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रे मिटटी के मानुस आखिर ये तुझे क्या हुआ ,ज़रा बता कितने दिनों से मिट्टी को नहीं छुआ ...आज शाम अचानक पैर की एक उंगली हल्की से चोटिल हो गयी , पास पड़े गमले में से मेरे डाक्टर साहब को निकाल कर मैंने वहां लगा लिया ,सो बरबस ही मुझे ये किससे याद आ गए | वैसे मेरा बहुत सारा समय मिट्टी के स...
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अजय कुमार झा
Tag :कुछ भी कभी भी
  July 23, 2017, 3:38 pm
कल हमारी बहुत सी मित्र दोस्त सहेलियों ने बड़ी ही मार्के की बात कही , वैसे ऐसा तो वे अक्सर करती हैं , कि सालों साल और लगभग पूरी उम्र हमारी माँ , बहिन और पत्नी की भांति वे सब , घरेलू काम , जिसमें सबसे प्रमुख घर के सभी सदस्यों के पौष्टिक और सुस्वाद भोजन तैयार कर सबको खिलाना , सबसे ...
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अजय कुमार झा
Tag :एक पन्ना
  July 16, 2017, 10:50 am
दंगल - अखाड़े में ,कुश्ती है , और है बेटियाँ ,बेटियों की हिम्मत ,बेटियों की लड़ाई , बेटियों की जीत , बाप की जिद्द ,बाप का संघर्ष ,बाप की जीत भी , देश , समाज , खेल ,खेल की राजनीति ...बस कुछ है इस अखाड़े में ..आमिर खान के साथ जो बात जुडी हुई है और वो यकीनन हठात ही नहीं जुडी है ..,..वो है उनके Mr. Per...
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अजय कुमार झा
Tag :कुश्ती
  December 25, 2016, 5:08 pm
रावण-दहन समय :रात्री आठ बजे स्थान : रामनगर चौक , कृष्णा नगर , दिल्ली पोस्ट : रिपोर्ट/टिप्पणी /लेख /फोटो 11 .10.2016इसे अब इत्तेफाक माना जाए या कलियुग की परिणति कि हर साल लोगों द्वारा जलाए जाने वाले रावणों(पुतलों) की लगातार  बढ़ती संख्या और सेना होने के बावजूद ,अब आजकल का रावण बेहद ...
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अजय कुमार झा
Tag :Ravan Dahan
  October 12, 2016, 10:29 pm
pic (courtesy indian express)The moment she wast thought to be murdered for the first time in the dirty mind, or say weak so much to be treated as human being, from that only moment Karuna died, or deteriorated to be get stabbed brutally .And , Just a second , why for this moment , and why not the moment when judiciary, system, executors, society , media , laws , No One ...and Nothing ...nothing made happened, that the culprit of the most heinous violence and brutal most crime ,which boiled up the mass and state ( although now it can be said that as it was shown so  to us )were not get hanged to death , till date . And the worst one is that one of those bad guys , the so called and...
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अजय कुमार झा
Tag :english post
  September 23, 2016, 6:50 pm
... डर था वही हुआ जैसे ही लोगों ने चिल्लाना शुरु किया और उनकी चिल्लाहट से प्रेरित होकर मीडिया ने उससे ज्यादा आवाज में चीत्कार राग में रिरियाना शुरू किया कि राजधानी दिल्ली के वह तथाकथित कर्ता धर्ता ऐसे विकट समय में जाने प्रदेश से बाहर क्या कर रहे हैं चीख पुकार मचाई गए एलज...
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अजय कुमार झा
Tag :दिल्ली
  September 17, 2016, 6:55 pm
इस यात्रा  वृतांत  की  ये  अंतिम  कड़ी  है ,इससे पहले की कड़ियाँ आप यहाँ ,यहाँ और यहाँपढ़ सकते हैं तो जैसा कि मैंने आपको पिछले पोस्ट में बताया था कि मनाली के क्लब हाउस  से  निकलने  के बाद  हमारा अगला और शायद इस यात्रा  का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़  चलना स्...
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अजय कुमार झा
Tag :बर्फ
  August 28, 2016, 6:45 am
पिछली गर्मियों की छुट्टीयों में अचानक ही पहाड़ों की सैर का बना कार्यक्रम कैसे आगे बढ़ रहा था ये आप इनऔर इन पोस्टों में पहले ही पढ़ देख चुके हैं | शिमला , कुफरी आदि के बाद स्वाभाविक रूप से अगला पड़ाव था मनाली | बुलबुल की तबियत अब ठीक हो चुकी थी और श्रीमती जी के ऊपर घुमावदार र...
