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मृणालिनी (Mranaalinee) : View Blog Posts
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मृणालिनी (Mranaalinee)

अकेले भले ------------------------उत्साह टूटता  चला जैसे जैसे तुम दूर चले मन की पगडंडियों मै हम न थे सूने भले आस भी जान जाती है हकीकत के पहाड़ों को तभी आँसूं बस रोने चले ,क्यूँ  मिलन के गलियारों  मेंप्यार भी एक राजनीति था बो दूर हो कर अब अजनवी बन हमसे मिलने चले ,यकीन के जो शव्द कह...
मृणालिनी (Mranaalinee)...
Tag :w b yeats
  April 29, 2012, 12:07 am
मलाल---------------------ओंठों  परहँसी  रखता हूँ जी  हाँ मै खुश रहता हूँ यह  कहना  हैमेरे  सभी दोस्तों  का लेकिन  हँसी के गुब्बारों  मै भी मलाल उड़ते  रहते  हैं जो  अक्सर  कहते हैं  की मै  नादान सा क्यूँ ढ़ोता  रहा बह  अपनापन  उनका जो मुझे मिला ही नहीं ----------------अनुराग चंदेरी   ...
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Tag :w b yeats
  April 28, 2012, 11:43 pm
जख्मों  के कांटे भी तरस खा के रो दिए पर  उन्हें दिखाई न दिए मेरे प्यार के फूल बे तो उलझे रहे खुद को पाक सिद्ध करने में .---------------------------------अनुराग शर्मा ...
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Tag :w b yeats
  April 27, 2012, 10:30 pm
मै और तुम-----------------------------------मन के दर्शन और तन के गणित मै खरा पाया देख समर्पण आपका मेरा रोम रोम भी कितना थर्राया मैने तुम्हारे मन के भावों में भी सागर सा गहरापन पाया,अमिट विश्वासरखा तुमने मुझ पर अपना तन मन वाराअब इतने होने पर भी क्यूँ दूर तुम चले गए प्रिय जान सको तो जान लो ...
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Tag :w b yeats
  April 27, 2012, 10:01 pm
कितना  चाहा  मैने  तुमको --------------------------------------कितना चाहा मैने तुमको ये  तुम  प्रयास कर पहचानने  के भी जान  ना सकीं ,साँसों  के  साथ  धड़कता  हैतुम्हारा  होनासिर्फ  सोच  का विज्ञानं भर काफी नहीं मन  केगहराते भंवरों  में तुम रहीं एक चक्रवात  सी  धारा,मेरे  होने  का पर्याय हो तु...
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Tag :डव्लू. बी. यीट्स
  April 27, 2012, 9:43 pm
प्यार --------------तुमने  न जानामेने महशूस किया है जीवन  के बंधन में ये गहरा बंधन निर्मित किया है जो जुड़ कर अब टूट नहीं सकता इसे मैने निर्मित किया है मेरे मोह से यह जानते हुए की तुमने उतना गंभीर होकर नहीं सोचा है तभी तो तुम मेरी गंभीरता में मजाक खोजते हो मेरे हास्य से  तुम...
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Tag :
  April 27, 2012, 7:48 am
कैसे सहा सहम के बुझना मन का देखा अपनों का फीकापन उनकी ऊबें ,चिडही होती तो चल जाता मैने स्वयं को उनके मन से उतरते देखा ,जलते चिरागों को बुझते बुझाते देखा ,कैसे रहे रिश्ते स्वार्थ की डोर से बंधे अनुपयोगी होते ही पल में टूट गए ,बिखर गए सब बंधन सारे रह गए शेष भुलावे झूठे ....
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Tag :
  April 25, 2012, 6:34 pm
वक्त  के  दायरे   नहीं  बदलते  कभी ये  तो  मन  हैजो छोटा बड़ा होता  रहता   है  . ------------------------------अनुराग चंदेरी --------------------------...
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Tag :
  April 25, 2012, 6:18 pm
जब से जाना है मैने दर्द भूख का नेताओ के दरवारो और मंदिर की प्रार्थनाओं से चिड हो गई है एक सामने रह कर नहीं सुनाता दूसरा अद्रश्य हो कर नहीं सुनता क्या पता दोनों की साजिश है कोई ?-----------------------------------अनुराग चंदेरी ...
