parinda

                        भागता बचपन               ब्लॉगर  साथियों नमस्कार । कुछ दिनों तक मै आपसब से दूर रही । बहुत जगह घूमना हुआ और इसके साथ मैंने आज की पीढ़ी के बच्चों का अध्ययन भी किया । जिस समस्या को लेकर मै चल रही थी, वो था आज के बच्चो का बदलता व्यवहार । यह कोई समस्या नहीं है बल्क...
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  April 22, 2012, 9:40 pm
                                         परिंदा यह नाम मेरी उस कविता का है जो कादम्बिनी में प्रकाशित हो चुकी है और मुझे बहुत ही प्रिय है इसीलिए  मै अपने ब्लॉग का नाम परिंदा रखी हूँ।यह उस परिंदे को समर्पित है जो मेरे घर काफी दिनों से पिंजरे में था और आज उसने अंतिम सांसें भी उसी पिं...
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  March 24, 2012, 9:19 pm
ख्वाहिश खुशियाँ पाने की तमन्ना थी उड़कर बादलों से मिलने और कुछ कहने की लालसा थी ।आसमान से सितारे तोड़कर किसी के आँचल में भर देने की इच्छा थी ।तितलियों से रंग चुराकर जिन्दगी  रंगीन बनाने की ख्वाहिश थी। नदी की शांत जलधारा को अपने प्रियतम सागर से  मिलने की व्यग्रता थी ।...
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Tag :jindagi
  March 12, 2012, 1:24 pm
अनकही रह जाती है बहुत कुछ अनकही सुप्त, या फिर बेबस, बेचैन ,शब्द बन जन्म लेते है जज्बातमंथन गतिमान होता उड़कर बाहर आने को आतुर  व्याकुल होठों तक पहुँच काँप उठते फिर भी अनकही रह जाती , ख़ामोशी एक चादर तान देती और छिप कर रह जाते बहुत कुछ, एक प्रयत्न पुन:गतिमान शब्दों का निर्...
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Tag :udgar
  February 28, 2012, 8:32 pm
जीवन में सुख क्यों री कोयल तुम फिर कूकने लगी                         अमराइयों मेंमदमस्त बावरी सी अपने प्रियतमऋतुराज वसंत को                      रिझाने में।                             सुध बुध खोयी तुम फिरती हो इधर- उधर चंचल सी कुहुक- कुहुक उठती हो छिपकर                              मंजरियों में...
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Tag :prem
  February 18, 2012, 1:56 pm
मन को आंदोलित करती -------------कितनी शर्मनाक है यह घटना, रोंगटे खड़े करने वाली । दसवी में पड़ने वाली केरल की एक नाबालिग  के साथ बलात्कार, एक बार नहीं बार-बार और पहला अपराधी स्वयं उसका पिता।  क्या यह घटना मन को आंदोलित नहीं करती ? हम कहाँ जा रहे हैं? नैतिकता मरती क्यों जा रही है? रिश्...
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Tag :samajik
  January 30, 2012, 1:05 pm
                 स्कूलों की मनमानी स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और इसी के साथ माता पिता की परेशानी भी. पब्लिक स्कूलों में माता पिता को भी गुजरना पड़ता है परीक्षा के दौर से और यदि उनकी डिग्री कम रही तो शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है . मुझे तो ताज्जुब होता है उन ...
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Tag :
  January 20, 2012, 11:09 pm
वह औरत है भोर की पहली किरण खोल देता है रात का आवरण, पर छुपे हुए रहस्य दफन हैं अभी भी उसके हृदय में ,कि रात में वह बेचैन थी ,सपनो की दुनिया में कैद थी ,अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए .उसकी यही दुनिया होती, पर सुबह होने से पहले ही वह पुन: लौट आती है ,पूर्ववत स्थिति में, वह जानती ह...
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Tag :aurat
  December 10, 2011, 8:23 pm
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