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चलते -चलते...!

गत अंक से आगे...!!! 4. धर्म के वास्तविक महत्व को समझने की कोशिश करें: आदमी किसी भी समाज में पैदा हो, लेकिन दो चीजें उसके जन्म के साथ ही उससे जुड़ जाती हैं. एक है “जाति” और दूसरा है “धर्म”. संसार में अधिकतर यह नियम सा ही बन गया है कि जो जिस जाति में पैदा होगा उसी के अनुसार उसका धर्...
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Tag :आलेख
  March 16, 2017, 12:46 am
गत अंक से आगे....मैं जहाँ तक समझ पाया हूँ कि दुनिया को बदलने का प्रयास करने से पहले हम खुद को बदलने का प्रयास करें. जब एक-एक करके हर कोई खुद को मानवीय भावनाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास करेगा तो दुनिया का स्वरुप स्वतः ही बदल जायेगा. लेकिन आज तक जितने भी प्रयास हुए हैं उनका स्त...
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Tag :आलेख
  February 18, 2017, 11:26 pm
गत अंक से आगे...हम अपने आसपास की चीजों को जब समझने की कोशिश करते हैं तो हमें समझ आता है कि इस समाज में कितना कुछ है जिसका हमारी जिन्दगी से कोई सीधा सरोकार नहीं है, और कितना कुछ ऐसा है जिसे हमें अपनाने की जरुरत है. अमूमन तो ऐसा होता है कि हम अपने सामाजिक परिवेश में जो कुछ घटित ...
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Tag :दुनिया
  February 8, 2017, 1:02 am
‘आदमी मुसाफिर है, आता है जाता है, आते जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है’. सन 1977 में आई फिल्म ‘अपनापन’ का यह गीत काफी लोकप्रिय गीत रहा है और मनुष्य जीवन के सन्दर्भ में काफी प्रासंगिक है. इस गीत का मुखड़ा मनुष्य जीवन के सफ़र के साथ भी जोड़ा जा सकता है. आदमी इस दुनिया में एक मुसाफिर...
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Tag :नफरत
  February 4, 2017, 12:32 am
गत अंक से आगे....कम्प्यूटर-स्मार्टफोन-इन्टरनेट और विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने आज के दौर में पूरे विश्व के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सोशल नेटवर्किंग साइट्स का जहाँ तक सवाल है तो इन साइट्स ने पूरी दुनिया के लोगों को अपनी भावनाओं की अ...
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Tag :अभिव्यक्ति की आजादी
  January 31, 2017, 11:57 pm
गत अंक से आगे....w.w.w. के विकास के साथ ही विभिन्न प्रकार के जाल स्थल भी अस्तित्व में आने लगे. एक तरफ जहाँ विभिन्न देशों की सरकारें और संगठन अपनी गतिविधियों को विभिन्न जाल स्थलों के माध्यम से आम जन तक पहुँचाने का प्रयास करने लगे, वहीँ दूसरी और कुछ ऐसे जाल स्थल भी अस्तित्व में भ...
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Tag :आलेख
  January 28, 2017, 1:16 am
गत अंक से आगे...स्मार्टफोन और इन्टरनेट के संगम ने सूचना को विस्तार देने, उसे त्वरित गति से लोगों तक पहुँचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. आंकड़ों के हिसाब से अगर हम पूरी दुनिया में स्मार्टफोन का प्रयोग करने वालों की संख्या पर नजर दौडाएं तो हमें यह बात आसानी से सम...
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Tag :आलेख
  January 15, 2017, 12:18 am
पिछले कुछ वर्षों से अंतर्जाल हमारी जिन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन गया है. अंतर्जाल पर उपलब्ध कुछ माध्यम हमारी रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. मेल, ब्लॉग, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप्प, इन्स्टाग्राम जैसे ठिकानों ने हमारी दैनिक जीवन की गतिविधियों और ...
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Tag :अभिव्यक्ति
  January 1, 2017, 11:49 pm
पिछले कुछ वर्षों से अंतर्जाल हमारी जिन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन गया है. अंतर्जाल पर उपलब्ध कुछ माध्यम हमारी रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. मेल, ब्लॉग, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप्प, इन्स्टाग्राम जैसे ठिकानों ने हमारी दैनिक जीवन की गतिविधियों और ...
