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Blog: KAVITA RAWAT

Blogger: Kavita Rawat
आज भले ही दीपावली में चारों ओर कृत्रिम रोशनी से पूरा शहर जगमगा उठता है, लेकिन मिट्टी के दीए बिना दिवाली अधूरी है। मिट्टी के दीए बनने की यात्रा बड़ी लम्बी होती है। इसकी निर्माण प्रक्रिया उसी मिट्टी से शुरू होती है, जिससे यह सारा संसार बना है। यह मिट्टी रूप में भूमि पर ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   2:00am 21 Oct 2019 #दीपावली विशेष
Blogger: Kavita Rawat
किसी राष्ट्र की संस्कृति उस राष्ट्र की आत्मा है। राष्ट्र की जनता उस राष्ट्र का शरीर है। उस जनता की वाणी राष्ट्र की भाषा है। डाॅ. जानसन की धारणा है, ’भाषा विचार की पोषक है।’ भाषा सभ्यता और संस्कृति की वाहक है और उसका अंग भी। माँ के दूध के साथ जो संस्कार मिलते हैं और जो मीठ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   1:30am 14 Sep 2019 #राष्ट्रभाषा पर चिंतन
Blogger: Kavita Rawat
बच्चे जब बहुत छोटे होते हैं, तो उनकी अपनी एक अलग ही दुनिया होती है। उनके अपने-अपने खेल-खिलौनें होते हैं, जिनमें वे दुनियादारी के तमाम झमेलों से कोसों दूर अपनी बनायी दुनिया में मस्त रहते हैं। इसीलिए तो उन्हें भगवान का रूप कहा जाता है। प्रायः सभी बच्चों को बचपन में खेल-खि... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   2:00am 2 Sep 2019 #मिट्टी के गणेश
Blogger: Kavita Rawat
हर मुश्किल राह आसान हो जाएगी तेरी धीरज रख  आगे कदम बढ़ा के तो देख बहुत हुआ तेरा अब सुनहरे ख्वाब बुनना नींद त्याग और बाहर निकल के तो देख कैसे-कैसे   लोग वैतरणी तर  गए  सरपट याद कर फिर उचक-दुबक चल के तो देख कुछ भी हासिल न होगा बैठ किनारे तुझे हिम्मत कर  गहरे पानी उतर के तो देख ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   1:30am 24 Aug 2019 #कविता
Blogger: Kavita Rawat
जब-जब 15  अगस्त को लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाता है तब-तब स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु न्यौछावर हर शहीद सबको याद आने लगता है प्रधानमंत्री जी पहले देश की कठिनाईयों, विपदाओं पर बहुत देर गंभीर रहते हैं फिर भावी योजना पर प्रकाश डाल वर्षभर की उपलब्धियों का बखान करते ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:20am 14 Aug 2019 #कविता
Blogger: Kavita Rawat
प्रस्तुत है- प्लीजेंट वैली राजपुर, देहरादून से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'हलन्त'के अंक अगस्त, 2019 में प्रकाशित मेरी रचना 'अबकी बार राखी में '... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   2:00am 11 Aug 2019 #रक्षाबंधन
Blogger: Kavita Rawat
आज आपके लिए प्रस्तुत है - दैनिक भास्कर DB स्टार भोपाल, मंगलवार, 30-07-2019 travel में प्रकाशित यात्रा वृत्तांत "काठमांडू की वादियों में बिताए सुकून के पल"... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   2:30am 31 Jul 2019 #यात्रा वृतांत
Blogger: Kavita Rawat
मेरा घर चार मंजिला इमारत के भूतल पर स्थित है। प्रायः भूतल पर स्थित सरकारी मकानों की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वालों के जब-तब घर भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते किसी कूड़ेदान से कम नहीं रहती है, फिर भी एक अच्छी बात यह रहती है कि यहां थोड़ी-बहुत मेहनत मशक्कत कर प... Read more
Blogger: Kavita Rawat
 गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टियाँ  लगते ही सुबह-सुबह की खटरगी कम होती है, तो स्वास्थ्य लाभ के लिए सुबह की सैर करना आनंददायक बन जाता है। यूँ तो गर्मियों की सुबह-सुबह की हवा और उसके कारण आ रही प्यारी-प्यारी नींद के कारण बिस्तर छोड़ने में थोड़ा कष्ट जरूर होता है, लेकि... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:30am 31 May 2019 #लेख
Blogger: Kavita Rawat
वह माँ जो ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर अपनों को समाज में एक पहचान  देकर खुद अपनी पहचान घर की चार दीवारी में सिमट कर रख देती है और निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐसी माँ का एक दिन कैसे हो सकता है! घर-दफ्तर के जिम्मेदारी के बीच द... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   2:40am 11 May 2019 #मातृ दिवस विशेष
Blogger: Kavita Rawat
मजदूर! सबके करीब सबसे दूर कितने मजबूर! कभी बन कर कोल्हू के बैल घूमते रहे गोल-गोल ख्वाबों में रही हरी-भरी घास बंधी रही आस होते रहे चूर-चूर सबके करीब सबसे दूर मजदूर! कभी सूरज ने झुलसाया तन-मन जला डाला निवाला लू के थपेड़ों में चपेट भूख-प्यास ने मार डाला समझ न पाए क्यों ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   10:00am 1 May 2019 #मजदूर
Blogger: Kavita Rawat
चैत्रेमासि सिते मक्षे हरिदिन्यां मघाभिधे। नक्षत्रे स समुत्पन्नो हनुमान रिपुसूदनः।। महाचैत्री पूर्णिमायां समुत्पन्नोऽञ्जनीसुतः। वदन्ति कल्पभेदेन बुधा इत्यादि केचन।। अर्थात्-चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन  मघा नक्षत्र में भक्त शिरोमणि, भगवान राम के अनन्य स्नेह... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:30am 18 Apr 2019 #समसामयिक
