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साहित्य - कला - पत्रकारिता : View Blog Posts
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साहित्य - कला - पत्रकारिता

गीली मौत सूखी मौतएक साथ गीली भी !एक साथ सूखी भी !हॉं !एक साथ ।यादों से गीली औरअहसास से सूखीयादें ऑंसुओं से गीलीं औरअहसास मर्महीनव सूखेआहें  न लोआहें होंगी सर्दन गीलीं न सूखीं ।कुछ तप्‍त कुछ आतप्‍त वैसे ही जैसेगंगासागर मेंभक्ति गीली,रास्‍ता गीलापर मौत !मौत है सर्ददर्...
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Tag :
  January 17, 2017, 4:48 pm
जीयें आपकितनी मीठी है ये दुआ । कितना सुन्‍दर है यह आशीष । ये शब्‍द झंकृत कर सकते हैं किसी के भी हृदय,मन और आत्‍मा को । शायद जीवन के सबसे बड़े आशीषों में से एक है बल्कि सबसे बड़ा आशीष है । लेकिन जो जीवन के पार निकल जाए उसके लिए कितनी सार्थक है यह शब्‍द ध्‍वनि ।  शरीर से जीव...
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  December 1, 2016, 12:47 pm
सिसकते घावखुले घावों मेंलहूरंजित छींटें,जि़न्‍दगी की  चादर परमलहम की उम्‍मीद में,सिसकते – सिसकतेआखि़र सो गए ।।                                        ( उन ‘निर्भयाओं’को समर्पित,जिन्‍हें न्‍याय नहीं मिला- न सामाजि...
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  November 1, 2016, 11:41 am
         कितनी सीता: कितनी अग्निपरीक्षा : कितनी भू-समाधि                       ‘’jkLrs ij fMokbMj ds ckaW;h rjQ lड़d ds fdukjs &fdukjs pyus vkSj  tc rd xUrO; ds fy, dkWl u dj ys rc rd vU;euLd vkSj viw.kZ eu%fLFkfr dh vknh lhrk bl bUrt+kj esa pyrh pyh tk jgh Fkh fd dc ;krk;kr dk izokg Fkksड़k fojke ys vkSj dc og tYnh ls lMd dzkl dj ys vkSj fQj pyrh jgs निश्चिन्‍तrc rd tc rd fd eaft+y rd u igqWap tk, A ysfdu ;krk;kr dk izokg Fkk fd Bgjus dk ...
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Tag :
  November 1, 2016, 11:41 am
कल ग्राउण्‍ड ज़ीरो से गुज़रते हुए दिल्‍ली पुलिस के जवानों के बीच की एक बात कान में पड़ी कि –पहले एक घण्‍टे तो ख़ूब धुलाई-वुलाई हुई.........  माहौल फिर वैसा ही था और लोग प्रदर्शन पर आमादा थे । पुलिस अपने मद और गुरुर में चूर ही नज़र आ रही थी । और यह कमेंट करते समय ऐसा लग रहा था मान...
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Tag :कहन
  December 26, 2012, 12:21 am
उभरना और उबरना- सुनने में बहुत अखरता है जब कोई सदमे से उभरताहै और किसी को मूर्ति के उभार में उबार दिखाई देता है । अच्‍छा  हो  कि भाषा के  अनुरूप हम उभरना और उबरना का उचित प्रयोग करें ।  उभरना-  (1) अरविन्‍द केजरीवाल एक सशक्‍त नेता के रूप में बड़े तेज़ी से                     उभरे है...
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Tag :हिन्‍दी भाषा-शब्‍द वैशिष्‍ट्य
  December 7, 2012, 3:18 pm
व्‍यक्‍त-अव्‍यक्‍त यदि भौतिक शरीर किसी जीव,मन और आत्‍मा की संयुक्‍त अभिव्‍यक्ति है तो भौतिक शरीर का न रहना  किसी  जीव,मन और आत्‍मा की अन-अभिव्‍यक्‍त अवस्‍था है !यह अध्‍यात्मिक सोपानों की सीढि़यॉं  हैं । यह अन-अभिव्‍यक्‍त अवस्‍था ( ‘प्रेत’यानी जो जान पड़ता है लेकिन उस...
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Tag :कहन
  October 12, 2012, 11:46 am
भावाविभ्‍यक्ति  में  भाव  बेहद  सूक्ष्‍म  जबकि  शब्‍द  बेहद  स्‍थूल  साबित होते  हैं   और इसीलिए  गहन भावों की  अभिव्‍यक्ति शब्‍दों के माध्‍यम  से सम्‍पूर्ण कभी नहीं हो  सकती । कुछ अनकहा शेष रह ही जाता है  और कुछ                   अकथ्‍य शब्‍दों में व्‍यक्‍त हो ही जाता है । ...
