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पत्तो की डायरी-एक संकलन : View Blog Posts
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पत्तो की डायरी-एक संकलन

                                                                            जब मैं निकलूँ सत पथ पर                                          तुम साया बन चलना साथ,                                          सांसों के संगीत रचयिता                                           पथ पर पकड़ो मेरा हाथ,           उस अम्बर तक जाने को               जहाँ मिले धरती अम्बर से              ...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 28, 2012, 9:08 am
फिरता है आदमीएक रोटी के लिएखानाबदोश सा, खाली पेट के साथखाली हो जाती है आत्मान कोई उमंग, न कोई तरंगन सपने, न भगवानक्योंकि भूखे का भगवान तो रोटी हैअपने बचपन को तंदूर मेंमिटाता है एक बच्चामाँ सड़क किनारेतोड़ती है पत्थरएक रोटी के वास्तेएक लड़की मज़बूर होती हैएक भिखारी स्...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 27, 2012, 8:49 am
तुम ही थे राममेरीभक्ति में,सर्वस्व समर्पितथा मम देवालय के देव तुम्हें तुम्हीं से जीवन जीना सीखा तुम्हीं से श्वांस का आना जाना तुम्हीं से मुस्कान मन्द तुमबिन सीखा मुरझाना, पर न समझ सकेनिस्वार्थ प्रेम को ठुकराकरचले गये धूल सा मुझको, काल केअभिशाप से अहिल्या बन गई मै...
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  February 26, 2012, 8:12 pm
तपतीजमीन पर ,सड़कके किनारेबैठाहै मुख उठाए एक आदमीमाथेपर पसीने की बूदें,मुरझायाचेहरा ,भूरेबाल ,माथेके बलसबउसकी कहानी कहते हैंकिवह सड़क का आदमी है।सड़कने ही उसे जन्मा,सयानाकियासड़कके किनारे ही उसने जीना सीखासारादिन अपनी किस्मत को कोसता सिर्फ पेट भरता है,फुटपाथके ...
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  February 26, 2012, 6:09 pm
ज्ञान के भण्डार , परम उदार गौतम बुद्ध को कोटि कोटि प्रणाम...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 24, 2012, 11:19 pm

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  February 24, 2012, 10:58 pm
यह तुम्हारा पत्र थाजिसने अंधेरी पगडंडी परमुझे उजाला दियाआज भी वह उजाला है भले तुम नहीं हो पाससुख भरी गागर लिएजैसे कोई एक पल में रंग बदल लेता हैबैसे ही बदल गया जिन्दगी का रंगसपनों को लादे कब तक चलना थाकोई बहार तो आनी ही थीअर्थहीन कोलाहल मेंएक हलचल तो होनी ही थीनही भरोस...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 23, 2012, 10:48 pm
 तुम नारी हो कभी न हारी हो, खिली हो भू पर प्रकृति की उत्पत्ति से सजाया है सारा बृह्माण्ड अनगिनत सुरीले सुरों से, व्याकुल सारा संसार तुम बिन हे कृति उपजाती ममता प्रत्येक हृदय में निर्जीवों में भी भरती प्राण वायु लेकिन निज उर को खँगालकर उठती एक चीख मुँह से कि रहने दो अ...
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  February 21, 2012, 9:51 pm
मानव जन का भार उठाधरा सा भारी बन करसब दु:ख शोक समाहित जिसमेंऐसा प्रशान्त बना मुझको,नहीं चाहता अर्थ-धर्मदे तो बस मानवता देदान में मूल्य़ों की चादरशाप अवमूल्यन के नाश का दे,नश्वर जीवन की लय ताल बतालक्ष्यों की डेहरी पर चढ़करऋणता का भार उठा पाऊँऐसी अंत:स्थ आत्मा की हो कट्...
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  February 20, 2012, 4:31 pm
 विश्वास  प्रेम हैं मेरे सच्चे जीवन साथी नित-नित बरसाती बरखा ये लिखी प्रेम की पाती, ये पत्र नहीं हैं ,हैं अमृत के प्याले असीम प्रेम जैसे हैं मुझपर बरसाने वाले, पढ़ लेती हूँ इनको जब-जब मैं मुरझाती नित-नित बरसाती बरखा ये लिखी प्रेम की पाती, एक-एक अक्षर में मेरी एक-एक सांस ...
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  February 20, 2012, 7:14 am
आज खुलीं आँखें गर्वीलींआज खुलीं आँखें गर्वीलींकाली पट्टी की देवी के हाथों में देखोसमय ने मधु मदिरा पीलीआज खुलीं------सोच रहा मानस बेचाराइन रहस्यमयी कर के बिन्दू परकहाँ गये वे धन के प्यालेमान प्रतिष्ठा के रखवालेदिया कटोरा इन हाथों मेंफूलों की भी साँसें गीली,आज खुलीं-----...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 19, 2012, 5:08 pm
तुम बिन लोक जगत मर्माहतसूने अंचल औरइन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दयाकी धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायणजीवनरहा तुम्हारा,इठलाती,बलखातीगुणतेरे ही गाती माँन पड़ता कमगुणगान तुम्हारातूलिकाघिसती जाती माँ,तुमसरस्वती  ज्ञान स्वरों से नहलाओजितने भी घटपीना चाहूँउतनेआज पिल...
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  February 19, 2012, 8:30 am
मधुरतम काव्यसाधना कि भूमिपरबसंती हवा सेहर्श-विशादकी देह पर लिखाजाता है,कोमल विचारशैय्या सेह्रदय की गहराईपरअभिनन्दनकरता यौवनबरसाता है,भवन और भवनोंकीकतारों परलिखे लेखगुफाओं कीदेह को उकेरते कर्कश तीरजीवन की लय ताल को स्याहीमें भिगाता है,पर्वतों कीचाँदनी,सागर की ...
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  February 18, 2012, 7:01 am
 पर्यवेक्षण गृह का पहला दिन मैंने ज्यो ही रखा पहला कदम निगाह एक बच्चे के आँसुओं से टकराकर दिल में उतर गई धीरे से मैंने रूँधाई को दबाकर प्रश्न किया कब से यहाँ हो बेटा नीचे सिर झुकाए, नजरें बचाए बोला कि एक वर्ष से हूँ माँ की बहुत याद आती है, माँ हर बार आती है रोकर चली जाती...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 17, 2012, 7:35 pm
इतना शोरकि खुद की आवाज़ सुनाई नहीं देती,रात के अंधेरे में जबकिपानी की बूँद की टिप-टिप से सोना दूभर होता है,कितना प्रदूषण फैल रहा है कि दुनिया में,दिन के उजाले में,इन्सानियत सुनाई नहीं देती,बेचैन आँखें ढूँढती इधर-उधरअपनो की आवाज ,उनकी ख्वाहिश,उनका रूठना और खिलखिलाना अ...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 16, 2012, 2:10 pm
स्वयं मिलेगीराह तुझेजीवन के संघर्षोंमें,कुछफूल-शूलके हार मिलेंगेकुछविश्वास मिलेगा वर्षों में,सुख दुख काआगम शाश्वत नहीं है पृथ्वीपरजब भेद समयका जान गयातो शोकाकुल क्यों नियति परजब कर में तेरेहै करनी का निस्सीम बलबन न लता वृक्षबन करप्रदान निज को संबल ,निज जीवन जीते...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 15, 2012, 2:19 pm
उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये।जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा  में प्रखर प्...
पत्तो की डायरी-एक संकलन...
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  February 15, 2012, 10:04 am
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