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Blog: विचार

Blogger: Aftab Azmat
बलात्कार, दामिनी, बदनसीब...न जाने कितने शब्दों की संज्ञा दे रहे हैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले। बड़े-बड़े विद्वानों को स्टूडियो में बैठाकर लंबी-लंबी बहस। कोई उस बहादुर लड़की को चिरैया की उपाधि दे रहा है तो कोई देश को शर्म से सर झुकने की बात चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है। निचो... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:58am 30 Dec 2012
Blogger: Aftab Azmat
भारत आजाद कराने के लिए गांधी जी ने जितनी जद्दोजहद यानी आंदोलन और समर्पण किया, एक भारत देश का सपना देखा लेकिन हे गांधी(हे भगवान स्टाइल) तेरे देश के नेताओं और बुद्धिजीवी वर्ग को ये क्या हो गया? जनता के वोट के लालच में इस कदर अंधे हो गए कि दो पल में वह अपना ऊपर से नियंत्रण खो द... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:19pm 28 Dec 2012
Blogger: Aftab Azmat
अंग्रेजों ने हमारे मुल्क को सबकुछ दिया। सोने की चिडिय़ा को कंगालों की फौज में तब्दील करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इन सबके बीच सबसे अहम बात है, कि अंग्रेजों ने एक ऐसा दर्द हमेशा के लिए दे दिया, जिसकी दवा कोई नहीं। शायराना अंदाज में कहते हैं न कि दर्द भी ऐसा दिया, जिस... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:56pm 27 Dec 2012
Blogger: Aftab Azmat
औरत, तेरी यही कहानी...आज फिर वो शब्द याद आ गए। मामला जब औरत की आजादी का आता है तो कई तरह की प्रतिक्रियाएं आम हैं। कोई इसे धार्मिक तौर पर देखता है तो कोई सामाजिक तौर पर। कोई बड़ी महिला हस्तियों का वास्ता देकर इस सच्चाई से मुंह चुरा लेता है तो कोई इस पर शून्य भाव दिखाकर उदासी... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:13pm 23 Dec 2012
Blogger: Aftab Azmat
रेप, गैंगरेप, कुकर्म और न जाने कितने घृणित करने वाले शब्द इस साल के आखिरी महीने के अखबारों और न्यूज चैनलों में इतिहास के साथ सिमट गए। एक मासूम के साथ हुई इस अनहोनी, अनहोनी नहीं बर्बरता को सुनकर, पढ़कर और इससे उपजे आंदोलन को देखकर हर उदासीन किस्म के इंसान की भी भावनाएं जाग... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   2:11pm 23 Dec 2012
Blogger: Aftab Azmat
निर्मल बाबा, इन दिनों सबके दिलो दिमाग में पर छाए हुए हैं। कल तक उनके प्रशंसक उनका गुणगान करने वाले आज उनके आलोचकों की फेहरिस्त में आ गए हैं। कई जगहों पर निर्मल बाबा के खिलाफ मुकदमेबाजी का दौर भी चल पड़ा है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर भी बाबा अब गुस्सैल यूजर्स के निशा... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   5:47am 14 Apr 2012
Blogger: Aftab Azmat
घर की बालकनीमें दो पल सुकून के तलाशते हुए अचानक ही एक अखबारी कागज की घर की बनाई हुई पतंग परनजर चली गई. पतंग जिस तरह हवा में गोते खा रही थी, उसे देखकर बरबस ही पुराने दिनोंकी यादें ताजा हो गई. ऐसी यादें जो कभी जब हवा की रफ्तार से उठती हैं तो हवा के हल्केपनके बजाए मन मस्तिष्क प... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:21pm 24 Mar 2012
Blogger: Aftab Azmat
भारतीय संस्कृति में सेक्सुअल एजूकेशन का जिक्र ही एक बड़ी बात कही जाती है। ऐसे में यह बच्चों को दिलाने का मामला तो जैसे भारतीय समाज में अपराध ही बन जाता है। लंबे समय से सेक्सुअल एजूकेशन को सेलेबस का हिस्सा बनाने की मांग उठती आ रही है। कभी इसमें समाज के कुछ ठेकेदार रोड़ा ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   3:39am 15 Nov 2011
Blogger: Aftab Azmat
वेलेंटाइन डे का दिन हम जैसे शादीशुदा प्रोफेशनल पुरुषों के लिए पत्नी को विश करने के बाद अपने अखबार में बेहतर से बेहतर कवरेज देने के लिए माना जाता है। हम भी इस दिन नए से नए एंगल की खबरें लाकर अपने रीडर्स को रिझाने की कोशिशें करते हैं। लेकिन इस बार के वेलेंटाइन डे ने जो खबर ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:51am 15 Feb 2011
Blogger: Aftab Azmat
वेलेंटाइन वीक शुरू होने के साथ ही सड़कछाप बाबाओं की भी मौज हो जाती है। महीनों तक ग्राहक का इंतजार करने वाले कथित ज्योतिषियों की तो जैसे प्यार के इस मौसम में बांछे खिल जाती हैं। हर प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्याज का इजहार करने के साथ ही अपने प्यार की उम्र जो देखना चाहता है... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:32am 11 Feb 2011
