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दिवाकरस्य वार्त्ताः

बहुत हुई बकवासकि अब अमर करें बनवासकि छोड़ दिया मुलायम गद्दीकि अब करें वे ब्लॉगवासकि अब वे उचरें कांग्रेस-रागकि अब गाएंगे वो गीतकि अब बने वो मैडम के मीततो भैया, बहुत हुई बकवासअब रहो ना तुम उदासऔर कुछ इधर-उधर से लेकेनिकालो अपनी भी भड़ास......[चित्र गूगल मियां की कृपा से]...
दिवाकरस्य वार्त्ताः...
दिवाकर मणि
Tag :नेता-पुराण
  June 17, 2010, 6:31 pm
रामलुभाया चच्चा,प्रणाम ।खुश रहो गुणगोबर, क्या हाल-चाल है? आजकल ना तो दिखाई देते हो, और ना ही सुनाई पड़ते हो, क्या बात है? और तोहरे चेहरा पर ई खुशी टपक रही है, एकर का राज है?अरे बात-वात कुछो ना है, चच्चा? जब से पिछला पंचायत चुनाव हारा हूं, तबसे खलिहरे चल रहा था, तो सोचा कि समाजसेव...
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दिवाकर मणि
Tag :कुछ इधर-उधर की..
  June 9, 2010, 5:55 pm
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही॥[[जिस प्रकार एक मनुष्य पुराने व फटे वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नये वस्त्रों को ग्रहण करता है,वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नये शरीर को प्राप...
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दिवाकर मणि
Tag :व्यथित हृदय
  May 18, 2010, 5:50 pm
ब्लॉगर मित्रों,हमें पता होता है कि जीवन का हर क्षण बड़ा ही परिवर्तन भरा होता है, लेकिन उसे यथावत्‌ स्वीकारना कितना कठिन होता है, इससे आज मैं दो-चार हूं। मन यह मानने को तैयार नहीं होता कि जिसे हम कुछ घंटों पूर्व तक हँसते-मुस्कुराते देख रहे हैं, वो हमारे सामने जीवन को वापस ...
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दिवाकर मणि
Tag :व्यथित हृदय
  May 14, 2010, 7:06 pm
ओ रामलुभाया,बोलो भायाये इंडिया है,जानता हूं.क्या जानते हो?यही कि ये इंडिया है.चुप्प बुड़बक!!ये जानते हो...क्या?कि..हां, बोलो-बोलो, क्या?कि, इहां एम्बुलेंस और पुलिस की पहुंच से जल्दी पिज्जा की होम-डिलीवरी होती है.अच्छा, ऐसा!!हां, यहां वाहन-ऋण 5% की दर से मिल जाएगा, किंतु शिक्षा-ऋ...
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दिवाकर मणि
Tag :
  May 5, 2010, 4:02 pm
प्रातः की इस वेला मेंप्राची में आ रहे भाष्कर से केवल यही है विनती कि मेरे सहचरों को रखो हमेशा स्वस्थ एवं सानन्द. करते रहें अनथक वे कार्य जब तक कि उनमें है दृढ़ विश्वास. [इन पंक्तियों को मैंने करीब तीन साल पहले लिखा था और गूगल-ग्रुप "हिन्दी-कविता" में इसे 29-अक्टूबर-2006 को पोस्...
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दिवाकर मणि
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  September 3, 2009, 11:34 am
एक बच्चे को किसी कार्यवश पचास रुपए की जरुरत थी. यह राशि उसने अपने माता-पिता से लेकर बड़े भाई-बहनों से भी माँगी किंतु सबने उसे कोई ना कोई बहाना बनाकर देने से मना कर दिया. इस तरह जब काफी दिन बीत गए तब उसने सोचा कि क्यों ना सीधे भगवान्‌ से ही रुपयों के लिए प्रार्थना की जाए. ऐसा...
