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शिल्पकार के मुख से

नदियों में नाथशिवनाथ नदी के तीर बसा हुआसूंदर सा गाँव रामपुर,जहाँ पीपल की छांव,मांझी की नाव,नदी तट पर जलक्रीड़ा करती सोन मछरिया,सुंदर साधारण घर-दुवरिया,मंथर जल कोपैरों की छपछपाहट से उकसाती छोरी,महादेव संग बैठी गौरीसब कुछ है इस गाँव रामपुर मेंकलचुरीकाल का त्रिस्तरीय शि...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :बलौदाबाजार
  July 2, 2014, 11:48 pm
पत्तियाँ पीली हुई पीपल के झाड़ कीबरफ़ पिघलने लगी अब पहाड़ कीछुट्टा छोड़ दिया किस ने सूरज कोजैसे सांकल खुल गई हो सांड़ कीसुबह से ही लहकने लगी है गरमीसटक गई बेचारे कूलर जुगाड़ कीकट गए सब पेड़ हरियाली गायब हुईदशा खराब हुई अब गांव गुवाड़ कीत्राहि त्राहि मच रही पारा भी चढ गयाबस जरु...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :
  June 10, 2014, 11:50 am
नही पढ पाता मैंभावोत्पादक कविताएंसीधे दिल में उतरती हैंऔर निर्झर बहने लगता हैएक एक शब्दअंतर में उतर करबिंध डालता है मुझेआप्लावित दृगदेख नहीं पातेछवि तुम्हारीबिसरने की कल्पना मात्रतार तार कर देती हैजीवन रेखा को...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :शिल्पकार
  May 24, 2014, 10:45 pm
तमाम उम्र सफ़र में रहा नहीं मैं कभी घर में रहा यायावरी पर क्या कहूँ कांटो भरी डगर में रहा तम्मना-ए-परवाज थी पर उनकी कैद में रहा कह न सका दिल की पासबां कोई हद में रहा मीठे बोल बोलते हैं वो सिर उनकी जद में रहा चलते चलते पहुंचा तो सज्जादों के शहर में रहा...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :बहर
  October 24, 2013, 10:07 pm
आज मरने आ खड़ा है रावण मेरे गाँव कालम्बा तगड़ा हट्ठा कट्टा रावण मेरे गाँव काकाले काले बादल झमाझम बरस रहे हैं खूबआसमान से होड़ लेता रावण मेरे गाँव काआतिशबाजी होगी तो धूर में मिल जाएगानेता जी के हाथों मरेगा रावण मेरे गाँव काबारुद भरी देह पर रंग बिरंगे हैं अलंकरणआज नहीं ...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :रामलीला
  October 13, 2013, 10:03 pm
आओ चुनरिया सतरंगी कर दूँ अबकी बार होली मेंआओ प्रीत रंग हजार बिखेर दूं अबकी बार होली मेंजागा है मधुमास मास आजसुगंध लिए ॠतुराज आया कान्हा ने भर ली पिचकारीदेख मन मोरा भी हरसाया लेकर आया हूँ प्रीत अमिट रंग,भरके अपनी झोली मेंआओ चुनरिया सतरंगी कर दूँ अबकी बार होली मेंपरसा ...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :
  March 30, 2013, 10:42 pm
कविताबहुत कठिन हैसमोसे खाने से नहीं आतीपहले यूँ ही आ जाती थीटहलते टहलते कभी भीकागज न हो चादर परलिख लेता चंद लाईने,कभी तकिए के खोल परवो अब मुझसे रुठ गयीदेखकर भी नहीं बोलतीबोलकर भी नहीं देखतीराजा नल के आने परबाल्टी लेकर दौड़ता हूँबिजलीरानी जाने परपैरों से पंखा झलता हू...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :मच्छर
  June 9, 2012, 10:16 pm
मै अनपढमिला तुमसे तोसीख गया पढनाचेहरे के भावजो सपाट लगते थेस्वयं कह देते हैंबिना कहे हीऔर मैं पढ लेता हूँतुम्हारे अंतरमन  कीसाक्षर हो गया हूँतुम्हारी एक मुस्कानछा जाती है नभ बनकरखामोशी तुम्हारीमेघों में भरा हुआ वर्षा जलगर्भ धारण कर रखा हो उसनेहिरण्यमयी गर्भवर्ष...
