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Blog: तन्हा राही का सफरनामा...........

Blogger: Ravinder Singh Dhull
एक खूबसूरत गीत है, उसकी शुरूआती पंक्तियाँ उस से भी अधिक खूबसूरत।"जे मैं तैनूं बाहर ढूँढाँ तो भीतर कौन समाया। जे मैं तैनूं भीतर ढूँढाँ , बाहर किस दी है माया। "इस खूबसूरत पंक्ति को हम मानव चरित्र के हर पहलू के साथ जोड़ सकते हैं। यदि आप ईश्वर को मानते तो इसे ईश्वर के साथ जो... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   11:18am 8 Aug 2015
Blogger: Ravinder Singh Dhull
मेरे जूनून का नतीजा भले कुछ भी हो पर एक बात सच है कि जीवन खाली और अधूरा न होगा।अपह्लिज व्यथा से गुजर जरूर रहा हूँ पर उस व्यथा से भी कुछ न कुछ निकल कर ही आएगा। आज के दिन मैं अपनी इस छोटी सी कुर्सी पर बैठा अपनी जिंदगी के साथ तालमेल बिठाने का प्रयास कर रहा हूँ। आज आशातीत सफलता ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   4:07am 8 Aug 2015
Blogger: Ravinder Singh Dhull
तमन्ना आज बगीचे में अकेली घूम रही थी. सामने उसका पसंदीदा पौधा था; बेहद सुन्दर रंग वाले फूल खिलते थे उसपर. केवल एक ही समस्या थी; उसमें कांटे थे...बहुत पैने कांटे जो कभी भी चुभ सकते थे. पर तमन्ना को वह पौधा जान से प्यारा था. आज उसने फूलों से छेड़खानी की ठान ली थी. जैसे ही उसने छून... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:03am 8 Aug 2015
Blogger: Ravinder Singh Dhull
धर्म और नैतिकता में से क्या बड़ा है? यह एक बेहद गंभीर प्रश्न है जिससे मैं इस समय रूबरू हो रहा हूँ एक पुस्तक में। मैं नास्तिक हूँ या आस्तिक तो भी नैतिक हो सकता हूँ, पर धार्मिक नहीं। यदि मैं सही मायने में धार्मिक हूँ तो नैतिकता को अपने अन्दर समाहित कर लेता हूँ, पर नैतिक होने ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   1:17pm 23 Jan 2015
Blogger: Ravinder Singh Dhull
साधक बोलो दुर्गम पथ पर तुम न चलोगे कौन चलेगा?कदम कदम पर बिछे हुए है, तीखे तीखे कंकर कंटक।भ्रांत भयानक पूर्वाग्रह है, और फिरते हैं वंचक।पर साथी इन बाधाओ को तुम न दलोगे कौन दलेगा?अम्बर में सघनघन का, कोई भी आसार नहीं है।उष्ण पवन है तप्त धरा है, कोई भी उपचार नहीं है।इस विकट वे... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:12pm 23 Jan 2015
Blogger: Ravinder Singh Dhull
न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुमसफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।सदा जो जगाये बिना ही जगा हैअँधेरा उसे देखकर ही भगा है।वही बीज पनपा पनपना जिसे थाघुना क्या किसी के उगाये उगा हैअगर उग सको तो उगो सूर्य से तुमप्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥सही राह को छोड़कर जो मुड़ेवही देखकर दूसरो... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:26pm 14 Dec 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
मैनें कई बार कोशिश की हैतुम से दूर जानें की,लेकिन मीलों चलनें के बादजब मुड़ कर देखता हूँतो तुम्हें उतना ही करीब पाताहूँ |तुम्हारे इर्दगिर्द वृत्त कीपरिधि बन कर रह गयाहूँ मैं ।कवि अज्ञात ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:21am 22 Nov 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
हमारे जीवन की विशिष्टता इस बात में है कि हम असंभव एवं मुश्किल परिस्थितियां का सामना किस प्रकार करते हैं। लघु बुद्धि वाला मनुष्य स्वयं को इस प्रकार की परिस्थितियों में समाप्त कर लेता है तथा स्थिर बुद्धि वाला मनुष्य इस प्रकार की परिस्थितियों  में स्वयं को संयमित रख ज... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   3:21pm 11 Nov 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
याद है, तुम और मैं पहाड़ी वाले शहर की लम्बी, घुमावदार,सड़्क परबिना कुछ बोलेहाथ में हाथ डालेबेमतलब, बेपरवाह मीलों चला करते थे,खम्भों को गिना करते थे,और मैं जब चलते चलतेथक जाता थातुम कहती थीं ,बसउस अगले खम्भे तक और ।आज मैं अकेला हीउस सड़्क पर निकल आया हूँ , खम्भे मुझे अजीब निग... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:17pm 11 Nov 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
