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अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ) : View Blog Posts
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अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

काव्य मंच की गरिमा खोई, ऐसा आज चला है दौरदिखती हैं चुटकुलेबाजियाँ, फूहड़ता है अब सिरमौर ।।कहीं राजनेता पर फब्ती, कवयित्री पर होते तंजअभिनेत्री पर कहीं निशाना, मंच हुआ है मंडी-गंज ।।मौलिकता का नाम नहीं है, मर्यादा होती अब ध्वस्तभौंडापन कोई दिखलाता, पैरोडी में कोई मस्त ।...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 28, 2017, 10:12 am
"यहाँ हमारा सिक्का खोटा"निर्धन को खुशियाँ तब मिलतीं, जब होते दुर्लभ संयोगहमको अपनी बासी प्यारी, उन्हें मुबारक छप्पन भोग।।चन्द्र खिलौना लैहौं वाली, जिद कर बैठे थे कल रातअपने छोटे हाथ देखकर, पता चली अपनी औकात।।जो चलता है वह बिकता है, प्यारे ! यह दुनिया बाजारयहाँ हमारा सि...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 9, 2017, 7:48 am
*यमक अलंकार - जब एक शब्द, दो या दो से अधिक बार अलग-अलग अर्थों में प्रयुक्त हो*।*दोहा छन्द* -(1)मत को मत बेचो कभी, मत सुख का आधारलोकतंत्र का मूल यह, निज का है अधिकार ।।(2)भाँवर युक्त कपोल लख, अंतस जागी चाहभाँवर पूरे सात लूँ, करके उससे ब्याह ।।*रूपक अलंकार - जब उपमेय पर उपमान का आरोप क...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  October 27, 2017, 9:05 am
एक श्रृंगार गीत -कजरे गजरे झाँझर झूमर चूनर ने उकसाया थाहार गले के टूट गए कुछ ऐसे अंक लगाया था ।हरी चूड़ियाँ टूट गईं क्यों सुबह सुबह तुम रूठ गईंकल शब तुमने ही तो मुझको अपने पास बुलाया था।हाथों की मेंहदी न बिगड़ी और महावर ज्यों की त्योंहोठों की लाली को तुमने खुद ही कहाँ बचा...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  August 23, 2017, 5:41 pm
दोहा छन्दनैसर्गिक दिखते नहीं, श्यामल कुन्तल मीतलुप्तप्राय हैं वेणियाँ, शुष्क हो गए गीत।।पैंजन चूड़ी बालियाँ, बिन कैसा श्रृंगारअलंकार बिन किस तरह, कवि लाये झंकार ।।घट पनघट घूंघट नहीं, निर्वासित है लाजबन्द बोतलों में तृषा, यही सत्य है आज ।।प्रियतम की पाती गई, गए अबोले ब...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 13, 2017, 9:17 pm
*गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें*गुरु की महिमा जान, शरण में गुरु की जाओजीवन  बड़ा  अमोल, इसे  मत  व्यर्थ गँवाओदूर   करे   अज्ञान , वही   गुरुवर   कहलायेहरि  से  पहले  नाम, हमेशा  गुरु  का  आये ।।*अरुण कुमार निगम*आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 9, 2017, 9:37 pm
गजल : खुशी  बाँटने की  कला  चाहता हूँन पूछें मुझे आप  क्या  चाहता हूँ खुशी  बाँटने की  कला  चाहता हूँ |गज़ल यूँ लिखूँ लोग गम भूल जायें ये समझो सभी का भला चाहता हूँ |बिना कुछ पिये झूमता ही रहे दिल  पुन: गीत डम-डम डिगा चाहता हूँ |न कोला न थम्सप न फैंटा न माज़ामृद...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 3, 2017, 9:58 pm
शायद असर होने को है...माँगने हक़ चल पड़ा दिल दरबदर होने को है खार ओ अंगार में इसकी बसर होने को है |बात करता है गजब की ख़्वाब दिखलाता है वो रोज कहता जिंदगी अब, कारगर होने को है |आज ठहरा शह्र में वो, झुनझुने लेकर नए नाच गाने का तमाशा रातभर होने को है |छीन कर सारी मशालें पी गया वो रोशन...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 2, 2017, 10:45 pm
