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Blog: parinda

Blogger: sandhyatiwari
                        भागता बचपन               ब्लॉगर  साथियों नमस्कार । कुछ दिनों तक मै आपसब से दूर रही । बहुत जगह घूमना हुआ और इसके साथ मैंने आज की पीढ़ी के बच्चों का अध्ययन भी किया । जिस समस्या को लेकर मै चल रही थी, वो था आज के बच्चो का बदलता व्यवहार । यह कोई समस्या नहीं है बल्क... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:10pm 22 Apr 2012
Blogger: sandhyatiwari
                                         परिंदा यह नाम मेरी उस कविता का है जो कादम्बिनी में प्रकाशित हो चुकी है और मुझे बहुत ही प्रिय है इसीलिए  मै अपने ब्लॉग का नाम परिंदा रखी हूँ।यह उस परिंदे को समर्पित है जो मेरे घर काफी दिनों से पिंजरे में था और आज उसने अंतिम सांसें भी उसी पिं... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:49pm 24 Mar 2012
Blogger: sandhyatiwari
ख्वाहिश खुशियाँ पाने की तमन्ना थी उड़कर बादलों से मिलने और कुछ कहने की लालसा थी ।आसमान से सितारे तोड़कर किसी के आँचल में भर देने की इच्छा थी ।तितलियों से रंग चुराकर जिन्दगी  रंगीन बनाने की ख्वाहिश थी। नदी की शांत जलधारा को अपने प्रियतम सागर से  मिलने की व्यग्रता थी ।... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   7:54am 12 Mar 2012
Blogger: sandhyatiwari
अनकही रह जाती है बहुत कुछ अनकही सुप्त, या फिर बेबस, बेचैन ,शब्द बन जन्म लेते है जज्बातमंथन गतिमान होता उड़कर बाहर आने को आतुर  व्याकुल होठों तक पहुँच काँप उठते फिर भी अनकही रह जाती , ख़ामोशी एक चादर तान देती और छिप कर रह जाते बहुत कुछ, एक प्रयत्न पुन:गतिमान शब्दों का निर्... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:02pm 28 Feb 2012
Blogger: sandhyatiwari
जीवन में सुख क्यों री कोयल तुम फिर कूकने लगी                         अमराइयों मेंमदमस्त बावरी सी अपने प्रियतमऋतुराज वसंत को                      रिझाने में।                             सुध बुध खोयी तुम फिरती हो इधर- उधर चंचल सी कुहुक- कुहुक उठती हो छिपकर                              मंजरियों में... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   8:26am 18 Feb 2012
Blogger: sandhyatiwari
मन को आंदोलित करती -------------कितनी शर्मनाक है यह घटना, रोंगटे खड़े करने वाली । दसवी में पड़ने वाली केरल की एक नाबालिग  के साथ बलात्कार, एक बार नहीं बार-बार और पहला अपराधी स्वयं उसका पिता।  क्या यह घटना मन को आंदोलित नहीं करती ? हम कहाँ जा रहे हैं? नैतिकता मरती क्यों जा रही है? रिश्... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   7:35am 30 Jan 2012
Blogger: sandhyatiwari
                 स्कूलों की मनमानी स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और इसी के साथ माता पिता की परेशानी भी. पब्लिक स्कूलों में माता पिता को भी गुजरना पड़ता है परीक्षा के दौर से और यदि उनकी डिग्री कम रही तो शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है . मुझे तो ताज्जुब होता है उन ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   5:39pm 20 Jan 2012
Blogger: sandhyatiwari
वह औरत है भोर की पहली किरण खोल देता है रात का आवरण, पर छुपे हुए रहस्य दफन हैं अभी भी उसके हृदय में ,कि रात में वह बेचैन थी ,सपनो की दुनिया में कैद थी ,अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए .उसकी यही दुनिया होती, पर सुबह होने से पहले ही वह पुन: लौट आती है ,पूर्ववत स्थिति में, वह जानती ह... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:53pm 10 Dec 2011
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