समस्त ज्ञान असत्य है एवं समस्त सत्य ज्ञान का स्वरुप है। समस्त सांसारिक ज्ञान केवल मात्र तर्क की शक्ति पर टिका है एवं जब तक  वह तर्क की सीमा को पार नहीं कर देता उसे संसार ज्ञान की श्रेणी में नहीं रखता। श्री रामकृष्ण परमहँस कहते हैं कि ज्ञान विश्वास से पैदा होता है न कि ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:49am 22 Oct 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
अकेला चलना क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है यह इस बात से साबित होता है कि न केवल आप इस जीवन में अकेले आते हैं ; अपितु आपकी अंतिम यात्रा भी अकेली ही रहती है। श्री कृष्ण गीता के सन्देश में केवल इतना ही कहते हैं कि हे पार्थ तूँ मुझमें है और मैं तुझमें। अन्य किसी और के बारे में मत ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:24pm 8 Sep 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
If you can keep your head when all about youAre losing theirs and blaming it on you,If you can trust yourself when all men doubt you,But make allowance for their doubting too;If you can wait and not be tired by waiting,Or being lied about, don’t deal in lies,Or being hated, don’t give way to hating,And yet don’t look too good, nor talk too wise:If you can dream — and not make dreams your master;If you can think — and not make thoughts your aim;If you can meet with Triumph and DisasterAnd treat those two impostors just the same;If you can bear to hear the truth you’ve spokenTwisted by knaves to make a trap for fools,Or watch the things you gave your life to, broken,And stoop and b... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   3:38pm 28 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रेफिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रेओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रेतेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रेफिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रेयदि कोई भी ना बोले ओरे ओ रे ओ अभागे कोई भी ना बोलेयदि सभी मुख म... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   11:21am 28 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
कदम उसी मोड़ पर जमे हैंनज़र समेटे हुए खड़ा हूंजुनूं ये मजबूर कर रहा है पलट के देखूंखुदी ये कहती है मोड़ मुड़ जाअगरचे एहसास कह रहा हैखुले दरीचे के पीछे दो आंखें झांकती हैंअभी मेरे इनतज़ार में वो भी जागती हैकहीं तो उस के गोशा-ए-दिल में दर्द होगाउसे ये ज़िद है कि मैं पुकारूंमुझे त... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:02pm 23 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
के जिस मंजिल के लिए चले थे हम। वो मंजिल अभी नहीं आई। तन्हा राही चलते हुए इक पड़ाव पर पंहुचा। चारों तरफ सब वैसा ही था जैसा वह च... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:04am 23 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
तन्हा राही राह चलता जाएगा; अब तो जो भी होगा देखा जाएगा। नेताजी सुभाष चन्द्र बॉस के जीवन चरित्र पर बनी एक फिल्म के गीत के उपरोक्त बोल एक ऐसे बाग़ी के हैं जिसने स्वयं की राह चुनी एवं उस राह पर चल दिए। इन्हें न मंजिल की फ़िक्र थी और न ही रास्ते की। इन्हें यह भी फ़िक्र नहीं थी कि क... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   6:06pm 22 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
दुःखेष्वनुद्विग्मनाः सुखेषु विगतस्पृहः।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते।।2/56 (गीता)भावार्थ: जो दुःख में विचलित न हो तथा सुख में प्रसन्न नहीं होता , जो आसक्ति, भय तथा क्रोध से मुक्त है, वह स्थिर बुद्धि वाला मनुष्य ही मुनि कहलाता है।ईश्वर कहते हैं कि मुनि अर्थात म... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:41am 6 Jul 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
