| परिवार ,समाज की एक इकाई अंग है ….. परिवार , हर इन्सान की जन्म-से मृत्यु तक की जरुरत है …. जैसा परिवार ,वैसा उस परिवार में रहने वाले इन्सान का व्यक्तित्व होता है …..घर में दिया न जलाया और मंदिर में दिया जलाने पहुँच गए तो वो कुबूल नहीं होता है …परिवार की ही बात करनी है ….. क्यूँ न... |
| बृहत् प्रामाणिक हिंदी कोश की समीक्षारिपोर्टः- शीर्षकः- बृहत् प्रामाणिक हिन्दी कोश। प्रकाशनः- लोकभारती प्रकाशन, दरबारी बिल्डिंग, एम. जी. रोड़, इलाहाबाद।मूल संपादकः- आचार्य रामचन्द्र वर्मा।संशोधन-परिवर्धनः- डॉ. बदरीनाथ कपूर।पृष्ठ संख्याः- 1088.शब्द संख्याः- लगभग 49000.शब... |
| वर्तमान समय में शिक्षक को लेकर बहुत सारे नए मत और विचार उभर कर आ रहे है। उन विचारों तथा विषयों पर चर्चा, परिचर्चा आदि भी हो रही है। लेकिन इन सब बातों से दूर एक विचार यह भी है कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। इस विचार से यह स्पष्ट होता है कि एक शिक्षक अपने पूरे जीवन का... |
| चल मेरे हमनशीं चल अब इस चमन मे अपना गुजारा नही,बात होती गुलोँ तक तो सह लेते हम अब तो काँटो पे हक़ भी हमारा नही”“कभी चाहा तुझे ऐसा की रब जैसा पूजा, किस जगह मैने तुझे पुकारा नही,यु दर्द देकर क्या मिला तुजे? कह देते की तुमसे मिलना अब गँवारा नही”“अब चला हु घर से ये सोचकर कि इस सा... |
| माँ तुम अब न वैसी होबोलो माँ अब कैसी हो ?उम्र हुई है अब सत्तरखड़ी हुई मिलती दर परसबकी झोली देती भरखुद की फिर भी आँखें तरझलक रहा चेहरे पर ज़रआँखों से दिखता कमतरपीड़ा नें बना लिया है घरपर नहीं उठाता कोई खरभेज दिया बिटिया को दूरवो भी है कितनी मजबूरभाई की आई है हूरलगी ह... |
| आज तक बहूत सारे महिमा-मंडित आलेख कविता पढ़ चुकी हूँ …. खुद एक बहुत ही अच्छी माँ की बेटी और एक बेटे की माँ हूँ …. लेकिन एक सवाल है मेरे मन में उसके जबाब ढूंढ रही हूँ ….एक माँ के तीन बेटे थे …. वे बेटे अनुशाषित परिवेश में परिवरिश पाकर बड़े हुये थे …. उनकी शादी हुई …. बेटों की माँ क... |
| तत्काल समाधान हेतु इस देश में यदि आज सबसे बड़ी कोई समस्या है तो वो है, देश के पच्चीस फीसदी दलितों और आदिवासियों और अड़तालीस फीसदी महिला आबादी को वास्तव में सम्मान, संवैधानिक समानता, सुरक्षा और हर क्षेत्र में पारदर्शी न्याय प्रदान करना और यदि सबसे बड़ा कोई अपराध है तो व... |
| एक वामा हूँ नए जगत कीनई विधा मैं जानती हूँहवाएँ गर्म हैंफिज़ाएँ नर्म हैंधूप सिमटी हुईसोचती मर्म हैपर खोज ही लूँगी ठंढ़ी बूँदों कोउसे पास बुलाना जानती हूँकितना शोर हैआँधियाँ जोर हैंसोया हुआ आजजीवन का मोर हैपर खोज ही लूँगी मीठे सुरों कोउसे लय में लाना जानती हूँसमय कठ... |
| मैं .. काश !मैं एक विशाल वृक्ष औरछोटे-छोटे पौधे ही होती ….एक विशाल वृक्ष ही होती जो मैं ….मेरी शाखाओं-टहनियों परपक्षियों का बैठना – फुदकनामेरे पत्तों में छिपकरउनका आपस में चोंच लड़ाना ,उनकी चह-चहाहट – कलरव को सुनना ,उनका ,शाखाओं-टहनियों पर ,पत्तों में घर बनाना ,गिलहरी का प... |
