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जिन्दगी जिस मोड पर अब है खडीकोई रास्ता पीछे को भी जाता है क्या ?जैसे कि लहरें धो रहीं है अनवरतरेत मे आरेख सब खींचा हुआ.दिल चाहता है वक्त में पीछे चलूंजहां छोड आया हू मै चौराहे कई.वहां पर पडे है गहन अनुभूति सनेमुरझा चुके कुछ स्वप्न जो थे सुरमईक्या पता उनमे से ही किसी राह प...
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  February 5, 2012, 7:51 pm
यूं तो उसकी जिंदगी में बहुत कुछ ऎसा हुआ था जो अनपेक्षित था.शायद इसीलिए उसे अब आश्चर्य नहीं होता या फिर यही उसके जीवन का स्थायी भाव बन चुका है.कहने को तो शहर उसके रिश्तेदारों से भरा पडा था जिन्दगी से उसे मां और अकेलेपन के अलावा कुछ नही मिला.“यही है उस बदचलन लक्षमिनिया का ज...
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  February 4, 2012, 8:40 pm
Anubhuti-A complete classic collection of Hindi Poetry....
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  February 4, 2012, 2:10 pm
नूर जो चेहरे पर छाया हैतेरा असर नुमाया हैफिरता हूं महका महकाजबसे गले लगाया हैपरवाज भुलाया पंख भुलायापिन्जरे से बाहर आया हैअंधेरों का अजब वाकयाहै पैकर या साया है...
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  February 4, 2012, 12:17 pm
मौन मन....
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  February 3, 2012, 1:00 am
मुझको अचरज होता है....
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  February 3, 2012, 12:59 am
बस मै और तुम....
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  February 1, 2012, 11:25 pm
ये कितने अर्थस्रजित करती हैंमन मेंहोकर प्रश्नसूचकजब देखती हैंये आखेंवही पल खोजती सीपरम अंतरंगता केकभी कहती कहानीकोई भूली हुई सीमै कितने अर्थ खोलूं ?बहुत कुछ चाहती हैंसदा बनकर पहेलीये आंखे कभी आईना बनकरमेरा अन्तस दिखातीकभी पतवार बनकरपार मुझको लगातींकभी बनकर सखा ...
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  January 28, 2012, 10:20 pm
आओ जनगण का त्यौहार मनाएंभूख से व्याकुलपढने को आतुरअपने ही हक़ सेवंचित दिलों मेंसंहर्षों की एक ज्वाला जलाएंआओ जनगण का त्यौहार मनाएंजिनके हाथों में वंचितसमाजों की दुनियाचलो छीन लें उनकेहाथों से दुनियाआओ पुनः मुक्ति के गीत गाएंआओ जनगण का त्यौहार मनाएंजहां हम सभी केस...
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  January 26, 2012, 3:53 pm
हमको दिले आवारा की आवारगी अच्छी लगीतेरे आरजू में कट रही ये जिन्दगी अच्छी लगीदिल में निजाते हिज्र की ख्वाहिश जगा के एक दिनचल दिए फिर छोडकर ये दिल्लगी अच्छी लगीदूर से आती हुई उम्मीद की वायस बनीशब -ए-गम की कैद में वो रोशनी अच्छी लगी...
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  January 25, 2012, 9:32 pm
दो किनारे नदी केमिल कभी पाते नहींमिलना क्यापहचान ही खो जाती हैपानी की ये दीवारजब सूख जाती हैसदियों से येपुल भर की दूरीबन गईसदियों की दूरीपदधूलियांउनके वजूद कोइस तरह मिलाती हैंअकिंचन प्रेम कीअनुभूतियांवक्त की धारा मेंबहती जाती हैं....
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  January 23, 2012, 10:13 pm
आकाश का स्रजन करें……......
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  January 22, 2012, 10:23 pm
सब अशेष सा,सब ओझलधुंध सी कैसी छाई है ?कोई मरीचिका राही कीसुध बुध हर लेने आई है .जिस ह्रदय को रीतेपन मे हीइक सदी हो जैसे बीत गईउस एकाकी अन्तस मे क्यूंकोई आहट पडी सुनाई है .संकेत कोई है विरही कोकि विरह-व्यथा अब और नहीआकुल प्रभात की इच्छा मेयह रात बहुत अलसाई है .दीपक ज्वाला जल...
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  January 20, 2012, 8:48 pm
नहीं मुझे यह आत्मवंचना-मेरी सदा ही रहो प्रियेनिशा-चांदनी अन्तरतम की वास ह्रदय में करो प्रियेमुझे कहीं बंदी न कर लें आरोपित आदर्श प्रियेजीवन है माटी तो तुम हो पारस का स्पर्श प्रियेराह प्रेम की रोक सकी है कहीं कोई वर्जना प्रियेछवि कौन छीनेगा मुझसे मन मे जो ली बना प्रिय...
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  January 18, 2012, 10:06 pm
मन के हारे से हारमन के जीते से जीत हैमनवा की सुन लो जीमनवा तो मीत हैउम्मीदों की नगरी हैसपनों का गाँव हैपूस में धुप है तोजेठ में छाँव हैकर्कश कोलाहल मेंसुमधुर संगीत हैमनवा की सुन लो जीमनवा तो मीत हैलोग आते हैं जाते हैंदुनिया का मेला हैसारी यादें सहेजेये मितवा अकेला हैज...
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  January 16, 2012, 9:27 pm
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