| साँझ के मई २०१२ के अंक में,अतीत से, में शहरयार की ग़ज़ल और परवीन शाकिर की नज़्म.कव्यधरा में, अंकिता पंवार, विनीता जोशी,सुधीर मौर्या 'सुधीर' की कवियाये और बरकतुल्ला अंसारी की ग़ज़ल.कथासागर में, सुधीर मौर्या 'सुधीर' की लघुकथा. ... |
| मई २०१२ अतीत से,शहरयार की ग़ज़लये काफिले यादो के, कहीं खो गए होतेएक पल भी अगर भूल से हम सो गए होतेऐ शहर तेरा-नाम-ओ-निशा भी नहीं होताजो हादसे होने थे , अगर हो गए होतेहर बार पलटते हुए घर को, यही सोचाऐ काश, किसी लम्बे सफ़र को गए होतेहम कुश हे, हमे धुप, विरासत में मिली हेअजदाद क... |
| आनलाइन बायफ्रेंड शानू के लेपटाप की स्क्रीन पर चेट बाक्स में लिख कर आता हे, जानू वेट १५ मिनेट में आता हूँ. जरा लंच कर लूँ.शानू भी तेजी से टाइप करती हे - ओ.के.आज सन्डे हे सो शानू घर पर हे, वो पदाई के लिए अपने मामा के घर लखनऊ आई हे.शानू के पास १५ मिनेट हे क्योंकि उसका आनलाइन बायफ... |
| टूटता स्वप्न संसार प्रेम, प्रतिच्छा, विरहकितना कुछ महसूस कर जाती हूँमें उस छन जब भी कौंधता हेतुम्हारा ख्याल मेरे मश्तिष्क मेंयहाँ कुछ भी नहीं होता ऐसाजैसा होता हे हमारेस्वप्न संसार मेंन जाने क्योंफिर भी खोजती रही तुम मेंअपनी कोमल भावनाओ काकल्पित ... |
| मार्च २०१२, के अंक में.काव्यधरा में - अंकिता पंवार, विनीता जोशी, सुधीर मौर्या 'सुधीर' की कवितायंकथासागर में - सुधीर मौर्या 'सुधीर' की लघुकथा अंकिता पंवार तुम्हारे सानिध्य मेंएक प्रेम भरासंबोधन तुम्हाराकितना कुछ बदल देता हेमेरे अंतर्मन मेंअनगिनत फासले तय हो जात... |
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