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कलम से..

ओ मेरी ज़िन्दगी की  कविता लिखने वाली  लड़की !जानती हो तुम्हारी लिखी उदास नज़्मे तो अच्छी लगती हैं पर तुम उदास अच्छी नहीं लगतीहो सके तो भोर के नीम उजाले में अपनी मुंडेर लाँघ के मेरी अटारी से अपनी उदास नज़्मो के बदले ज़िन्दगी का एक ख्वाब ले लो। --सुधीर ...
कलम से.....
Tag :सुधीर मौर्य
  April 5, 2017, 10:21 pm
 पौराणिक उपन्यास 'पहला शूद्र'लेखक - सुधीर मौर्य बहुत कम लोग होते है जो साहित्यिक राजनीति से कोशो दूर, पुरष्कार लालसा से मीलो दूर और बिना किसी ढोल नगाड़ा के साहित्य सेवा में नौकरी करते हुए इतने मन से समर्पित रहते है। ऐसे ही है अपने Sudheer Maurya जी। नौकरी करते हुए उनकी अब तक...
कलम से.....
Tag :पहला शूद्र
  April 2, 2017, 3:28 pm
ओ मेरी सुघड़ देवि !मैं कामना करता हूँ कि तुम लौट आओ मेरी ज़िन्दगी में और बचा लो मेरी बची हुई उम्र को शापित होने से। ओ मेरी सुघड़ देवि !मैं दुआ मांगता हूँ सोते - जागते हर घडी कभी अपने तो कभी तुम्हारे देवताओं से कि वो भेज दें तुम्हे मेरे संग उस राह पे जिसक...
कलम से.....
Tag :Poem
  March 31, 2017, 10:25 pm
मिसेजसचानआजमुझकोदूसरीबारदेखरहीथीऔरदेखतेहीमुझसेमुलाकातकीख्वाहिशमंदहोउठीथी।उनकीयेख्वाहिशमैनेउनकीआँखोंमेंबखूबीपढ़ीथी।मैंएकलेखकहूँऔरलोगमुझेभावनाओकाचितेराकहतेहैं।तोभावनाओकेचितेरेरोमांटिककहानियांलिखनेवालेएकलेखककेलिए  किसीऔरतकीआँखोंकीभाषापढ़न...
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Tag :सुधीर मौर्य
  March 22, 2017, 9:23 pm
पुस्तक - पहला शूद्र (वैदिककालीन उपन्यास) लेखक - सुधीर मौर्य प्रकाशक - रीड पब्लिकेशन पृष्ठ - १५२ पेपरबैक ISBN-13: 978-8190866446समीक्षक - गंगाशरण सिंह Sudheer Maurya जी जी ऐसे लेखक मित्र हैं जो अमूमन न मुझे पढ़ते हैं न मैं उन्हें :)कहा जा सकता है कि हमारी मित्रता के बीच हमारा लिखना पढ़ना...
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Tag :गंगाशरण सिंह
  March 5, 2017, 3:01 pm
Pahla Shudra Novel By Sudheer MauryaPahla Shudra ... the story of the King Sudas who was a great warrior and the Hero of Aryans. He was the first Aryan who established Aryans' Empire ... but unfortunately he was trapped by his own priest who made him First Shudra.Amazon Link:-http://www.amazon.in/Pahla-Shudra-Sudheer-Maurya/dp/8190866443/ref=sr_1_8?s=books&ie=UTF8&qid=1487759842&sr=1-8&keywords=shudra ...
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Tag :उपन्यास
  February 22, 2017, 4:10 pm
तुम हंसती अच्छी लगती हो। कुछ फूल है मेरे दामन मेंमैं सोचता हूँ इस सावन मेंतुमको ये अर्पित कर दूंगा मन अपना समर्पित कर दूंगा।तुम हंसती अच्छी लगती होतुम फूल सी मुझको दिखती होतुम देवी हो सुंदरता कीमुझे परियों सी तुम लगती हो।जब फूल खिलेंगे बागों मेंतब आ जाना तुम बाहो...
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Tag :नज़्म
  February 15, 2017, 5:26 pm
एक ठो वामपंथी स्त्री हैं, मेरी किसी पोस्ट को पढ़कर मुझ पे ज्ञान बघारते हुए बोली 'ये पद्मिनी काल्पनिक पात्र हैं फिर अगर कोई उन पर अपने हिसाब से कहानी लिखे या फिल्म बनाये तो तुम्हे क्या तकलीफ और फिर अभिव्यक्ति की आजादी पे कोई रोक नहीं लगा सकता।'उनकी बात सुनकर मैने जवाब दि...
