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Blog: पुरक़ैफ-ए-मंज़र

Blogger: rajesh tripathi
30 सितम्बर 2010,आज के दिन आने वाला था अयोध्या के विवादित स्थल का ऐतिहासिक फैसला । सुबह सुबह गांव से पिता जी का और मेरे ससुराल से मेरी सासू मां का फोन आ गया। दोनों लोगों का मुझसे फोन पर पहला यही सवाल था कि आज ऑफिस जाओगें। मैं बिस्तर पर नींद में ही बोला, हां जरूर जाऊंगा। क्यों ? स... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   6:12pm 6 Oct 2010
Blogger: rajesh tripathi
तमाम उम्र गुजारी तो घरौंदा था बना,उम्र के साथ उसने, साथ मेरा छोड दिया । नोट- ये तस्वीर मैंने अपने गांव से उतारी है।... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:40pm 26 Apr 2010
Blogger: rajesh tripathi
दोनों हाथ से बजती तालियां उनका औजार हैउनका संगीत हैउनका वाद्ययंत्र हैंउनकी पहिचान हैसंबोधन है उनकी नपुंसकता काजिसके दम पर वो चलाते हैं अपनी रोजी रोटीपालते हैं अपने पापी पेट कोआज मुंबई की लोकल ट्रेन से गिरकरएक किन्नर का, दाहिना हाथ कट गयामैं उसे देखकर सोच रहा थाहाय... ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   12:11pm 8 Jun 2009
Blogger: rajesh tripathi
सूरते हाल बताओ यारो,क्या हुआ हमको दिखाओ यारोंवहां पे सिसकिया थीं रेला थाहमें भी कुछ तो सुनाओं यारों।गुबार गम के, धुंआ आंसू सेजल रहे लोग, वहां सांसो सेसिमट के जिंदगी है सहमी सीउसको एतबार दिलाओ यारों।कराह, आह सब लिपट से गयेलाखों थे लोग सब सिमट से गयेसामने दरिया है, उफनता ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:55pm 26 Dec 2008
Blogger: rajesh tripathi
जब आने लगे घर से गलियों में वो,आना जाना भी अपना शुरू हो गया।अब तलक सिर्फ तकते थे हम देखकर,देखकर मुस्कुराना शुरू हो गया।।वो हमें देखकर भाग जाते है क्यों ,क्यों नही देखकर पास आते है वोजब से एहसास होने लगा प्यार का,घर से कोई बहाना शुरू हो गया।।क्यो हमें देखकर भाग जाते है वो,... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   9:35am 30 Sep 2008
Blogger: rajesh tripathi
मकड़ियों के जालो से बंधी किताबों की पोटली कोआज मैंने देखा धूल भरे कमरे की उन अलमारियों में।सूरज की एक रोशनी खपड़ैले छत के सुराख से झांक रही थीदेख रही थी मुझे, या फिर कोशिश पहचानने कीजो मुझे रोज जगाती थी बरसो पहले।दबे पांव , जाना चाहता था कमरे के भीतरदबे हाथ, छूना चाहता थ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   8:05am 15 Sep 2008
Blogger: rajesh tripathi
मेहरबान कदरदान....सुनाते हैं, बताते हैंहम फरमाते हैं, दास्तानउंगली गुरू की।डुगडुगी की थाप के साथवो बजाते हैं , खबरो कोलब्बो लुआब के साथफरमाते हैं, खबरों कोलेकिन हर खबर पर,हर बात पर,उंगली जरूर करते हैउंगली गुरू।पांव टिकते नहीं हैं तुम्हारें सनम...........में।की तर्ज पर,सुबह- ए... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:59am 28 Aug 2008
Blogger: rajesh tripathi
तमाम टेढ़ी मेढ़ी लकीरे हैं हथेली पर.......भविष्य को बनाती बिगाड़तीकिसी की किस्मत......किसी का लिखा है लकीरों पर नाम.....जो इश्क को परवाज देती हैं।उनके हाथों में हैं मुरझायें फूलकिसी के इंतजार में..........मुकाम की आस में दम तोड़तेतेरी हथेली पर मेरा हाथगर्म सांसे.........मोहताज चंद लम्ह... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:43am 21 Aug 2008
Blogger: rajesh tripathi
कुछ तौर तरीके भी हैं बदनाम गली केकुछ अपने सलीके भी है बदनाम गली केतुम को उछालना है तो पत्थर उछाल दोशीशे नही टूटेंगें बदनाम गली के।हमको भी नजाकत की अदा खूब पता हैउनको भी अदावत की अदा खूब पता हैकुदरत की कायनात में दुश्मन भी, दोस्त भीरिश्ते नहीं टूटेंगे बदनाम गली के।उनकी ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   12:49pm 9 Jul 2008