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Tag :शिल्पकार
  March 26, 2012, 12:00 am
महुआ बीनतीवह अनमनी सी लड़कीहँसती है जबझरते हैं फूल, महुआ केमन करता है उसके जूड़े मेंखोंस दूं कुछ फूल टेसू केइस वसंत मेंउसे पहना दूं हारसुर्ख सेमल के फूलों कामहुए के फूल बीनती वहअभिसारिकाजब नदी किनारे बैठ करपैरों से छपछपाती है जलतो उससे बनता है तीरथगढ़धुंआधार जैसा ज...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :ललित शर्मा
  March 1, 2012, 11:56 pm
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Tag :ललित शर्मा
  December 27, 2011, 4:40 am
एक अरसे से शिल्पकार ने कुछ काव्य रचा नहीं, पहले रोज एक पोस्ट आ ही जाती थी नित नेम से। शायद काव्य का सोता सूख गया। अब काव्य उमड़ता-घुमड़ता नहीं। पता नहीं क्यो अनायास हीं एक जीता जागता ब्लॉग मृतप्राय हो गया, जबकि यह मेरा पहला ब्लॉग है। शिल्पकार ब्लॉग जगत की गलियों भटकता रहा। ...
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Tag :प्यार
  December 6, 2011, 4:45 am
शकुन्तला तरार  की एक कविता "जंगली सौंदर्य" जंगली सौंदर्य बैलाडिला लौह अयस्क प्रोजेक्ट ऊँचा नाम ऊँचा काम नये-नये लोग अचानक बस्तर आना जंगली सौंदर्य उफ! परिणति अनब्याही मां नाबालिग मां घरेलू काम के एवज में लुटी हुई अस्मत दैहिक शोषण की शिकार बालाएं चंद टुकड़े रुपयों के ल...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :
  August 8, 2011, 11:18 pm
शकुन्तला तरार  की एक कविता "जंगली सौंदर्य" जंगली सौंदर्यबैलाडिला लौह अयस्क प्रोजेक्टऊँचा नाम ऊँचा कामनये-नये लोगअचानक बस्तर आनाजंगली सौंदर्यउफ!परिणतिअनब्याही मांनाबालिग मांघरेलू काम के एवज मेंलुटी हुई अस्मतदैहिक शोषण की शिकार बालाएंचंद टुकड़े रुपयों केलुटी हुई...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :
  August 8, 2011, 11:18 pm
कंचे,लट्टू,गुल्ली-डंडा,पुराना बक्सा खोल रहा हूँ।खोया बचपन ढूंढ रहा हूँ,मैं बचपन ढूंढ रहा हूँ॥राजा-रानी, परियों की, कहानी खूब सुनाती थी।खोयी ममता ढूंढ रहा हूँ,मैं बचपन ढूंढ रहा हूँ॥लड्डू-पेड़े,खाई-खजाना,मुझको खूब खिलाती थी।तेरे आंचल की छाया में, मैं बचपन ढूंढ रहा हूँ।।क...
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Tag :माँ
  June 27, 2011, 6:00 pm
कठपुतली नाचती हैउसके हर ठुमके परतालियाँ बजती हजारहोठो पर छाती है स्मित थिरकते कदमों से करती है अभिवादनखेल ख़त्म होते हीनट खोलता है धागेअपने पोरों से बेजान कठपुतलियांफिर टंग जाती हैंबरसों पुरानी खूंटी सेबार बार छली जाती हैंमालूम होते हुए भी उनके प्राण किसी और के ...
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Tag :कठपुतली
  May 24, 2011, 8:28 pm
रात के तीन बजकर 29 मिनट हुए हैं, चैट पर टन्न की आवाज आती है। बसंत पंचमी की शुभकामनाएं लिखा दिखाई देता है। ध्यान से देखता हूँ तो अरुण राय जीहैं। जिनकी कविताएं मुझे बहुत पसंद आती है। समय-बेसमय उनके ब्लॉग पर जाता हूँ और बिना आहट के चला आता हूँ। मुझे कविता लिखे लगभग एक बरस होने...
