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Blog: शिफ़ा कजगाँवी - شفا کجگاونوی

Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक हिंदी ग़ज़ल प्रस्तुत करने का साहस कर रही हूँजो कमियाँ हों उन से अवगत कराने की कृपा अवश्य करेंधन्यवाद !ग़ज़ल_______हम कर्तव्यों को पूर्ण करें, माँगें केवल अधिकार नहींमानव से मानव प्रेम करे,संबंधों का व्यापार नहींजिस धरती माँ में सहने की शक्ति का पारावार न होउस का मत इतन... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:17am 30 May 2013 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक महीने के वक़फ़े के बाद एक ग़ज़ल के साथ फिर हाज़िर हूँशायद पसंद आएग़ज़ल***********धड़कनें हों जिस में, वो ऐसी कहानी दे गयाचंद   किरदारों की कुछ यादें पुरानी दे गया*****टूटे    फूटे   लफ़्ज़   मेरे   शेर   में   ढलने   लगेमेरा मोह्सिन मुझ को ये अपनी निशानी दे गया*****रोज़ ओ शब की रौनक़े... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   5:14am 7 May 2013 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
लीजिये’चराग़’रदीफ़ के साथ एक ग़ज़ल कहने और आप तक पहुंचाने की हिम्मत कर रही हूंऔरअब नतीजे का इंतेज़ार है_____________________________________________________________________ग़ज़ल___________आँधियाँ ज़ुल्म जो ढाएं तो बिफरता है चराग़वरना उफ़रीत को ज़ुलमत के निगलता है चराग़___ख़ैर मक़दम में अँधेरों के वो जल जाता हैआग मे... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   7:08am 29 Mar 2013 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आज क़रीब-क़रीब २ माह के बाद एक ताज़ा ग़ज़ल के साथ ब्लॉग का रुख़ कर पाई हूँ हालाँकि एक ख़ौफ़ भी है कि ’शेफ़ा’ कजगाँवी का वजूद ब्लॉग की दुनिया में बाक़ी है या इतने दिनों की ग़ैर हाज़िरी ने ख़ुश्क पत्ते की तरह ब्लॉग-दोस्तों के ज़ह्नों से कहीं दूर कर दिया ग़ज़ल_____________जिन के फ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   12:18pm 26 Feb 2013 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
मुझे लगता है कि इस कविता से पहले मुझे कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है बस इतना कहना चाहूंगी कि ये किसी एक दुर्घटना पर व्यक्त की गई संवेदना नहीं है .....हम तेरे साथ हैं__________________सृष्टिकर्ता ने तेरी आँख बनाई थी जबसोचा होगा कि भरूँ नैन में सपने इसकेइसकी आँखों मेंसदाप्यार की इक ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   2:06pm 22 Dec 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक माह के अरसे के बाद एक बार फिर एक ग़ज़ल के साथ हाज़िर ए ख़िदमत हूंग़ज़ल_______________हथियार तेरे किस को डराने के लिये हैंहम तो तेरा हर वार बचाने के लिये हैं*हर फूल की क़िस्मत में शिवाला नहीं होताकुछ फूल तो मय्यत पे सजाने के लिये हैं*आँसू को सदा ग़म से ही जोड़ा नहीं करतेख़ुशियो... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   5:32am 6 Dec 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक ग़ज़ल हाज़िर ए ख़िदमत है आज मेरा जी चाहा कि इसे आप सब तक भी पहुंचाऊंअब आप बताएं कि मेरा फ़ैसला ठीक है या मेरे कलाम ने आप सब कोनाउम्मीद किया*************************ग़ज़ल*************************अह्ल ए वफ़ा को जंग में उस पार देख करहूँ मुंजमिद यक़ीन को मिस्मार देख कर*****जिस की ज़ुबाँ ने ज़ख़्म दिये है... