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काव्यान्जलि : View Blog Posts
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काव्यान्जलि

 जिन्दगी कल खो दिया आज के लिए आज खो दिया कल के लिए कभी जी ना सके हम आज के लिए बीत रही है जिन्दगी कल आज और कल के लिए.      दोस्तों आज मेरा जन्म दिन भी  है, मैंने आज  66 वर्ष पूरे कर लिए ......
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  July 1, 2017, 9:34 pm
जिन्दगीकल खो दिया आज के लिए आज खो दिया कल के लिए कभी जी ना सके हम आज के लिए बीत रही है जिन्दगी कल आज और कल के लिए.      दोस्तों आज मेरा जन्म दिन भी  है, मैंने आज  65  वर्ष पूरे कर लिए ......
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  July 1, 2016, 5:46 pm
holi animated scraps, graphics फिर से होली आई रस बरसाते रंगों के संग, फिर से आई होली , फागुन का त्यौहार निराला भर लो अपनी झोली ! मौज मनाए मिल-जुल कर आओ खेल रचाए , लें गुलाल लें रंग फाग का सबसे प्रेम बढाए ! चारों ओर लगा है मेला मौसम बना रंसीला , स्नेह रंग की ऋतू आई कर लो तनमन गीला ! पि...
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  March 5, 2015, 8:39 pm
खुशखबरी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जनपद सदस्य  के पद हेतु   11प्रत्यासियों के बीच कड़े मुकाबले में 3997  वैधमतों    में अपने  मित्रों के सहयोग से 850मत  पाकर 36मतों से चुनाव जीतने में कामयाब रहा | अपने सभी दोस्तों से अनुरोध है कि ईश्वर से विनय करे की मै अपने कर...
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Tag :जनपद सदस्य
  March 1, 2015, 9:22 pm
  जाड़े की धूपजाड़े की धुप टमाटर का सूप, मूंगफली के दानेछुट्टी के बहाने, तबीयत नरम पकौड़े गरम, ठंडी हवा मुह में धुंआ,फाटे हुए गालसर्दी से बेहाल,तन पर पड़े  ऊनी कपडे, दुबले भी लगते मोटे तगड़े, किटकिटाते दांत ठिठुरते ये हाथ, जलता अलाव हांथों का सिकाव, गुदगुदा बिछौ...
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  November 25, 2014, 7:55 pm
 दीप जलायें खेतों में  दीप जलाये  कृषकों  ने  नई फसल के !  दरिद्रता का घना अन्धेरा मिटा इसी के बल से !! चारो ओर धरा है जगमग ,आज सुहानी लगती !  खुशहाली  के गीत गूँजते, नई आशाऐ  जगती !! हरवाहे  किसान महिलाएं, श्रम की माल पिरोती !  दीपपर्व पर  कर न्योछावर,आज खुश...
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Tag :दीप
  October 23, 2014, 3:48 pm
काश-तुम्हारे भी एक बेटी होतीप्यार से उसका नाम रखते ज्योती,सहमी सहमी सिमटी सी-गुलाबी कपड़ों लिपटी सी-टुकुर टुकुर निहारती,जैसे बेरहम दुनिया को देखना चाहती, उसका हंसना बोलना और मुस्कराना,तुम्हारा प्यार से माथे को सहलाना,गाल चूमकर नाम से बुलाते-गोद में उठाकर सीने से लगा...
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  September 2, 2014, 7:24 pm
आज के दोहे.नई  सदी  से  मिल  रही,  दर्द  भरी  सौगात    बेटा   कहता   बाप  से , तेरी   क्या  औकात !!अब  तो अपना  खून भी, करने लगा कमाल     बोझ समझ माँ बाप को, घर से रहा निकाल !! पानी आँख में  न रहा, शरम  बची  ना लाज      कहे   बहू  अब  सास  से,...