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अजय कुमार झा
Tag :पहाड़
  December 29, 2015, 7:01 pm
इस सफ़र की शुरुआत और पहले पड़ाव तक पहुंचे की कहानी आप पढ़ चुके हैं | वहां पहुँचते ही सबसे पहले जो बात सबके मुंह से निकली वो ये कि जोरों की भूख लगी है सो पहले पेट पूजा की जाए | शिमला में प्रवेश करते करते बारिश की फुहारों ने भी स्वागत करते हुए जता और बता दिया था कि अब अगले एक सप्त...
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अजय कुमार झा
Tag :
  September 27, 2015, 8:56 pm
चांदी की छत बहुत समय से कहीं  बाहर निकल पाने का अवसर आते हुए भी कहीं न कहीं कुछ न कुछ ऐसी वजह निकल ही आती थी की ठीक आखिरी वक्त पर भी वो स्थगित हो जाया करता था | पिताजी के फ़ौजी जीवन के कारण पहले ही पूरा बचपन यायावरी रहा सो देश के बहुत सारे भागों के बहुत सारे खूबसूरत शहरों ,नग...
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अजय कुमार झा
Tag :मणिकरण साहिब
  July 11, 2015, 1:46 pm
समय घूम फ़िर कर वहीं आ खडा होता है और ऐसे समय में तो मुझे लगता है मानो हम सब किसी पार्क में एक दूसरे के पीछे भाग भाग कर गोल गोल घूम घूम कर रेलगाडी छुक छुक छुक छुक खेलने में लगे हैं  । दिल्ली विधानसभा चुनाव एक बार फ़िर से लडे जाने वाले हैं , अपने यहां इस देश में लोकतंत्र इतने ह...
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अजय कुमार झा
Tag :राजनैतिक टिप्पणी
  January 29, 2015, 10:19 pm
पिछले साल से इस नए साल तक यदि कोई विवाद घिसटता चला आ रहा है तो उसमें से नि:संदेह एक हाल ही में प्रदर्शित सिनेमा पीके भी है । हालांकि इस सिनेमा के विषय या इसके प्रदर्शन से पहले भी इसके साथ विवाद तो तभी शुरू हो गया था जब इसका पहला पोस्टर जारी किया गया था जिसमें अभिनेता आमिर ख...
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अजय कुमार झा
Tag :धर्म
  January 11, 2015, 5:48 am
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अजय कुमार झा
Tag :शब्द चित्र
  December 31, 2014, 12:18 pm
समय लगभग साढे सात -आठ बजे शाम का वक्त । पिछले कई दिनों से बालों की कटाई का काम किसी न किसी अनचाही बाधा/व्यवधान के कारण स्थगित हो जाता था ।  अब अक्सर ही ऐसा होता है कि ऐसे कामों के लिए मैं और पुत्र एकसाथ ही निकल जाते हैं । मुख्य सडक पर स्थित सैलून के दरवाज़े पर पहुंचते ही भां...
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अजय कुमार झा
Tag :कुछ भी कभी भी
  November 4, 2014, 6:53 pm
इन पोस्टों में एक , दोऔर तीन , में आप पहले पढ चुके हैं कि जयपुर प्रवास के दौरान अनुज के मित्र मिंटू जी पर हमें जयपुर घुमाने की जिम्मेदारी डाली गई और हवामहल , जलमहल होते हुए हम आमेर के किले से बाहर निकले तो अनुज भी अपनी फ़टफ़टिया पर बहुरिया को लिए हुए हमारे साथ आगे आ मिले , इसके ...
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अजय कुमार झा
Tag :जयपुर यात्रा संस्मरण
  November 2, 2014, 9:26 am
इन पिछली दो पोस्टों पोस्ट नंबर एक , और पोस्ट नंबर दो , में आप पढ चुके हैं कि अनुज द्वारा अचानक ही तय किए गय कार्यक्रम के अनुसार हम जयपुर प्रवास पर थे । पहले दिन की सैर में , बिडला मंदिर , मोती डूंगरी वाले गणेश मंदिर , राजमंदिर सिनेमा हॉल , अलबर्ट म्युज़ियम तथा अक्षरधाम मंदिर द...
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अजय कुमार झा
Tag :जयपुर
  September 16, 2014, 2:59 pm
दिल्ली से जयपुर जाने का कार्यक्रम ज्यों ही बना तो अनुज ने स्वाभाविक रूप से नई नवेली डबल डैकर ट्रेन का चुनाव किया । मैं अपने बचपन में पुणे से मुंबई ऐसी ही एक डबल डैकर ट्रेन में बैठ चुका था , मगर निश्चित रूप से वो इतनी शानदार नहीं थी । गोलू और बुलबुल रेल के उस डब्बे में ही दो ...
