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Blog: नूतन ( उद्गार)

Blogger: annapurna
महामारी और रोजी रोटी की समस्या ************************************ कोरोना वायरस की वज़ह से इस वक्त देश क्या सम्पूर्ण विश्व के हालात सही नहीं हैं। जिसके कारण देश में भी लॉकडाउन करना पड़ा है । जिसकी वज़ह से लोगों के काम बंद हैं। बड़ी बड़ी फैक्ट्रियाँ बंद है । ऐसे में लोगों के सामने रोजी-रोटी की सम... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   5:19pm 13 Apr 2020 #
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                              रंगों का त्योहार होली बसंत पंचमी के आते ही प्रकृति में एक नवीन परिवर्तन आने लगता है । दिन बड़े होने लगते है जाड़ा कम होने लगता है। पतझड़ शुरू हो जाता है । माघ की पुर्णिमा पर होली का डांडा रोप दिया जाता है। आम... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   9:49am 21 Feb 2020 #
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बाल यौन उत्पीड़न समस्या एवं समाधान========================== वैश्विक पटल पर दृष्टिपात करें तो न केवल भारत अपितु सम्पूर्ण विश्व में बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और शोषण की बातें अगर घर या विद्यालय की चहारदीवारी में ही रहे तो अच्छा है समाज की ऐसी सोच रही है ताकि न तो स्कूल और न ही ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   10:28am 27 Jan 2020 #
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नवरात्रि स्पेशल – नवसंवत्सर-विक्रमसंवत और वासंतिक नवरात्र जब कड़ाके की ठंड समाप्त होने लगती है तब कुछ गुलाबी सर्दियों के साथ ही आता है बसंत और ले आता है नैसर्गिक सुंदरता,साथ ही त्योहारों की भरमार । हवाएँ रूमानी हो जाती हैं, चारों ओर रंग,सुगंध, महुए की गंध,दहकते टेसू,महक... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:53pm 4 Apr 2019 #
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स्त्रीविमर्श या स्त्रीवादी विचार क्या है? उसका समग्र रूप क्या है ? प्रश्न यह उठता है कि क्या स्त्री विमर्श के माध्यम से आप और हम जिस स्त्री पर चर्चा करना चाहते हैं उसे हृदय की उतनी गहराई से जानते हैं? उसकी जिन समस्याओं पर विचार कर समाधान बतलाए जा रहे है क्या उनपर सच में क... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:24pm 30 Jun 2018 #
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बेटियाँ घर आँगन की रौनक  जिस प्रकार एक उपवन बिना चिड़ियों की चहचहाहट के अधूरा और सूना-सूना लगता है उसी प्रकार बेटियों के बिना घर का उपवन,आँगन भी अधूरा और सूना लगता है। इसका दर्द वही समझ पाता है जिस घर में बेटी नहीं होती। सोच कर देखिये । इतिहास उठा कर देखे तो हम पाएंगे कि ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:34pm 4 Apr 2018 #
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पर्यावरण प्रदूषण – वायु प्रदूषण या धुंये का राक्षस -------------------------------------------------------------पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है। पृथ्वी के नजदीक लगभग 50 km ऊँचाई पर स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है। यह स्तर सूर्यप्रकाश की पारबैंगनी (UV) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुचने से रोकता ह... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:30pm 4 Apr 2018 #
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पर्यावरण में महिलाओं की भूमिका ----------------------------------------------सर्वप्रथम हम अपनी संस्कृति पर दृष्टिपात करें और सामाजिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों को देखें तो यह पता चलता है कि प्राचीन काल से ही महिलाएँ पर्यावरण-संरक्षण के प्रति जागरुक रही हैं, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण आज भी महिलाओं द्... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   7:17pm 3 Apr 2018 #