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दिवाकर मणि
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  September 2, 2009, 3:37 pm
मेरे एक मित्र USBने एक मेल भेजा, जिसमें महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों के द्वारा कही गयी बातों का जिक्र है. चूंकि, मुझे वह काफी प्रभावकारी लगी तो सोचा कि आंग्लमाध्यम में कही गई उस छवियुक्त फाइल को हिंदी भाषा में भी उपस्थित किया जाये, ताकि उन बातों का क्षेत्र और व्यापक हो. अस्तु, "...
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दिवाकर मणि
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  August 24, 2009, 7:12 pm
**नहीं पढूंगा(गी)-नहीं पढूंगा(गी),ला दो चाहे ढेरमिठाई ।पहले मुझे बता दो पापा,किसने की थी शुरु पढ़ाई !x-(**मैं जन्मनाबुद्धिमान थालेकिनइस "पढ़ाई-लिखाई"के चक्‍करने मुझेकहीं का नहीं छोड़ा।**अभ्याससेव्यक्ति“पूर्ण”बनता है....यह भी उतना ही सच है कि कोई व्यक्ति कभीभी“पूर्ण”नहींह...
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दिवाकर मणि
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  August 18, 2009, 11:16 am
जब ईसा के 57 वर्ष पूर्व महान्‌ सम्राट विक्रमादित्य ने शक आक्रमणकारी खरोश को हराकर उज्जैन में अपना राज्यारोहण प्रारंभ किया तो तत्कालीन समय में एक नये कैलेण्डर अर्थात्‌ पञ्चाङ्ग की शुरुआत की गई, जिसे हम आज विक्रम संवत्‌ के रूप में जानते हैं। इस नववर्ष का प्रथम दिन चैत्र...
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दिवाकर मणि
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  March 27, 2009, 12:17 pm
अपनी दैनिक चर्या के अनुसार पिंटू समाचार-पत्र पढ़ रहा था।अचानक उसने अपने पिताजी से पूछा- "पिताजी ! शासन-प्रणाली से क्या तात्पर्य है?""ये कुछ ऐसा है......" पिताजी कुछ देर तक सोचते रहे और फिर बोले, "देखो, मैं धन कमाता हूं और उसे लेकर घर आता हूं, मतलब कि मैं मनीहोल्डरहूं। तुम्हारी म...
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दिवाकर मणि
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  March 17, 2009, 8:26 pm
ये भी कितनी अजीब बात है ना !! कि एक ऐसा समय भी होता है जब हम बड़े होने की जल्दी में होते हैं, जब हम यह चाहते हैं कि अपना एक मुकाम हासिल करके चैन की बांसुरी बजाएं! कि जब हम जैसा चाहें, पलक झपकते ही प्राप्त कर लें ! जब ऐसा दिन भी हम अपनी जिन्दगी में देख लेते हैं तो भी कहीं ना कहीं हम...
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दिवाकर मणि
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  February 12, 2009, 12:37 pm
सर्वेभ्यो नमः....सभी को नमस्कार....विगत वर्ष के अंतिम दिवस को यहां मैंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, उसके बाद पाणिनि बाबा के "अदर्शनं लोपः" सूत्र का प्रभाव हो गया था.  आज सुबह कार्यालय आने के बाद हर दिन की तरह सबसे पहला काम "जीमेल को खोलना" किया तो लगभग तेरह के करीब अपठित मेल द...
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दिवाकर मणि
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  February 9, 2009, 2:12 pm
सभीपाठकों को मेरा नमस्कार!!अपनीबात शुरु करने से पहले शिष्टताके नाते अपना परिचय दे दूं ।मैं श्रीयुत्‌इक्कीसवींशताब्दी जी का आठवां पुत्र2008 ई. हूं।अब मेरी चला-चलीकी बेला है, जीवनके कतिपय2-4 घंटेबचे हैं। बहुत-सीबातें हैं जो आपसे बांटनाचाहता हूं ताकि शांतिपूर्णतरीके से म...
