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kagad ki lekhi

           अपनी गलतियों का दोष भाग्य और इश्वर  पर डालते जरा भी नहीं सोचते कि कभी हमारी गलतियों की इन्तहा होगी ?एक तूफान आया और सब अपने साथ बहा के गया।घर,लोग,पशु पेड़ ...हे ईश्वर,जरा भी दया नहीं आई।कितने बच्चे थे ,कितने बूढे  थे कितने लाचार थे।सबको लील लिया .....बहुत शि...
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  July 2, 2013, 10:50 pm
हमारी आस्थाएँ                  मेरी ईश्वर  में गहरी  आस्था है।सुबह की गहमागहमी में घर का काम निबटाने  की जल्दी के बावजूद  नहाकर मंदिर में दीया  जरुर जलाती हूँ।धर्म में भी मेरी उतनी ही आस्था है क्यूंकि कही पढ़ा था कि  धर्म हमे बुराइयों से बचाता है,कर्त्तव्य निर्वाह के लिए प्र...
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Tag :dharm.
  April 12, 2013, 7:37 pm
स्त्री मैने हमेशा सुना कि  स्त्री-पुरुष एक गाड़ी के दो पहिये है और इश्वर की कृपा से इतनी भाग्यशाली रही कि  हमेशा एक स्त्री के रूप में सम्मान पाया .पिता,पति,भाई ,बेटा, मित्र सबने यथोचित सम्मान दिया पर समाज में हो रहे अत्याचार,लड़किओं के प्रति दुर्व्यवहार ने दिल को दुखी ...
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  March 10, 2013, 6:03 pm
कविता मैं बहुत देर तक शब्दों को पकडती रही,कविता रचने का प्रयास करती रही और शब्द उड़ते रहे आगे -पीछे दाएँ -बाएं बनते-बिगडते रहे कभी बादल बन विस्तृत आकाश की सीमा लांघने की कोशिश में विफलकभी चाँद की चांदनी में पिघल गए तो कभी सूरज की गर्मी में जल गए। मैं बहुत देर तक ...
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Tag :shabd
  October 31, 2012, 5:10 pm
हाथहर बेटी मानती है कि उसके पिताजी इस दुनिया  का सबसे अच्छे पिता  हैं ,उन जैसा कोई दूसरा हो ही नहींसकता .मुझे भी यही विश्वास  है .मेरे बाबूजी जैसा कोई नहीं सारे संसारमें .कोई समस्या हो ,कोई प्रश्न हो सबका हल बाबूजी के पास ....आज मैं  जहाँ हूँ जैसी भी हूँ बाब...
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  October 10, 2012, 9:18 pm
आज सुबह-सुबह एक कार्यक्रम देख रही थी.इमरान साक्षत्कार कर रहे थे जाने माने कलाकार विक्टर बनर्जी का..इसी दौरान उन्होंने  एक बहुत ही हृदयस्पर्शी कहानी सुनाई जो इस प्रकार है .....   'उत्तराखंड  बचाओ आन्दोलन' के समय की बात है.विक्टर उस समय मसूरी में रह रहे थे और आन्दोलन में स...
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  September 30, 2012, 10:01 pm
           रोज़ ६.१५ का समय तय है .हम तीनों  नियमानुसार  निकल पडे.तय स्थान है जहाँ शाम को हम walk के लिए जाते है .walk के साथ talk  भी उसी speed से होता है पतियों की बुराई से लेकर बच्चों की पढाई और बाइयों का रोना .......दिन भर की हलचल......सबको साझा करने का वही समय है (ये अलग बात है कि पत...
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  September 20, 2012, 5:10 pm
उम्र ..........आओ समय मैं सहेज लूँबंद कर अपनी हथेलीताउम्र न खुले ये पहेली .....जान भी न पाए कोईक्यों हुए  थे गाल  गुलाबी .क्यों नशे में बंद आंखेक्यों छाई  थी वो लाली।याद कर कर के वो शर्माना .बस  धीरे  से मुस्कानाकही खो जाना ,गुम  हो जानारातों को जागते रहनाउजाले में भी घबरानाकभी  ...