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अजय कुमार झा
Tag :दिल्ली टू जयपुर
  September 7, 2014, 4:54 pm
गुलाबी नगरी शहर की जब रुख किया था तब ये सोचा नहीं था कि एक समय ऐसा आ जाएगा जब वास्तविक संसार पर  आभासी दुनिया की छाया इतनी प्रबल हो उठेगी कि सब कुछ उसके पार्श्व में चला जाएगा , हालांकि इसमें बहुत हद तक बदलती हुई परिस्थितियां और लगाता संकीर्ण होता दायरा बहुत हद तक जिम्मे...
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अजय कुमार झा
Tag :गुलाबी नगरी
  July 20, 2014, 6:01 pm
नरेंद्र मोदी ने चुनाव के बाद दिए गए अपने धन्यवाद  भाषण के दौरान ये कहा कि "राज़नीति में कोई दुश्मन नहीं होता"और इस बात को बहुत जल्दी ही वैश्विक फ़लक पे साबित भी कर दिया जब किसी की सोच और कल्पना से कोसों दूर वाले कदम , पडोसी और शाश्चत प्रतिद्वंदी देश पाकिस्तान के प्रमुख नवा...
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अजय कुमार झा
Tag :नरेंद्र मोदी
  May 31, 2014, 7:03 pm
ग्राम यात्रा के दौरान रेल की खिडकी से खींची गई एक फ़ोटो अब इस देश को मिलने वाली रोज़ाना की खबरों में न्यायिक क्षेत्र से जुडी हुआ कोई समाचार , कोई फ़ैसला , कोई रोक न हो ऐसा संभव नहीं लगता । फ़िर इन दिनों तो मामला जीवन और मौत के बीच उठी बहस का है । मामला हत्या के बाद फ़ांसी ,माफ़ी और उ...
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अजय कुमार झा
Tag :राजनीतिक
  February 21, 2014, 10:39 pm
इस देश में आस्था का अर्थतंत्र यूं तो काफ़ी पुराना रहा है किंतु धर्म से आबद्ध होने की परंपरा से विलग स्वयंभू पूजनीयों के आडंबरों के ईर्द गिर्द जमा होने लगी । धर्म गुरूओं और इन अवतारनुमा लोगों ने न सिर्फ़ ढकोसलों और आडंबरों का बहुत बडा साम्राज्य खडा किया बल्कि समाज को बदल...
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अजय कुमार झा
Tag :आडंबर
  February 10, 2014, 8:19 pm
अब से लगभग तीन वर्षों पहले भारतीय लोकतंत्र की पूरी तरह बर्बाद हो चुकी परिपाटी से त्रस्त लोगों को यदि कोई बात अपने घरों से बाहर निकल आने के लिए कारण बनी थी तो वो थी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटने के लिए लोकपाल के रूप में ऐसी संस्था/व्यक्ति को लाने की तैयारी क...
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अजय कुमार झा
Tag :कानून
  February 9, 2014, 3:44 pm
ये मूर्तियां , मां शारदे की जय के नारे से गुण्जायमान हो रही होंगी आज का ही दिन , बहुत बरसों पहले , बहुत बरसों पहले इसलिए कहा है क्योंकि दिल्ली में खानाबदोशी के जीवन से पहले जब एक स्थाई और बहुत ही खूबसूरत जिंदगी जिया करते थे उन दिनों , आज का दिन , यानि वसंत पंचमीं के दिन का मतल...
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अजय कुमार झा
Tag :यादें
  February 5, 2014, 2:14 pm
किसी मुझ जैसे की डायरी का एक पन्ना .............."नाम उसका मुहब्बत था शायद ,जिंदगी के हर मोड पे मुझसे टकराई थी वो ,मैं चलता रहा और इश्क भी ,जाने खुद को और मुझको कहां ले आई थी वो ""हम एक बार जीते हैं , एक ही बार मरते हैं और हमें प्यार भी एक ही बार होता है "फ़िल्म कुछ कुछ होता है का ये डायलॉग ज...
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अजय कुमार झा
Tag :चंद शब्द
  February 1, 2014, 7:05 pm
दिल्ली में रहते हुए अब ये सोचता हूं कि आखिर वो क्या वजह है कि "खबरों के संसार"के अधिकांश "देश"दिल्ली के गलियारों जैसे लगने लगते हैं ।और फ़िर इन दिनों तो यहां झाडू फ़िराई का कार्य प्रगति पर है । पॉलिटिकल स्ट्रैटजीज़ राजनीतिक मान्यताएं बगावत पर उतारू हैं , कहीं न कहीं लोग बाग ...
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अजय कुमार झा
Tag :परिवर्तन
  January 29, 2014, 8:24 pm
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