प्रेमी प्रेमिका से पूछता हैतुम्हे मिला क्या ?ऑफिस में हर रोज यही चर्चा होती हैकब मिलेगा,कोई चुपके से बात करता हैकोई जोर से बोलता हैताकि एचआर के लोगों...
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  June 25, 2008, 4:57 pm
रोज मिलती है मुझे वो गली के मोड़ पर....भीगी भीगी सी लगी.... बारिशों के साथ वोसहमी सहमी सी लगी....दिन हो चाहे रात होसुनती रहती सिर्फ है वो....चाहे कोई बात होप्यासी है या प्यास उसकी बुझ चुकी...क्या पता...?रोज मिलती है मुझे वो गली के मोड़ पर....दम नही है बाजुओं में..... बाह ढीली सी लगीबोल उसक...
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  June 24, 2008, 1:48 pm
हाय, कैसी हो....तुम फोन पर ऐसी बाते क्यों करती होजो मुझे पसंद नही, जो तुम्हारे लिए भी ठीक नहीप्लीजजजजजजजजजज......फोन मत रखना,ये फोन रखने की अपनी आदत छोड़ दो....अरे, तुम गुस्सा हो जाओ तो ठीक है, मैं गुस्सा करूं तो....क्या यार क्या बात करती हो....अब बोलो, कब मिल रही हो....कल मैं बहुत बिजी ह...
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  June 16, 2008, 8:29 pm
एक आंगन में दो आंगन हो जाते हैं, राम के घर में जब भी दंगा होता है हिंदू मुस्लिम सब रावण हो जाते हैं।...
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  May 15, 2008, 2:35 pm
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  March 20, 2008, 1:55 pm
डांस ऑफ लाइट....जर्नी ऑफ लाइट....लाइट फ्लो......वाटर रेनबो.....लहरों पर रंगीनियां...
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  March 18, 2008, 8:08 pm
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