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  September 12, 2012, 7:17 pm
           फिर बेटी ने कहामाँ मुझको भी आने दो अपनी गोद सजाने दो बनकर आसमान में चंदा चांदनी से भर दूंगी बनकर असमान का सूरज मैं रौशनी कर दूंगी बनकर फूलों की पंखुडिया अपनी गोद सजाने दो आने दो माँ आने दो माँ अपनी गोद सजाने दो तितली बनकर आसपास जब मैं  लहराऊंगीलाल ला...
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  September 11, 2012, 5:30 pm
           फिर बेटी ने कहामाँ मुझको भी आने दो, अपनी गोद सजाने दो बनकर आसमान में चंदा ,चांदनी से भर दूंगी बनकर असमान का सूरज ,मैं रौशनी कर दूंगी बनकर फूलों की पंखुडिया, अपनी गोद सजाने दो आने दो माँ ,आने दो माँ ,अपनी गोद सजाने दो तितली बनकर आसपास ,जब मैं  लहराऊंगीलाल ला...
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Tag :maan
  September 11, 2012, 5:30 pm
        कल अचानक उनकी मृत्यु का समाचार मिला .कुछ भी असामान्य  नहीं था. ८० की उम्र में मृत्यु .....सुनकर उतना दुःख नहीं होता.  हाँ अपनों को खोने  की कसक तो हमेशा रहती है.बहुत पहले मिलना हुआ था बुआ से पर फूफाजी से नहीं के बराबर मुलाकात होती. यू तो बुआ से रिश्ता कोई ब...
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  September 2, 2012, 9:11 pm
नींद आज खुमारी सी छाई हैशायद बहुत दिनों के बाद,नींद आई है ......आज बारिश हुई है फिर से कहींअभी-अभी खबर ये आई हैमहकी हुई है खुशबु से हर ग़ज़ल जो हमने गाई है  यूँ तो कहते हैं  सपने आते है नींदों में.  हमने तो हरदम  उनीदी आँखों में सपनो की दुनिया सजाई है....... रात दिन  जाग-जाग कर हमने ...
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  August 7, 2012, 10:48 pm
पर तुम नहीं आये .......क्या विवाह की रस्म ,लिए दिए वचन प्रेम की कसौटी है ? लगभग ७५% लोग तो वास्तव में जीवन अकेले जीते है ,क्या गृहस्थ और प्रेम एक दूसरे का पर्याय है?या प्रेम एक भाव है और गृहस्थी एक जिम्मेदारी ....या दोनों एक है ?मैं इंतज़ार करती रहीपर तुम नहीं आए ........बस सप्तपदी फेर...
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  July 15, 2012, 6:40 pm
प्रेम कुछ देर और खामोश बैठो कि दिल की जुबान कुछ कहना चाहती है कोई गीत होंठों  से निकल न जाएँकि दिल की धड़कन कुछ गुनगुनाती है .महसूस करो  इस प्यार की कशिशनर्म हथेलिओं की रेखाओं  का मिलना बंद आंखों से देखने की कोशिश लरजते बादलों के बीच कौंधती बिजली .कि कहीं  हुई बारिश स...
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  July 12, 2012, 8:06 pm
बस यूँ ही आँख बंद किये आँगन में बैठीधूप पी रही थीकि एक नन्ही सी तितलीकाली पीली धब्बो वालीबांह पर  आकार बैठ गयीऔर बार बार पंख फडफडा कर अपना अस्तित्व जताने कीकोशिश करती रही .हवा का झोंका,मेरी सांसो की गति, उसे उड़ा न सकी मैं उनींदी आँखों से देखती रही उसे निहारती रही मै...
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  July 4, 2012, 5:04 pm
उम्मीद दिन भर में कई चेहरे ऐसे दिखते है जो निराश,हताश हो चुके है.ज़िन्दगी कभी कभी किसी के लिए इतनी निष्ठुर क्यों हो जाती है .काश कि एक उम्मीद का दीया  उस ज़िन्दगी में  जला सकूँ ...जब  भी देखती हूँ तुम्हारी आंखों में खो जाती हूँ दर्द की गहराई मेंउतरती जाती हूँ गहरे और ग...
