रविकर की कुण्डलियाँ

बाजीगर सैनिक डटे, मौत सामने ठाढ़ |ग्राम नगर कश्मीर के, झेल रहे हैं बाढ़ |झेल रहे हैं बाढ़, देश राहत पहुँचाया |फौजी रहे बचाय, सामने जो भी आया |फ़ौजी का सम्मान, करो रे मुल्ला-काजी |तुर्क-युवक नादान, बंद कर पत्थरबाजी ||...
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  September 10, 2014, 9:01 am
घाटी की माटी बही, प्राणांतक सैलाब |कुछ भी न बाकी बचा, कश्मीरी बेताब |कश्मीरी बेताब, जान पर फौजी खेलें |सतलुज रावी व्यास, सिंधु झेलम को झेलें |राहत और बचाव, रात बिन सोये काटी |फौजी सच्चे दोस्त, समझ ना पाये घाटी ||...
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  September 9, 2014, 9:48 am
 भला भयातुर भी कहीं, कर सकता अपराध । इसीलिए तो चाहिए,  भय-कारक इक-आध । भय-कारक इक-आध, शिकारी खा ना पाये । चलता रहे अबाध, शांतिप्रिय जगत बनाये । धर्म-भीरु इस हेतु, डरे प्रभु से यह पगला । सँभला जीवन-वेग, आचरण सँभला सँभला । ...
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  September 6, 2014, 4:08 pm
गाली देते ही रहे, बीस साल तक धूर्त |अब गलबहियाँ डालते, सत्ता-सुख आमूर्त |सत्ता-सुख आमूर्त, देखिये प्यार परस्पर |गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर |यह कोसी की बाढ़, इकट्ठा हुवे बवाली |एक नाँद पर ठाढ़, करें दो जीव जुगाली ||...
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  August 12, 2014, 4:23 pm
आदरणीय!! व्याकरण की दृष्टि से क्या यह कुण्डलियाँ छंद खरा उतरता है ?? आलोचक चक चक दिखे, सत्ता से नाराज । अच्छे दिन आये कहाँ, कहें मिटायें खाज । कहें मिटायें खाज, नाज लेखन पर अपने। रखता धैर्य समाज, किन्तु वे लगे तड़पने । बदलोगे क्या भाग्य ? मित्र मत उत्तर टालो ।...
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  July 19, 2014, 12:36 pm
ताना-बाना बिगड़ता, ताना मारे तन्त्र । भाग्य नहीं पर सँवरता,  फूंकें लाखों मन्त्र । फूंकें लाखों मन्त्र, नीयत में खोट हमारे । खुद को मान स्वतंत्र, निरंकुश होते सारे । साधे रविकर स्वार्थ, बंद ना करे सताना । कुल उपाय बेकार, नए कुछ और बताना ॥ ...
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  July 14, 2014, 4:38 pm
फ़री फ़री मारा किये, किया किये तफ़रीह । -परजीवी पीते रहे, दारु-रक्त पय-पीह। दारु-रक्त पय-पीह, नहीं चिंता कुदरत की। केवल भोग विलास, आत्मा भटकी भटकी । आगे अन्धा-मोड़, गली सँकरी अति सँकरी । रविकर मत कर होड़, मचेगी अफरा-तफरी ॥ ...
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  July 9, 2014, 9:30 pm
(1)पड़े हुवे हैं जन्म से, मेरे पीछे लोग । मरने भी देते नहीं, देह रहे नित भोग । देह रहे नित भोग, सुता भगिनी माँ नानी । कामुकता का रोग, हमेशा गलत बयानी । कोई देता टोक, कैद कर कोईअकड़े । कहीं चाल अश्लील, कहीं पर छोटे कपड़े ॥ (2)पड़ेहुवे हैं जन्म से मेरे पीछे मर्द |मरने भी देते न...
