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नूतन ( उद्गार)

नवरात्रि स्पेशल – नवसंवत्सर-विक्रमसंवत और वासंतिक नवरात्र जब कड़ाके की ठंड समाप्त होने लगती है तब कुछ गुलाबी सर्दियों के साथ ही आता है बसंत और ले आता है नैसर्गिक सुंदरता,साथ ही त्योहारों की भरमार । हवाएँ रूमानी हो जाती हैं, चारों ओर रंग,सुगंध, महुए की गंध,दहकते टेसू,महक...
नूतन ( उद्गार)...
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  April 4, 2019, 11:23 pm
स्त्रीविमर्श या स्त्रीवादी विचार क्या है? उसका समग्र रूप क्या है ? प्रश्न यह उठता है कि क्या स्त्री विमर्श के माध्यम से आप और हम जिस स्त्री पर चर्चा करना चाहते हैं उसे हृदय की उतनी गहराई से जानते हैं? उसकी जिन समस्याओं पर विचार कर समाधान बतलाए जा रहे है क्या उनपर सच में क...
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  June 30, 2018, 6:54 pm
बेटियाँ घर आँगन की रौनक  जिस प्रकार एक उपवन बिना चिड़ियों की चहचहाहट के अधूरा और सूना-सूना लगता है उसी प्रकार बेटियों के बिना घर का उपवन,आँगन भी अधूरा और सूना लगता है। इसका दर्द वही समझ पाता है जिस घर में बेटी नहीं होती। सोच कर देखिये । इतिहास उठा कर देखे तो हम पाएंगे कि ...
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  April 4, 2018, 11:04 pm
पर्यावरण प्रदूषण – वायु प्रदूषण या धुंये का राक्षस -------------------------------------------------------------पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है। पृथ्वी के नजदीक लगभग 50 km ऊँचाई पर स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है। यह स्तर सूर्यप्रकाश की पारबैंगनी (UV) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुचने से रोकता ह...
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  April 4, 2018, 11:00 pm
पर्यावरण में महिलाओं की भूमिका ----------------------------------------------सर्वप्रथम हम अपनी संस्कृति पर दृष्टिपात करें और सामाजिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों को देखें तो यह पता चलता है कि प्राचीन काल से ही महिलाएँ पर्यावरण-संरक्षण के प्रति जागरुक रही हैं, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण आज भी महिलाओं द्...
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  April 4, 2018, 12:47 am
“भारतीय नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी, वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं।” -भारत कोकिला सरोजिनी नायडू । अल्टेकर के अनुसार प्राचीन भारत में वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति समाज और परिवार में उच्च थी, परन्तु पश्चातवर्ती काल में कई कारणों से उसकी स्थिति में ह्रा...
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  October 2, 2016, 5:28 pm
ग्रीष्म के अवसान पर काले-काले कजरारे मेघों को आकाश मे घुमड़ता देख पावस ऋतु के प्रारम्भ मे पपीहे की पुकार और वर्षा की फुहार से आभ्यंतर आप्लावित एवं आनंदित होकर जीव जन्तु सभी इस मास को पर्व की तरह मनाने लगता है। मनुष्य तो सावन के मतवाले मौसम में झूम उठता है ,पक्षियों की भी ...
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  August 6, 2015, 4:40 pm
पूरा आलेख पढ़िये - तिरस्कार का दंश झेलते बुजुर्ग---------------------------------------------------------------बाल्यावस्था में भगवान बुद्ध एक कृशकाय वृद्ध की दयनीय दशा देखकर द्रवित हो उठे थे, उनका हृदय वितृष्णा से भर गया था. इसीलिए कुछ लोग वृद्धावस्था को जीवन का अभिाप मानते हैं. क्योंकि इस अवस्था तक आते-आते ...
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  October 1, 2014, 7:02 pm
दया के सिक्के - ये सत्य घटना  है--------------------------------------------बात मैं अपने बचपन से आरंभ करती हूँ - एक समय था जब मैं गरीबों पर बहुत करुणा करती थी मुझे लगता था कि ये बेचारे गरीब हैं और इन्हे हमारी जरूरत है । इनकी हर संभव मदद करनी चाहिए । सो मैं किसी भी गरीब को खाली हाथ नहीं जाने देती थी यहा...