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Tag :सुधीर मौर्य
  January 29, 2017, 4:54 pm
तुमसे झेलम छीनी गई केसर के खेत छीने गए ढाका का मलमल और ढाकेश्वरी छीन लिए गए बामियान के बुद्ध और माता हिंगलाज तुम्हारे न रहे तक्षशिला और पुरुषपुर से तुम्हारा नामोनिशान मिट गया गांधार को तुम्हारी आँख के सामने कंधार बना दिया गया दिल कहे जाने वाली...
कलम से.....
Tag :
  January 3, 2017, 11:20 pm
कितना भोलापन था उस दिन तुम्हारे चेहरे पर, मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति के आगे जब तुम हाथ जोड़कर खड़ी थी। मैं कभी तुम्हें और कभी मूर्ति को निहार रहा था। मंदिर से बाहर आकर गार्डन में टहलते हुए जब मैंने तुमसे पूछा, मुझसे शादी करोगी उस समय तुम्हारा चेहरा लाज से लाल हो गया थ...
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Tag :कहानी
  January 1, 2017, 1:44 pm
ओ सुजाता ! Gaanu Prasadiमै तकता हूं तेरी राहऔर चखना चाहता हूंतेरी हाथ की बनी खीरदेख मै नही बनना चाहता बुद्धन ही पाना चाहता कैवल्यमै तो बस चाहता हूँ छुटकारादुखो से अपनेदेवी !दान दोगी न मुझेएक कटोरा खीर कान सही बुद्ध की मेरे लिए दूसरी सुजाता बनके। --सुधीर मौर्य ...
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Tag :नज़्म
  December 30, 2016, 9:44 pm
Add caption                  माँ ने उसे सहारा दे कर कार की पिछली सीट पर बैठा दिया और खुद उसके बगल में बैठ गयी। मुझे गाड़ी चलाने की हिदायत देकर, माँ उसे अपनी बोटल से पानी पिलाने लगी। न जाने क्यूँ आज मुझ...
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Tag :कहानी
  December 29, 2016, 11:24 pm
देख लड़की मैं जानता हूँतूँ देखा करती थी कनखियों से किसी को अपनी छत पे टहलते हुएहाथो में कोई खुली किताब लिएदेख लड़की मैं जानता हूँ तूँ कामना करती थीमुरादों के दिन की दिसम्बर की कंपकपाती रात की तन्हाई मेंअपनी सांवली गुदाज़ उंगलियों सेअपनी कमर से इज़ारबंद खोल केदेख लड़...
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Tag :नज़्म
  December 25, 2016, 2:40 pm
यद्द्पि मुगलिया सल्तनत 1857में ही ख़त्म हो गई थी पर वो फिर भी इसी आस में रहे की कभी न कभी अंग्रेजो के जाने पे वही इस देश के शासक होंगे। जब 1947 में उन्हें लगा वे शासक नही बन रहे तो उन्हें बहुत दुःख हुआ साथ ही साथ वे गुस्से से उपल पड़े। जगह – जगह उन्होंने दंगे किया, क़त्लोआम किया और इ...
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Tag :
  December 22, 2016, 1:29 pm
घर के पूरे आँगन मेंतुम हौले - हौले चलते होभईया दीदी के संग अब तुमउनके खेल खेलते होबच कर मम्मी से अबघर के बाहर आ जाते होअपनी अम्मा की खांसी कीहँस - हँस नक़ल बनाते होसबसे ज्यादा गोद तुम्हेबड़े पापा की  भाती हैऐ बी  सी दी कहते हो जबबुआ तुम्हे पढ़ाती हैअब तक मुझसे लाल तुम्हार...
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Tag :नाम तुम्हारा टुनमुन है
  November 15, 2016, 4:31 pm
इस धरती पर कुछ वीर ऐसे भी हुए जिन्हें इतिहास ने कभी याद रखना नहीं चाहा। और वे गुमनाम ही रहे।दाशराज युद्ध का महानायक और दिवोदास पुत्र सुदास जिसने अनार्यों से भीषण संघर्ष के बाद सप्तसैंधव को आर्यवर्त का नाम दिया, जमदग्नि पुत्र परुशराम  से कहीं अधिक पराक्रमी और कोशल नर...
कलम से.....
Tag :पहला शुद्र
  November 14, 2016, 4:40 pm
इंद्र को दिए जाने वाले हवि को प्रतिबंधित करने वाले वीर का जन्म अभी होना था। कुरुक्षेत्र में योद्धाओं का शक्ति परिक्षण में अभी सदियों का समय था। लंका पे अभी सेतु नहीं बंधा था और मेघवृत्र का वध हुए अभी कुछ ही काल बीता था। अनार्यो का पूर्ण न सही आंशिक दमन हो चूका था और इस...
