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अंतर्मन की लहरें Antarman Ki Lehren

सारिका मुकेश का कविता-संग्रह “खिल उठे पलाश” पुरस्कृत हुआ और उन्हें “शब्द श्री” सम्मान से विभूषित किया गया मध्य प्रदेश सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान, उज्जैन में ‘अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान, 2014’ के समारोह में 30 मार्च 2014 रविवार को सारिका मुकेश के कविता-संग्रह ‘खिल उठे ...
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Tag :
  April 4, 2014, 5:12 pm
ज़रा भविष्य के विषय में भी सोचिए: दोस्तों, आज इस इक्कीसवीं सदी तक पहुँचते-पहुँचते हम शिक्षित तो खूब हुए पर हमने प्रकृति को ध्वंस करने में कोई कसर नहीं छोड़ी I कभी-कभी तो यूँ लगता है कि हमारी सारी प्रगति और उन्नति के मूल में यह विध्वंस ही छिपा है I हमने प्रकृति का सारा संतुलन ...
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Tag :
  March 14, 2014, 8:56 am
न हो हताशडूबकर उगता फ़िर से सूर्य *** सभी मित्रों को सुप्रभात :-))(चित्र: गूगल से साभार)...
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Tag :कविता
  March 6, 2014, 9:24 am
हमारी पुस्तक “शब्दों के पुल” पढ़कर हमारी एक सम्मानित मित्र ने (जो हमसे फेसबुक के माध्यम से ही परिचित हैं और अब हमारी प्रिय बहन बन चुकी हैं) हमसे फोन पर अपनी सहज, स्वाभाविक प्रतिक्रिया एक विशिष्ट अंदाज़ में व्यक्त की ! हमें महसूस हुआ कि अपनी रचना के माध्यम से भी हम किसी से क...
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Tag :कविता
  March 5, 2014, 4:41 pm
आपे में ही खो गया अब इतना यह संसारधन्यवाद तक से नहीं व्यक्त करते लोग उदगारकरते लोग उद्गार ना करना किसी की इज़्ज़त जानेंदो तुम उनको इज़्ज़त तो वो खुदा खुद को मानेंकहें मुकेश कविराय, ना व्यर्थ में समय गंवाओख़ुद पर रखो ध्यान अब ना दूजे पे निगाह गड़ाओ...(चित्र गूगल से साभार)...
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Tag :कविता
  March 5, 2014, 4:25 pm
Cover page of our sixth book ‘Hava Mein Shabd’हमारी पुस्तक 'हवा में शब्द'का कवर पेज ...
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Tag :हवा में शब्द
  February 22, 2014, 9:40 am
(चित्र गूगल से साभार) तुझसे मिल बन जाते अपने पल भर में ***खिली-सी धूप छत पर लड़की उदास मन ***तू खुद पर रख पूरा विश्वाश बनेगी बात ***...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  February 22, 2014, 9:19 am
सब हृदय से तेरे आभारी हैं ओ मेरे भगवान हर रोज सुबह के रूप में तू जो देता है वरदान.....सुप्रभात :-)) चित्र गूगल से साभार ...
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Tag :
  February 10, 2014, 6:59 am
हिंदी ब्लॉग जगत में सुपरिचित डॉ. सुशील कुमार जोशी जी ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में हमारी पुस्तक “शब्दों के पुल” पर अपने स्नेह-पुष्पों के रूप में कुछ स्वसृजित हाइकुओं की वर्षा की है । जहाँ तक मुझे याद पड़ता है मैंने पहले इनके हाइकु नहीं पढ़े हैं और यही इस समीक्षा की विशेषता कह...
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Tag :शब्दों के पुल
  February 9, 2014, 9:43 am
                                                 वसंत आया                                     आई तुम्हारी याद                                         दिल दुखाया (चित्र गूगल से साभार)...
