| छली जा रहीं नारियां, गली-गली में द्रोह ।नष्ट पुरुष से हो चुका, नारिजगत का मोह |नारिजगत का मोह, गोह सम नरपशु गोहन ।बनके गौं के यार, गोरि-गतिगोही दोहन ।नरदारा नरभूमि, नराधम हरकत छिछली । फेंके फ़न्दे-फाँस , फँसाये फुदकी मछली । । गोहन = साथी-संगी गौं के यार=अपना अर्थ साधने वाल... |
| दहले दिल्ली देश, दरिंदा दुष्ट दहाड़े -धाता कामी कापुरुष, रौंदे बेबस नार । बरबस बस पर चढ़ हवस, करे जुल्म-संहार । करे जुल्म-संहार, नहीं मिल रही सुरक्षा । गली हाट घर द्वार, सुरक्षित कितनी कक्षा । करो हिफाजत स्वयं, कुअवसर असमय आता । हुआ विधाता बाम, पुरुष जो बना बिधाता ॥ ... |
| Saudi Arabia Reportedly Deports Men for Being ‘Too Handsome’ हेलो हैंडसम अरब में, मत करना घुसपैठ |पुलिस खदेड़ेगी तुम्हें, कान तुम्हारें ऐंठ |कान तुम्हारें ऐंठ, फिकर उनको है भारी |कहीं फिसल ना जाय, वहाँ की सारी नारी |पर रविकर खुशहाल, वहाँ रह सकता बम बम |जीते यहाँ कुरूप, हारता हेलो हैंडसम ||... |
| नाची क्यूँ बिंदी लगा, मुजरा घुंघरू साज । हॉलीवुड की नर्तकी, आय हिन्दु कोलाज । आय हिन्दु को लाज, नकलची हमसे बढ़कर । सेलेना धिक्कार, कहे धर्मांध बिगड़कर । सकते हमी उडाय, धज्जियां साँची-साँची । तुम होती हो कौन, लगा के बिंदी नाची ॥ ... |
| नवसंवत्सर की शुभकामनायें -पारी-पारा मेटिये, रिश्ते नाते ख़ास । लेने जो देते नहीं, आजादी से साँस । आजादी से साँस, रास आते ना भाई । दादा दादी बाप, चचा चाची माँ माई । सभी दुखों का मूल, दोस्ती रिश्तेदारी । आया शूटर आज, बाप की दिया सुपारी । ... |
| नवसंवत्सर की शुभकामनायें -पारी-पारा मेटिये, रिश्ते नाते ख़ास । लेने जो देते नहीं, आजादी से साँस । आजादी से साँस, रास आते ना भाई । दादा दादी बाप, चचा चाची माँ माई । सभी दुखों का मूल, दोस्ती रिश्तेदारी । शूटर लिया बुलाय, बाप की दिया सुपारी । ... |
| आभार आदरणीय अरुण निगम जी- मुदित-मुदिर मुद्रा मटक, मुद्रा मुफ्त कमाय । जिला रही नश्वर बदन, जिला-जवाँर घुमाय । यमक अलंकार मुद्रा / जिला जिला-जवाँर घुमाय, जवानी के जलवे हैं । रूपाजीवा हाय, हुवे दंगे बलवे हैं । मरे हजारों लोग, लांछना लेकिन अनुचित । रविकर मरता जाय, मगन मन झ... |
| दोहे रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट |रंग-महल रँगरेलियाँ, *फगुहारा ले लूट ||*फगुआ गाने वाला पुरुष -फ़गुआना फब फब्तियां, फन फ़नकार फनिंद |रंग भंग भी ढंग से, नाचे गाये हिन्द ||हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग | अँगिया रँगिया रँग गया, रंगत में अंगांग ||देख पनीले दृश्य को, छुपे शिश... |
| (ब्वायज-मेस की चर्चा पर आधारित )लड़के भूले नैनसुख, प्रेम-धर्म तकरार। सम-लैंगिकता खुश हुई, बोले जय सरकार । बोले जय सरकार, चले वो गली छोड़ के । अफ़साना नाकाम, मजे में मोड़ मोड़ के । जमानती अपराध, व्यर्थ झंझट में पड़के । हवालात की बात, बड़ा घबराते लड़के ॥ ... |
| मिलियन घपले से डिगी, कहाँ कभी सरकार । दंगे दुर्घटना हुवे, अति-आतंकी मार । अति-आतंकी मार, ख़ुदकुशी कर्जा कारण । मँहगाई भुखमरी, आज तक नहीं निवारण । काला भ्रष्टाचार, जमा धन बाहर बिलियन । मुर्दा मुद्दा जिया, हिला दे देश तमिलियन ॥ ... |
| मिलियन घपले से डिगी, कहाँ कभी सरकार । दंगे दुर्घटना हुवे, अति-आतंकी मार । अति-आतंकी मार, ख़ुदकुशी कर्जा कारण । मँहगाई भुखमरी, आज तक नहीं निवारण । काला भ्रष्टाचार, जमा धन बाहर बिलियन । मुर्दा मुद्दा जिया, हिलाता देश तमिलियन ॥ पहलवान अब गधा, बाप कह रही रियासत -बेचारा रविक... |
| किडनी डी एम के गई, वेंटीलेटर पार । इन्ज्वायिंग मेजोरिटी, बोल गई सरकार । बोल गई सरकार, बहुत आनंद मनाया । त्राहि त्राहि इंसान, देखना भैया भाया । सत्ता का आनंद, हाथ की खुजली मिटनी । हाथी सैकिल बैठ, लूट लाएगा किडनी । किसको चुनें:-वह मारे इक बार, रोज मत मरना यारा-यारा हत्यारा ... |
