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कहानियो के मन से .....

 तान्याआज : दोपहर १ बजे मैंने सारे बर्तन सिंक में डाले और उन्हें धोना शुरू किया. आज मन कुछ अच्छा नहीं था. सुबह से ही अनमना सा था. कोई भी काम सही तरह से नहीं हो पा रहा था. कभी कुछ छूट जाता था,कभी कुछ नहीं हो रहा था. एक अजीब सी खीझ भी हो रही थी. मन में ये कैसी उदासी थी, मैं कुछ समझ न...
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Tag :बेटी
  April 15, 2017, 9:24 am
  |||  मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस |||||| सुबह 8:30 |||नासिक |||मैंने उतावली आवाज़ में टैक्सी ड्राईवर से पुछा, “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।”  मैंने घडी देखी, 8:40 हो रहे थे। मैंने झल्लाते हुए कहा – “यार 9:20 की गाडी है। थो...
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Tag :
  March 11, 2017, 2:50 pm
ॐ गणपतये नम:भगवान शिव की कथा लिखना ! मुझ जैसे मामूली से इंसान के बस की बात नहीं है। ये मेरी सिर्फ एक छोटी सी कोशिश मात्र है। ये मेरी शिव भक्ति का एक रूप ही है। भगवान शिव के चरणों में मेरे शब्दों के पुष्प समर्पण ! मैं तो सिर्फ प्रस्तुत कर रहा हूँ। सब कुछ तो बहुत पहले से ही ...
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Tag :पार्वती
  February 23, 2017, 7:26 pm
डायल कुमार फॉर किलिंग : १४ जुलाई :उस दिन दोपहर से ही बारिश हो रही थी. उन दिनों मेरा मूड वैसे ही खराब रहता था. कोई नया काम नहीं मिल रहा था. रुपये पैसो के मामले में मैं परेशान था. मेरा जीवन भी क्या बेकार सा जीवन था. मैं लेखक था,और पूरी तरह से फ्लॉप था. करियर के प्रारम्भ में मैं खूब...
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Tag :डायल कुमार फॉर किलिंग
  December 18, 2016, 1:03 pm
क्या तुम्हे सब याद है - उसने मुझसे पुछाहां ! मैंने कहा .एक गहरी सांस लेकर मैंने आगे कहा- वो भी जो हुआ और वो भी जो नहीं हुआउसने अपनी भीगी आँखों से मुझे देखामैंने उसकी तरफ से मुड़कर खुद की आँखों को पोछा !© विजय...
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Tag :vijay sappatti
  September 3, 2016, 10:14 am
तो हुआ यूँ कि एक मरे हुए देश में , एक जिंदा आदमी ने अपनी जिंदा पत्नी को एक सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया . अब सरकारी हॉस्पिटल भी मरा हुआ ही था. सो वहाँ वो औरत भी मर गयी , अब ये जो जिंदा आदमी था , इसके पास तो खाने के भी पैसे नहीं थे . और हमारे मरे हुए देश का मरा हुआ सरकारी दवाखाना ...
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Tag :
  August 28, 2016, 5:38 pm
आलेख||| शिष्टाचार |||ईश्वर के द्वारा रचे गए इस संसार में सबसे अद्भुत प्राणी सिर्फ मनुष्य ही है. मनुष्य को ही ईश्वर ने ज्ञान और बुध्दि से नवाज़ा है ,ताकि वो अन्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ रहे . मनुष्य जैसे जैसे बढता गया वैसे वैसे उसके जीवन में आमूल परिवर्तन आये है . और इन्ही पर...
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Tag :आलेख
  May 18, 2016, 8:41 am
कल से इस छोटे से शहर में दंगे हो रहे थे. कर्फ्यू लगा हुआ था. घर,दूकान सब कुछ बंद थे. लोग अपने अपने घरो में दुबके हुए थे. किसी की हिम्मत नहीं थी कि बाहर निकले. पुलिस सडको पर थी.ये शहर छोटा सा था,पर हर ६ – ८ महीने में शहर में दंगा हो जाता था. हिन्दू और मुसलमान दोनों ही लगभग एक ही संख...