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दिवाकर मणि
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  December 31, 2008, 8:43 pm
शहरमें लगा था इश्तिहारजिसकामजमून थाकिजो भीमहानुभावअपनीकविता की प्रतिभादिखानाचाहते होंपचासका एक नोटरजिस्ट्रेशनफी के रूप में लेकरनियततारीख को आ जाएंऔर अपनीकविता रूपी प्रतिभा सेदस-दसरुपए में इकठ्ठाकिए गएश्रोताओंका मुकाबिला करा जाएं.इसेपढ़कर मैंने भी सोचाक्य...
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दिवाकर मणि
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  December 28, 2008, 9:26 pm
यहबताने की कोई खास आवश्यकतानहींहै कि आज के दौर में इंटरनेटएक ऐसा समुद्र है, जिसकीगहराई हिन्द महासागर से किसीभी मामले में कम नहीं है। अचानकडूबते-उतरातेमैं भी“YouTube” नामकएक टापू पर पहुंच गया और वहांके एक वीडियो-क्लिप  ने ही सम्प्रतिअंगुलियां कुंजी-पटलको दबाने पर मजबूर...
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दिवाकर मणि
Tag :इस्लामी आतंकवाद
  December 26, 2008, 8:14 pm
उनकी यादों के झरोखों मेंमैं ही मैं थाजाने क्या बात हुईआजउन झरोखों मेंकिसी और का वजूद था...क्या ख़ता हुई मुझसेयह तो मालूम नहींलेकिन रुसवाई उनकीदिल को चूर कर गयी.जब मैंने देखा था उनको पहली बारऔर हम दोनों की नजरें हुई थीं चारतब मैंने पाया था उनमेंअपने लिए असीमित प्यारफिर...
दिवाकरस्य वार्त्ताः...
दिवाकर मणि
Tag :
  April 29, 2008, 3:37 pm
१) नक्सलीभूखों, नंगों को चूसकरबने हुए लाल सेजब एक और लाल निकलता हैपुनःउन भूखे, नंगों कोचूसने के लिएतो समझोकोई नक्सली है.२) वामपंथीशोषितों के खून से, भरे हुए गाल वाला एवं लाल अट्टालिका में रहने वाला जब लाल-लाल चिल्लाए समझो रक्त पिपासु कोई वामपंथी नए लाल की तलाश में आ र...
दिवाकरस्य वार्त्ताः...
दिवाकर मणि
Tag :
  February 12, 2008, 5:18 pm
आज ब्लॉग-दर-ब्लॉग घूम रहा था कि अचानक एक "चिट्ठे" पर नजर पड़ी, जिसके चिट्ठाकार भाई प्रतीक ने चाचा चौधरी के कॉमिक्स पर बड़ा ही रोचक एक लेखलिखा है, उसे पढ़कर मुझे भी अपने बाल्यावस्था से किशोरावस्था तक के दिनों के "कॉमिक्स-प्रेम" की याद आ गई. सोचा कि आप सबों से उन दिनों की इस या...
दिवाकरस्य वार्त्ताः...
दिवाकर मणि
Tag :
  January 29, 2008, 8:45 pm
कवना खोतवा में लुकइलो, आहिरे बालम चिरई ।बन-बन ढूँढलीं, दर-दर ढूँढलीं, ढूँढलीं नदी के तीरे,साँझ के ढूँढलीं रात के ढूँढलीं, ढूँढलीं होत फजीरेजन में ढूँढलीं, मन में ढूँढलीं, ढूँढलीं बीच बाजारे, हिया हिया में पैस के ढूँढलीं, ढूँढलीं बिरह के मारे कवने अतरे में, कवने अतरे में स...
दिवाकरस्य वार्त्ताः...
दिवाकर मणि
Tag :
  January 29, 2008, 5:33 pm
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