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Blog: saara aakash

Blogger: sudha tiwari
किसी अनजान शहर से गुजरती रेल पुचकारती है बलखाती स्ट्रीट लाइटों के आगोश मेंलेटी सड़क को          वातानुकूलन के शीशे   &... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   8:21pm 15 Aug 2018 #
Blogger: sudha tiwari
बीमारी से नहीं मरते बच्चेवो मरते हैं मरी हुई व्यवस्था के विष से.अस्पताल में दाखिल होने केबहुत पहले अपनी कुंठा, गरीबी और ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   4:44pm 12 Oct 2017 #
Blogger: sudha tiwari
एक आदमी जिसने जमीन और आसमान को एक कर दिया, जिसने यह क्रांतिकारी तथ्य सिद्ध किया कि पहाड़ से एक राजा और एक गरीब एक साथ गिरें ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:55am 27 Sep 2017 #
Blogger: sudha tiwari
छोटी-छोटी बूँदों की उतावली लड़ियाँ जब दिनोंबरसती रहेंजैसे आसमान के दिल मेंकोई बात सुराख कर गयी होखुद झर-झर नष्टनीड़हो हर सूखेपन के खिलाफबरस पड़ती बारिशों को देखना क्यों देखना भर ही नहीं हो सकता बसये बेवजह की परेशानियां कितनी बावजह हैक्यों बताऊंएक चिड़िया जो भोर से... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:23pm 23 Sep 2017 #
Blogger: sudha tiwari
नदी खोई-सी थीलहर...पानी...फूल...सबसे अलगपत्थर की सीढ़ियों से सिर टकरातीहर बार.दूर कहीं वो जहाज जा रहा थाजहाँ डूबता है सूरज चुê... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:11pm 28 Aug 2017 #
Blogger: sudha tiwari
माँ बरसाती नदी हैरिमझिम बूँदों की सुंदरता न होपर जीवन को भरे-पूरे रूप में समो लेने की शक्ति है वहहर आने वाली बारिश मेंभर जाती है पूरी-की-पूरीऔर बीतते मौसम के साथजब उतर जाता है समूचा पानीउसकी सोंधी आँखों में कौंध जाता हैकिसी बिखरते हुए बादल का वह दृश्य जो उसकी मिट्टी की ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   12:01pm 13 Nov 2013 #
Blogger: sudha tiwari
एक नदी थीकुछ काई की रंगत वालीपहाड़ों के चादर में लिपटी हुईउसके शांत स्थिर पानी मेंदिखती थीं कई-कई विस्मृतियां हाँ, जब धूप उसके पैरों के कोने से फिसलकर चादर के पीछे सो रहती है।सतह के नीचे फैले शैवालों से झाँकती हैं किलकारियाँ और रात घिरने पर ढेर के ढेर उगे अंगूरों पर आव... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   6:41am 24 Sep 2013 #
Blogger: sudha tiwari
सोया हुआ शहर आँखों में उतरा आये ख्वाब की तरह होता है.कुछ रातरानी के फूल अनगिन दीयों की टिमटिमाती महक मेंघुल गए हों जैसेहल्की सरसराहटों मेंबीता हुआ वक़्त आकाशके झीने चादर कोगहराता चला जाता हैऔर चांदी की नदीसपनीली घाटियों में आते-आते ठिठक पड़ती है                                  ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   4:46am 19 Apr 2012 #
Blogger: sudha tiwari
जब तुम अपनी तोतली आवाज़ में शब्दों के घरौंदें बुनती होमेरे आकाश की डाली परएक गुलमोहर खिलता हैअपनी नन्हीं उँगलियों के स्पर्श सेतुम मन की किसी अदृश्य वीणापर छेड़ देती होकोई सुहाना राग.वसंत के पूर्वागमन-सी  स्वप्न में मुकुलित तुम्हारी आँखेंमरुभूमि के उपवन तो नहीं!क्... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   10:49am 6 Apr 2012 #muskan chandani jiwan sangit
Blogger: sudha tiwari
जब कभी तुम अपने सफ़ेद पंखों मेंमुझेलपेट लेती होतुम्हारे सादेपन की रंगतमेरा कुछ ले उड़ती है.घने गांछों के सिर परजहाँ सांझ उगती हैऔर डूब जाता हैअनमना-सा सूरजकुछ भी तो नहीं बदलताफिर जाने क्यों टहनियां झुक जाती हैंउदास होकरऔरजरा सा रूककर तुम  मुझे छोड़ देती हो वही... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   7:06am 4 Mar 2012 #
Blogger: sudha tiwari
जब कभी तुम अपने सफ़ेद पंखों मेंमुझे लपेट लेती हो तुम्हारे सादेपन की रंगतमेरा कुछ ले उड़ती है.घने गांछों के सिर पर जहाँ सांझ उगती है और डूब जाता है अनमना-सा सूरज कुछ भी तो नहीं बदलताफिर जाने क्यों टहनियां झुक जाती हैं उदास होकरऔरजरा सा रूककर तुम  मुझे छोड़ देती हो वहीँ कह... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   7:06am 4 Mar 2012 #
Blogger: sudha tiwari
पहले ख्वाब केवल तीन तरह के होते थे- बच्चों का ख़्वाब, जवानों का ख़्वाब और बूढों का ख़्वाब. फिर ख्वाबों की इस फ़ेहरिस्त में आजादी के ख़्वाब भी शामिल हो गये. और फिर ख्वाबों की दुनिया में बड़ा घपला हुआ. माता-पिता के ख़्वाब बेटे-बेटियों के ख्वाबों से टकराने लगे. पिताजी बेटे क... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   1:04am 15 Jan 2012 #
Blogger: sudha tiwari
saara aakash: मौसम... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   3:12pm 12 Jan 2012 #
Blogger: sudha tiwari
