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अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

दोहा छन्द - बेला के फूल स्पर्धा थी सौंदर्य की, मौसम था प्रतिकूलसूखे फूल गुलाब के, जीते बेला फूल |चली चिलकती धूप में, जब मजदूरन नार अलबेली को देख कर, बेला मानें हार | हरदम हँसता देख कर, चिढ़-चिढ़ जाये धूपबेला की मुस्कान ने, और निखारा रूप | पहले गजरे की महक, कैसे जाऊँ भूल&nb...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 22, 2017, 9:45 am
कुण्डलिया छन्द:पहचाना जाता नहीं,  अब पलाश का फूलइस कलयुग के दौर में, मनुज रहा है भूलमनुज रहा है भूल,   काट कर सारे जंगलकंकरीट में  बैठ,  ढूँढता  अरे  सुमङ्गलतोड़ रहा है नित्य,  अरुण कुदरत से नाताअब पलाश का फूल,  नहीं पहचाना जाता।।अरुण कुमार निगम आदित्य नगर, द...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 15, 2017, 3:45 pm
आम गज़ल .....आम हूँ बौरा रहा हूँपीर में मुस्का रहा हूँ ।मैं नहीं दिखता बजट मेंहर गज़ट पलटा रहा हूँ ।फल रसीले बाँट कर बसचोट को सहला रहा हूँ ।गुठलियाँ किसने गिनी हैंरस मधुर बरसा रहा हूँ ।होम में जल कर, सभी कीकामना पहुँचा रहा हूँ ।द्वार पर तोरण बना मैंघर में खुशियाँ ला रहा हूँ ।...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 6, 2017, 4:44 pm
जनकवि कोदूराम “दलित” की साहित्य साधना :( 5 मार्च को 107 वीं जयन्ती पर विशेष) : शकुन्तला शर्मा मनुष्य भगवान की अद्भुत रचना है, जो कर्म की तलवार और कोशिश की ढाल से, असंभव को संभव कर सकता है । मन और मति के साथ जब उद्यम जुड जाता है तब बड़े बड़े  तानाशाह को झुका देता है और लंगोटी ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 5, 2017, 7:47 am
*दोहा छन्द*`निर्णय के परिणाम से, हर कोई है स्तब्धसहनशीलता सर्वदा, जनता का प्रारब्ध ।जनता ने पी ही लिया, फिर से कड़ुवा घूँटकिस करवट है बैठता, देखें अब के ऊँट ।दूषित नीयत से अरुण, पनपा भ्रष्टाचारआशान्वित होकर सदा, जनता बनी कतार ।आकर कर दो राम जी, दुराचार को नष्टराम राज की आस म...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :देखें अब के ऊँट
  November 16, 2016, 1:19 pm
कुछ सामयिक दोहे .....मैला है यदि आचरण, नीयत में है खोट रावण मिट सकते नहीं, चाहे बदलो नोट । नैतिक शिक्षा लुप्त है, सब धन पर आसक्त सही फैसला या गलत, बतलायेगा वक्त । बचपन बस्ते में दबा, यौवन काँधे भार प्रौढ़ दबा दायित्व में, वृद्ध हुए लाचार । पद का मद सँभला नहीं, कद पर धन ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :सही फैसला या गलत
  November 13, 2016, 10:21 am
एक सामयिक ग़ज़ल.....(१२२ १२२ १२२ १२)समाचार आया नए नोट कागिरा भाव अंजीर-अखरोट का |दवा हो गई बंद जिस रात सेहुआ इल्म फौरन उन्हें चोट का |मुखौटों में नीयत नहीं छुप सकीसभी को पता चल गया खोट का |जमानत के लाले उन्हें पड़ गएभरोसा सदा था जिन्हें वोट का |नवम्बर महीना बना जनवरीउड़ा रंग नाया...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 12, 2016, 12:05 pm
आज के सन्दर्भ में दोहे -भैया देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारिछुट्टा आवै काम उत,का करि सकै हजारि ।उनको आवत देख के, छुट्टन करै पुकारिनोट हजारि बंद हुए, कल अपनी भी बारि ।बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे नोट हजारमार्किट में चलता नहीं, गायब ब्लैक बजार ।भैया खड़ा बजार में, लिए हजारी हाथकोई...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 11, 2016, 7:03 pm