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“भारतीय नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी, वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं।” -भारत कोकिला सरोजिनी नायडू । अल्टेकर के अनुसार प्राचीन भारत में वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति समाज और परिवार में उच्च थी, परन्तु पश्चातवर्ती काल में कई कारणों से उसकी स्थिति में ह्रा... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   11:58am 2 Oct 2016 #
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ग्रीष्म के अवसान पर काले-काले कजरारे मेघों को आकाश मे घुमड़ता देख पावस ऋतु के प्रारम्भ मे पपीहे की पुकार और वर्षा की फुहार से आभ्यंतर आप्लावित एवं आनंदित होकर जीव जन्तु सभी इस मास को पर्व की तरह मनाने लगता है। मनुष्य तो सावन के मतवाले मौसम में झूम उठता है ,पक्षियों की भी ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   11:10am 6 Aug 2015 #
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पूरा आलेख पढ़िये - तिरस्कार का दंश झेलते बुजुर्ग---------------------------------------------------------------बाल्यावस्था में भगवान बुद्ध एक कृशकाय वृद्ध की दयनीय दशा देखकर द्रवित हो उठे थे, उनका हृदय वितृष्णा से भर गया था. इसीलिए कुछ लोग वृद्धावस्था को जीवन का अभिाप मानते हैं. क्योंकि इस अवस्था तक आते-आते ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   1:32pm 1 Oct 2014 #
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दया के सिक्के - ये सत्य घटना  है--------------------------------------------बात मैं अपने बचपन से आरंभ करती हूँ - एक समय था जब मैं गरीबों पर बहुत करुणा करती थी मुझे लगता था कि ये बेचारे गरीब हैं और इन्हे हमारी जरूरत है । इनकी हर संभव मदद करनी चाहिए । सो मैं किसी भी गरीब को खाली हाथ नहीं जाने देती थी यहा... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   1:11pm 22 Sep 2014 #
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आलेख ----------साहित्य के स्वरूप को लेकर चलने वाली बहस कोई नयी चीज़ नहीं है। किसी पुराने ज़माने की कालातीत कहानी जैसे ही पुरातन साहित्य शास्त्रियों की पुस्तकों के सिद्धान्त, हमारी आधुनिक साहित्यिक चिंतन में प्रतिष्ठित हैं। यूँ साहित्य के स्वरूप पर हमारे विद्वान साहि... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:01pm 21 Jul 2014 #
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आकाश में काले-काले बादलों के छाते ही मन में उमंग जाग उठती है। मन करता है कि उड़ कर बादलों को छू लिया जाए। इसी इच्छा को पूरी करने के लिए वृक्षों की शाखाओं पर झूले डाल दिए जाते हैं और उन झूलों पर बैठ कर ऊंची-ऊंची पींगें लेने की होड़ लग जाती है। झूला झूलने वाला हर व्यक्ति बादलों... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   9:53am 16 Jul 2014 #
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प्यारी गुड़िया चंचला ,खेले दौड़े धूप । नन्हे नन्हे पाँव हैं ,मनभावन है रूप ॥मनभावन है रूप , तोतली बातें करती । बात बात मुस्कात ,सभी के मन को हरती॥करे जतन से प्यार ,हमारी मुन्नी न्यारी । सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया प्यारी ।।... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   8:11am 12 May 2014 #
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कुछ मुस्कुरा लें :-गम का मारा मनुष्यमंदिर मे पहुँच लगा रोने बार बारप्रभु को दोषी ठहरानेप्रभु जी मगनटिकाये अपने हाथ पर सीससोने मे लगे , वो लगा ज़ोर से घंटा बजानेटन्न टन्न टन्न टन्न टन्नखुली आँख प्रभु की, कसमसायेबोले क्या है ? तूने मेरी नींद खराब कर दीमनुष्य रोने लगा , गि... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:22pm 10 May 2014 #