ग़ज़ल पर एक प्रयास -आप कितने बड़े हो गए हैंवाह चिकने घड़े हो गए हैंपाँव पड़ते नहीं हैं जमीं पेकहते फिरते, खड़े हो गए हैंदिल धड़कता कहाँ है बदन मेंहीरे मोती जड़े हो गए हैंपत्थरों की हवेली बनाकरपत्थरों से कड़े हो गए हैंशान शौकत नवाबों सरीखीफिर भी क्यों चिड़चिड़े हो गए हैं ।अरुण कुमा...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :ग़ज़ल
  July 1, 2017, 6:24 pm
अरुण दोहे -पद के मद में चूर है, यारों उनका ब्रेनरिश्तों में भी कर रहे, डेकोरम मेन्टेन ।।साठ साल की उम्र तक, पद-मद देगा साथबिन रिश्तों के मान्यवर, खाली होंगे हाथ ।।पद-मद नश्वर जानिए, चिरंजीव है प्यारसंग रहेगी नम्रता, अहंकार बेकार ।।लाट गवर्नर आज हो, कल होगे तुम आमसिर्फ एक प...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :
  May 21, 2017, 6:48 pm
दोहा छन्द - बेला के फूल स्पर्धा थी सौंदर्य की, मौसम था प्रतिकूलसूखे फूल गुलाब के, जीते बेला फूल |चली चिलकती धूप में, जब मजदूरन नार अलबेली को देख कर, बेला मानें हार | हरदम हँसता देख कर, चिढ़-चिढ़ जाये धूपबेला की मुस्कान ने, और निखारा रूप | पहले गजरे की महक, कैसे जाऊँ भूल&nb...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 22, 2017, 9:45 am
कुण्डलिया छन्द:पहचाना जाता नहीं,  अब पलाश का फूलइस कलयुग के दौर में, मनुज रहा है भूलमनुज रहा है भूल,   काट कर सारे जंगलकंकरीट में  बैठ,  ढूँढता  अरे  सुमङ्गलतोड़ रहा है नित्य,  अरुण कुदरत से नाताअब पलाश का फूल,  नहीं पहचाना जाता।।अरुण कुमार निगम आदित्य नगर, द...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 15, 2017, 3:45 pm
आम गज़ल .....आम हूँ बौरा रहा हूँपीर में मुस्का रहा हूँ ।मैं नहीं दिखता बजट मेंहर गज़ट पलटा रहा हूँ ।फल रसीले बाँट कर बसचोट को सहला रहा हूँ ।गुठलियाँ किसने गिनी हैंरस मधुर बरसा रहा हूँ ।होम में जल कर, सभी कीकामना पहुँचा रहा हूँ ।द्वार पर तोरण बना मैंघर में खुशियाँ ला रहा हूँ ।...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 6, 2017, 4:44 pm
जनकवि कोदूराम “दलित” की साहित्य साधना :( 5 मार्च को 107 वीं जयन्ती पर विशेष) : शकुन्तला शर्मा मनुष्य भगवान की अद्भुत रचना है, जो कर्म की तलवार और कोशिश की ढाल से, असंभव को संभव कर सकता है । मन और मति के साथ जब उद्यम जुड जाता है तब बड़े बड़े  तानाशाह को झुका देता है और लंगोटी ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 5, 2017, 7:47 am
*दोहा छन्द*`निर्णय के परिणाम से, हर कोई है स्तब्धसहनशीलता सर्वदा, जनता का प्रारब्ध ।जनता ने पी ही लिया, फिर से कड़ुवा घूँटकिस करवट है बैठता, देखें अब के ऊँट ।दूषित नीयत से अरुण, पनपा भ्रष्टाचारआशान्वित होकर सदा, जनता बनी कतार ।आकर कर दो राम जी, दुराचार को नष्टराम राज की आस म...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :देखें अब के ऊँट
  November 16, 2016, 1:19 pm
कुछ सामयिक दोहे .....मैला है यदि आचरण, नीयत में है खोट रावण मिट सकते नहीं, चाहे बदलो नोट । नैतिक शिक्षा लुप्त है, सब धन पर आसक्त सही फैसला या गलत, बतलायेगा वक्त । बचपन बस्ते में दबा, यौवन काँधे भार प्रौढ़ दबा दायित्व में, वृद्ध हुए लाचार । पद का मद सँभला नहीं, कद पर धन ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :सही फैसला या गलत
