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बहुत नहीं थे सिर्फ़ चार कौए थे कालेउन्होंने यह तय किया कि सारे उड़ने वालेउनके ढंग से उड़ें, रुकें, खाएँ और गाएँवे जिसको त्योहार कहें सब उसे मनाएँ।कभी-कभी जादू हो जाता है दुनिया मेंदुनिया-भर के गुण दिखते हैं औगुनिया मेंये औगुनिए चार बड़े सरताज हो गएइनके नौकर चील, गरूड़ ...
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  March 9, 2015, 9:28 pm
Raangon Ki Baarish Yaa Hamare Khwaishon Ki Baarish... Udte Hue Raangin Sapno Mein Aaj Phir Hai Armaano Ki Baarish... Kisi Ki Umid Mein Thode Rang Bharne Ki Baarish...Ya Man Ke Kaale Bhanvar Ka Nirmal Rangoon Se Bhigone Ki Baarish... Bas Itna Hi Kahta Hun, Ye Hai Hamaare Sabhi Ke Ek Prayaash Haamare Pyar Ki Baarish."HAPPY HOLI"...
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  March 8, 2012, 12:55 am
गहरे आकाश पर चलकर फिसल गया हूँ कई बार, उदास नम आँखों से टपक गया हूँ कई बार, तन्हाइयाँ बेचैन कर जाती हैं या बेचैनी में तन्हा रह जाता हूँ कई बार…बहुत सोंचा… बहुत चाहा…कोई दर्पण उठाकर देखूं खुद को, थोड़ा अपने से समझूं खुद को… मगर ज्योंही उठाया, दर्पण चनक गया… अफसोस मेरा थ...
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  February 26, 2011, 11:40 am
कुछ छूट रहा है मुझसे गहराते दरियाओं का शहर,आज आ गया है मुझसे मिलने और नया आरंभन,बस दो पल के लिए बिखर जाऊँ उस घने आगोश में,रोज नया आरोहन हो ऐसे सघन आगोश में॥नये साल की मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएँ।HAPPY NEW YEAR TO ALL MY FRIENDS...
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  January 2, 2011, 2:59 pm
Divyabh Aryan Photographyमेरे सभी पुराने व नये मित्रों को "दीपावली"की ढेरों शुभकामनाएंधन्यवाद।...
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  November 5, 2010, 4:14 pm
"काफी समय बीत गया रुह चुराने में…शायद जीवन और लगे उसे पास लाने में"।इस दौरान मेरे एक मित्र मधुमये जी जो संगीतकार हैं,उन्होंने मुझे प्रेरित किया गीत लिखने के लिए और बसकलमबद्ध गीत की संगीतमय रुपरेखा तैयार हो गई…वैसे तो ये बहुत पहले ही संगीतबद्ध हो चुका था किंतुसमयाभाव क...
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  May 29, 2009, 9:43 pm
आगोश में निशा के करवटें बदलता रहता है सवेरालिपटकर उसकी संचेतना में बिखेरता है वह प्रांजल प्रभा…संभोग समाधि का है यह या अवसर गहण घृणा काफिर-भी तरल रुप व्यक्त श्रृंगार, उद्भव है यह अमृत का…उत्साह मदिले प्रेम का…जागते सवेरे में समाधि…अवशेष मुखरित व्यंग…या व्यंग इस रच...
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  November 14, 2008, 2:12 pm
जाने कितनी ही सुबह बीत गई रातको तकने के बहाने पर याद रहामेरा यही साथी जो साथ चला थातन्हाइयों में उस वक्त…अपने फिल्म को लेकर इतना व्यस्तहो गया हूँ कि कब रात आती हैऔर चली जाती है पता ही नहीं चलता।वैसे मेरी फिल्म का Promoसीरिफोर्ट ऑडिटोरियम में 20 मई कोदिखलाया गया था जिसमें द...
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  July 17, 2008, 11:28 am
नियती नहीं मेरा किसी सोये हुए इतिहास काउद्घोषणा प्रकृति का नवीन वर्तमान हूँ…मन की उदास वृत्ति बेचैन शोक का नाद नहींराह दृष्टांतधवल ज्योति का पूँज हूँ…गहन अंधकारनिस्तेज आवरण अविद्या शरणार्थी नहींप्रस्फुटित काया प्रज्ञा भूषित क्रांति का पुत्र हूँ…हारा हुआ संग्र...