Blogger: Kavita Rawat
होली पर्व से सम्बन्धित अनेक कहानियों में से हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रहलाद की कहानी बहुत प्रसिद्ध है। इसके अलावा ढूंढा नामक राक्षसी की कहानी का वर्णन भी मिलता है, जो बड़ी रोचक है।  कहते हैं कि सतयुग में रघु नामक राजा का सम्पूर्ण पृथ्वी पर अधिकार था। वह विद्वान, मधुरभाषी ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   2:30am 19 Mar 2019 #लेख
Blogger: Kavita Rawat
मुर्गा अपने दड़बे पर बड़ा दिलेर होता है अपनी गली का कुत्ता भी शेर होता है दुष्ट लोग क्षमा नहीं दंड के भागी होते हैं लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं हज़ार कौओं को भगाने हेतु एक पत्थर बहुत है सैकड़ों गीदड़ों के लिए एक शेर ही ग़नीमत है बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए च... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   2:30am 21 Feb 2019 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat
हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के  जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बाग... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:30am 10 Feb 2019 #पेड़-पौधों का महत्व
Blogger: Kavita Rawat
          हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के  जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:30am 10 Feb 2019 #पेड़-पौधों का महत्व
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आज वैवाहिक जीवन की 23वीं वर्षगांठ पर पहले पहल प्यार में गुजरे प्रेम पातियों में से निकली एक पाती प्रस्तुत है-   चल पड़ी है गाड़ी आजकल उनके प्यार की सुना है कन्हैया बना चितचोर रहती उन्हें हर घड़ी अब उनके इंतजार की रोम-रोम पुलकित हो उठते जब भी बजती घंटी झनक उठते दिलतार डूबे म... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   5:59am 30 Nov 2018 #वैवाहिक वर्षगांठ
Blogger: Kavita Rawat
मक्खन की हंड़िया सिर पर रखकर धूप में नहीं चलना चाहिए बारूद के ढ़ेर पर बैठकर आग का खेल नहीं खेलना चाहिए छोटा से पैबंद न लगाने पर बहुत बड़ा छिद्र बन जाता है धारदार औजारोंं से खेलना खतरे से खाली नहीं होता है काँटों पर चलने वाले नंगे पांव नहीं चला करते हैं चूहों के कान होते हैं ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:30am 26 Nov 2018 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat
लम्बी उम्र सब चाहते हैं पर बृढ़ा होना कोई नहीं चाहता है यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है छोटी उम्र या कोरे कागज पर कोई भी छाप छोड़ी जा सकती है युवा के पास ज्ञान तो वृद्ध के पास सामर्थ्य की कमी रहती है बूढ़ा भालू धीमें-धीमें करके ही नाचना सीख पाता है... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   2:30am 16 Nov 2018 #बचपन
Blogger: Kavita Rawat
आओ मिलकर दीप जलाएं अँधेरा धरा से दूर भगाएं रह न जाय अँधेरा कहीं घर का कोई सूना कोना सदा ऐसा कोई दीप जलाते रहना हर घर -आँगन में रंगोली सजाएं आओ मिलकर दीप जलाएं. हर दिन जीते अपनों के लिए कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखें हर दिन अपने लिए रोशनी तलाशें एक दिन दीप ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   9:00am 7 Nov 2018 #दीपपर्व
Blogger: Kavita Rawat
मुझे बचपन से ही रामलीला देखने का बड़ा शौक रहा है। आज भी आस-पास जहाँ भी रामलीला का मंचन होता है तो उसे देखने जरूर पहुंचती हूँ। बचपन में तो केवल एक स्वस्थ मनोरंजन के अलावा मन में बहुत कुछ समझ में आता न था, लेकिन आज रामलीला देखते हुए कई पात्रों पर मन विचार मग्न होने लगता है। रा... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   2:30am 19 Oct 2018 #मारीच
Blogger: Kavita Rawat
आज आया है शिवा का जन्मदिन पर नहीं है कोई मनाने की तैयारी मेज पर केक बदले पसरी किताबें क्यों परीक्षा पड़ती सब पर भारी! अनमना बैठा है उसका मिट्ठू टीवी-मोबाईल से छूटी है यारी गुमसुम है घर का कोना-कोना क्यों परीक्षा पड़ती सब पर भारी! घर में लगा हुआ है अघोषित कर्फ्यू बस दिन-रात ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   2:30am 20 Sep 2018 #परीक्षा के दिन
Blogger: Kavita Rawat
हमारी भारतीय संस्कृति में गणेश जी के जन्मोत्सव की कई कथाएं प्रचलित हैं। हिन्दू संस्कृति (कल्याण) के अनुसार भगवान श्रीगणेश के जन्मकथा का इस प्रकार उल्लेख है- “जगदम्बिका लीलामयी है। कैलाश पर अपने अन्तःपुर में वे विराजमान थीं। सेविकाएं उबटन लगा रही थी। शरीर से गिरे उबट... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   2:30am 13 Sep 2018 #गणेशोत्सव
Blogger: Kavita Rawat
पहनने वाला ही जानता है जूता कहाँ काटता है जिसे कांटा चुभे वही उसकी चुभन समझता है पराये दिल का दर्द अक्सर काठ का लगता है पर अपने दिल का दर्द पहाड़ सा लगता है अंगारों को झेलना चिलम खूब जानती है समझ तब आती है जब सर पर पड़ती है पराई दावत पर सबकी भूख बढ़ जाती है अक्सर पड़ोसी मुर्... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   2:50am 1 Sep 2018 #कविता
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