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  September 22, 2014, 6:41 pm
आलेख ----------साहित्य के स्वरूप को लेकर चलने वाली बहस कोई नयी चीज़ नहीं है। किसी पुराने ज़माने की कालातीत कहानी जैसे ही पुरातन साहित्य शास्त्रियों की पुस्तकों के सिद्धान्त, हमारी आधुनिक साहित्यिक चिंतन में प्रतिष्ठित हैं। यूँ साहित्य के स्वरूप पर हमारे विद्वान साहि...
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  July 21, 2014, 11:31 pm
आकाश में काले-काले बादलों के छाते ही मन में उमंग जाग उठती है। मन करता है कि उड़ कर बादलों को छू लिया जाए। इसी इच्छा को पूरी करने के लिए वृक्षों की शाखाओं पर झूले डाल दिए जाते हैं और उन झूलों पर बैठ कर ऊंची-ऊंची पींगें लेने की होड़ लग जाती है। झूला झूलने वाला हर व्यक्ति बादलों...
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  July 16, 2014, 3:23 pm
प्यारी गुड़िया चंचला ,खेले दौड़े धूप । नन्हे नन्हे पाँव हैं ,मनभावन है रूप ॥मनभावन है रूप , तोतली बातें करती । बात बात मुस्कात ,सभी के मन को हरती॥करे जतन से प्यार ,हमारी मुन्नी न्यारी । सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया प्यारी ।।...
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  May 12, 2014, 1:41 pm
कुछ मुस्कुरा लें :-गम का मारा मनुष्यमंदिर मे पहुँच लगा रोने बार बारप्रभु को दोषी ठहरानेप्रभु जी मगनटिकाये अपने हाथ पर सीससोने मे लगे , वो लगा ज़ोर से घंटा बजानेटन्न टन्न टन्न टन्न टन्नखुली आँख प्रभु की, कसमसायेबोले क्या है ? तूने मेरी नींद खराब कर दीमनुष्य रोने लगा , गि...
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  May 10, 2014, 6:52 pm
ऐसे नेता को क्या कहिएजो पीटे हिन्दू मुस्लिम रागसांप्रदायिकता का बिगुलबजा कर लगाये देश मे आग ऐसे नेता .......जिनका कोई ईमान नहीं धर्म से कोई प्रेम नहीं राष्ट्र प्रेम का ढोंग दिखाएँ बेबस जनता को लूटें खाएं ऐसे नेता .......गिरगिट से होते नेता पल मे रंग बदलते नेता पल...
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  May 2, 2014, 11:59 pm
आने वाली सरकार से लोगो क्या अपेक्षाएं है -मैंने कई गण मान्य लोगो से इस विषय पर बात की । उन सबके विचार इस प्रकार रहे--1) प्राइवेट स्कूलों , कलेजो,की फीस बहुत ज्यादा है अंधाधुंध पैसा बहाओ तब कहीं जाकर अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा दिला सको । स्कूल हो या कालेज सभी जगह यही हाल है ।...
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  April 30, 2014, 8:27 am
कोहरा सूरज धूपआदरणीय बृजेश नीरज जी की काव्य कृति कोहरा सूरज धूप अपने नमानुकूल ही छाप छोड़ती है । जिस प्रकार सर्दी मे कोहरा छाया होता है और सूरज के निकलते ही धीरे छटने लगता है और चारों ओर अच्छी धूप फैल जाती है यह धूप जनमानस को राहत पहुंचाती है । उनकी कृति यथार्थ का सम्पूर...
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  April 22, 2014, 7:30 pm
इकड़ियाँ  जेबी से‘ये इयकड़ियाँ नहीं अनमोल अशरफियाँ है’ आ0 योगराज सर की ये पंक्ति इस रचना संकलन के लिए एकदम उपयुक्त बैठती है । आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी का शब्द संसार बहुत विस्तृत है । उन्होने अपने मनोभावों को बड़ी ही सुंदरता से एक एक नगीना सा जड़ा है । उनकी प्रयोग धर्मिता हर ...