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Tag :अभिव्यक्ति
  January 1, 2017, 11:49 pm
आज सोच रहा हूँ बीते हुए कल के विषय में उलझ रहा हूँ भविष्य की योजनाओं में खाका खींच रहा हूँ आने वाले दिन की गतिविधियों काद्वंद्व है मन में भूत और भविष्य का. सोच रहा हूँ इनसान की फितरत के बारे मेंकहानी याद कर रहा हूँ आज तक के उसके सफर की समझ रहा हूँ उसकी भविष्य की योजनायें चा...
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Tag :किसान
  December 29, 2016, 1:07 am
गत अंक से आगे.....आम जनमानस बोली में ही अपने भावों को अभिव्यक्त करने की कोशिश करता है, उसके जीवन का हर पहलू बोली के माध्यम से बड़ी खूबसूरती के साथ अभिव्यक्त होता है. हम अगर भाषा का गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि भाषा में प्रयुक्त कुछ शब्द भाव सम्प्रेषण में बाधक होते ...
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Tag :प्राकृतिक
  November 17, 2016, 4:05 pm
गत अंक से आगे.....मनुष्य जीवन की प्रारम्भिक अवस्था में अपने परिवेश से शब्दों के उच्चारण सीखता है. अधिकतर यह देखा गया है कि बच्चा सबसे पहले ‘माँ’ शब्द का ही उच्चारण करता है. फिर धीरे-धीरे वह अपनी जरुरत और सुविधा के हिसाब से शब्दों को सीखता है और उनका प्रयोग करता है. अगर हम बच...
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Tag :Language
  November 11, 2016, 1:15 pm
गत अंक से आगे...भावों की अभिव्यक्ति के लिए मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव जन्तु भी कुछ ध्वनि संकेतों का प्रयोग करते हैं. हालाँकि हम उनके ध्वनि संकेतों को समझ नहीं पाते, लेकिन सामान्य व्यवहार में देखा गया है कि वह ऐसा करते हैं. जीवन की हर स्थिति में वह भी अपने भावों की अभिव्यक्त...
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Tag :आलेख
  November 6, 2016, 12:45 am
इस ब्रह्माण्ड को जब हम समझने का प्रयास करते हैं तो हम यह पाते हैं कि इसकी गति निश्चित है. जितनी भी जड़ और चेतन प्रकृति है वह अपनी समय और सीमा के अनुसार कार्य कर रही है. विज्ञान ने अब तक जितना भी इस ब्रह्माण्ड के विषय में जाना है उससे तो यही सिद्ध होता है कि इस ब्रह्माण्ड का आ...
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Tag :अभिव्यक्ति
  November 1, 2016, 12:31 pm
दीपखुद को जलाताकिसी दूसरे को प्रकाश सेसरावोर करने के लिएरिश्ता दीप का उससे कोई नहींन ही कोई चाह है उससेन कोई बदले का भावफिर भीदीपउसे प्रकाश दे रहा हैसिर्फ अपने कर्तव्य की पूर्ति के लिए.दीपशिक्षा है संसार के लिएजो खुद को जलाकरमार्ग बना रहा है दूसरों के लिएअँधेरा चाहे...
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Tag :दिवाली
  October 30, 2016, 12:34 am
वर्षों पहले पहाड़ दुर्गम था, दूर होना कोई प्रश्न नहीं था?था तो पहाड़ का दुर्गम होना. सोचता था..... कभी पहाड़ की चोटी तक पहुंचा तो छू लूँगा आसमान हालाँकि यह भी भान था कि पहाड़ होता है वीरान.फिर भी पहाड़ मुझे खींचता था अपनी ओरया कभी ऐसा भी हुआ मैं खुद ही खिंच गया पहाड़ की और....... मेरे और ...
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Tag :कविता
  October 28, 2016, 12:14 am
गत अंक से आगे... मन वचन और कर्म के पहलुओं को समझाने की कोशिश कई तरीकों से की जाती. गाँव के बुजुर्ग गाँव के हर बच्चे के साथ अपने बच्चे जैसा व्यवहार करते, इसलिए बच्चों के पास कोई अवकाश नहीं होता था कि वह किसी के साथ उदंडता से पेश आये. अगर कभी ऐसी भूल हो भी जाती थी तो वहीं बच्चे क...
