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राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta says...) : View Blog Posts
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राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta says...)

जी करे मैं  काम की फेहरिस्त लिखना छोड़ दूँझटकार लूँ ये हाथ और काम सारे छोड़ दूँ जो हुआ सो हो गया, जो होगा बेहतर ही होगा आने वाले कल की मैं अब फ़िक्र करना छोड़ दूँ पास जितना मैं गया वो दूर उतना हो गयी ऎसी मंज़िल को तो अब मैं पकड़ना छोड़ दूँ जिसने सफर शुरू किया  सिर्फ तेर...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :
  February 6, 2015, 10:23 am
चिड़िया का बच्चा झांकता कोटर से अगले ही पल छिप जाता किसी डर से बाहर उजाला है बहुत हवा तेज़ चलती है अंदर सब ठीक है माँ की कमी खलती है माँ होती तो गले से लगा लेती मुझको जाने कौन से जादू से सुला देती मुझको कुछ कहने में मेरी सांस अटक जाती है बिना बोले मेरी बात म...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :
  February 5, 2015, 8:35 pm
आजा रे यूँ न छोड़ मुझे तनहाकैसे मैं जी पाउँगा तेरे बिना।तेरी याद में, दिन मेरे कटेना रात को पाउन मैं चैना।आजा रे।.……मेरी जिस बात पे तू रुस्वा हो गयाजरा उस बात को तू इक पल भूल जा।इक पल सोच फिर, क्या मैं इतना बुरा। ।आजा रे यूँ न छोड़ मुझे तनहा।।।।।।क्या तुझको यकीं , कि  मैं वो...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :My Music
  December 7, 2014, 12:48 pm
माँ तू दूर क्यूँ हैज्यादा हैं कमरे बहुत है सामान भीइस घर में है थोड़ा सा आराम भी।पर माँ तू जो नहीं है तो रीता लगे हैसारा दिन राह तेरी तकता लगे है माँ तू दूर क्यूँ है ?एक  छोटे से कमरे में रहा करते थे हम सबयाद आती हैं बातें जो करते थे हम सब   जगमगाते थे दिन वो उम्मी...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Poem for mother
  July 24, 2014, 12:22 pm
 This is what we made out of old cassette covers. the 3-d TIGER !...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Cassette craft
  June 19, 2014, 12:20 pm
तेरे साथ में है कितना वक़्त मेरान तुझे है पता न मुझे है पताफिर रहे मुझसे दूर क्यूँ चेहरा तेराअपनी नज़रों से पूछ , दे मुझे तू बतातुझे  दुनिया जहां का है काम जंहाँतुझमे हे ढूँढा मैंने मेरा जंहाफुर्सत जब मिले इस जंहा से तुझेहमसे मिलने कि तू , कर लेना खता।तेरे साथ में है कि...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :
  January 16, 2014, 9:35 am
ख्वाइशें , तेरी ख्वाइशेंमेरी खाइशों से जुदा  हैं क्यूँमंज़िलें जब अपनी एक हैंफिर ये रास्ते जुड़ा हैं क्यूँइस जहाँ में हमेशा कोई न रहाफिर इतने ज़ुल्म क्यूँ क्यूँ इतना सहाउलझने इतने ज़यादा, मुहब्बत कम हैं क्यूँख्वाइशें , तेरी ख्वाइशेंमेरी खाइशों से जुदा  हैं क्यूँ...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :
  January 16, 2014, 9:34 am
आसमा से जो बारिश हो रही है,तेरी मेरी सिफारिश हो रही है.देखो पत्ते भी नहायेक्यूँ न हम भी भीग जाएँ .करें बस वो, जो ख्वाइश हो रही है।आसमा से जो बारिश हो रही है…कहे भीगी सी ये खुशबू ,मुस्कुरा दे अब ज़रा तू,मौसम की समझाइश हो रही है.आसमा से जो बारिश हो रही है…जो है बादल की कहानी,स...