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ऐसे नेता को क्या कहिएजो पीटे हिन्दू मुस्लिम रागसांप्रदायिकता का बिगुलबजा कर लगाये देश मे आग ऐसे नेता .......जिनका कोई ईमान नहीं धर्म से कोई प्रेम नहीं राष्ट्र प्रेम का ढोंग दिखाएँ बेबस जनता को लूटें खाएं ऐसे नेता .......गिरगिट से होते नेता पल मे रंग बदलते नेता पल... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:29pm 2 May 2014 #
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आने वाली सरकार से लोगो क्या अपेक्षाएं है -मैंने कई गण मान्य लोगो से इस विषय पर बात की । उन सबके विचार इस प्रकार रहे--1) प्राइवेट स्कूलों , कलेजो,की फीस बहुत ज्यादा है अंधाधुंध पैसा बहाओ तब कहीं जाकर अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा दिला सको । स्कूल हो या कालेज सभी जगह यही हाल है ।... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   2:57am 30 Apr 2014 #
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कोहरा सूरज धूपआदरणीय बृजेश नीरज जी की काव्य कृति कोहरा सूरज धूप अपने नमानुकूल ही छाप छोड़ती है । जिस प्रकार सर्दी मे कोहरा छाया होता है और सूरज के निकलते ही धीरे छटने लगता है और चारों ओर अच्छी धूप फैल जाती है यह धूप जनमानस को राहत पहुंचाती है । उनकी कृति यथार्थ का सम्पूर... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:00pm 22 Apr 2014 #
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इकड़ियाँ  जेबी से‘ये इयकड़ियाँ नहीं अनमोल अशरफियाँ है’ आ0 योगराज सर की ये पंक्ति इस रचना संकलन के लिए एकदम उपयुक्त बैठती है । आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी का शब्द संसार बहुत विस्तृत है । उन्होने अपने मनोभावों को बड़ी ही सुंदरता से एक एक नगीना सा जड़ा है । उनकी प्रयोग धर्मिता हर ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   3:27pm 17 Apr 2014 #
Blogger: annapurna
तेरी आँखों मे वो नूर है साई जब भी विकल हो शरण मे आई तूने संभाला है मुझको मेरे साईं गले से हर बार तूने लगाया है साईं मेरे साईं ............ बहुत जख्म खाये जहां मे हमने तुमने ही आके मेरी बिगड़ी बनाई तेरी रहमत का जलवा है बिखरा और तेरी कृपा का ही नूर है साईं मेरे साई .......... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:48pm 2 Apr 2014 #
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लीजिये फिर आ गई है होली !! चलिये मनाए प्यार से , उत्साह से , उमंग से !!होली जहां एक ओर सामाजिक एवं धार्मिक त्योहार है वहीं यह रंगो का भी त्योहार है । होली आते ही हर ओर रंग ही रंग दिखने लगता है । टेसू डालियो पर दहकने लगता है , रंग बिरंगे फूल खिल खिलखिलाते से लगते है ,  वातावरण  ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   8:11pm 14 Mar 2014 #
Blogger: annapurna
मूक नहीं हूँ लिखते जाना ही मेरी  जात है ,तम की स्याही से लिखती नित्य नव प्रभात हूँ ।  उजियारा फैलाने को रोज नया सूरज मै लाती हूँ  ,जो मूक हो जीते है उनकी जुबान मै बन जाती हूँ ।   पढा लिखा कर सम्मान की अलख मै जगाती हूँ  ,झूठे हो चाहे जितने पर सच्चाई की धार लगाती हूँ ।अ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   7:10am 5 Mar 2014 #
Blogger: annapurna
चाँदी के रथ पे सवार लिए जीवन नवल चिर प्रीतम संग चंद्रिका आयी धवल .............. प्रिय सखी निशा संग भरती किलकारियाँ गगन से धरा तक करती अठखेलियाँ रूप किशोरी सी चंद्रिका आयी धवल .........शशि प्रियतम संगचमचम सितारों वाली श्याम चुनरिया ओढ़े  धीरे धीरे दबे पाँव प्रिय सुंद... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:35pm 26 Feb 2014 #
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