I am honored to be with you today at your commencement from one of the finest universities in the world. I never graduated from college. Truth be told, this is the closest I've ever gotten to a college graduation. Today I want to tell you three stories from my life. That's it. No big deal. Just three stories.The first story is about connecting the dots.I dropped out of Reed College after the first 6 months, but then stayed around as a drop-in for another 18 months or so before I really quit. So why did I drop out?It started before I was born. My biological mother was a young, unwed college graduate student, and she decided to put me up for adoption. She felt very strongly that I ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:27pm 28 Apr 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
अविराम चलता यह जीवनइक नए मोड़ पर खड़ा है।पूछता है क्या किया जोमुझे कोसते होकब मैंने तुम्हें हराया;कब तुम्हारा दिल दुखायाकब किस्मत के लेखे को;मैं बदल पाया!मैंने कहा ऐ जीवन;कोसता यूं नहीं मैं के मैंने ठोकर खाई है;कोसता यूं नहीं के मैं आज हारा हुआ हूँ;कोसता यूं हूँ के भाग्... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   7:41am 27 Apr 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
एक उपन्यास का लेखन प्रारम्भ कर रहा हूँ। आशा करता हूँ कि अपेक्षा अनुरूप उसे सही रूप दे पाऊंगा।  उस उपन्यास में एक ऐसे रिश्ते का दर्द छिपा है जिसकी न कोई सामाजिक स्वीकार्यता है और न ही उसका कोई मूल्य है। मूल्य उसका केवल मात्र उन इंसानों के लिए है जिनके लिए उस रिश्ते की क... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   7:36am 27 Apr 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
हमदीवानों की क्या हस्ती, हम आज यहाँ कल वहां चलेमस्ती का आलम साथ चला,हम धूल उडाते जहाँ चलेआए बनकर उल्लास अभीआँसू बनकर बह चले अभी,सब कहते ही रह गए,अरे तुम कैसे आए, कहाँ चले?किस ओर चले? यह मत पूछो,चलना है, बस इसलिए चले,जग से उसका कुछ लिए चले,जग को अपना कुछ दिए चले।दो बात कही, दो ब... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   11:19am 8 Mar 2014
Blogger: Ravinder Singh Dhull
आज अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान की पुण्य तिथि है। उनकी पुण्य तिथि पर मैं राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी कविता जो लहू में उबाल ला देती है; उसे पेश कर रहा हूँ:हैफ़ हम जिसपे कि तैयार थे मर जाने कोजीते जी हमने छुडाया उसी कशाने कोक्या न था और बहाना कोई तडपाने को... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:18am 19 Dec 2013
Blogger: Ravinder Singh Dhull
हे वीर बन्धु ! दायी है कौन विपद का ?हम दोषी किसको कहें तुम्हारे वध का ?यह गहन प्रश्न; कैसे रहस्य समझायें ?दस-बीस अधिक हों तो हम नाम गिनायें।पर, कदम-कदम पर यहाँ खड़ा पातक है,हर तरफ लगाये घात खड़ा घातक है।घातक है, जो देवता-सदृश दिखता है,लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है,जिस पाप... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   6:31pm 18 Sep 2013
Blogger: Ravinder Singh Dhull
बादशाह अकबर और उनके दरबारी एक प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   4:08pm 15 Sep 2013
Blogger: Ravinder Singh Dhull
अपना भारत वो भारत है जिसके पीछे संसार चला। आज बड़े दिन के बाद पूर्व और पश्चिम का यह गीत सुना।  हम कहाँ थे और कहाँ पंहुच गए! भारत अर्थात आर्यावर्त; न केवल इसकी भाषा अपितु इसकी संस्कृति, वेशभूषा, धर्म, मान्यताएं और यहाँ तक कि नागरिक भी एक गंभीर खतरे से रूबरू हैं और इसे कोई ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:34pm 18 Aug 2013
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