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Tag :पहला शुद्र
  November 13, 2016, 5:43 pm
हल्के - हल्के शिप लेकर शराब पीती वो लड़की मुझे न जाने क्यों अच्छी नहीं लग रही थी।लड़खड़ाते कदमो से वो पार्टी हाल से बाहर निकलते हुए वो बोली 'मैं पार्टी में आई थी, बीफ पार्टी में नहीं धिक्कार है तुम सब पे जो लोगो की भावनाये नहीं समझते।' वो लड़की न जाने क्यों मुझे अच्छी लगने लग...
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Tag :लघुकथा
  October 13, 2016, 7:33 pm
कसबे में एक हरे रंग के बाशिंदे में साथ उसकी उठक - बैठक थी।  कहते है जब दिल में डर हो तो उसकी लकीरे चेहरे पर नुमाया हो जाती है।  उसकी भी हुई।  और उन डर की लकीरों पर उस हरे रंग के बाशिंदे अब्दुल की भी नज़र पड़ी।उस दिन अब्दुल जब उसके साथ बैठा चाय पी रहा था उसके चेहरे पे उभरी डर...
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Tag :कहानी संग्रह
  September 1, 2016, 7:57 pm
लड़की गिनती है अपने सेनेटरी नैपकिन पे वो धब्बे जो उसकी रोमिल योनि से निकले रक्त से बने है और उसके आधार पे वो, उतनी ही लाईन की लिखती है कविता लड़की पुकारती है अपनी मां तुल्य  को बेबी और उसकी देह के अवयवों की संख्या के आधार पे लिखती है एक नंगी कविता लड़की लि...
कलम से.....
Tag :
  August 13, 2016, 7:47 pm
प्रतिलिपि कथा उत्सव २०१६ में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित। प्रियानेमुझसेपूछाये BHMB क्याहोताहै।मैनेगौरसेप्रियाकोदेखकरकहा'नहींजानता।'मेराजवाबसुनकरप्रियानेकहा'उऊह , तुमकुछनहींजानतेचलोमै  किसीऔरसेपूछलूंगी।'कहकरप्रियाजानेलगीतोमैनेउसेरोककरकहनाचाहा'मैइसक...
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Tag :कहानी
  August 11, 2016, 9:34 pm
देखो मेरे प्यारे कश्मीर बुरहान वानी से  दहशतगर्द जब - जब तुझे लहूलुहान करेंगे तब - तब तेरी रक्षा को सेना के जवान मुस्तैद मिलेंगे देखो मेरे प्यारे कश्मीर तेरी प्यारी वादियों को हरा भरा रखने के लिए कभी मेजर सोमनाथ तो कभी कर्नल रॉय अपना रुधिर बहाते रहेंगे देखो मेरे प्य...
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Tag :नज़्म
  July 13, 2016, 10:30 pm
इबादतगाह की मुहब्ब्तगाह इबादतगाह भी मुहब्ब्त करने वालो का ठौर होता है।उस शाम जब मै एक मंदिर की चौखट पे प्रसाद चढ़ाने के चढ़ रहा था तो मैने वहीँ पास पे एक पेड़ की औट से नाज़ को मुझे तकते हुए पाया। मै मंदिर की चौखट चढ़ने की जगह उतरने लगा था। मैँ नहीं जानता था ये कहीं गुनाह तो न...
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Tag :मेरे और नाज़ के अफ़साने
  June 10, 2016, 10:24 am
जितना आसान उँगलियों से रेत पर बेल - बूटे बनाना थाजो उतनी आसानी से उँगलियाँ पानी पे बेल - बूटे बना पाती ओ लड़की !तो हमारा इश्क़ भी मुकममल हुआ होता। --सुधीर मौर्य  ...
कलम से.....
Tag :
  June 5, 2016, 10:04 pm
अघोषित प्रेम की खामोश घोषणा_______________________वो एक मेघ भरा दिन था ।घटायें बेकाबू होकर धरती को चूमने को बेक़रार थी और धरती हवा बनकर घटाओं को चूमने को।  हवाएं क्लासरूम के दरीचे की राह से नाज़ की ज़ुल्फ़ों से खेलने की ख्वाहिशमंद और नाज़, वो मौसम की इस जुगलबंदी पे अपनी युगल आँखों से मुझ...
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Tag :मेरे और नाज़ के अफ़साने
  May 24, 2016, 8:07 pm
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