मन से उपजे गीत (मधुशाला छंद)ह्रदय प्राण मन और शब्द-लय , एक ताल में जब आते तब ही बनते छंद सुहाने, जो सबका मन हर्षाते तुकबंदी है टूटी टहनी, पुष्प खिला क्या पाएगी मन से उपजे गीत-छंद  ही, सबका मन हैं छू पाते ||अरुण कुमार निगम आदित्य नगर, दुर्गछत्तीसगढ़ ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 7, 2016, 8:20 pm
मित्रों , जीवन की विभिन्न विवशताओं ने लम्बे समय से बाध्य कर रखा था. अतः ब्लॉग जगत में मेरी लम्बे समय से अनुपस्थिति रही. ३१ अगस्त २०१६ को मैं भारतीय स्टेट बैंक में ३६ वर्ष की सेवाएं पूर्ण करते हुए सेवानिवृत्त हुआ हूँ. ब्लॉग जगत में अपनी अपनी दूसरी पारी का शुभारम्भ कर रह...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 3, 2016, 8:53 pm
छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह "छन्द के छ:"का ग्राम अर्जुनी टिकरी में ऐतिहासिक विमोचन शरद पूर्णिमा की रात अमर कवि स्व.कोदूराम “दलित”के जन्म ग्राम अर्जुनी टिकरी (अर्जुन्दा) में शरद पूर्णिमा का भव्य आयोजन किया गया. आयोजित कविसम्मेलन के इस मंच से स्व.कोदूराम “दलित” के सुपुत्र...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 28, 2015, 11:25 pm
एलोरा :एलोराकीजानखंडहरदिखतेबियाबानखंडहर  |चमगादड़ कर गये बसेरा सूने और वीरान खंडहर |सदियोंसेहीधूलखारहेफिरभीकरतेगुमान खंडहर |इनपत्थरोंपरकलाऊँकेरी किसनेकह न सकेबेजुबानखंडहर |पाषाणी जीवंत मूर्तियाँबता रहीं प्रमाण खंडहर |दीवारों की अद्भुत नक्काशी करती हैं है...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 1, 2015, 7:12 am
अब स्वभाव से हो रहा, हर मौसम प्रतिकूलबेटा  तू    बैसाख  में  , सावन  झूला  झूल ||अपनी फेसबुक में मैंने अपने पोते के फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. यह कार्य दो मई से एक श्रृंखला के तौर पर चल रहा है. मित्रों का सरा...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :दोहे अनेक (भाग - २)
  May 14, 2015, 9:46 am
सुख तेरे मन में  छुपा , बाहर मत तू खोज।सुविधाओं को त्याग कर,खुशी मना हर रोज ।।अपनी फेसबुक में मैंने दिनांक ०२ मई २०१५ को इस फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. मित्रों का सराहनीय सहयोग मिला. आइये आप भी इन दोहों का आनंद लीजि...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 7, 2015, 1:49 pm
मैं सिद्धार्थ शुद्धोधन प्यारा प्रजावती का राजदुलारा लुम्बिनी में जन्म हुआ था कपिलवस्तु था घर हमारा .गौतम गोत्र शाक्य वंशधारी क्षत्रीय वर्ण सनातनचारी जन्मदात्री मेरी महामाया मौसी गौतमी बनी थी धाया राज-वैभव कभी रास न आया याधोधरा भी लागे माया पिता ने सारे जतन किये थे ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 3, 2015, 10:23 pm
 रोजीरोटीकीजुगाड़में -चलपड़ेहैंकमानेकोछोटा-बड़ाकोईकाममिले -इनहाथोंकेपैमाने को हमकोखुदपरनाजनहीँ-जीनेकाहैअंदाजयहीजोमिलजाएरूखी-सूखी-पेट की आगबुझानेको कलकीफिकर कभीकरतेनही-बारिशधूपसेडरतेनहीफुटपाथपरकटती हैंरातें-अगलीअल सुबहजगाने को आँखोमेंख्वाबजगाये...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 1, 2015, 10:25 am
छत्तीसगढ़ अंचल के कवि अरुण निगम की छन्द संग्रह की किताब "शब्द गठरिया बाँध"काविमोचन अंजुमनप्रकाशन, इलाहाबाद के सौजन्य से देश के वरिष्ठ गीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून) की अध्यक्षता में तथा प्रो. राजेंद्र कुमार के मुख्य आतिथ्य में २२ मार्च २०१५ को सत्यप्रकाश मिश्...
