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कथा कहानी

वह गांव से शहर आया था, कुछ छोटा-मोटा काम खोजता हुआ. शुरू-शुरू में ख़र्चा बांट कर किसी के साथ रहने लगा. उधर, किसी पक्की नौकरी की कोशिश भी करता रहा. एक दिन, एक बड़े कारखाने में बात बन ही गर्इ, नौकरी पक्की तो नहीं थी पर यह पता चला कि अगर पांच साल तक मेहनत से काम करे तो ...
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Tag :home
  January 26, 2017, 4:46 pm
उसकी शादी हुए कुछ समय हो गया था. पर गोद अभी नहीं भरी थी. यूं तो इस बात पर किसी का कोर्इ ख़ास ध्यान नहीं था पर उसकी सास को इस बात का मलाल था और, गाहे-बगाहे इस बारे में कुछ टेढ़ा सा सुना ही देती थी. उनके घरों में, इन मामलों में डॉक्‍टरों की सलाह लेना ज़रा सही नहीं माना जाता था. यह ...
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Tag :child
  December 10, 2016, 4:17 am
वहभार्इ-बहनोंमेंसबसेबड़ीथी. बचपनमेंही एकआदिवासीगांवसेशहरआगर्इथी.  अपनेबचपनमें, दूसरेपरिवारोंकेबच्चेसंभालनेकाकामकिया. बड़ीहोगर्इतोघरोंमेंनौकरानीकाकामकिया. लोगउसेमेडकहतेथे. हरमहीनेगांवमनिऑर्डरभेजती. गांवजानातभीहोताथाजबकोर्इशादी-विवाहहो. एकबारगांवग...
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Tag :child
  July 4, 2016, 2:49 pm
उस महानगर के बीचो-बीच एक बहुत बड़े चाैराहे के चारों तरफ वहां का बाज़ार बसा था. बाज़ार बस बाज़ार ही नहीं था, उसमें तमाम तरह के दफ़्तर भी थे. उस चौराहे पर पता नहीं कौन लोग सुबह मुंह-अंधेरे कुछ दाना डाल जाते, आैर कबूतर सारा दिन उसे चुगते रहते. चौराहे पर ट्रैफ़िक का बहुत ज़ोर र...
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Tag :relation
  March 16, 2016, 4:42 am
जब जब गांव आती है खुदाई की  मशीन,डर जाता है खेतसहमता है चूल्‍हा हंसता है ताला.पगडंडी-से पैण्‍डुलम के दूसरे सि‍रे पर बंधा शहर ठठाता हैबुलाता है.बस कुछ दि‍न और...मुटा जाता है शहरडर जाता है खेतमर जाता है खेत.00000...
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Tag :farm
  December 30, 2015, 10:52 am
उसकी उम्र तीन-चार साल थी. बाजार के कोने में एक दुकान बन रही थी जहां उसके मां-वाप ईंटें ढोने का काम कर रहे थे. वह वहीं अपने मां-बाप के आस-पास खेलता रहता. पास की दुकानों पर लोग आते-जाते, वह उन्‍हें देखता रहता. आने-जाने वालों के साथ बच्‍चे भी होते वह उन बच्‍चों को भी देखता. और देख...
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Tag :packet
  November 13, 2015, 8:02 am
लाला बहुत परेशान था. उसने जगह-जगह फ़ोन करने के बाद फ़ैसला कि‍या कि‍ थाने जाना ही ठीक रहेगा. थानेदार को मि‍ला और अपनी आपबीती सुनाई कि‍ -‘साहब, मेरा सेल्‍समैन रामू मेरा तेइस लाख रूपया लेकर भाग गया. दो नंबर का पैसा नहीं थासाहब, तीन दि‍न की बि‍क्री का पैसा था. बैंक के सभी काम व...
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Tag :FIR
  November 2, 2015, 7:27 am
गांव में दोनों के घर साथ-साथ थे. पर दुश्‍मनी पुश्‍तैनी थी, कि‍सी को याद नहीं था कि‍ दुश्‍मनी कि‍स बात पर और कब से चली आ रही थी. दोनों घरों में आने वाली नई बहुएं भी बि‍ना कहे ही शीतयुद्ध की पैठ समझ जाती और समय के साथ-साथ वे भी अपने-अपने दायरे बना लेती.एक दि‍न, उन्‍हीं में से एक ...