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Tag :My Music
  September 30, 2013, 12:06 pm
रात को जागने वालों से पूछोतन्हाई में याद करते हैं किसको?सुर्ख आँखों से, भरी पलकों से, नींद किसने चुराई?दस ग्यारह बारह से, कब बजते हैं ढाई?रात को जागने वालों से पूछो ....काम  सैकड़ों हैं,करने   हैं,रात फिर ये फुर्सत में कैसे?दिन बिताया , एहसान चुकाया, रात अपनी हो जैसे. रात को जा...
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Tag :My Lyrics
  May 18, 2013, 12:47 pm
भारत तुझे पुकारे कान्हा आजा  रेमैली गंगा मैला मन है, पावन करजा रे।चीर बढाने  वाला , लाज बचाने  वालाकोई नहीं है मन से कंस मिटने वाला सोये हुए हैं अर्जुन उन्हें जगा जा रे भारत तुझे पुकारे कान्हा आजा  रेधुंए से भरी हवा है,शोर भरी ये फिजा है निर्मल नहीं है जल भी, जीवन बना सज...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :My Lyrics
  March 15, 2013, 9:02 pm
Material Used:Old unsable CDs.Acrylic ColorsFevicolThread.Darw and Paint whatever you like on the CDs. Paste them back to back with fevicol. Run a thread in center of all. Thats it !...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :art and craft.
  March 4, 2013, 10:20 am
राम नाम ले भाया - जग झूठी माया।कांटे पथ में , छले पग में , जब निर्बल हो काया रहना चलते  नाम ले, वक्त न करना जाया।जग झूठी माया .राम नाम ले भाया - जग झूठी माया।सखा न कोई बंधू न कोई ना कोई हम साया बस इश्वर ही सच्चा साथी, प्रभु में प्रेम समाया जग झूठी माया .राम नाम ले भाया - जग झूठी म...
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Tag :My Music
  February 27, 2013, 9:48 pm
नहीं याद रहता किसी को कोई जो दिखाई न दे वो तो है ही नहीं।की है जसकी खुदा  से मन्नत कोई वो उनके लिए क्या खुदा ही नहीं।नहीं याद रहता किसी को कोई .......जिनसे कहने में लगता हो दर न कोई उससे बढ़कर के अपना तो होगा नहीं .नहीं याद रहता किसी को कोई ..........उस जगह पे महफ़िल सजाता कोई जँहा म...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :
  February 24, 2013, 9:24 pm
रास्ता जो दिल दिखाए क्यूँ न वंही पर जाएँ थमना  है क्यूँ रुकना है क्यूँजब हर कदम पर मंजिल मिल जाये .किसको पता कल होगा क्या किसको खबर होंगे कँहा बस आज ही अपने पास है ये पल ही सबसे खास हैकल की फिकर को भूल कर बस आज ही में हम खो जाएँ थमना  है क्यूँ रुकना है क्यूँजब हर कदम पर मंज...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :My Lyrics
  February 19, 2013, 11:49 am
Ever wondered what to do with old unusable floppy discs? Well, here is what I did !A chandelier out of the old floppies.Luckily all floppies have space for nut-bolting at one end. the onther end can be drilled without much effort.Material used:Unusable Old floppiesUnusable old Guitar sringsStraw pipe piecesBeads and mirror pieces.यदि पुरानी फ्लॉपी से कुछ और बेहतर बनाने का आयडिया आपके पास है तो ज़रूर बताइयेगा।...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :art and craft.