| यारा हत्यारा चुनो, धूर्त लुटेरे दुष्ट |टेरे माया को सदा, करें बैंक संपुष्ट |करें बैंक संपुष्ट, बना देंगे भिखमंगा |मर मर जीना व्यर्थ, विदेशी नाचे नंगा |हत्यारा तो यार, ख़याल रख रहा हमारा |वह मारे इक बार, रोज मत मरना यारा ||... |
| करवा करवा-ता रहा , बलमा दारूबाज |दोनों किडनी फेल हैं, सत्यवान की आज |सत्यवान की आज , सती सावित्री चिंतित |लेकिन पति नाराज, सिकन चेहरे पर किंचित |बेंच खेत खलिहान, दिया घरभर को मरवा |पति को है विश्वास , बचा लेगा यह करवा - ... |
| मदिरा सवैया स्वारथ में कुल देव पड़े, शुभ मंथन लाभ उठाय रहे । भंग-तरंग चढ़े सिर पे शिव को विषपान कराय रहे । कंठ रुका विष देह जला शिव, पर्वत पे भरमाय रहे । नाग गले शशि गंग धरे तन भस्म मले शिथिलाय रहे ।... |
| नाबालिग (18 वर्ष से कम) की सहमति से सेक्स अपराध था-पर अब 2 वर्ष घटा दिए गए-कामुकता को छूट मिल गई है दो वर्षों की-वाह रे सख्त कानून ... |
| अट्ठारह सोलह लड़े, भूला सतरह साल |कम्प्रोमाइज करो झट, टालो तर्क बवाल |टालो तर्क बवाल, आयु सतरह करवाओ |करो नहीं अंधेर, सख्त कानून बनाओ |फास्ट ट्रैक में केस, जड़ों पे डालो मठ्ठा |नाशों पाप समूल, बिठा मत मंत्री भट्ठा ||... |
| तक तक कर पथरा गईं, आँखे प्रभु जी आज |कब से रहा पुकारता, बैठे कहाँ विराज |बैठे कहाँ विराज, हृदय से सदा बुलाया । नाम कृपा निधि झूठ, कृपा अब तक नहिं पाया |सुनिए यह चित्कार, बुलाये रविकर पातक |मिटा अन्यथा याद, याद प्रभु तेरी घातक ॥ ... |
| साफ़ सूपड़ा कर रहा, रोज मीडिया बोल । अर्थ हारकर खोजता, शब्दकोश को खोल । शब्दकोश को खोल, जरा मतलब समझाओ । हुई कहाँ उत्पत्ति, जरा इतिहास बताओ । आकर्षक यह शब्द, कमाए शब्द रोकडा । भाव समझ कापुरुष, अन्यथा साफ़ सूपड़ा ॥ ... |
| हमने भी की गलतियाँ, मिले शर्तिया दंड |शिकायतें भी हैं कई, किन्तु नहीं उद्दंड |किन्तु नहीं उद्दंड, सिपाही भारत माँ का |सेवा करूँ अखंड, करे ना कोई फांका |सभी हाथ को काम, ग्रोथ नहिं देंगे कमने | स्वास्थ्य सुरक्षा शान्ति, शपथ दुहराई हमने ||... |
| लटके झटके पाक हैं, पर नीयत नापाक |ख्वाजा के दरबार में, राजा रगड़े नाक |राजा रगड़े नाक, जियारत अमन-चैन हित |हरदम हावी फौज, रहे किस तरह सुरक्षित |बोल गया परवेज, परेशां पाकी बटके |सिर पर उत तलवार, इधर कुल मसले लटके || ... |
| छोड़े सज्जन शॉर्टकट, उधर भयंकर लूट |देर भली अंधेर से, पकड़ें लम्बा रूट |पकड़ें लम्बा रूट, बड़ी सरकार निकम्मी |चुनो सुरक्षित मार्ग, सिखाते पापा मम्मी |लिए नौ लखा हार, सुरक्षा घेरा तोड़े |बाला लापरवाह, लुटा करके ही छोड़े || ... |
| हदे पार करते रहे, जब तब दुष्टाबादि |*अहक पूरते अहर्निश, अहमी अहमक आदि |अहमी अहमक आदि, आह आदंश अमानत |करें नारि-अपमान, इन्हें हैं लाखों लानत |बहन-बेटियां माय, सुरक्षित प्रभुवर करदे |नाकारा कानून व्यवस्था व्यर्थ ओहदे ||*इच्छा / मर्जी गोया गैया गोपियाँ, गोरखधंधा गोप |बन्धन में ... |
| हारा कुल अस्तित्व ही, जीता छद्म विचार |वैदेही तक देह कुल, होती रही शिकार |होती रही शिकार, प्रपंची पुरुष विकारी |चले चाल छल दम्भ, मकड़ जाले में नारी |सहनशीलता त्याग, पढाये पुरुष पहारा |ठगे नारि को रोज, झूठ का लिए सहारा ||हदे पार करते रहे, जब तब दुष्टाबादि |*अहक पूरते अहर्निश, अह... |
| मन सूबे से स्वार्थ से, जुड़े धर्म से सोच । गर्व करें निज वंश पर, रहा अन्य को नोंच । रहा अन्य को नोंच, बढ़ी जाती कट्टरता । जिनकी सोच उदार, मूल्य वह भारी भरता । भारी पड़ते दुष्ट, आज सज्जन मन ऊबे । निष्फल करना कठिन, दुर्जनों के मनसूबे ॥ ... |
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