| मानव जन्म क्याएक बुदबुदा हैऔर उसका जीवनएक कर्म,कर्म अपूर्व कर्म परजब यह कर्मअधूरा रह जाता हैकिसी के प्रति, तबएक कसमसाहटकुछ यंत्रणाएँअसहनीय तड़पअव्यक्त पीड़ामन मस्तिष्कमें लिएवो बुदबुदानया रूप लिएफिर आता हैक्यों क्या, काकर्म पूरा करने कोया किसी को, कर्म मेंसहभाग... |
| ( डॉ. नीरज भारद्वाज ) पत्रकारिता के अर्थ की बात करें तो पत्रकारिता को अंग्रेंजी में ‘जर्नलिज्म’ कहते है, जो ‘जर्नल’ शब्द से निकला है] जिसका शाब्दिक अर्थ ‘दैनिक’ है अर्थात् दिन&प्रतिदिन के क्रिया&कलापों] सरकारी] सावर्जनिक बैठकों का विवरण ‘जर्नल’ कहलाता है। लेकिन श... |
| मैं जितना सुलझाती हूँवो उतना ही और उलझा देता हैसुनोऐसा करो तुम कुछ मत करोमैं खुद ही तुम्हें सुलझा दूंगीन सुलझा पायी तो जो उलझा रहे हैंउन को सुलझा दूंगीमकसद साफ़ हैसिर्फ तुम्हें सुलझा हुआ सादा साफ़ नजरिया देनाके तुम देख पाओ जिस्मों के पार रूहों का मिलापArchna Sood ... |
| चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात की जगहचारो दिन ,आठों पहर ,स्याह दिन ,कपाती रहती रूहबस चार दिनबस चार दिनचार दिन पहले शोक-संतापपरसो आक्रोश-भड़ासकल संकोच-सन्नाटाआज सम्पूर्ण-शांतिबस चार दिनबस चार दिनफिरइंतजारफिरएक घटना के लिएबस चार दिनबस चार दिनचारो घड़ी आठों पहरबस जी... |
| आजकल नींद नाराज हैं मुझसे सिरहाने भी अब कोसने लगे हैं वास्ता देते हैं मुझे तुम्हारी बाहों का सपने भी अब मुझे टोकने लगे हैं सवालों का ढेर लगा हैं इर्द गिर्दजवाबो में ताने चुभोने लगे हैं तन्हायी का आलम न पूछ सजनाआंसू भी आँखों के कोर भिगोने लगे हैं नाराज हैं मुझ... |
| आज भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी टीपू सुल्तान की पुण्यतिथि है. भारतीयस्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती दिनों में इनके द्वारा दिए गए योगदान को भुलायानहीं जा सकता. भारत के इस महान वीर को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करें.टीपू सुल्तान : शेर ए मैसूर की आज प... |
| सबरजीत के शव सेकिडनी और दिल नहीं मिलापाक के नीयत कितने पाक़ हैंदिलदिल जहाँ रह गयावहीँ आत्मा भी तो रह गईदिल तक वे संवेदनाएं पहुँच जातीवो मिटटी बन कर आयालेकिन वतन की मिट्टी को चूम न सकाजिनकी वज़ह से वे आज उसकी बहन – बेटी केआंसू पोछ रहा और गले मिल रहा हैउसकी बहन उन्हीं लो... |
| पसोपेश में हूँ …..तुम क्या कहोगे?हाँ या नहीतुम जानते हो न मेरे प्यार कीशिद्दत , और तुमने भीमुझे इतना प्यार कियाकिअब तुम्हारा अकेलापनसालता हैं मुझेअपने अकेलेपन को दरकिनार कर ,मैं जानती हूँमेरे होने से या न होने सेतुम्हारे आस पा ज्यादा कुछ नही बदलेगातुम तब भी उतने ही व... |