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  April 17, 2014, 8:57 pm
तेरी आँखों मे वो नूर है साई जब भी विकल हो शरण मे आई तूने संभाला है मुझको मेरे साईं गले से हर बार तूने लगाया है साईं मेरे साईं ............ बहुत जख्म खाये जहां मे हमने तुमने ही आके मेरी बिगड़ी बनाई तेरी रहमत का जलवा है बिखरा और तेरी कृपा का ही नूर है साईं मेरे साई ..........
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  April 3, 2014, 12:18 am
लीजिये फिर आ गई है होली !! चलिये मनाए प्यार से , उत्साह से , उमंग से !!होली जहां एक ओर सामाजिक एवं धार्मिक त्योहार है वहीं यह रंगो का भी त्योहार है । होली आते ही हर ओर रंग ही रंग दिखने लगता है । टेसू डालियो पर दहकने लगता है , रंग बिरंगे फूल खिल खिलखिलाते से लगते है ,  वातावरण  ...
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  March 15, 2014, 1:41 am
मूक नहीं हूँ लिखते जाना ही मेरी  जात है ,तम की स्याही से लिखती नित्य नव प्रभात हूँ ।  उजियारा फैलाने को रोज नया सूरज मै लाती हूँ  ,जो मूक हो जीते है उनकी जुबान मै बन जाती हूँ ।   पढा लिखा कर सम्मान की अलख मै जगाती हूँ  ,झूठे हो चाहे जितने पर सच्चाई की धार लगाती हूँ ।अ...
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  March 5, 2014, 12:40 pm
चाँदी के रथ पे सवार लिए जीवन नवल चिर प्रीतम संग चंद्रिका आयी धवल .............. प्रिय सखी निशा संग भरती किलकारियाँ गगन से धरा तक करती अठखेलियाँ रूप किशोरी सी चंद्रिका आयी धवल .........शशि प्रियतम संगचमचम सितारों वाली श्याम चुनरिया ओढ़े  धीरे धीरे दबे पाँव प्रिय सुंद...
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  February 27, 2014, 12:05 am
( 1 ) दो पुष्प खिले हर्षित हृदय लीं बलैयां ( 2 )धीरे धीरे बढ़ चले राह पकड़ी बचपन डगर ( 3 )मार्ग दुर्गम वे थामे अंगुली आशित जीवन ( 4 )हुये बड़े बीता बचपन डाले गलबहियाँ ( 5 )संस्कार भरे करते मान सम्मान न कभी अपमान ( 6 )जीवन बदला खुशियाँ आईं सुखद क्षण ( 7 ) ...
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  February 24, 2014, 9:25 pm
कुछ त्रिपदियाँ ...शिरोमणि कहलाने वाले !!क्या पीड़ा हर लोगे तुम ... क्या व्यथाओं को समझ सकोगे तुम ?इन चिथड़ों मे  जीवन हैचिथड़ों की हो रही चिन्दियाँक्या ये  चिन्दियाँ समेट सकोगे तुम  ?भग्न हो चुका मन प्राण हैखो रही आशाओं की रशमियांक्या रश्मियां प्रेषित कर सकोगे तुम ?पी र...
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  February 20, 2014, 2:54 pm
ओबीओ लखनऊ चैप्टर का पादप कुछ  अधिक पुष्पित पल्लवित हो  इस आशा के साथ कानपुर की सर जमीं पर इसका आयोजन किया गया । मेरी और कानपुर की ही ओबीओ की सदस्या आ0 मीना जी की  हार्दिक अभिलाषा थी कि एक काव्य गोष्ठी का आयोजन हमारे शहर कानपुर मे भी किया जाय जिसे लखनऊ चैप्टर के संयोजक ...
नूतन ( उद्गार)...
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  February 13, 2014, 11:07 pm
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