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  July 1, 2014, 2:14 pm
पड़े हुवे हैं जन्म से, मेरे पीछे लोग । मरने भी देते नहीं, देह रहे नित भोग । देह रहे नित भोग, सुता भगिनी माँ नानी । कामुकता का रोग, हमेशा गलत बयानी । कोई देता टोक, कैद कर कोईअकड़े । कहीं चाल अश्लील, कहीं पर छोटे कपड़े ॥ ...
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  July 1, 2014, 2:14 pm
पुरानी रचना पाई नाव चुनाव से, खर्चे पूरे दाम |लूटो सुबहो-शाम अब, बिन सुबहा नितराम |बिन सुबहा नितराम, वसूली पूरी करके |करके काम-तमाम, खजाना पूरा भरके |सात समंदर पार, चली रविकर अधमाई |थाम नाव पतवार,  जमा कर पाई पाई  ||लाज लूटने की सजा, फाँसी कारावास |देश लूटने पर मगर,  ...
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  June 29, 2014, 11:10 am
बैठा जाये दिल मुआ, कैसे बैठा जाय |उठो चलो आगे बढ़ो, कर लो उचित उपाय |कर लो उचित उपाय, अगर सुरसा मुंह बाई |राई लगे पहाड़, ताक मत राह पराई |उद्यम करता सिद्ध, बिगड़ते काम बनाये |धरे हाथ पर हाथ, नहीं अब बैठा जाये ||...
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  June 27, 2014, 10:40 am
थाने में उत्कोच दे, कोंच कोंच कंकाल । तन मन नोंच खरोच के, दे दरिया में डाल । दे दरिया में डाल, बड़े अच्छे दिन आये । कर ले भोग विलास, आधुनिकता उकसाये। रवि कर मत संकोच, पड़े सैकड़ों बहाने । व्यस्त आज-कल कृष्ण, नहीं कालिया नथाने ॥  ...
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  June 7, 2014, 6:16 pm
बातें करते हवा से, हवा हुई सरकार |हवा-हवाई घोषणा, भूले भ्रष्टाचार |भूले भ्रष्टाचार, भूल जाते मँहगाई |करने लगे प्रचार, उन्हीं सेक्युलर की नाई |पानी पी पी कोस, होंय खुश कई जमातें |देखो अपने दोष, बनाओ यूँ ना बातें ||...
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  March 7, 2014, 9:33 am
कड़े बयानों के लिए, चुलबुल करती दाढ़ |छोड़ केकड़े को पड़ा, मकड़े पीछे साँढ़ |मकड़े पीछे सांढ़ ,जाल मकड़ा फैलाये |करवाये दल बदल, बैल तेरह बहकाये |किन्तु बचे नौ बैल, चार मकड़े ने जकड़े |मारे मन का मैल, मरे तू भी ऐ मकड़े ||...
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  February 26, 2014, 11:25 am
तालू से लगती नहीं, जिभ्या क्यूँ महराज |हरदिन पलटी मारते,  झूँठों के सरताज  |झूँठों के सरताज, रहे सर ताज सजाये |एकमात्र  ईमान, किन्तु दुर्गुण सब आये |मिर्च-मसाला झोंक, पकाई सब्जी चालू ।दे *दिल्ले में आग, बिगाड़े आप रतालू ॥*किवाड़ के पीछे लगा  लकड़ी का च...
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  February 25, 2014, 1:45 pm
पाना-वाना कुछ नहीं, फिर भी करें प्रचार |ताना-बाना टूटता, जनता करे पुकार |जनता करे पुकार, गरीबी उन्हें मिटाये  |राजनीति की मार, बगावत को उकसाए |आये थे जो आप, मिला था एक बहाना |किन्तु भगोड़ा भाग, नहीं अब माथ खपाना ||साही की शह-मात से, है'रानी में भेड़ |खों खों खों भालू करे, दे गीदड़ ...
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  February 24, 2014, 12:01 pm
दखलंदाजी खेल में, करती खेल-खराब |खले खिलाड़ी कोच को, लेकिन नहीं जवाब |लेकिन नहीं जवाब, प्रशासक नेता हॉबी |हॉबी सट्टेबाज, पूँछ कुत्तों की दाबी |ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी |बड़ी व्यस्त सरकार, करे क्यूँ दखलंदाजी --...