जब हम साथ होते हैंकभी मौसम के बारे में नहीं पूछते क्या ही बेमानी सी चीज़  मालूम पड़ती हैकि कहें- देखो आज धूप खिली है वह उगती है और छा जाती हैहम परहवा चलती है और बहका जाती हैबारिश में घुलती मिट्टी कीमहकबहुत जानी-सी हैऔरतुम्हारी बूंदों में पल-पल सोंधा हो जाना मैंने सीखा... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   2:37pm 9 Jan 2012 #
Blogger: sudha tiwari
सिल्क, एक ऐसी लड़की की कहानी है जो अस्सी की दशक में पैदा तो हुई लेकिन वह अपने समय से काफी आगे की सोच रखती है. व्यक्ति स्वातंत्रय की उस आदिम भावना को अपने जिस्म के लिफाफे में लपेटे वह लड़की अपने रास्ते खुद चुनती है और सोचती है कि वह अपनी मंजिल भी चुनेगी,ये उसका नितांत निजी च... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   6:54am 10 Dec 2011 #बाजार
Blogger: sudha tiwari
मन है और उसको ओढ़े हुए एक देहकुछ है जो नहीं हैजीवन हैधरती हरी चुनर ओढ़े खड़ी हैऔरविस्तृत मरुप्रांतर की शुष्क हवाके ऊपर खिला है आकाश.समुद्र है कहीं दूर उस न देखे झरोखे-सानदी कीछूटी हुई  धारा की पहुँच से बाहरआँखों के काजल में डूबती दिशाएंकुछ चिटक-सा जाता है हर बार.आह भगवान!... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   11:47am 18 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
saara aakash: एक सवाल: "एक प्रश्न मेरे ज़ेहन में बार-बार उठता है कि जातिवादी व्यवस्था जो हमारे समाज में एक अरसे से चली आ रही है,उसका समाधान क्या हो! आखिर वह कौन सी..."... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   11:37am 8 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
एक प्रश्न मेरे ज़ेहन में बार-बार उठता है कि जातिवादी व्यवस्था जो हमारे समाज में एक अरसे से चली  आ रही  है,उसका समाधान क्या हो! आखिर वह कौन सी मानसिकता या कि सामाजिक समझ थी जिसने इस विचार को जन्म दिया होगा कि समाज खांचे में बटा हो.लेकिन इधर कुछ मित्रों की असहिष्णुता देखक... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   11:37am 8 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
saara aakash: जानेवालों से - निदा फाजली: "जानेवालों से राब्ता* रखना दोस्तों, रस्मे-फातहा रखना जब किसी से कोई गिला रखना सामने अपने आइना रखना घर की तामीर* चाहे जैसी हो इसमें ..."... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   11:34am 8 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
जानेवालों से राब्ता* रखनादोस्तों, रस्मे-फातहा रखना जब किसी से कोई गिला रखनासामने अपने आइना रखना घर की तामीर* चाहे जैसी होइसमें रोने की कुछ जगह रखना जिस्म में फैलने लगा है शहरअपनी तन्हाईयाँ बचा  रखना मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिएअपने दिल में कहीं खुदा रखना मिलना-जुल... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   11:34am 8 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
कभी शब्द और अर्थ पास होकर भी किसी अनजाने क्षितिज की ओर खुलने लगते हैं ...क्या है ये ! इस इंद्रजाल की सोंधी सी महक में हलके बहुत थोड़े से भींगे पत्तों की छुअन डाल से अभी-अभी टपके फूल की लजाई मुस्कानऔर रात के अन्धकार में डूबते अंतिम तारे की अटूट निष्ठा ये सब और बहु... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   4:42am 8 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
saara aakash: कला: "'यह शायद मस्तिष्क का एक ही उचित पक्ष होता है जो एक पुरुष को आभूषणों और कला के अपेक्षाकृत अधिक स्थिर सिद्धांतों से सम्बंधित सत्य या क्या सही ..."... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:31pm 4 Aug 2011 #
Blogger: sudha tiwari
"यह शायद मस्तिष्क का एक ही उचित पक्ष होता है जो एक पुरुष को आभूषणों और कला के अपेक्षाकृत अधिक स्थिर सिद्धांतों से सम्बंधित सत्य या क्या सही है - इसका एक विचार बनाने में सक्षम बनाता है. इसमें पूर्णता का एक ही केंद्र होता है,हालाँकि यह अपेक्षाकृत छोटे वृत्त का केंद्र होता ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:31pm 4 Aug 2011 #fashion and interests
Blogger: sudha tiwari
  " विद्रोही बनते नहीं, उत्पन्न होते हैं.विद्रोह्बुद्धि परिस्थियों से संघर्ष की सामर्थ्य, जीवन की क्रियाओं से,परिस्थितियों केघात-प्रतिघात से नहीं निर्मित होती. वह आत्मा का कृत्रिम परिवेष्टन नहीं है, उसका अभिन्नतम अंग है. मैं नहीं मानता कि दैव कुछ है, क्योंकि हममें को... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   11:45am 26 Jul 2011 #
Blogger: sudha tiwari
निदा फाजली की शायरी में  बारिश के बाद धुले आकाश में खिलते इन्द्रधनुष की-सी कशिश है.इनके अंदाज़-ए-बयां में जिंदगी के हर रंग ढलें हैं, आज हम जिस कठिन समय में जी रहें हैं...जहाँ इन्सानियत की दुहाई देना बुझदिली समझी जाती है और दूसरों को चोट पहूँचाने को कला.मुंबई में हूआ  सि... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   10:11am 15 Jul 2011 #
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