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Tag :लघुकथा
  February 28, 2016, 8:39 pm
बिहार के दरभंगा जिले के दो परिवार है . एक है भूमिहार और दूसरा क्षत्रिय. दोनों के परिवार एक दुसरे से अपरिचित है . दो अलग अलग जगहों में रहते है . दोनों के बच्चे शहर में जाकर एक ही कॉलेज में एडमिशन लेते है . भूमिहार परिवार का पुत्र का नाम राजेश है और क्षत्रिय परिवार की लड़की का न...
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Tag :लघुकथा
  February 28, 2016, 8:38 pm
आज शर्मा जी के घर में बड़ी रौनक थी,उनकी एकलौती बेटी ममता की शादी जो थी. बहुत से मेहमानों से घर भरा हुआ था,दरवाजे पर शहनाई बज रही थी,खुशियों का दौर था.शर्मा जी बड़े व्यस्त थे. फेरे हो रहे थे. बेटी की विदाई के बारे में सोच सोच कर ही शर्मा दम्पति का दिल दुःख जाता था. शर्मा जी की पत्...
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Tag :लघुकथा
  February 28, 2016, 8:37 pm
मैंने रेड सिग्नल पर अपनी स्कूटर रोकी . ये सिग्नल सरकारी हॉस्पिटल के पास था . उस जगह हमेशा बहुत भीड़  रहती थी. मरीज , बीमार, उनके रिश्तेदार और भी हर किस्म के लोगो की भीड़ हमेशा वहां रहती थी,अब चूँकि सरकारी हॉस्पिटल था तो गरीब लोग ही वहां ज्यादा दिखाई देते थे. अमीर किसी और महंग...
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Tag :लघुकथा
  February 28, 2016, 8:35 pm
||| जनम |||गोपाला ने अपना एक झोला और बैग लिया और ट्रेन में बैठ गया,ये ट्रेन दुर्ग से जगदलपुर जा रही थी। गर्मी के दिन थे,उसे खिड़की के पास वाली सीट मिली । ट्रेन चलने लगी तो भागते हुए तीन युवक आये और ठीक उसके सामने वाली सीट पर बैठ गए । ट्रेन चल पड़ी तो थके होने के कारण थोड़ी देर में ह...
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Tag :vijay sappatti
  January 6, 2016, 12:13 pm
......मैंने पहले बोलना सीखा ...अम्मा... !फिर लिखना सीखा.... क ख ग a b c 1 2 3 ...फिर शब्द बुने !फिर भाव भरे !.... मैं अब कविता गुनता हूँ  , कहानी गड़ता हूँ ..जिन्हें दुनिया पढ़ती है ..खो जाती है .. रोती है ... मुस्कराती है ...हंसती है ..चिल्लाती है ........मुझे इनाम ,सम्मान , पुरस्कार से अनुग्रहित करती है ...!.....औ...
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Tag :
  August 17, 2015, 9:51 am
कोलाज़ ::: प्रेमकथा - मैं, तुम और प्रेम :::विजय कुमार सप्पत्ति  :: Address  ::  VIJAY KUMAR SAPPATTI ,  FLAT NO.402, FIFTH FLOOR, PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402, DEFENCE COLONY, SAINIKPURI POST,  SECUNDERABAD- 500 094 [TELANGANA]M : 09849746500  E : vksappatti@gmail.com::: प्रेमकथा - मैं, तुम और प्रेम  :::खुदा से बड़ा रंगरेज कोई दूसरा नहीं है वो किसे क्या देता है, क्यों देता ...
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Tag :इश्क
  March 25, 2015, 8:39 am
||| सुबह 8:30 |||मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।”उसने कहा –“साहब बस 30मिनट में पहुंचा देता हूँ।”  मैंने घडी देखी  8:40हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9बजे की गाडी है।”थोडा जल्दी करो यार। उसने स्पीड बढ़ा दी. मैं नासिक की सडको को देखने लगा।मैं अपनी कंपनी के काम से आ...
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Tag :मर्डर
  February 25, 2015, 8:57 am
बहुत साल पहले की ये बात है. मुझे कुछ काम से मुंबई से सूरत जाना था.मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था. सुबह के करीब ६ बजे थे. मैं स्टेशन में मौजूद बुक्स शॉप के खुलने का इन्तजार कर रहा था ताकि सफ़र के लिए कुछ किताबे और पेपर खरीद लूं.अचानक एक छोटा सा बच्चा जो ...
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Tag :किस्सा
  February 2, 2015, 3:23 pm
पिताजी की स्मृति में...................दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए. इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी. यहाँ तक कि संक्रांति की पूजा में भी ऐसा लगा क...