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Tag :इन्टरनेट
  October 25, 2016, 12:17 am
गत अंक से आगे.... गाँव में जीवन का क्रम जन्म से लेकर मृत्यु तक एक दूसरे के सहज सहयोग पर आधारित होता. लेकिन फिर भी कहीं पर मानवीय स्वभाव और स्वार्थ जरुर सामने आता, और यह जीवन की वास्तविकता भी है. फिर भी गाँव में जीवन सदा ही सुखद और सहज महसूस होता. कहीं कोई भागदौड नहीं, कोई लालसा...
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Tag :Winter
  October 22, 2016, 12:00 am
गाँव से बाहर रहते हुए मुझे लगभग 16 वर्ष हुए हैं. 2000 से 2005 के बीच के समय में साल में लगभग दो से तीन महीने गाँव में गुजरते थे. लेकिन 2005 के बाद यह सिलसिला महीने भर का हो गया और अब पिछले तीन-चार सालों से कुछ ऐसा सबब बना है कि साल दो साल में 10-15 दिनों के लिए ही गाँव जाना होता है. ऐसा नहीं ह...
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Tag :आलेख
  October 18, 2016, 12:37 am
गाँव से बाहर रहते हुए मुझे लगभग 16 वर्ष हुए हैं. 2000 से 2005 के बीच के समय में साल में लगभग दो से तीन महीने गाँव में गुजरते थे. लेकिन 2005 के बाद यह सिलसिला महीने भर का हो गया और अब पिछले तीन-चार सालों से कुछ ऐसा सबब बना है कि साल दो साल में 10-15 दिनों के लिए ही गाँव जाना होता है. ऐसा नहीं ह...
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Tag :आलेख
  October 18, 2016, 12:37 am
जीवन एक सफर है और शरीर इस सफर का एक पड़ाव. भारतीय दर्शन में निहित तत्व हमें इस पहलू की जानकारी बखूबी देता है. जीव और शरीर दोनों को अलग करके देखें तो भारतीय दर्शन की पक्की मान्यता है कि शरीर की यात्रा सीमितहै औरजीव की यात्रा अनन्त है. जीव शरीरों में रहते हुए, शरीर...
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Tag :Live Long
  October 12, 2016, 12:16 am
गत अंक से आगे... इस यात्रा का अनुभव अद्भुत है, लेकिन यह महसूस तब होता है जब हम इसे महसूस करना चाहते हैं. अधिकतर तो मनुष्य के साथ यह होता है कि वह जैसे-जैसे जीवन की यात्रा को तय करता है, वैसे-वैसे उसके दिलो-दिमाग पर कई तरह की परतें जमती जाती हैं. उसके मन में कई तरह की दीवारें बन ज...
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Tag :कर्तव्य
  September 23, 2016, 12:23 am
गत अंक से आगे.... मनुष्य चेतना का प्रतिबिम्ब है और यही इसकी वास्तविक पहचान है. वैसे अगर चेतना के इस दायरे को मनुष्य से बाहर की दुनिया पर भी लागू किया जाए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. जब हम इस बात को स्वीकारते हैं कि इस सृष्टि के कण-कण में इसे रचने वाली चेतना समाई है ...
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Tag :अनुभव
  September 18, 2016, 12:28 am
इतिहास शब्द जहन में आते ही हम अतीत के विषय में सोचना शुरू करते हैं. संभवतः हम अतीत के विषय में जानने और समझने के लिए कल्पना का सहारा कम ही लेते हैं. कल्पना की ऊँची उड़ान तो भविष्य के लिए है. अतीत के लिए तो सोच है, समझ है, तर्क है और अंततः अतीत तथ्य पर आकर रुकता है और वहीँ रूढ़ हो ...
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Tag :अनुभव
  September 14, 2016, 11:13 pm
राह चलतेजीवन के सफ़र मेंमंजिल को तय करतेमिले मुझे लोग कईअपनी-अपनी विशेषता से भरपूरजिनमें अक्स देखा मैंनेअपनी भावनाओं का, अपने विचारों कासमर्थन का-विरोध काप्रेम का-नफरत का, अच्छे और बुरे का भीजितने नज़ारे हैं,इस जहान में-उस जहन मेंजितने अनुभव हैं, दुनिया मेंएक-एक कर सब स...
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Tag :कविता
  March 22, 2016, 8:15 am
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