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Tag :enmity
  September 25, 2015, 5:25 pm
वह कड़े जीवट वाला सीधा सा इन्‍सान था. नौकरी की खोज में गांव से शहर आया था. पढ़ने का शौक उसे पत्रकारि‍ता में ले गया. ईमानदारी से नौकरी की और उतनी तरक्‍की भी पायी जि‍तनी एक ईमानदार को मि‍लती है, इसलि‍ए पूरी ज़िंदगी तंगी में गुजारी. पर उसे कभी कि‍सी से कोई शि‍कायत नहीं रही. कि...
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Tag :कि‍ताबें
  September 16, 2015, 9:44 pm
वह आढ़ति‍ये का इकलौता बेटा था. पि‍ता का, सब्‍ज़ी की आढ़त का अच्‍छा-ख़ासा काम था. मंडी में, कई सब्‍ज़ि‍यों और फलों के किंग माने जाते थे. बड़ी सी कोठी थी. कारें थीं. कई प्रापर्टि‍यां थीं. लोगों पर लाखों का उधार था. पि‍ता की सलाह थी कि‍ वह यही पुश्‍तैनी काम संभाल ले, पर उसे पि‍त...
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Tag :commission
  September 3, 2015, 12:57 pm
दूर कहीं कि‍सी देश में एक गांव था, दीन-दुनि‍या की बातों से अछूता. गांव, बाहर की दुनि‍या से एकदम कटा हुआ था. ऊपर खुला आसमान और नीचे हरी धरती ही गांव वालों की दुनि‍या थे.  गांव में हर तरह के लोग थे. अलग-अलग धर्मों से मि‍लते-जुलते से उनके तरह-तरह के वि‍श्‍वास थे. अपनी ज़रूरत की ...
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Tag :literacy
  September 1, 2015, 11:05 am
उसे लि‍खने का बहुत शौक था. नौकरी तो थी पर उसमें, लेखक होने के बावजूद कोई इज्‍ज़त नहीं थी. कोई उसकी इस बात को भाव नहीं देता था कि‍ वह लेखक था. वह बचपन से ही कवि‍ताएं लि‍खता आ रहा था. उसे कवि‍ के बजाय लेखक कहलाना पसंद था. उसने अपनी कवि‍ताओं की डायरि‍यां बड़ी संभाल के रखी हुई थी...
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Tag :publisher
  August 23, 2015, 7:32 pm
उसकी उमर बहुत हो गई थी. पर फि‍र भी घर के नज़दीक ही एक डॉक्‍टर के छोटे से प्राइवेट क्‍लीनि‍क में सफाई-पोचे का काम करती थी. घर पर कुछ ख़ास काम नहीं होता था सो, सुबह-सवेरे पहुंच जाती, धीरे-धीरे आराम से काम नि‍पटाती, पूरा दि‍न वहीं रहती और फि‍र शाम को ही घर जाती. एक दि‍न सुबह-सुबह ...
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Tag :infanticide
  August 22, 2015, 5:38 pm
वह बहुत बड़ा लीडर था. और यह, उस लीडर के मातहत एक छोटा सा मुलाजि‍म. लीडर एक दि‍न इस मुलाजि‍म के यहां दौरे पर आया. साथ चल रहे लोगों पर रौब गांठने की गर्ज़ से, कुछ बहाना बना कर उसने मातहत को एक थप्‍पड़ जड़ दि‍या. मातहत ने केस दर्ज़ करा दि‍या. मामला चलता रहा. साल-महीने बीतते रहे.एक...
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Tag :leader
  August 1, 2015, 6:00 am
वह गांव से शहर आकर एक सि‍क्‍योरि‍टी कंपनी में गार्ड लग गया था. रि‍सैटलमेंट कॉलोनी में कि‍राए का एक कमराभी सही कर लि‍या था. शुरू-शुरू में उसे रात की ड्यूटी मि‍लती. आमतौर से यहां-वहां ग़ुप हाउसिंग सोसायटि‍यों के गैट पर चौकीदारी करता. रात को सीनि‍यर गार्ड सोता और गेट खोलने...
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Tag :etiquettes
  July 30, 2015, 6:00 am
उस शहर की सड़क के फुटपाथ पर तीन छोटू रहते थे, बड़ा छोटू, छोटा छोटू और बि‍चका छोटू. यही उनके नाम थे. पूरा दि‍न यहां-वहां कूड़े में से, तीनों कुछ-कुछ काम की चीज़ें चुनते रहते और शाम को एक कबाड़ी के यहां उन्‍हें बेचकर चार पैसे कमा लेते. फि‍र खा-पी कर रात को वहीं फ़ुटपाथ से सटी दी...