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  April 10, 2008, 1:55 pm
पता नहीं मुझे इस जिंदगी के और कितने मायने हैं…समझ नहीं आता कौन दु:ख के, कौन सुख के हैं…सभी को साथ लेकर परखना……? संभव नहीं,वक्त निकलता जाता है, कई उलझे मोड़ छोड़ देता हैमदिले संरचना में इसके फिर देवदास चला आता हैअपने को भींगाकर रस में पतला सा दर्द फैला जाता हैतन्हाई है…इंतज...
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  March 26, 2008, 2:51 pm
"नालंदा"जिसका अर्थ है ज्ञान बाँटने वाला, जहाँ से भारत में सांस्कृतिक वदार्शनिक विचारधारा का सूत्रपात हुआ। जिस समय विश्व अपने अस्तित्व कोअंधकार में तलाश रहा था, हमारी नालंदाअपनी ज्ञान गंगा से जगत केपाप-पंकिल-शरीरीको पवित्र करने में जुटा था। उस जमाने में विश्व ध्यान-य...
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  December 23, 2007, 3:07 pm
कतरा-कतरा जीवन की डोर सिमटतीजाती है संध्या के लाल गर्भ में…बेख़ौफ नाचती आहिस्ते सेघटती जाती है सांसों में…दौड़ अंधी, भाग दुनियाँ कीबैचैन चेहरों में उगती हैमायूस पल तृष्णा की कैदआजाद मन पर चढ़ती जाती है…।सभी भाग रहे बस औरों से आगे-आगे,किस ओर कहाँ किसलिए?? है यह बस प्रारब्...
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  November 26, 2007, 1:49 pm
एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में अचानक मुझे मुंबई से बाहर जानापड़ रहा है… कुछ दिन तो लग ही जाएँगे आने में, तबतकआप सभी को मेरी ओर से----"सभ्यता-संस्कृति-संस्कारों का है यह प्रज्ज्वलनया भूत से वर्तमान का है यह संवरणमेरे लिए तो यह दीपक भविष्य का है परावर्तन॥""दीपावली"की बहुत-2 शुभक...
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  November 7, 2007, 2:26 pm
"बढ़कर विपत्तियों पर छा जा, मेरे किशोर! मेरे ताजा!जीवन का रस छन जाने दे,तन को पत्थर बन जाने दे।तू स्वयं तेज भयकारी है,क्या कर सकती चिनगारी है?"राष्ट्रकवि 'दिनकर'विरचित ये पंक्तियाँ आम मानव मेंभी विशिष्टता का बोध कराने सकने में सक्षम है… विगतकुछ दिनों पहले ही राष्ट्रकवि 'द...
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  October 24, 2007, 12:45 pm
हमारे परम पिता, गुरु एवं कर्णधारकई मायनों में हमसे बिल्कुल समानऔर थोड़े जुदा-जुदा भी। आज विश्वअहिंसा दिन भी घोषित किया गया जोइस महान पुरुष के लिए विश्व श्रद्धांजलिहै। भारत ही ऐसा देश है जहाँ इस महा-पुरुष की सबसे ज्यादा आलोचना की गईमगर वह आज भी अपनी प्रज्ञा से शोभितहै… ...
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  October 2, 2007, 2:12 pm
न देखे विश्व पर मुझको घृणा से, मनुज हूँ सृष्टि का श्रृंगार हूँ मैं।सुनूँ क्या सिंधु!! मैं गर्जन तुम्हारा स्वयं युग-धर्म का हुंकार हूँ मैं। इन पंक्तियों की प्रखरता को देखकर सहज ही अनुमान लगायाजा सकता है कि मैं बात किसकी करने वाला हूँ… इसकारणबताना भी उचित नहीं समझता… आप ...
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  September 28, 2007, 12:05 pm
न देखे विश्व पर मुझको घृणा से, मनुज हूँ सृष्टि का श्रृंगार हूँ मैं।सुनूँ क्या सिंधु!! मैं गर्जन तुम्हारा स्वयं युग-धर्म का हुंकार हूँ मैं। इन पंक्तियों की प्रखरता को देखकर सहज ही अनुमान लगायाजा सकता है कि मैं बात किसकी करने वाला हूँ… इसकारणबताना भी उचित नहीं समझता… आप ...