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:44am 3 Nov 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आज९ अक्तूबरहै मेरे ब्लॉग कीतीसरी सालगिरह ,तो मैंने  सोचा कि अपनी वो ग़ज़ल पोस्ट करूँ जो मुझे बेहद पसंद हैआज आप सब दोस्तों ,सलाहकारों, टिप्पणीकारोंऔर हर उस व्यक्ति का आभार प्रकट करना चाहती हूँ जिस ने मेरे ब्लॉग को पढ़ा lये आप के ही उत्साहवर्धन से संभव हो सका वर्ना तो शा... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   5:30am 9 Oct 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक ग़ज़ल हाज़िर ए ख़िदमत है ग़ज़ल -----------------अब कहाँ आन -बान बाक़ी है घर नहीं बस मकान बाक़ी है *****जिस हवेली में बसते थे रिश्ते उस हवेली की शान बाक़ी है *****नीम मुर्दा से हो गए फिर भी इन उसूलों में जान बाक़ी है *****जिस के हाथों में हाथ हैं अब तक बस वही ख़ानदान बाक़ी है *****होंगी सारी... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   6:31am 2 Oct 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
२७ अगस्त को लखनऊ में होने वाले सम्मान समारोह में ये गीत पढ़ा गया लेकिन ये लिखा गया  उस समय जब गुवाहाटी काँड ने हमें अत्याधिक व्यथित किया थाआप के विचारों का हृदय से स्वागत है " मैं कैसे ग़ज़ल कहूँ "_______________________________कहीं जातिवाद का ज़ह्र हैकहीं जल रहा कोई शह्र हैकहीं टूटता कोई ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:21am 2 Sep 2012 #गीत
Blogger: इस्मत ज़ैदी
पंकज जी के ब्लॉग पर पोस्ट की गई एक पुरानी ग़ज़ल पेश ए ख़िदमत है ..........अभी तक गाँव में ________________________गोरियाँ पनघट पे जाती हैं, अभी तक गाँव में प्रीत की राहों के राही हैं, अभी तक गाँव में*****पायलों से सुर मिलाती वो खनकती चूड़ियाँलोक धुन पर गुनगुनाती हैं, अभी तक गाँव में*****पक्षियों क... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:14am 21 Aug 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आज एक नज़्म के साथ हाज़िर हूँ शायद पसंद आए " यही सदियों तलक होगा "__________________________यही सदियों से होता हैयही सदियों तलक होगाकि परवाना तड़पता हैशमा का दिल भी जलता हैये इतना प्यार करती हैउसे दिल में बसाती हैमगर ये जानती भी हैअगर वो पास आएगातो उस कि जान जाएगीइसी ग़म में वो घुलती है... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   7:07am 20 Jul 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आज फिर एक ग़ज़ल ले कर हाज़िर हूँ इस उम्मीद के साथ कि आप सब हज़रात ओ ख़वातीन       मेरी बार बार की ग़ैर हाज़िरी को नज़र अंदाज़ कर के अपने ख़यालात से ज़रूर नवाज़ेंगे / नवाज़ेंगी , शुक्रियाग़ज़ल_________________अपनी चालों से ख़ुद मात खाने लगेतब यक़ीं के क़दम डगमगाने लगे*****लम्स ममता का ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   8:41am 21 Jun 2012 #
clicks 168 View   Vote 0 Like   7:27am 23 May 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
२ माह के वक़फ़े के बाद एक ग़ज़ल हाज़िर ए ख़िदमत है  आप सब के क़ीमती मश्वरों का इंतेज़ार रहेगा शुक्रिया......हमनवा नहीं होता ________________________वो जो मुझ से ख़फ़ा नहीं होतादर्द हद से सिवा नहीं होता*****हमज़बाँ तो बहुत मिले लेकिनक्यों कोई हमनवा नहीं होता*****आग बस्ती की वो बुझाता तोउस का ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   7:22am 23 May 2012 #ग़ज़ल