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  April 28, 2015, 9:20 am
५ मार्च को एक सौ पाँचवीं जयन्ती पर विशेष {छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कहानीकार और वरिष्ठ साहित्यकार श्री परदेशीराम वर्मा जी की किताब – “अपने लोग”के प्रथम संस्करण २००१ से साभार संकलित}छत्तीसगढ़ के जनकवि :कोदूराम “दलित”भुलाहू झन गा भइयापिछड़े और दलित जन अक्सर अन्चीन्हे रह ...
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  March 4, 2015, 11:38 pm
  (चित्र ओबीओ से साभार)  कुकुभ छन्द – पहला दृश्य एक सरीखी प्रात: संध्या,जीवन की सच्चाई रे एक सूर्य को आमंत्रण दे , दूजी करे विदाई रे कालचक्र की आवा-जाही, देती किसे दिखाई रेतालमेल का ताना-बाना, सुन्दर बुनना भाई रे  कुकुभ छन्द – दूसरा दृश्य दादा  की   बाँहों म...
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  February 22, 2015, 8:38 pm
रूपमाला छन्द :एक पटरी सुख कहाती , एक का दुख नाम किन्तु होती साथ दोनों , सुबह हो या शाममिलन इनका दृष्टि-भ्रम है, मत कहो मजबूरएक  ही  उद्देश्य  इनका , हैं  परस्पर  दूर  चल रही इन पटरियों पर , जिंदगी की रेलखेलती  विधुना  हमेशा , धूप - छैंया खेलसाँस के लाखों मुसाफिर, सफ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  January 27, 2015, 7:25 pm
अच्छे दिन : कब लौटेंगे  यारों अपने  , बचपन वाले अच्छे दिनछईं-छपाक, कागज़ की कश्ती, सावन वाले अच्छे दिन गिल्ली-डंडा, लट्टू चकरी , छुवा-छुवौवल, लुकाछिपीतुलसी-चौरा, गोबर लीपे आँगन वाले अच्छे दिन हाफ-पैंट, कपड़े का बस्ता, स्याही की दावात, कलम शाला की छुट्टी की घंटी, टन-टन वाल...
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  January 18, 2015, 3:18 pm
तकलीफ  : लगभग एक माह पूर्व बेटे का विदेश से फोन आया था कि वह मिलने आ रहा है. मन्नू लाल जी खुशी से झूम उठे. पाँच वर्ष पूर्व बेटा नौकरी करने विदेश निकला था. वहीं शादी भी कर ली थी. अब एक साल की बिटिया भी है. शादी करने की बात बेटे ने बताई थी. पहले तो माँ–बाप जरा नाराज हुये थे,फिर यह ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  January 7, 2015, 12:25 am
कहानी : प्रतीक्षा      अर्पण गुलमोहर की शीतल छाँव में बैठा , तपन का आभास कर रहा है. शिशिर की शीतल पवन,ज्येष्ठ - लू जैसे ही मचल रही है. वातावरण हिम बनने  से भयभीत है किंतु अर्पण न जाने किन ज्वालाओं में झुलस रहा है. सम्भवत: अब आ ही जायेगी, बस इसी सम्भावना में संध्या आकर ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  January 3, 2015, 10:04 pm
भारत बनाम इण्डिया बाबूजी जब डैड हो गये , माता हो गई माम पूरब में उस दौर से छाई,  एक साँवली शाम अब गुरुकुल गुरु-शिष्य कहाँ, बस कागज के अनुबंध सर-मैडम, अंकल-आंटी में, सरसे कहाँ सुगंध कहाँ कबड्डी, गिल्ली-डंडा, छुआ छुऔवल खेल कहाँ अखाड़े कंदुक-क्रीड़ा, छुक-छुक करती रेल खेल फिरंग...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  December 15, 2014, 11:30 pm
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