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  February 22, 2014, 9:38 am
खरी खरी कह हर घरी, खूब जमाया धाक |अपना मतलब गाँठ के, किया कलेजा चाक |किया कलेजा चाक, देश भर में अब घूमे |दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे |डाल गए मझधार, धोय साबुन से कथरी |मत मतलब मतवार, महज कर रहे मसखरी || ...
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  February 20, 2014, 10:49 am
(१)खाँसी की खिल्ली उड़े, खीस काढ़ते आप |खुन्नस में मफलर कसे, गया रास्ता नाप |गया रास्ता नाप, नाव मझधार डुबाये |सहा सर्द-संताप, गर्म लू सदा सताये |अब चुनाव आसन्न, व्यस्त फिर भारतवासी |जन-गण दिखें प्रसन्न, हुई संक्रामक खाँसी॥ ...
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  February 19, 2014, 12:11 pm
भारत का भुरता बना, खाया खूब अघाय |भरुवा अब तलने लगे, सत्तारी सौताय |सत्तारी सौताय, दलाली दूजा खाये |आम आदमी बोल, बोल करके उकसाए |इज्जत रहा उतार, कभी जन-गण धिक्कारत  |भागे जिम्मेदार, अराजक दीखे भारत ||अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आग-अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आ...
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  January 21, 2014, 12:05 pm
"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"अंक-34दोहादारु दाराधीन पी, हुआ नदारद मर्द  |दारा दारमदार ले, मर्दे गिट्टी गर्द ||कंकरेत कंकर रहित, काष्ठ विहीन कुदाल |बिन भार्या के भवन सम, मन में सदा मलाल ||अड़ा खड़ा मुखड़ा जड़ा, उखड़ा धड़ा मलीन |लीन कर्म में उद्यमी, कभी दिखे ना दीन ||*कृतिकर-...
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  January 20, 2014, 12:20 pm
असम में हिंदीभाषी हुए हमले के शिकार जागरण - ६ घंटे पहलेचिंदी-चिंदी तन-बदन, पांच मरे इक साथ । *बोड़ा निगले जिंदगी, हिंदी हुई अनाथ ॥ *अजगर हिंदी हुई अनाथ, असम-पथ ऊबड़-खाबड़ । है सत्ता कमजोर, धूर्त आतंकी धाकड़ । हिंदी-भाषी पाय, बना माथे पर बिंदी । अपने रहे निकाल, यहा...
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  January 19, 2014, 4:07 pm
सपने नयनों में पले, वाणी में अरदास |बुद्धि बनाये योजना, करे कर्म तनु ख़ास |करे कर्म तनु ख़ास, पूर्ण विश्वास भरा हो |शत-प्रतिशत उद्योग, भाग्य को तनिक सराहो |पाय सफलता व्यक्ति, लक्ष्य पा जाये अपने |रविकर इच्छा-शक्ति, पूर्ण कर देती सपने ||...
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  January 18, 2014, 9:09 am
लासा मंजर में लगा, आह आम अरमान |मौसम दे देता दगा, है बसन्त हैरान |है बसन्त हैरान, कोयलें रोज लुटी हैं |गिरगिटान मुस्कान, लोमड़ी बड़ी घुटी है |गीदड़ की बारात, दिखाता सिंह तमाशा |बन्दर की औकात, बताता नया खुलासा ||...
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  January 17, 2014, 8:55 am
खिले खिले बच्चे मिले, रहे खिलखिला रोज । बुझे-बुझे माँ-बाप पर, रहे मदर'सा खोज । रहे मदरसा खोज, घूस की दुनिया आदी। भावी रहे सुधार, शहर ला दादा-दादी। पैतृक घर दे बेंच, मिले उपयुक्त राशि ले ।  करे सुरक्षित सीट, आज यूँ मिलें दाखिले ॥ ...
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  January 15, 2014, 10:16 am
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