  November 13, 2016, 10:21 am
एक सामयिक ग़ज़ल.....(१२२ १२२ १२२ १२)समाचार आया नए नोट कागिरा भाव अंजीर-अखरोट का |दवा हो गई बंद जिस रात सेहुआ इल्म फौरन उन्हें चोट का |मुखौटों में नीयत नहीं छुप सकीसभी को पता चल गया खोट का |जमानत के लाले उन्हें पड़ गएभरोसा सदा था जिन्हें वोट का |नवम्बर महीना बना जनवरीउड़ा रंग नाया...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :
  November 12, 2016, 12:05 pm
आज के सन्दर्भ में दोहे -भैया देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारिछुट्टा आवै काम उत,का करि सकै हजारि ।उनको आवत देख के, छुट्टन करै पुकारिनोट हजारि बंद हुए, कल अपनी भी बारि ।बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे नोट हजारमार्किट में चलता नहीं, गायब ब्लैक बजार ।भैया खड़ा बजार में, लिए हजारी हाथकोई...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 11, 2016, 7:03 pm
मन से उपजे गीत (मधुशाला छंद)ह्रदय प्राण मन और शब्द-लय , एक ताल में जब आते तब ही बनते छंद सुहाने, जो सबका मन हर्षाते तुकबंदी है टूटी टहनी, पुष्प खिला क्या पाएगी मन से उपजे गीत-छंद  ही, सबका मन हैं छू पाते ||अरुण कुमार निगम आदित्य नगर, दुर्गछत्तीसगढ़ ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 7, 2016, 8:20 pm
मित्रों , जीवन की विभिन्न विवशताओं ने लम्बे समय से बाध्य कर रखा था. अतः ब्लॉग जगत में मेरी लम्बे समय से अनुपस्थिति रही. ३१ अगस्त २०१६ को मैं भारतीय स्टेट बैंक में ३६ वर्ष की सेवाएं पूर्ण करते हुए सेवानिवृत्त हुआ हूँ. ब्लॉग जगत में अपनी अपनी दूसरी पारी का शुभारम्भ कर रह...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 3, 2016, 8:53 pm
छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह "छन्द के छ:"का ग्राम अर्जुनी टिकरी में ऐतिहासिक विमोचन शरद पूर्णिमा की रात अमर कवि स्व.कोदूराम “दलित”के जन्म ग्राम अर्जुनी टिकरी (अर्जुन्दा) में शरद पूर्णिमा का भव्य आयोजन किया गया. आयोजित कविसम्मेलन के इस मंच से स्व.कोदूराम “दलित” के सुपुत्र...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 28, 2015, 11:25 pm
एलोरा :एलोराकीजानखंडहरदिखतेबियाबानखंडहर  |चमगादड़ कर गये बसेरा सूने और वीरान खंडहर |सदियोंसेहीधूलखारहेफिरभीकरतेगुमान खंडहर |इनपत्थरोंपरकलाऊँकेरी किसनेकह न सकेबेजुबानखंडहर |पाषाणी जीवंत मूर्तियाँबता रहीं प्रमाण खंडहर |दीवारों की अद्भुत नक्काशी करती हैं है...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :
  July 1, 2015, 7:12 am
अब स्वभाव से हो रहा, हर मौसम प्रतिकूलबेटा  तू    बैसाख  में  , सावन  झूला  झूल ||अपनी फेसबुक में मैंने अपने पोते के फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. यह कार्य दो मई से एक श्रृंखला के तौर पर चल रहा है. मित्रों का सरा...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :दोहे अनेक (भाग - २)
  May 14, 2015, 9:46 am
सुख तेरे मन में  छुपा , बाहर मत तू खोज।सुविधाओं को त्याग कर,खुशी मना हर रोज ।।अपनी फेसबुक में मैंने दिनांक ०२ मई २०१५ को इस फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. मित्रों का सराहनीय सहयोग मिला. आइये आप भी इन दोहों का आनंद लीजि...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
Tag :
  May 7, 2015, 1:49 pm
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