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Tag :कहन
  September 19, 2012, 4:52 pm
आज हमने फिर मनायाहिन्‍दी डे सेलेब्रेशनदृश्‍य पटल पर ख़ूब दिखायाहिन्‍दी का प्रेज़ेण्‍टेशनदेखो ! हिन्‍दी का तो हो रहासभी जगह इम्‍प्‍लीमेण्‍टेशनहिन्‍दी-प्रेमी अब तो कर लोतुम भी इस पर सैटिस्‍फैक्‍शन ।हिन्‍दी-भाषी प्रान्‍त तुम भीपालो न कोई फ़्रस्‍ट्रेशनफिर भी भारी ...
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Tag :कविता
  September 14, 2012, 12:50 pm
हिंसा के  विरुद्ध साहित्‍य ( Literature against Violence ) : साहित्‍य का यह रूप समझने के लिए हमें पहले दोनों को अलग-अलग करके देखना होगा । हिंसा क्‍या है  ?  और साहित्‍य क्‍या है ?साहित्‍य हम सभी जानते हैं,यहॉं बैठा हर व्‍यक्ति लेखनी से साहित्‍यकार है और दिल से भी । फिर बारी आती है हिंसा की । ह...
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Tag :लेख
  July 31, 2012, 3:55 pm
सामूहिक  अपराध या सामूहिक अपराध के प्रति मूक सहमति/मूकदर्शिता/उदासीनता मानसिक बीमारी है या अपराधियों से डर ?  सामूहिक असंगठित अपराध में भागीदारी/इसकी स्‍वीकार्यता क़बीलायी संस्‍कृति है या मानवीय सभ्‍यता  ? क्‍या भीड़ में जानवर या हैवान बन जाना हमारा/हमारे पुरुषों क...
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Tag :कहन
  July 13, 2012, 3:37 pm
मूल रूप से हर बच्‍चा एक इनसानी स्‍वभाव के अनुरूप स्‍वभावत: एक कोरी स्‍लेट होता है । अगर बाह्य रूप से आरोपित विचार उसे वैसा कुछ और बनने के लिए प्रेरित न करे तो हर बालक सहज, शान्तिप्रिय और सरल ही होता है । जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है समाज, देश-काल और लोगों की सकारात्‍मक या नक...
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Tag :कहन
  June 19, 2012, 4:53 pm
मूल रूप से हर बच्‍चा एक इनसानी स्‍वभाव के अनुरूप स्‍वभावत: एक कोरी स्‍लेट होता है । अगर बाह्य रूप से आरोपित विचार उसे वैसा कुछ और बनने के लिए प्रेरित न करे तो हर बालक सहज, शान्तिप्रिय और सरल ही होता है । जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है समाज, देश-काल और लोगों की सकारात्‍...
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Tag :कहन
  June 19, 2012, 12:52 pm
वर्ष 2008 जब अपनी शैशवावस्था में किलकारी भरने की शुरुआत ही कर रहा था तब जहाँ मुम्बई में दो नवयुवतियाँ विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश और 'यत्र नारयस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता' की अवधारणा वाले देश में अपने महिला होने के अघोषित अपराध की सज़ा में कराह रही थीं वही...
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Tag :लेख
  June 4, 2012, 2:10 pm
                                                                                                                                                                                                                              eMAIL- platasharma6@gmail.com                                                                                                                                              ...
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Tag :कहानी
  May 8, 2012, 11:35 am
      ध्‍वनि का अनुशासन मंत्र हैयंत्र का अनुशासन मशीन हैप्राण का अनुशासन अध्‍यात्‍म है आत्‍मा का अनुशासन परमात्‍मा है और मनुष्‍य का अनुशासन ?जीवन का अनुशासन ?कृपया बताऍं अगर सूझे.............                                    ...
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Tag :कहन
  April 26, 2012, 12:31 pm
      ध्‍वनि का अनुशासन मंत्र है यंत्र का अनुशासन मशीन हैप्राण का अनुशासन अध्‍यात्‍म है आत्‍मा का अनुशासन परमात्‍मा है और मनुष्‍य का अनुशासन ?जीवन का अनुशासन ?कृपया बताऍं अगर सूझे.............                                    -पुष्‍पी...
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Tag :कहन
  April 26, 2012, 12:31 pm
  कविताऍं –              - कुछ अध्‍यात्मिक- (1)    बाती जगर-जगर कर जगर-मगर                                          जल-जल बुझती मन की बातीकभी जलाती होली-सी और कभी सुहाती दीवाली-सी बातीतन-रूपी माटी के दीपक मेंप्रकाश-पुंज सी सिमटी बाती आकाश-रूप में सूरज ही बनतन से उड़ जाती औचक ही बाती ।      ...
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Tag :कविता
  April 23, 2012, 12:44 pm
...
साहित्य - कला - पत्रकारिता...
Tag :कहानी
  April 13, 2012, 1:32 pm
(MISS PUSHPI)                                                                                                                                                                                                                  EMAIL- platasharma6@gmail.com                                                                                                                         ...
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Tag :व्यंग्य
  April 2, 2012, 5:06 pm

...
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Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
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