Blogger: rajesh tripathi
फोन पर बजती कई बार पूरी पूरी रिंगफोन करने पर सुविज्ड ऑफ का संकेतमोबाइल पर मैसेज का अनसेंड वाली खबरजानकर, सुनकर, सचमुच.....जिया जले.......।रेस्टोंरेंट में एक कोने मेंचेयर पर अकेले बैठे किसी का इंतजारशहर वाले पार्क में पेड़ की छांव तलेबार बार कलाई पर बंधी घड़ी को देखनामहसूस क... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   8:50am 3 Jul 2008
Blogger: rajesh tripathi
गोरी इतराती हैखूब बलखाती हैझूलों की पेंग संगझूम झूम जाती हैसावन के महीने में।मायका महकाई हैसुसरे से आई हैवो नवेली दुल्हनजो मेंहदी रचवाईं हैसाथ में भौजाई हैसावन के महीने में।बदरों की बेला हैपानी का रेला हैझप झप का खेला हैसावन का मेला हैबजती पिपिहरी मेंलोगों का रेला... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   3:30pm 30 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
तुम गजल बन गई….मीठी मीठी तन्हाईं मेंघर की अपनी अंगनाई मेंसपनों की इस पुरवाई मेंजब तुम आईगजल बन गईरेत के कोरे कागज परप्यार उकेरें पांव तेरेथकी दोपहरीभीगी रात मेंजब तुम आईगजल बन गई।बोल पड़े जब होंठ तुम्हारेसोन चिरईयां जैसी तुमखुली तेरी चब दो दो चोटीघिरे बादलों जैसी त... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   10:05am 28 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
नदिया कहे मोरे साजन का घर किस पारबहती जाउं एक दिशा में कहा है मोरा घर - बारजागू नो सोऊ, न मैं रोऊशरम से पानी पानी न होऊसजना का मिला न संसारकहा है मोरा घर - बारनदिया कहे.....संग न खेले मोरे सहेलीकोई करे न मोसे ठिठोलीबहे नही कजरे की धारकहा है मोरा घर – बारनदिया कहे....बाबुल का घर म... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   11:26am 27 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
मार्च का महीना बीतने के बादइंतजार रहता है इस लेटर काहर कम्पनी के हर शख्स को।प्रेमिका प्रेमी से पूछती हैलेटर मिला क्या ?प्रेमी प्रेमिका से पूछता हैतुम्हे मिला क्या ?ऑफिस में हर रोज यही चर्चा होती हैकब मिलेगा,कोई चुपके से बात करता हैकोई जोर से बोलता हैताकि एचआर के लोगों... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   11:27am 25 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
रोज मिलती है मुझे वो गली के मोड़ पर....भीगी भीगी सी लगी.... बारिशों के साथ वोसहमी सहमी सी लगी....दिन हो चाहे रात होसुनती रहती सिर्फ है वो....चाहे कोई बात होप्यासी है या प्यास उसकी बुझ चुकी...क्या पता...?रोज मिलती है मुझे वो गली के मोड़ पर....दम नही है बाजुओं में..... बाह ढीली सी लगीबोल उसक... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   8:18am 24 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
हाय, कैसी हो....तुम फोन पर ऐसी बाते क्यों करती होजो मुझे पसंद नही, जो तुम्हारे लिए भी ठीक नहीप्लीजजजजजजजजजज......फोन मत रखना,ये फोन रखने की अपनी आदत छोड़ दो....अरे, तुम गुस्सा हो जाओ तो ठीक है, मैं गुस्सा करूं तो....क्या यार क्या बात करती हो....अब बोलो, कब मिल रही हो....कल मैं बहुत बिजी ह... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   2:59pm 16 Jun 2008
Blogger: rajesh tripathi
एक आंगन में दो आंगन हो जाते हैं, राम के घर में जब भी दंगा होता है हिंदू मुस्लिम सब रावण हो जाते हैं।... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:05am 15 May 2008
Blogger: rajesh tripathi
डांस ऑफ लाइट....जर्नी ऑफ लाइट....लाइट फ्लो......वाटर रेनबो.....लहरों पर रंगीनियां... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   2:38pm 18 Mar 2008
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