Blogger: Aftab Azmat
एक समाचार पत्र, जिसके तैयार होने में पैसा और मेहनत दोनों लगते हैं। समाचार पत्र का हम मीडिया जगत के लोगों के लिए जो ओहदा है, आम पाठक की नजर में वह इससे बिल्कुल अलग है। यह तब देखने को मिला, जब मैं सड़क किनारे खड़ा हुआ अपने एक मित्र के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। मैं प्रतीक्षा... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:22pm 6 Feb 2011
Blogger: Aftab Azmat
मुस्लिम समाज का दुनिया में एक बड़ा संस्थान दारुल उलूम देवबंद आजकल विवादों के घेरे में है। यहां से जारी होने वाले फतवों को दुनियाभर के मुस्लिम मानते हैं। मुस्लिम समाज में इस संस्थान को जो ओहदा यानी इमेज है, वह देशभर में चुनिंदा संस्थानों की ही है। पुराने वाइस चांसलर के... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:58pm 6 Feb 2011
Blogger: Aftab Azmat
एक देश, 28 राज्य, 1618 भाषाएं, 6400 जातियां, 6 धर्म, 6 एथनिक ग्रुप और 29 मेजर फेस्टिवल्स। यह है उस हिंदुस्तान की पहचान, जिसमें दीवाली में अली और रमजान में राम बसते हैं। 62वें गणतंत्र दिवस पर हम हमारी एकता को दिल से सम्मान और सलाम करते हैं। इन 62 सालों में न जाने कितनी बार हमें तोडऩे के प... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:08am 28 Jan 2011
Blogger: Aftab Azmat
तुम मेरे साथ हो रोशन है आंगन मेरे दिल कातुम न होती तो रोशनी कहां से लाताकह देते एक बार भी मुझेचांद-तारे मैं तोड़ लाताहवाओं का रुख मैं मोड़ लातातुम मेरे साथ हो रोशन है आंगन मेरे दिल का।।मोहब्बत का दर्द समझ जाता मैंगर प्यार की भाषा में कह पाताशब्दों को जोडऩा न सीख पाता मै... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   1:39pm 19 Jan 2011
Blogger: Aftab Azmat
100 का नोट बहुत ज्यादा लगता है, जब किसी गरीब को देना हो लेकिन होटल में तो बहुत कम लगता है…तीन मिनट भगवान को याद करना मुश्किल है लेकिन तीन घंटे की फिल्म देखना आसान है…पूरे दिन मेहनत के बाद दोस्तों के पास मस्ती करने से नहीं थकते लेकिन जब मां-बाप के पैर दबाने हों तो लोग तंग आ जा... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:25pm 16 Jan 2011
Blogger: Aftab Azmat
हिंदू आतंकवाद, नाम जुबान पर आया तो जैसे बवाल होना शुरू। राहुल गांधी ने इसका नाम लिया तो विपक्षियों ने जैसे जान की आफत बना दी। अब यूपी के एक नेता आजम खां ने इसका नाम लिया तो सियासी भूचाल फिर अपने चरम पर आ गया। भगवा या हिंदू आतंकवाद को लेकर बवालों का यह सिलसिला थमने का नाम न... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   2:46pm 24 Dec 2010
Blogger: Aftab Azmat
प्याज, वह नाम जो हर आम आदमी की जुबान पर आते ही कड़वा स्वाद खुद पैदा कर देता है। हालांकि कल तक यह प्याज हम सबका चहेता था। हम रेस्टोरेंट में भोजन करने जाते थे तो खाने के थाली के साथ फ्री में खूब सजावट के साथ हमारे सामने पेश किया जाता था। आज हम खाना खाने जाते हैं तो प्याज खाने ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:32pm 23 Dec 2010
Blogger: Aftab Azmat
साल शुरू होते हुए महंगाई डायन का प्रकोप ऐसा शुरू हुआ कि साल बीतने के साथ ही आल इज नोट वेल में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। साल के शुरू में आमिर खान की फिल्म थ्री इडियट के डायलॉग आल इज वेल ने आम जनता को एक राहत दी थी, कि जब भी कभी कोई आपत्ति आए तो आप इस वाक्य को ‘अहं ब्रह्मास्... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:16am 21 Dec 2010
Blogger: Aftab Azmat
सोमवार की सुबह हर अखबार में एक छोटी मगर दर्दनाक खबर छपी थी- पिता की डांट से क्षुब्ध होकर बेटे ने खुद को गोली मारी। यह दर्दनाक खबर अगले दिन उस बेटे की मौत के साथ ही और भी दुखदायी हो गई। बाप अपने इकलौते बेटे की चिता को आग लगाने से पहले गम की आग में खुद जल रहा था कि मंगलवार के अ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:24am 7 Dec 2010
Blogger: Aftab Azmat
आमतौर पर हर दिन कहीं न कहीं से सुनने को मिल जाता है कि फलां आदमी या सेलेब्रिटी के खिलाफ फतवा जारी हो गया है। फतवे को लेकर हमारी जनता में इस कदर कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है कि हम इसे फरमान समझ बैठते हैं। अगर इस बात की तह तक जाएं तो पता चलता है फतवा महज एक कानूनी सलाह है, ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   2:38pm 5 Dec 2010
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