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Blog: अलबेली कवितायेँ

Blogger: albela khatri
प्यारे मित्रो ! यह बताते हुए  मुझे अत्यन्त ख़ुशी है कि  आदि शक्ति  देवी हिंगलाज  के भजनों और स्तुतियों पर आधारित  एक शानदार  वीडियो "जय माँ हिंगलाज" के निर्माण ने अब तेजी पकड़ ली है  और शीघ्र ही  यह तैयार हो कर  हिंगलाज भक्तों  तक पहुँचाने का प्रयास मैं कर रह... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   5:41pm 25 Jul 2012
Blogger: albela khatri
 तेरी संगतमेरी रंगत निखार देती हैपर तेरी मुहब्बतअक्सर मुसीबत में डाल देती हैक्योंकि ज़मानाढूंढता है बहाना क़त्ल करने काहर तरफ़ धोखानहीं कोई मौका वस्ल करने काअपनी हस्ती जुदा हैअपनी मस्ती जुदा हैअपनी बस्ती जुदा हैये कोई और लोग हैं जो जीना नहीं जानतेये सागर नहीं ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   11:38am 31 Mar 2012
Blogger: albela khatri
अदावत नहींआदावत की बात कर अलगाव की नहीं आ लगाव की बात कर नफ़रत नहींतूउल्फ़त की बात करबात कर रूमानियत कीमैं सुनूंगाबात कर इन्सानियत कीमैं सुनूंगामैं न सुन पाऊंगा तेरी साज़िशेंरंजिशें औ खूं आलूदा काविशेंकिसने सिखलाया तुझे संहार कर !कौन कहता है कि पैदा खार कर !रे मनुज त... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   1:48am 27 Mar 2012
Blogger: albela khatri
खरगोश की उछालमृग की कुलांचबाज़ की उड़ानशावक की दहाड़शबनम की चादरगुलाब की महकपीपल का पावित्र्यतुलसी का आमृत्य निम्बू की सनसनाहटअशोक की लटपटाहट _______ये सब अब कहाँ सूझते हैं कविता करते समयअब तोआदमी का ख़ूनबाज़ार की मंहगाईखादी का भ्रष्टाचारसंसद का हंगामाग्लोबलवार्मिं... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:44am 16 Mar 2012
Blogger: albela khatri
 रिश्ते जब रिसने लगते हैंतो परिजन पिसने लगते हैंमत दिखलाना घाव किसी कोलोग नमक घिसने लगते हैंहास्यकवि अलबेला खत्री  फिल्म संगीतकार  राम लक्ष्मण  के साथ मुंबई में  गानों की रिकॉर्डिंग के अवसर पर जय हिन्द !... Read more
clicks 234 View   Vote 2 Like   4:06am 15 Mar 2012
Blogger: albela khatri
 आज मुझे सपने में आया सपना एक महानसपने में देखा मैंने सपनों का हिन्दुस्तान  मैंने देखा पुलिसकर्मियों में विनम्र स्वभाव मैंने देखा सस्ते होगये फल-सब्ज़ी के भाव मैंने देखा रेलों में कोई धक्कम-पेल नहीं है मैंने देखा किसी शहर में कोई जेल नहीं है भ्रष्टाचारी लोग कर चुक... Read more
clicks 302 View   Vote 0 Like   3:19am 14 Mar 2012
Blogger: albela khatri
सियारी खाल की बदबू हवा से जान लेता हूंसियासत वालों को मैं दूर से पहचान लेता हूँभुवन में हो कोई बाधा तो आए रोक ले मुझकोवो पूरा करके रहता हूं जो मन में ठान लेता हूंमेरे गंगानगर में नहर है पंजाब से आतीइसी कारण मैं पीने से प्रथम जल छान लेता हूंये सब इक कर्ज़ अदाई है, न बेटा है,... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   6:32pm 13 Mar 2012
Blogger: albela khatri
नम्रता यदि ज्ञान से कुछ कम नहींतो अहम अज्ञान से कुछ कम नहींसड़ रहे हैं शव जहां पर प्राणियों केवे उदर श्मशान से कुछ कम नहींजिस हृदय में प्रेम और करुणा नहींवो हृदय पाषाण से कुछ कम नहींइतनी महंगाई में भी ज़िन्दा हैं हमयह किसी बलिदान से कुछ कम नहींआचरण यदि दानवों का छोड़ द... Read more
clicks 195 View   Vote 1 Like   6:21pm 12 Mar 2012
Blogger: albela khatri
