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कशमकश

अन्जान राह पे चलते चलतेथक गये हैं अब कदमहो गयी है इन्तहांदुखने लगे हैं अब जखम करता रहा ज़ो जी हुजूरीऔर गिराहर बार हूँहिम्मत तो देखोइक बार फिर लड़ने को मै तैयार हूँ...
कशमकश...
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  January 19, 2012, 7:14 pm
चुप हूँ पर मेरी चुप्पी को ख़ामोश न समझोमै तो इशारों से ही तुझे राख़ बना सकता हूँख़ुशनसीब है तू जो माँझी हमारा एक हैकश्ती तो मैं तूफाँ में भी चला सकता हूँ.शुक्र कर ख़ुदा का जो हम साथ हैं इस राह परतेरे ग़ुरूरको हर राह पे झुका सकता हूँइंसान है इंसानियत को कुछ तो इज्ज़त देते...
कशमकश...
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  January 4, 2012, 7:56 pm
चुप हूँ पर मेरी चुप्पी को ख़ामोश न समझोमै तो इशारों से ही तुझे राख़ बना सकता हूँख़ुशनसीब है तू जो माँझी हमारा एक हैकश्ती तो मैं तूफाँ में भी चला सकता हूँ.शुक्र कर ख़ुदा का जो हम साथ हैं इस राह परतेरे ग़ुरूरको हर राह पे झुका सकता हूँइंसान है इंसानियत को कुछ तो इज्ज़त देते...
कशमकश...
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  January 4, 2012, 7:56 pm
चुप हूँ पर मेरी चुप्पी को ख़ामोश न समझोमै तो इशारों से ही तुझे राख़ बना सकता हूँख़ुशनसीब है तू जो माँझी हमारा एक हैकश्ती तो मैं बहते पानी में भी थाम सकता हूँ.शुक्र कर ख़ुदा का जो हम साथ हैं इस राह परतेरे ग़रूरको हर राह पे झुका सकता हूँइंसान है इंसानियत को कुछ तो सम्मान दे...
कशमकश...
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  January 3, 2012, 10:36 pm
जोतुमने दास्ताँ अपनी सुनाई आँख भर आईबहुत देखे थे दुःख मैंने मगर क्यों आँख भर आईग़मों से दुश्मनी लगती है बिलकुल दोस्ती जैसीखुदा भी जल गया हमसे कि जब ये दोस्ती देखीखराशें दिल में हैं तो फिर मुझे नश्तर से क्या डर हैडराना है अगर मुझको तो फिर कुछ और गम देदोसुकूँ मुझको नहीं म...
कशमकश...
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  December 29, 2011, 2:15 am
वो उल्फ़त-ए-बंदिश कब की तोड़ दीपर ख़्वाब-ए-दिल अब तक न मिटा सकावफ़ा-ए-मोहब्बत तो तोड़ दी उसनेअब हाल-ए-दिल अपना किससे कहूं...
कशमकश...
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  December 19, 2011, 8:09 pm
इक दिल तो है पर गम-ए-दर्द कहा से लाऊंलिखने का शौक तो है पर शब्द कहा से लाऊँकोशिश जो की गम-ए-रुसवाई को लिखने कीपर चेहरों को पढने की नज़र कहा से लाऊं...
कशमकश...
Tag :क्षणिकाएं
  December 11, 2011, 11:30 pm
आये दिन हम सभी न्यूज़पपेर्स में छेड़छाड़ के किस्से पढ़ते रहते हैं शायद हम सभी को बहुत शर्मिंदगी होती है और डरते रहते हैं की कहीं..................... मैंने जब कुछ लोगों से बात की तो सोंचा किकितनाडरतेहुएभीइनमेकितनाहौसलाहैऔरकुछ पंक्तियाँ लिखी जोकुछइसतरहहैं.........मतदेखऐसेमैंतमाशाब...
कशमकश...
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  December 7, 2011, 7:11 pm
मिट गया वो इस कदर कि राख में भी ना मिला.था वो साया मौत का जो अश्क फिर से भर गया.ढूँढा उसे हर शाख पर हर कौम में हर चक्षु मेंपूँछा जो हर एक मोड़ से तो हर जगह बस ये मिलाकि मिटगया वो इस कदर कि राख में भी ना मिला.अर्ज़-ए-इबादत खूब की हर कब्र पे हर घाट पेक़ाज़ी मिले पंडे मिले मिलके सभी क...
कशमकश...
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  December 2, 2011, 1:54 am
इक कलम था इक थी दुआ और शब्द थे कुछ पुष्प से बांधा उन्हें फिर सोच कर तो बन गयी आराधना हे हंसवाहिनी अर्पण तुझे इस भक्त की ये साधनाकरलो इसे स्वीकारऔर देदो मुझे कुछ ज्ञान अबकि लिख सकूं इस देश परइस देश की सच्चाई परबस दे मुझे कुछ ताकतेंमेरी कलम और मेरी सोच मेंलिख दूं नयी इक ...
कशमकश...
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  December 1, 2011, 12:33 am
इश्क में हम भी जो थे और इश्क में वो भी जो थे प्यार कुछ हमको भी थाऔर प्यार कुछ उनको भी थाफरमाईशें तो कुछ मेरी भी थींफरमाईशें तो कुछ उनकी भी थींछुप छुप के फिर हम भी मिले छुप छुप के फिर वो भी मिलेमोहब्बत जो यूं फिर जवां हुईतन्हाईयाँ भी सब मिटने लगींकस्मे हुईं वादे हुए रुसवा...
कशमकश...
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  November 30, 2011, 8:01 pm
वो कितनी प्यारी  प्यारी  थीकुछ खुशबू सौंधी  सौंधी थी कुछ हिना के जैसी सुन्दर थी कुछ गुलशन जैसी महकी थीकुछ समीर सी चंचल थीकुछ माखन सी तासीर भी थीवो कितनी प्यारी प्यारी थीएक दिल था भोला  भाला साजिसमे कितनी गहराई थीनैना थे बिलकुल हिरनी सेदुनिया की जिनमे परछाईं थीस...
कशमकश...
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  November 24, 2011, 11:13 am
मत उठा मेरे प्यार पे ऊँगली ऐ शाहिद मत करा  दूर दो रूंहों को अलग ऐ शाहिद हम भी अल्लाह के बन्दे हैं कुछ तो डर ऐ शाहिद कहीं ऐसा न हो कि, तू भी कल प्यार में हो और बन जाऊं मैं शाहिद...
कशमकश...
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  November 24, 2011, 11:03 am
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