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  July 4, 2014, 8:03 pm
             ब्लोगिंग के तीन साल,   तीन  साल   लिखते   हुआ ,"काव्यान्जली"में  पोस्ट    दो  सौ  अडसठ  मिल  गए, अब  तक  मुझको  दोस्त,  अब तक मुझको दोस्त,दोसौ पांच रचनाये लिख डाली    दस  हजार एक  सौ  छियान्बे , टिप्पणियाँ  भी ...
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  June 28, 2014, 8:40 pm
प्यारी  सजनीतुम  न्यारी तुम  प्यारी  सजनीलगती  हो  पर- लोक  की  रानी  नख  से  शिख   तक  तुम  जादू    फूलों  सी  लगती   तेरी  जवानी,केशों    में    सजता    है  गजरा नैनों   में   इठलाता  है   कजरा खोले   केश   सुरभि  है   ...
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  May 21, 2014, 11:06 am
आम बस तुम आम हो हे आम  के बृक्ष उदार  तुम, उपकार  करते  हो  सदा भगवान्  ने  तुमको रचा है,करने  जगत  का फायदातुम  हो  मदन के  बाण , तुम में खूबियाँ  बे शुमार है पथिकों   विहंगों  प्रेमियों  को, तुम्हीं  से  बस प्यार हैबौर आते  ही बसंत  में, तब  स...
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Tag :बृक्ष.गुण.
  May 10, 2014, 5:39 pm
 अनाडी बन के आता है  अनाडी  बन के  आता है, खिलाड़ी  बन  के  जाता है    लगे  जो  दाग  दामन  में, उन्हें  सब  से  छुपाता  है,अगर  इंसान  ये  होता , कभी  का  मर  गया  होता  फकत दो वक्त की रोटी में,ये क्या-क्या मिलाता है,मेरा  हमर्दद  बन  करक...
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  April 28, 2014, 12:03 am
उठती  टीस  एक  मन में न्योला एक किसान ने पाला,वह करता था उससे प्यार पत्नी और  दुधमुहा  बच्चा, बकरे  बकरी का था संसारटिक टिक कर दौड़ा फिरता,न्योला था मालिक के साथ क्षमता भर रोज बटाता,अपने मालिक के कामो में हाथसच्चा साथी  सच्चा सेवक, स्वामिभक्त  था  वह प्राणीमा...
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  April 19, 2014, 9:17 pm
आजचलीकुछऐसीबातें...  आजचली  कुछ  ऎसी बातें, बातों पर हैं  जाएँ बातेंहँसती हुयी  सुनी हैं बातें, बहकी हुयी  सुनी हैं  बातेंबच्चो की क्या प्यारी बातें,इनकी बातें,उनकी बातेंहोती हैं  कुछ अपनी बातें, दिल को छू जाती हैं बातेंआसूँ  में  कुछ डूबी बातें, क्यूँ क...
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  April 14, 2014, 11:45 am
 स्व. पं ओम व्यास 'ओम'जी की एक सुन्दर रचना.माँ माँ,माँ-माँ संवेदना है,भावना है अहसास है      माँ,माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है,    माँ, माँ रोते हुए बच्चे का  खुशनुमा पलना है,माँ, माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,माँ, माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है,म...
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  March 29, 2014, 12:59 pm
प्यार में दर्द है, प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है   वो सनम  जब यहाँ  बेवफा हो गया   टुकड़े-टुकड़े जिगर के मेरे कर गया,  हँस  के मैंने  उसे बस  यही था कहा     तू  मेरा  प्यार  है, वो  तेरा  प्यार है !   प्यार में दर्द है...
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Tag :दर्द
  March 20, 2014, 8:53 pm
रंग रंगीली होली आई..रंग - रंगीली  होली  आई   मस्तानों   के   दिल  में  छाईजब माह  फागुन  का आता  हर घर में  खुशियाली लातानया काम  व्यवसाय बढाता  सबके मन में जोश जगाता  गली - गली  में   धूम  मचाई  रंग   रंगीली   होली   आई,       &nbs...