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आप सभी को होलीबहुत बहुतमुबारक हो .........कहीं ये अर्थ न खो दें ________________________________________मनोभावों को करते व्यक्त सारे रंग होली के बहुत सुंदर ,बहुत गहरे हैं सारे रंग होली के ये पीले, लाल, नारंगीहरे, नीले , गुलाबी सब छिपाए अपने अंदर रंग, हैं भंडार अर्थों कासभी रंगों के अर्थों में मिलेग... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   5:38pm 6 Mar 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक आम सी ग़ज़ल हाज़िर ए ख़िदमत है ,,ग़ज़ल************पथरा गई निगाह इसी इंतेज़ार में आएगा कोई शख़्स कभी इस दयार में ******************चाहा था तुम ने फूल खिलें रेगज़ार में पर बात ये नहीं थी मेरे एख़्तियार में ******************ऐ रहनुमा ए क़ौम यक़ीं कैसे हो हमें धोके मिले हैं हम को सदा एतबार में ******************... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   7:28am 29 Feb 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
कभी कभी लिखना चाहते हुए भी कुछ लिखना मुहाल लगता हैऐसे ही हालात में कही गई ग़ज़ल आप की ख़िदमत में हाज़िर है ग़ज़ल-------------जान कर बच्चा हमें बहलाएगी झुनझुना वादों का फिर दे जाएगी-------उल्झनें जिस ज़ात से मनसूब हैंमस’अलों को कैसे वो सुलझाएगी--------साँझ ने घूंघट उठाया रात काचाँद क... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   6:07am 13 Jan 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
कभी कभी लिखना चाहते हुए भी कुछ लिखना मुहाल लगता हैऐसे ही हालात में कही गई ग़ज़ल आप की ख़िदमत में हाज़िर है ग़ज़ल-------------जान कर बच्चा हमें बहलाएगी झुनझुना वादों का फिर दे जाएगी-------उल्झनें जिस ज़ात से मनसूब हैंमस’अलों को कैसे वो सुलझाएगी--------साँझ ने घूंघट उठाया रात काचाँ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   6:07am 13 Jan 2012 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
चंद दिन पहले की बात है कि एक दिन पंकज सुबीर जी ने फ़ेसबुक पर एक शेर पोस्ट किया और सभी लोगों को आमंत्रित किया ग़ज़ल पूरी करने के लिये ,बस फिर क्या था जितने लोग ऑनलाइन थे उन की एक एक ग़ज़ल तैयार हो गई ,मैंने  भी कोशिश कीअब आप भी लुत्फ़ लीजिये लेकिन ये ध्यान रखियेगा कि ये  फ़िल... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:32am 19 Dec 2011 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
आज २६ नवम्बर है और मैं  एक नज़्म की शक्ल में खिराज ए अक़ीदत पेश करना चाहती हूँ उन शहीदों को जो अपने मुल्क की ख़ातिर खुद तो क़ुर्बान हो गए लेकिन अपने देशवासियों को  महफ़ूज़ कर गए जज़्ब  ए वतन _____________ लोग बहबूदी ए मिल्लत का लबादा ओढ़े और चेहरों पे सजाए हुए मासूम से रंग कितने ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   8:08am 26 Nov 2011 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
एक तरही ग़ज़ल पेश कर रही हूँ  तरह ये है -"सावन भादों में करती है हम से आँख मिचोली धूप "यूँ तो घटाओं के झूमने का मौसम चला गया लेकिन गोवा में तो कभी भी घटाएं आसमान पर छा जाती हैं और बारिश होने लगती है लिहाज़ा ये ग़ज़ल शायद बेमौसम नहीं होगी ग़ज़ल____________अपनी बस्ती, अपना आँगन ,वो पी... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:02pm 5 Nov 2011 #
Blogger: इस्मत ज़ैदी
शुभकामनाएँ______________दो छोटी छोटी रचनाएँ प्रस्तुत हैं ,,नई तो नहीं है लेकिन शायद बहुत कम लोगों की पढ़ी हुई है ,,आप सभी को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएंमन में ज्ञान का दीप जलाकर ,अंतर्मन से प्रश्न करें .हम ने कैसे कर्म किए हैं ?गर्व करें या शर्म करें?अंतर्मन ही न्यायधीश है,वो त... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   8:08pm 25 Oct 2011 #
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