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  September 28, 2007, 12:05 pm
शक्ति है… विश्वास है…आजाद भारत का वरदान हैयह शब्दहमारी "आन"हैइसकी उन्मादहमारी "जान"हैउद्घोषहमारी "शान"है…आत्मा के अंतरतम में गुंजता यहपावन गीत मेरे हर्ष का आधार है…वंदेssssssमातरम…………………अखंड भारतका गौरव…एक पवित्रजागहै…।********आओ मिलकर जोड़करको गा लें हम भी गीत नया,बुन ल...
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  August 15, 2007, 1:44 pm
मौज़ोंमें फैला आध्यात्मअज्ञानों पर बैठी गीता-गानहै,नि:सीम शून्यअनंतमेंपंखों पर उड़ती आशा है,उत्सव ही उत्सवमदिरालय में उसके,क्यों अंतरतम खाली है…इतना सबकुछ बाहर है, फिर-भी भीतर खाली है…।ममताऔर करूणाहै, कण-कण मेंबहती लहरों की तरह परिवर्तित संसार,नया-नवीन-नूतनता लिए नि...
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  August 5, 2007, 1:43 pm
Hello Everyone,Before I say anything I would like to introducemyself...some ofyou may know me by my comments posted at few places in Hindi Blogworld .I am Aditi Nandan little brother of your own Divyabh Aryanand just an other ordinary Indian. My enforcement into writing this article is due to My Bhaiya who wanted me to share my understanding of the topic and beliefs.BIHAR ! Does this name require any explanation from people like me ? Am i a worthy exponent to defend this mighty state from the onslaught it's citizen's have to face in day to day life? Are we so less intellectual that we have to fight over such trivial issues when bigger issues are enlarging to swallow us! Answer is surely in n...
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  July 27, 2007, 8:01 pm
हम भी भारत माता के वक्ष हैंदेखो न…कैसे गंगा बह रही है दूध की तरह…'सफर'का कोई कारण तो होता नहीं…राहसामने हो तो कदमकुछ पाने की लालसा में आगे बढ़ ही जाते हैं…इस सफर मेंऔर लोग भी कदम साथ कर लें तो हैरानी का कोई कारण नहीं,थोड़ी दूर तलक चलें साथ तो काफ़िला बन जाता है…रस-आनंद,वाद-वि...
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  July 20, 2007, 2:21 pm
हम भी भारत माता के वक्ष हैंदेखो न…कैसे गंगा बह रही है दूध की तरह…'सफर'का कोई कारण तो होता नहीं…राहसामने हो तो कदमकुछ पाने की लालसा में आगे बढ़ ही जाते हैं…इस सफर मेंऔर लोग भी कदम साथ कर लें तो हैरानी का कोई कारण नहीं,थोड़ी दूर तलक चलें साथ तो काफ़िला बन जाता है…रस-आनंद,वाद-वि...
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  July 20, 2007, 2:21 pm
"मैं"ने माना है…तुम चली गई हो दूर बहुत,मेरी छाया से भी अलग, ख्वाबों केशरहदों के भी पार…पर "हृदय"ने जाना है…उसमें रची-बसीहो तुम,कहीं अंतरंग लय में भींगो रही हो तुम…"मैं"ने माना है…दु:ख-विरह की उद्वेगावस्था हो तुम,संताप की परमसीमा…एक मात्रइंतजारहो तुम…पर "हृदय"ने जाना है…...
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  July 7, 2007, 2:25 pm
"मैं"ने माना है…तुम चली गई हो दूर बहुत,मेरी छाया से भी अलग, ख्वाबों केशरहदों के भी पार…पर "हृदय"ने जाना है…उसमें रची-बसीहो तुम,कहीं अंतरंग लय में भींगो रही हो तुम…"मैं"ने माना है…दु:ख-विरह की उद्वेगावस्था हो तुम,संताप की परमसीमा…एक मात्रइंतजारहो तुम…पर "हृदय"ने जाना है…...
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  July 7, 2007, 2:25 pm
आज बहुत दिनों बाद या यों कहा जाए कि पहली बार किसी पुस्तक की समीक्षा करने का मौकामिला जो मेरे लिए एकदम अलग अनुभव रहा…कई दिनों से यह इच्छाथी कि ऐसा कुछ किया जाए किंतु समयाभाव के कारणत: ऐसा हो नहीं पा रहा था, उसी दौरान ‘अभय जी’ जो रुस में “भारत के राजनयिक” के तौर पर कार्यरत ह...
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  June 24, 2007, 2:17 pm
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