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Tag :
  February 6, 2014, 1:37 pm
   जीवन की धूप और छाँवहै                           'शब्दों के पुल'दोस्तों...आज ही 'सारिका मुकेश'जी की लिखी नई पुस्तक 'शब्दों के पुल' (प्रकाशक-जाह्नवी प्रकाशन, दिल्ली) प्राप्त हुई है. हिन्दी कविता में नवीन प्रयोगवादी कवियों के द्वारा जापान से जिस नई विधा 'हाइकु'...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  January 28, 2014, 4:25 pm
मर्मस्पर्शी हाइकुओं का संकलन है“शब्दों के पुल”        अभी एक सप्ताह पूर्व डॉ. सारिका मुकेश द्वारा रचित एक हाइकु संग्रह मिला, जिसका नाम था “शब्दों के पुल”। 83 रचनाओं से सुसज्जित 112 पृष्ठों की इस पुस्तक को जाह्नवी प्रकाशन, दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है। जिस...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  January 26, 2014, 10:30 pm
शब्दों के पुल आड़ी-तिरछी जीवन की डगर सँभलकर ***     जुड़ें हैं हम विविध होकर भी ज्यों मालगाड़ी ***     मिलाए छोर जीवन और मृत्यु शब्दों के पुल ***     ...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  January 26, 2014, 5:11 pm
करने पूरा पिताजी का वचनवो गए वन       ***ये मानो ललामुकद्दर का लिखाना टाले टला       ***पंचवटी सेमाँ सीता का हरणकरे रावण        ***...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  January 23, 2014, 7:49 pm
तुम हो एक वृक्षसंग तुम्हाराज़ेहन में अब भीबसे हैं किस्से    ***ना भूला कभी वो छलकती हँसी निर्मल छवि    ***जन्मों का साथतुम हो एक वृक्ष मैं एक डाली    ***...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  January 22, 2014, 7:53 pm
रख विश्वाश नया आकाश नयी संभावनाएं नयी उड़ान       ***बनो सशक्त लो मुट्ठी में आकाश खूँदो जहान       ***रख विश्वाश हौंसलों में उड़ान छू ले आकाश       ***...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  January 16, 2014, 7:24 pm
दीप बन के जलूँपूजा-अर्चना मन को करें शुद्धदें नयी शक्ति        ***बनूँ तो बनूँआरती का दीपक तेरे थाल में       ***बन के दीपजलूँ तेरे मन मेंयही कामना       ***...
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Tag :हथेली में चाँदनी
  January 15, 2014, 7:31 pm
कैसा विचित्र  संसार  ये  कैसी रीति विचित्रपैसा  ही अब माता-पिता पैसा  संबंधी मित्र                        ****विपदा दूजे की हमें अब तनिक न करे व्याकुलखुद की एक  खरोंच से  हम हो  जाते  आकुल                  ...
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Tag :कविता
  January 14, 2014, 8:34 pm
जीवन की धूप-छाँव से गुजरते हुए ऊसर जमीन में हम, उपहार बो रहे हैं हम गीत  और ग़ज़ल के उद्गार ढो रहे हैं !!            ***प्रीत और मनुहार लेकर आ रहे हैं !हम हृदय में प्यार लेकर आ रहे हैं !!               ***हिंदी ब्लॉग जगत् अर्थात् हिंदी चिट्ठा जगत में जन...
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  January 13, 2014, 3:13 pm
हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, कवि, पत्रकार और एक कुशल वक्ता माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी  जी की इन पंक्तियों पर आज एकाएक ही मेरी नज़र पड़ी तो सोचा नव-वर्ष के अवसर पर आज इन्हें यहाँ आप सबसे साझा कर लिया जाए:दिन जाते देर नहीं लगती,देखते-देखते एक वर्ष बीत गया;लंबी प्रतीक्षा क...
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Tag :विविध
  January 2, 2014, 6:33 pm
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  January 1, 2014, 11:11 am
कल अचानक ही मिल गया एक पुराना कवितुरंत पहचान गया हमारी कवि वाली छविकुशलक्षेम पूछने के उपरांतअपनी जिज्ञासा करने को शांतउसने अपना मुँह खोलाऔर बडे ही प्रेम से बोला-आपको देखकर लगता है आप अच्छी लिखी-पढी हैंफिर आप क्यों कविता लिखने के इस पचडे में पडी हैंकिसी अच्छी मल्टीने...
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Tag :खिल उठे पलाश (काव्य-संग्रह)
  November 17, 2013, 2:23 pm
कल पढते-पढते एकाएक ही किताब में रखा हुआमिल गया एक फूलऔर याद दिला गया-गुज़रे हुए कितने ही हसीं पलवो हँसता हुआ चेहराप्यार से वो आँखें छलछलना जाने कितनी ही कसमेंजो कभी निभाई ना जा सकीऔर ह्र्दय की ऐसी कुछ बातें जो कभी बताई ना जा सकींना जाने कितने ही वादेजो ना हो सके कभ...
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Tag :कविता
  November 16, 2013, 4:16 pm
दिन कील्हाश को ढोतीरात्रि के मरघट की ओरसरक-सरक करले जातीउदास-उदास सी शाम.                                                                         ›  ...
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Tag :कविता
  November 15, 2013, 8:20 pm
तुम जो देख रहे होइस काग़ज़ पर यह सब कोई कविता नहींयह मैं हूँ...तुम हो...हम सब ही तो हैं... यह तो सच की वो लकीरें हैंजो हमारे आसपासचारों ओर हर कहीं जाल की तरह बिछी हैंजिनके बीच से अक्सर रोज़ होता है हमारा गुज़रनाऔर हम प्राय: उन परछोटी-मोटी टिप्पणी कर बिना ज़्यादा ध्यान या तवज़...
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Tag :कविता
  November 10, 2013, 8:56 am
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