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  June 28, 2012, 11:10 pm
1 june2012.......अट्ठारह वर्ष यूँ ही गुज़र गए आज भी याद है कैसे नवेली दुल्हन बनकर आई  तुम्हारी आंगन मेंकितना शरमाई थी कितना घबराई  थी न जानेकैसे निभेगा जन्मों का साथ माँ ने कहा था  जब बांधी थी दुपट्टे में गांठ अब है निभाना ज़िन्दगी भर  साथ और तब से चाल रहे है साथ क़ि इतने वर्षो...
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  June 19, 2012, 10:25 pm
समुंदर की लहर बड़ी बेआबरू है जी बेलिहाज होकर यू ही इतराती बलबलाती है, बलखाती चली आती है न जाने कैसेकिस छोर से पागल, मिटा कर चली जाती है समुंदर की लहर देखो .कभी गाती कभी डरातीकभी बुलाती अपनी ओर कभी उथली कभी धुंधली नागिन सी ये बलखाती चली आती है समुंदर की लहर देखो .कभी...
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  May 27, 2012, 10:07 pm
ठहर  जा शाम कुछ पल और     अभी होना है मिलन बाकीधरा और सूरज कागुलाबी  रंगतों में डूबना हैधरा को कि आते ही शुरू होगी चंदा की मधुर शरारत किसी ओट से करेगा वोएक कोशिश सताने की कहीं लजा न जायेदुल्हन सी धरा अलबेली समेटे जो हरी चुनरी छिपाए नूर सा चेहरा अधखुली आँखों से बाट जोहत...
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  April 30, 2012, 10:54 pm
मेरा जन्म मुक्तेश्वर की सुरम्य वादियोंमें हुआ. मुक्तेश्वर को भूल पाना ,पल भर भी बिसराना मेरे लिए मुश्किल है .मैं हर पल वहा की हवा को अपने भीतर महसूस करती हूँ ........हिमालय की सुर्ख सफ़ेद पर्वत श्रखलाओं  के नीचे हरे देवदार के दरख्तों के बीच बुरुंश के लाल फूलों की छटाएंसफ़...
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  April 28, 2012, 11:42 pm
मित्र चलो दोस्त , कुछ फुर्सत मिली है बिता लें लम्हे साथ  कुछ बातें कुछ किस्से कुछ यादें .कुछ पल और जी ले खिलखिला के हंस ले .दिलों के जोड़-तोड़ तमाम बंध खोल  पंछी से उड़ लें समय के आसमान में.थोड़ी सी और दूरी जो रह गयी थी अधूरी तय कर ले चलते चलते  सागर के साथ साथ .चंदा की रौ...
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  April 28, 2012, 10:00 pm
क्या बनोगी ?बचपन में जब भी मैं अपनी बेटी से कहती" क्या बनोगी " उत्तर होता "माँ "थोड़ी बड़ी होने पर उत्तर होता "बाई ".उसकी मासूमियत पर हम खूब हंसते .अब वो और बड़ी हो गयी है कि अब तय करना होगा वास्तव में उसे क्या बनना  है? फिर हमारा  जीवन भौतिकता की  चपेट में कुछ इस तरह  है कि भ...
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  March 25, 2012, 4:33 pm

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  March 25, 2012, 4:27 pm
बहुत दर्दनाक है बेवक्त पति की मौत के सदमे से उबरना एक पत्नी के लिए .....यू तो किसी भी एक साथी का जाना जीवन में खालीपन भर देता है एक मित्र के पति की मृत्यु ने बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर दिया .मृत्यु की वास्तविक  भयावहता ने हिला कर रख दिया ,इश्वर उसे शक्ति दे इस हादसे से उबरने क...
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  March 17, 2012, 10:52 pm
महिला दिवस इस बार भी जोर शोर से मनाया गया महिला दिवस .......अखबारों  में खूब हुआ प्रचार प्रसार पन्ने के पन्ने भर गएउपहारों के इश्तहारों से लेखों से जाबांज महिलाओं की कथाओं से अभ्यर्थनाओं से और भर गए  उपहारों से  बाज़ारहर  कोई भागता  रहा करता रहा खरीदारी मनाता रहा महि...
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Tag :
  March 11, 2012, 1:52 pm
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