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aishlaxmi

मै पश्चिम का सूरज हूँ ,तुम पूरब के बन जाओ ,मै निस्तेज तिमिर का वाहक ,तुम पथ के दीपक बन जाओ ,मै और तुम दोनों है रक्तिम ,अंतर बस इतना पता हूँ ,तुम उगने का अर्थ लिए ,मै उगने की राह  बनाता हूँ....डॉ आलोक चांटिया  "महा -रज"...
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  January 15, 2012, 8:46 am
बीत गया जो ,वो अतीत हो गया ,आ रहा जो समय ,वो प्रतीत हो गया ,कहते है कह कर ,इसे नव वर्ष मनाओ ,हर ओठ का आज ,यही गीत हो गया ,किया जो प्रबंधन ,पल पल का आलोक देखो वो कैसे अब सब का मीत हो गया ,बहको न तुम ,न बहके ही हम सब ,प्रगति की कहानी में ,वही जीत हो गया ,नव वर्ष  जो लाया ,वह सन्देश समझ लेना ,...
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  January 1, 2012, 12:03 am
मै में रहते ,लोग जहा पर,भारत उस को ,ही कहते है ,मै-मै  सब ही .जपते रहते ,हर दर्द वही ,अब सहते है ,देश बाँट कर ,प्रदेश काट कर ,सुख की तलाश में ,रोज भटकते रहते है ,भाई भतीजा वाद में ,ढूंढे विकास देश का ,माँ फिर भी इसको ,कहते रहते है ,क्या नही जागोगे ,अब भी सोने से , दूसरो  की बुराई,और रोने ...
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  December 31, 2011, 1:26 pm
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  December 26, 2011, 4:24 pm
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  December 26, 2011, 4:23 pm
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  December 26, 2011, 4:21 pm
ये किसका दर्द मुझमे जब्ज हो रहा है ,आज मेरी आखो से ये कौन रो रहा है ,कल तक था हसना ही जिसकी फितरत ,मुझे भारत को देख ये क्या हो रहा है ..............माँ कह कर बाट देना बेटा होने का सच ,ये कौन का अँधेरा रोशन हो रहा है ....घरो में माँ की दुर्दशा आलोक किस से कहे,जब माँ भारती का ही  आंचल रो रहा है...
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  December 26, 2011, 1:14 pm
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