| लखनऊ। युवा पत्रकार व लेखक एम. अफसर खां सागर को जनहित भारतीय पत्रकार एसोसिएशन का वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनित किया गया है। अफसर पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले दस सालों से कार्य कर रहे हैं। उनकी कड़ी मेहनत व लगन को देखते हुए इस पद से नवाजा गया है। अफसर के नियुक्ति... |
| वह अपनी उम्र के लड़कों के साथ सेक्स करने की तमन्ना रखती है, न कि अपने पिता से बड़ी उम्र के मर्दों के साथ, लेकिन उसे अपनी उम्र के लड़के बच्ची समझते हैं। लड़कों की नजर में बड़ी दिखने के लिये वह दो-दो ब्रा पहनती है, लेकिन फिर भी कुछ मतलब नहीं निकलता….!(डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निर... |
| ना बहन थी ….ना बेटी हुई ….बहुत नाज़ों से ,पाल रही थी ,एक पोती कीनाज़ुक तमन्ना ….मर्यादित मिठासजीवन में होता ….अब मुश्किल मेंजां आन पड़ी ….कलेज़े में हुक बड़ी….डर और आतंक केस्याह समुंदर मेंडूब उतरा रही हूँ ….छ: महीने की पोती कोकैसे लाल-मिर्ची कीपुड़िया पकड़ाऊँगी ….एक साल क... |
| किसी की दिल से दिल्लगी !किसी के दिल को लग गई !!तुझे हक़ मिला नहीं दिल्लगी काकिसी के दिल से ना खेलखुद का दिल बहलाने के लिएकी किसी दिन ख़ुदा ने दिल्लगीतेरी दिल्लगी बन जायेगी दिल की लगीना सुखेगे अश्क ,तरसेगा दिल के लगी के लिएसच का गाँसगले में डाले फाँसक्ल... |
| है कि नहीं ……बहुत गुस्सा में हैं ……है कि नहीं ……प्रेमी या प्रेमिका बे-वफ़ा निकले ….पत्नी या पति मगरूर -जल्लाद निकले ….स्वाभाविक प्रतिक्रिया है ,मेरे दोस्त ,है कि नहीं ….कोसो ना ,पानी पी-पी के कोसो ….जितनी गालियाँ देनी है , दोउनका नाम लेकर दो ना …एक की गलती की सज़ा ,सारे ... |
| चन्दौली ब्यूरो। प्रदेश के लोक निमार्ण व सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार में प्रदेश का तेजी से विकास हो रहा है। सरकार द्वारा जनहित के अनके कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, जिसका लाभ सर्व समाज को मिल रहा है। सपा सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई के लिए म... |
| परिवार -समाज – कानून और सरकार किसे कोसे …… ??जब एक इंसान किसी लड़की का बलात्कार करता है तो उसी लड़की से बलात्कारी की शादी करावा दी जाती है ….वही बलात्कारी अपनी साली के साथ बलात्कार और हत्या के केस में फसा पाया जाता है ….वही बलात्कारी अपनी चचेरी बहन के साथ बलात्कार करने की ... |
| सोनभद्र ब्यूरो। विकास की अवधारणा के साथ ही संगठनात्मक शक्ति की महत्ता को विशेष स्थान दिया गया है। रेणुकूट के विश्राम गृह हॉल में ऑल प्रेस एण्ड राइटर्स एसोसिएशन की एक बैठक बीते रविवार दिनांक 14.4.2013 को आयोजित की गयी। ‘अपवा’के प्रदेश अध्यक्ष बृजेष सिंह राणा की अध्यक्षता... |
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