 पैरोडी  : इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया ...जहाँ गाँव है घायल, नगर है ज़ख्मी,महानगर भी दुखिया इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया ...इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया जहाँ खादी वाले चूस रहे हैं आज़ादी का गन्ना जहाँ गुण्डों के हिस्से आता है देश का नेता बनना जहाँ रक्षक ही भक्षक बन बैठे रौंद ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   8:41am 29 Feb 2012
Blogger: albela khatri
हाकिम को घूस दे केअपना बना लो, यहीकाम करवाने का है ढंग मेरे देश मेंधनी लोगों, वासना केलोलुपों को रात दिनबेचती गरीबी अंग-अंग मेरे देश मेंक्षेत्र सम्प्रदायों केअसीम हैं, अनन्त हैं वबन्दगी के दायरे हैं तंग मेरे देश मेंढूंढना जो चाहो ढूंढ़ो,आदमी मिले न मिले,लाखों मिल जाएं... Read more
clicks 205 View   Vote 1 Like   3:52am 28 Feb 2012
Blogger: albela khatri
मधुर-मधुर, मीठा-मीठा और मन्द-मन्द मुस्काते हैं सुन्दर-सुन्दर स्वप्न सलोने हमें रात भर आते हैं बस्ती-बस्ती बगिया-बगिया,परबत-परबत झूमे हैमस्त पवन के निर्मल झोंके प्रीत के गीत सुनाते हैं उभरा है तन पे यौवन ज्यों चमके बिजली बादल में शीतल शबनम के क़तरे तन-मन में आग लगाते हैं... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   4:10am 27 Feb 2012
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मधुर-मधुर, मीठा-मीठा और मन्द-मन्द मुस्काते हैं सुन्दर-सुन्दर स्वप्न सलोने हमें रात भर आते हैं बस्ती-बस्ती बगिया-बगिया,परबत-परबत झूमे हैमस्त पवन के निर्मल झोंके प्रीत के गीत सुनाते हैं उभरा है तन पे यौवन ज्यों चमके बिजली बादल में शीतल शबनम के क़तरे तन-मन में आग लगाते हैं... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   4:10am 27 Feb 2012
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मधुर-मधुर, मीठा-मीठा और मन्द-मन्द मुस्काते हैं सुन्दर-सुन्दर स्वप्न सलोने हमें रात भर आते हैं बस्ती-बस्ती बगिया-बगिया,परबत-परबत झूमे हैमस्त पवन के निर्मल झोंके प्रीत के गीत सुनाते हैं उभरा है तन पे यौवन ज्यों चमके बिजली बादल में शीतल शबनम के क़तरे तन-मन में आग लगाते हैं... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   4:10am 27 Feb 2012
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रात न ढले तो कभी भोर नहीं होती बन्धुसांझ न ढले तो कभी तम नहीं होता है लोहू तो निकाल सकता तेरे पाँव में से कांच से मगर घाव कम नहीं होता है जीने की जो चाह है तो मौत से भी नेह कर डरते हैं वो ही जिनमें दम नहीं होता है सच मानो जब तक पीर का काग़ज़ न हो कवि की कलम का जनम नहीं होता हैहा... Read more
clicks 202 View   Vote 2 Like   5:06am 25 Feb 2012
Blogger: albela khatri
कुछ अरसा पहले  भारतीय जनता पार्टी  के कद्दावर नेता  और तत्कालीन  केन्द्रीय मंत्री  श्री जसवंतसिंह  ने एक पुस्तक  रच कर जिन्ना के प्रति  नरम रुख दिखाया था जिस पर बड़ा बवाल मचा  और उन्हें पार्टी से बाहर तक होना पड़ा था ....उसी दौर में  कटाक्ष के  रूप में मैंने  कुछ हाइकू  लिख... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   2:42pm 24 Feb 2012
Blogger: albela khatri
ऐ मेरी ज़िन्दगी, तू कहाँ खो गई ?शायरी भी मेरी, अब जवां हो गईजल रही है ज़मीं, जल रहा आसमांक़ायनात-ए-तमाम पुर-तवां हो गईहर शहर हर मकां मौतगाह बन गयाहर निगाहो - नज़र खूंफ़िशां हो गईतौबा-तौबा ख़ुदा ! लुट गए - लुट गएआज घर- घर यही दास्ताँ हो गईईश्वर ! रहम कर हाल पे हिन्द केरोते... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:01pm 24 Feb 2012