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Tag :ललित शर्मा
  February 8, 2011, 3:44 am
संत पवन दीवान जी ने अपनी एक कविता " ओ महाकाल " अपने काव्य संकलन "अम्बर का आशीष" के विमोचन के अवसर पर सुनाई थी। उन्होने कहा कि आज राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता है, छोटी-छोटी एकता मिलकर बड़ी एकता बनती है। इस कविता का पॉडकास्ट सुनिए।ओ महाकालओ महाकाल तुम कब दोगेजीने के लिले हमें द...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :गीत
  January 5, 2011, 7:00 am
हिन्दी और  छत्तीसगढ़ी  कविताओं के माध्यम से जन-चेतना की अलख जगाने वाले लोकप्रिय  संत  कवि पवन दीवान  (स्वामी अमृतानंद सरस्वती ) से जगत में सभी परिचित हैं। इसलिए मुझे उनके विषय में परिचय देने की आवश्यकता नहीं है। दीवान जी  का "मेरा हर स्वर इसका पूजन" नामक काव्य संकलन दो...
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Tag :कवि्ता
  January 4, 2011, 8:33 am
भाई योगेन्द्र मौदगिलके गजल संग्रह ‘अंधी आँखे-गीले सपने” से एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ। बढ रही मंहगाई हमको आजमाने के लिए।आदमी जिंदा है केवल तिलमिलाने के लिए।बेकसी बढती रही गर दाने-दाने के लिए।तन पड़ेगा झोंकना चूल्हा जलाने के लिए।प्याज ने आँसू निकाले, देख बेसन ने कहा।च...
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Tag :योगेन्द्र मौदगिल
  December 25, 2010, 9:15 am
मैं सोचता थाकविता में सिर्फ़ भाव होते हैंजो अंतरमन से उतरते हुएकागज पर अपना रुप लेते हैलेकिन जब कवितातुम्हारे पास पहुंचती है तोउसमें क्या-क्या नहीं ढूंढ लेते तुमगांधारी आंखो सेविदुर दृष्टिकोण तुम्हाराढूंढ लेता हैशिल्प,बिंब, अलंकार, व्यथाव्याकरण, छंद, समासअतिश्योक...
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Tag :-ललित शर्मा
  November 15, 2010, 4:50 am
हम लड़ रहे हैं मित्र दोना पान के लिएभाड़े में भीड़ जुटती है सम्मान के लिएक्या नहीं होता अब पूजा के नाम परबिक जाते हैं फ़रिश्ते अनुष्ठान के लिएहै खेल सियासत का कुर्सी के वास्तेतुलने लगे कुबेर भी अनुदान के लिएअपने उसुलों के लिए बागी हुए हैं हमछोड़े हैं सिंहासन भी स्वाभिमान क...
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Tag :विश्वकर्मा
  November 13, 2010, 4:48 am
वो लकड़ियाँ कहाँ हैं?जिन्हे सकेला था बुखारी के लिएअब के ठंड  मेंदेती गरमाहट तुम्हारे सानिध्य सीबुखारी ठंडी पड़ी परकांगड़ी में सुलग रहे हैकुछ कोयलेपिछले कई सालों सेजिसकी गरमी काअहसास है मुझे अब तकजब से तुमने आने का वादा कियामैने नहीं सिलगाई बुखारीसिर्फ़ कांगड़ी को सीने ...
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Tag :-ललित शर्मा
  November 10, 2010, 4:48 am
एक पुरानी कविता  आज सुबह-सुबह श्रीमती ने  जगायाहाथ में चाय का कप थमाया तो मैंने  पूछा- क्या टाइम हुआ है?मुझे लगता नहीं कि अभी सबेरा हुआ हैबोली ब्रम्ह मुहूर्त का समय है,चार बजे हैं और आप अभी तक खाट पर पडे हैंमालूम नहीं आज नरक चौदस हैआज जो ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान करता है व...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :ललित शर्मा
  November 4, 2010, 10:35 am
 इस गीत को मैने लगभग 10 वर्षों पूर्व लिखा था-आज पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ, आशा है कि आपको पसंद आएगा।फूलों से हो लो तुम,जीवन में सुंगध भर लोमहकाओ तन-मन सारा भावों को विमल कर लोफूलों से हो लो तुम ........................................वो मालिक सबका हैं ,जिस माली का हैं ये चमनवो रहता सबमे हैं तुम ,कर लो उ...
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ललित शर्मा-للت شرما
Tag :गीत
  September 29, 2010, 7:16 am
युग पुरुष योगेश्वर श्री कृष्ण का आज जन्मदिवस है, इस अवसर पर मन में आया कि कुछ गीत सा रचा जाए। आपके लिए प्रस्तुत है-जन्माष्टमी पर आनंद लें। पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हापानी नहीं है,जरुरी है लानापनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा कितना है मुस्किल घरों से निकलनापानी भरी ...
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Tag :ललित शर्मा
  September 1, 2010, 8:38 am
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