  November 16, 2012, 10:59 am
भ्रष्टाचार अब नहीं सहेंगे "चलता है" नहीं चलने देंगे अब ये मशाल नहीं बुझने देंगे."वो" हमको पल पल रोंदेंगेलुहुलुहान पर नहीं रुकेंगेअब ये मशाल नहीं बुझने देंगे.सब मिल कर हमको घेरेंगेहम होंगे अकेले किन्तु लड़ेंगेअब ये मशाल नहीं बुझने देंगे.कीचड वो हुम पर फेंकें...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  October 30, 2012, 11:14 am
पाया मैंने वजूद मेराचौराहे के बुत के जैसाघिरा भीड़ से किन्तु अकेला.ना हसने का ना रोने काजाने क्या एहसास है मन काबस सुनने का चुप रहने का.जिसको देखा वही मिला थाअपने घर की दीवार बनातामेरे हाथ में कोरा नक्शा.बस दिल की दस्तक से दरवाज़ामेरे लिए क्यूँ कोई खोलेगाये दुनियाद...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  October 22, 2012, 11:32 am
सरकारी दफ्तर की घूमने वाली कुर्सी पर बैठकर मोटी सी फ़ाइल पर फिर चिड़िया बिठा कर फिर कट गया एक दिन बतौर सरकारी कलेंडर तीन दिन और इसी तरह भर भर के छापेगा प्रिंटर घिसी जायेगी कलम और बनेगे पोथी पत्तरकभी भी , कंही  भी हो जाने वाला ट्रांसफरगाडिया लुहार सा जीता एक सरकारी अफस...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  October 15, 2012, 6:04 pm
क्या कहानी लिखी जाये.समर्पित पोषण की, सर्वताभाव केन्द्रता की.अथवा अकर्मण्य एहसानफ़रामोशी की उन्नत विचारशीलता की, समय की समय के हृदयविहीन होने की या उस समय की जब समय नहीं रहेगा उनकी सेवा करने को जिनकी सेवा से जीवन भर तृप्त रहे आपआखिर क्या कहानी लिखे जाये ?...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  September 10, 2012, 6:25 pm
ऐ ज़िंदगी मुझसे रूठ जाती है क्यूँठुकरा कर मुझको मुझसे दूर जाती है क्यूँ सपने दिखा कर मुझको इतना रुलाती है क्यूँआगे को देखता हूँ जब भी मुझे पीछे ले जाती है क्यूँ?जिस दिल में सिर्फ तू हैउसी के टुकड़े  किये जाती है क्यूँ?हालात मौत से भी बदतर हैं न मेरे पास है न छोड़कर जात...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  September 10, 2012, 6:07 pm
सन दो हज़ार की मेरी पहली कविता.स्वयं से एक प्राण है.आशाओं के आकार काकर्म के धरातल परनिर्माण हेतु समर्पण है.न व्यथाजनित निराशान हर्षोन्माद का पागलपनसार्थक करना अब हर एक क्षण है. ...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  September 10, 2012, 5:47 pm
तूफ़ान से पहले ये झोंपड़ी ये चार बर्तनमिट्टी के मेरी ज़िंदगी की कमी है यही आने वाला कोई तूफ़ान ही सही में इन्हें छोड़ कर जाऊं कैसे ?तूफ़ान में मौत बरसाती गरीबों परये कातिल हवाएं क्यूँ हैं?ऐ खुदाए समंदर तू इस कदर खफा क्यूँ है?...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  September 10, 2012, 5:43 pm
कँहा मिलेगा उत्तरउन प्रश्नों काजिन्हें निरंतरहमने पूछा.- नीले आसमान से-काली रात से-प्रस्फुटित होती सुबह से.फिर एक सुबह'वो' हमें मिले.प्रत्यक्ष उत्तर तो नहीं,पर संभवतः एक रास्ताजन्हा उत्तर मिलेगा हमेंमिला-उनकी आँखों में. ...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  August 28, 2012, 10:22 am
समझना है कभी समझाना है कभी हर हाल में लेकिन बढ़ते जाना है अभी ज़िंदगी सवालों का एक समंदर है मेरी कश्ती को बहुत दूर जाना है अभी बस एक ही दिन का सफ़र हुआ है अभीशाम की चादर में सूरज खोया है अभी रात ले आयी है पुरानी यादों की ठिठुरन यादों को ही हमसफ़र बनाना है अभी जो भी करना ह...
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  August 28, 2012, 10:05 am
एक महीन कागज़जैसा जीवननापते हुए मोटाईजांचते हुए दरारऔर देखते हुएविकृति.फिर कंही मानस पटल पर अंकित कर लेने कोकी क्या देखा हमने.लिखित अलिखित सम्बन्ध.जाना अनजाना व्यवहार.क्या यह महीन कागज़ अंकित कर पायेगा,उपलब्धउपकरणों के बावजूद....
राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ( Rajesh Gupta s...
Tag :Hindi Poetry
  August 28, 2012, 10:02 am
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