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Tag :orphan
  July 29, 2015, 6:00 am
वह बचपन से ही माता पि‍ता के साथ शहर में रह कर पला बढ़ा. और फि‍र आगे की पढ़ाई करने के लि‍ए वह अमरीका चला गया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अब वहीं नौकरी कर रहा था और उसे ग्रीन कार्ड भी मि‍ल गया था. वह लंबे समय बाद भारत लौटा था और आजकल समय नि‍काल कर अपने पुश्तैनी गांव आया हुआ था. ...
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Tag :hallo
  July 26, 2015, 11:45 am
'अजीसुनतेहो, सेफ़्टीपिननहींमिलरहीं. कहींदेखीं?’'तुमनेहीइधर-उधररखदीहोंगी. ध्‍यानसेढूंढो.’उसनेबुदबुदातेहुएड्रॉअरऔरअल्मारि‍यांबारी-बारीसेखोलनीशुरू कर दीं – ‘दि‍लकरताहै, आजहीकामसेनि‍कालदूंइसे. जबदेखोतबकुछनकुछचुपचापउठाकरलेजातीहै. औरअगरपूछोतोऐसेएक्‍टिंगक...
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Tag :theft
  July 24, 2015, 12:24 pm
उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक बाबा जी का...
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Tag :gangster
  July 23, 2015, 7:43 am
उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक बाबा जी का...
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Tag :gangster
  July 23, 2015, 7:43 am
बहुत भागदौड़ के बाद एक दि‍न, वह एक बहुत बड़ी सरकारी कंपनी में छोटा सा बाउ बन गया. उसे बाबू होने से शि‍कायत नहीं था, पर छोटा-बाबू होना उसे रास न आता था. उसने यूनि‍यनबाजी कर ली और जल्‍दी ही यूनि‍यन का प्रधान भी हो गया. कंपनी ने नाममात्र के लि‍ए उसे, लोगों की कम्‍प्‍लेंटें लेन...
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Tag :ghost
  July 14, 2015, 1:28 pm
वह स्‍कूल से नि‍कल कर कॉलेज आया तो उसकी ज़िंदगी में मानो पंख लग गए. नए दोस्त बने. कोई पूछने वाला नहीं, कोई बंदि‍श नहीं. जहां दि‍ल कि‍या वहां घूमे, जो चाहा सो कि‍या. देखते ही देखते तीन साल यूं ही बीत गए. सब ग्रेजुएट हो गए. कुछ नौकरि‍यों में चले गए कुछ आगे पढ़ने लगे. कुछ ने अपने ...
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Tag :life
  July 6, 2015, 3:29 am
उसे शहर में नौकरी मि‍ली तो गांव से आकर यहीं बस गया. साथ में काम करने वाली एक लड़की से उसे प्‍यार हो गया. दोनों वि‍वाह कर, कि‍राए के मकान में रहने लगे. एक बेटा और बेटी हुए. उनकी खुशि‍यां चौगुनी हो गईं. धीरे धीरे उनकी दुनि‍या ही बदल गई. उनकी ज़िंदगी बच्‍चों के चारों ओर घूमने लग...
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Tag :family
  July 3, 2015, 7:58 am
गांव में उन दोनों के परि‍वार, आपस में दुश्‍मनी के ही कारण जाने जाते थे. दोनों ही परि‍वार कोई बहुत अमीर नहीं थे पर फि‍र भी उन दोनों परि‍वारों में पुश्‍तैनी दुश्‍मनी अमीरी से कम न थी. दुश्‍मनी कि‍स बात पर चली आ रही थी यह अब कि‍सी को याद तक न था. उस दि‍न भी, फि‍र कि‍सी बात पर झग...
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Tag :children
  May 24, 2015, 8:28 pm
गांव में उन दोनों के परि‍वार, आपस में दुश्‍मनी के ही कारण जाने जाते थे. दोनों ही परि‍वार कोई बहुत अमीर नहीं थे पर फि‍र भी उन दोनों परि‍वारों में पुश्‍तैनी दुश्‍मनी अमीरी से कम न थी. दुश्‍मनी कि‍स बात पर चली आ रही थी यह अब कि‍सी को याद तक न था. उस दि‍न भी, फि‍र कि‍सी बात पर झग...
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Tag :children
  May 24, 2015, 8:28 pm
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