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इक मुख यदि है गुलाब जैसा महका तोसैकड़ों के चेहरे उदास मेरे देश मेंएक के शरीर पे रेमण्ड का सफ़ारी है तोपांच सौ पे उधड़ा लिबास मेरे देश मेंकाम सारे हो रहे हैं कुर्सी की टांगों नीचे काग़ज़ों में हो रहे विकास मेरे देश मेंदूध है जो महंगा तो पीयो ख़ूब सस्ता हैआदमी के ख़ून क... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   2:04am 24 Feb 2012
Blogger: albela khatri
अरुण की लालिमा में जब गगन से ओस गिरती हैउजाले की किरण जब इस धरा पर पांव धरती हैहवा में हर दिशा जब मरमरी आभा बिखरती हैसरोवर में कमल कलिकायें जिस दम खिलखिलाती हैंतुम्हारी याद आती हैयदि योगी तपस्वी साधु सिद्ध जब ध्यान करते हैंगुरूद्वारे गुरूवाणी का जब गुणगान करते हैंहर... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   1:26pm 23 Feb 2012
Blogger: albela khatri
तेग़-ओ-खंजर उठाने का वक़्त आ गयालोहू अपना बहाने का वक़्त आ गयासर झुकाते - झुकाते तो हद हो गयीअब तो नज़रें मिलाने का वक़्त आ गयाख़त्म दहशत पसन्दों को कर दें ज़रा मुल्क़ में अम्न लाने का वक़्त आ गया क़त्ल-ओ-गारत के साये हटाने  चलें अब तो मौसम सुहाने का वक़्त आ गया क्यों अँधेरे... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   3:36am 22 Feb 2012
Blogger: albela khatri
तेग़-ओ-खंजर उठाने का वक़्त आ गयालोहू अपना बहाने का वक़्त आ गयासर झुकाते - झुकाते तो हद हो गयीअब तो नज़रें मिलाने का वक़्त आ गयाख़त्म दहशत पसन्दों को कर दें ज़रा मुल्क़ में अम्न लाने का वक़्त आ गया क़त्ल-ओ-गारत के साये हटाने  चलें अब तो मौसम सुहाने का वक़्त आ गया क्यों अँधेरे मे... Read more
clicks 214 View   Vote 1 Like   3:36am 22 Feb 2012
Blogger: albela khatri
तेग़-ओ-खंजर उठाने का वक़्त आ गयालोहू अपना बहाने का वक़्त आ गयासर झुकाते - झुकाते तो हद हो गयीअब तो नज़रें मिलाने का वक़्त आ गयाख़त्म दहशत पसन्दों को कर दें ज़रा मुल्क़ में अम्न लाने का वक़्त आ गया क़त्ल-ओ-गारत के साये हटाने  चलें अब तो मौसम सुहाने का वक़्त आ गया क्यों अँधेरे... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:36am 22 Feb 2012
Blogger: albela khatri
                      { कविता की तीन अवस्थाएं } शब्द-शब्द जब मानवता के हितचिन्तन में जुट जाता हैतम का घोर अन्धार भेद कर दिव्य ज्योति दिखलाता हैजब भीतर की उत्कंठायें स्वयं तुष्ट हो जाती हैंअन्तर में प्रज्ञा की आभा हुष्ट-पुष्ट हो जाती हैअमृत घट जब छलक उठेबिन तेल जले जब बातीतब कवि... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:48am 22 Feb 2012
Blogger: albela khatri
                      { कविता की तीन अवस्थाएं } शब्द-शब्द जब मानवता के हितचिन्तन में जुट जाता हैतम का घोर अन्धार भेद कर दिव्य ज्योति दिखलाता हैजब भीतर की उत्कंठायें स्वयं तुष्ट हो जाती हैंअन्तर में प्रज्ञा की आभा हुष्ट-पुष्ट हो जाती हैअमृत घट जब छलक उठेबिन तेल जले जब बातीतब कवि... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:48am 22 Feb 2012
Blogger: albela khatri
फ़ित्न-ए- दौरां में हर लम्हा हवादिस देखियेअब्र से बरसे है हर दम बर्क़ बारिश देखियेमुज़्तरिब हो, रो पड़ा है हक़ भी हाल-ए-दहर परआदमी का हर कदम है एक साजिश देखियेइस तरफ़ से उस तरफ़ रक्स-ए-क़यामत हो रहाउस तरफ़ से इस तरफ़ बिखरी है आतिश देखियेहर दरो-दीवार पर है दाग़-ए-खून-ए-हुर... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   8:34am 21 Feb 2012
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