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  March 16, 2014, 6:27 pm
फिर से  होली आई रस  बरसाते  रंगोंके  संग, फिर  से  आई  होली , फागुनका त्यौहार निरालाभरलोअपनी झोली ! मौजमनाए मिल-जुल  कर  आओ  खेलरचाए , लें  गुलाल  लेंरंग  फाग  का  सबसे  प्रेम  बढाए ! चारों  ओर  लगा  है  मेला  मौसम  बना  रंसीला , ...
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Tag :रंगगुलाल
  March 12, 2014, 9:17 pm
 पुरानी होली  कम  पैसा   पर  रुतवा  था   कम ज्यादा कुछ रकबा था मेहनत  की  हम  खाते  थे इज्जत   से   सो   जाते  थे पूनम    की   वो   रातें   थी सच्ची  झूंठी  कुछ बातें थी जब होली की रुत आती थी तब भंग  पिलाई  जाती थी हम  रंग   खेलन...
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Tag :बीराना
  March 6, 2014, 8:02 pm
बदले जो न ढंग. हाथ गुलाल लिए खड़े,मोहन  बहुत  उदास ,राधा  पहुँची  डेट पर, और  किसी  के साथ !राधा के  मन और है, मोहन  के  मन  और ,इसके मन  भी चोर है, उसके मन  भी चोर !होली दिवाली  भाय न, भाये अब  न बसंत ,मोहन  के  मन अब  बसे, बैलेटाइन  सन्त !पहले  चाट  पसंद&n...
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Tag :मोहन
  March 1, 2014, 12:12 am
फागुन की शामपोखर में डूब रही    फागुन की शाम !  झुक आया  धरती तक   नीला आकाश,  देख - देख  हो बैठी   पत्तियाँ उदास !  सूरज ने   घोड़ों की     खोल दी लगाम !     सतरंगी किरणें     अब -     पीपल से झांक,     भाग - भाग    जाती है       स...
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  February 25, 2014, 6:59 pm
 आँसुओं की कीमत मेरे आँसुओं की  कीमत  तुम  चुका न  सकोगी,  मेरे दिल से  दूर रहकर  तुम भी जी  न सकोगी!तडपते थे  हम  एक दिन  अपने  प्यार  में कभी,मुझको भुला के  तुम वह दिन  भुला न सकोगी!खाई थी  कसमे  निभाने की  न होगें  जुदा कभी,मुझको  जुदा करके ...
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  February 18, 2014, 9:58 pm
पितापिता जीवन है,संम्बल है,शक्ति है,पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है,पिता अंगुली पकडे बच्चे का सहारा है,पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है, पिता ! पिता पालन है पोषण है परिवार का अनुशासन है,पिता ! पिता धौस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है,पिता ! पिता रोटी है कपड़ा है मका...
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  February 10, 2014, 10:42 pm
बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं हैकुहासों   ने   घूंघट  उतारा  नही  है, अभी मेरे प्रियतम का इशारा नहीं है! किरणों  का  रथ  लगता  थम गया, सूरज  ने अभी  पूरब निहारा नही है! चारो  दिशाओं  में धुंधलके  है  फैले,  पूनम  के  चाँद  को  गंवारा नहीं  है!  चा...
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  February 5, 2014, 6:23 pm
  आप  इतना यहाँ  पर न इतराइये.आप  इतना यहाँ  पर न इतराइये  चंद  सासों  की राहें सभल जाइये,अज़नबी मान करके  कहाँ जा रहे    आपको भी यहाँ हमसफर चाहिये !जख्म  लेकर यहाँ मै तो जीता रहा  जहर  मिलता  रहा जहर पीता रहा,  जिंदगी   के   तजुर्बे   बड़े  ख़ास  ...
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  January 18, 2014, 7:55 pm
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