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Tag :विजय कुमार सप्पत्ति
  January 22, 2015, 7:13 am
||| एक शहर की मौत |||पर्दा उठता हैमंच पर अँधेरे के बीच एक स्पॉट लाइट पड़ती है. उस स्पॉट लाइट के केंद्र में सूत्रधार आता है और दर्शको की ओर देखते हुए सबसे कहता है :“ दोस्तों, ये नाटक मात्र एक नाटक नहीं है, बल्कि हमारे देश के इतिहास का एक काला पन्ना है,इस पन्ने पर सिर्फ मौत लिखी है ...
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Tag :एक शहर की मौत
  November 19, 2014, 6:09 pm
::: अमृत वृद्धाश्रम :::||| एक नयी शुरुवात |||मैंने धीरे से आँखे खोली, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा,“ईश्वर अंकल,आप चिंता न करे,मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात ...
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Tag :अमृत वृद्धाश्रम
  October 16, 2014, 11:10 am
नाटक ::: ||| आत्महत्या ||| :::विजय कुमार सप्पत्ति:: Address  ::  VIJAY KUMAR SAPPATTI,  FLAT NO.402, FIFTH FLOOR, PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402, DEFENCE COLONY, SAINIKPURI POST,  SECUNDERABAD- 500 094 [TELANGANA ]M : 09849746500  E : vksappatti@gmail.comआत्महत्यामुख्य कलाकार :कांस्टेबल रामसिंह सब इंस्पेक्टर काम्बले सूबेदार मेजर रावत डिप्टी कमांडेंट सिंह कमांडेंट देवे...
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Tag :आत्महत्या
  September 2, 2014, 12:57 pm
DISCLAIMER: इस कहानी में उपयुक्त हुए नाम, संस्थाए, जगह, घटनाएं इत्यादि का उपयोग सिर्फ और सिर्फ कहानी को मनोरंजक बनाने के लिए किया गया है। किसी भी व्यक्ति या संस्था से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है,कृपया इस कथा को मुक्त हास्य में ले; पर/और दिल पर न ले !!! कथा में निहित व्यंग्य को समझिये ! ...
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  March 2, 2014, 12:04 pm
दोस्ती, प्यार और ज़िन्दगी का चौराहा !करीब ८ महीने पहले………………….!डॉक्टर वर्मा ने मुझे अपने करीब बिठाया और कहा,“देखो देव,तुम एक संवेदनशील कवि और लेखक हो,मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा। तुम लंग कैंसर की एडवांस स्टेज पर हो। तुम्हारी सिगरेट पीने की आदत ने तुम्हे ख़तम कर दिया है। अब...
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Tag :कथा
  January 14, 2014, 11:18 am
आंठवी सीढ़ी ::: बीतता हुआ आज, बीता हुआ कल और आने वाले कल की गूँज ::::मैं, पहली मंजिल पर स्थित अपने घर की बालकनी में बैठी नीचे देख रही थी ।  आज मेरे सर में हल्का हल्का सा दर्द था ।  मैंने अपने लिये अदरक वाली चाय बनाई और धीरे धीरे उसकी चुस्कियां लेते हुये सड़क को निहार रही थी । सड़क...
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Tag :इश्क
  October 9, 2013, 11:33 am
आंठवी सीढ़ी ::: बीतता हुआ आज, बीता हुआ कल और आने वाले कल की गूँज ::::मैं, पहली मंजिल पर स्थित अपने घर की बालकनी में बैठी नीचे देख रही थी ।  आज मेरे सर में हल्का हल्का सा दर्द था ।  मैंने अपने लिये अदरक वाली चाय बनाई और धीरे धीरे उसकी चुस्कियां लेते हुये सड़क को निहार रही थी । सड़क...
कहानियो के मन से ........
Tag :प्यार
  October 9, 2013, 11:33 am
 आसक्ति से विरक्ति की ओर .....!::: भाग एक  ::::श्रावस्ति नगर के निकट स्थित प्रकृति की सुन्दरता से सजी जेतवन में सुबह की नर्म धूप की सजावट मौजूद थी । और ये धूप, वन में मौजूद पेड़ो से छन कर ; राह पर पड़े पत्तो पर गिरी हुई ओस की बूंदों पर बार बार अपने देवता सूर्य के अद्भु...
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Tag :
  August 26, 2013, 10:26 am
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