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Tag :
  April 22, 2012, 10:50 pm
वक़्त के आईने में खुद को नहीं देखा इसलिए सब काबुरा मानते रहे -------------,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अनुराग  चंदेरी ...
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  April 22, 2012, 10:44 pm
हवाओं में भी धोखा है जाने किन तूफानों से वादा किया हो इन ने साथ लाने का -------------------------------अनुराग  चंदेरी ...
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  April 22, 2012, 10:39 pm
प्रणय के चार दिन अवसाद भरी एक उम्र से ज्यादा है--------------------------अनुराग  चंदेरी ...
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  April 22, 2012, 10:30 pm
उम्र के हर उस मोड़पर कभी साथ तुम न थे जब थी जरूरत बेहद मुझे ,में तो कर्ण सा शक्ति बिहीन रहा जीवन के महाभारत में------------------------------अनुराग चंदेरी   ...
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  April 22, 2012, 10:14 pm
चुप-चाप -----------------चुपचाप  चुपचाप झरने  का  स्वरहम  में   भर  जाएचुपचाप  चुपचापशरद  की  चांदनी  झील  की  लहरों  पर  तिर  जाए चुपचाप  चुपचाप जीवन  का  रहस्य जो  कहा  न   जाये , हमारी ठहरी  आँखों  मे  गहराए  चुपचाप    चुपचापहम  पुलकित  विराट में  डूबें पर  विराट  हम  में  मिल  जाए ...
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  April 21, 2012, 10:25 pm
मेरे ह्रदय में खून के  आंसू थे तुम आँखों से देखते रहे इसलिए मुस्कुराते रहे .............============================अनुराग चंदेरी ...
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  April 21, 2012, 7:23 pm
मौन युद्ध -------------------------चुप  हो  जाना एक  लड़ाई   है  अद्रश्य  जो  समझता  हैबह  भोगता  है,चिड़ियों   सी  चहक  देता  चेहरा जब  मौन  हो  जाये तो समझो  ये एक  शुरू  होती  लड़ाई है जो  शव्द्विहीन   हो कर  चलाई है यह  युद्ध  का  आकारऔर दूरियां  निर्मित    करने  की की ज्यामिति  है तर्क ...
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  April 20, 2012, 11:17 pm
भ्रम -----------------चट्टान  से  भारी हो  गया  मन  तुम्हारा सारी  नाजुकताएं और  कोमल  अहसासों  को तुमने  पूर्णतः  मन  की   स्मृतियों   से हटा दिया  है तभी  तो  चले   गए  तुम अनंत   की परिधियों  में दूरी के  उस  पार ,बहां  जा कर भी  खुद को छिपा   लिया   है तुमने तो ओढ़  ली   है चादर समाज  क...
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Tag :
  April 20, 2012, 4:49 pm
खामोशियाँ ----------------कोई  बीज  थोड़े  ही  बोता  है  खामोशियों के ये  तो  उग  आती  हैसहज  हीमन  के  विचलन  और  तनाब  के  दारुण  में  ,ये   तो सघन  प्रेम  और  गहन  आलिंगन  में भी  पैदा  हो  जाती  है ,खामोशियों  की  तस्वीरेंजीवन  में रंग  देती  हैं यथार्थ  को  जानने  का समझ  के विज्ञान...
मृणालिनी (Mranaalinee)...
Tag :
  April 19, 2012, 11:14 pm
आप रिश्तों  को कहने लगे बेड़ियाँ आँख की पर नमी को नमी बोलिए --------------------राकेश जोशी ...
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Tag :
  April 16, 2012, 7:15 pm
दम ------उदासी और निराशा भर साथी होते तो टूट जाता मैये आशाओं के पंख भी क्या कमाल के है इन्होंने हार नहीं मानीउड़ना सीखा है बस लड़ना सीखा है दम से , फिर चाहे हार ही हाथों मे क्यूँ न हो ,संघर्षों से मिल जाती है संतुस्टी--------------------------अनुराग चंदेरी  ...
मृणालिनी (Mranaalinee)...
Tag :
  April 16, 2012, 7:05 pm
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