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तजुर्बा

आँख तर थी मगर मुस्कुराना पड़ाउनके हाथों ज़हर हमको खाना पड़ालाख मैंने बताया लहू सुर्ख हैफिर भी दिल चीर के दिखाना पड़ाउँगलियाँ मत ज़माने की मुझ पे उठेंइसलिए उनसे रिश्ता चलाना पड़ादिल में था घर में न आने दूंगा कभी सामने आ गए तो बुलाना पड़ासामने जब वो आ गए मेरेदेख के उनको अपना सर ...
तजुर्बा...
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Tag :
  November 11, 2014, 4:10 pm
ऐ दोस्त !चल छोड़ यार कहीं और चलते हैं सियासत से दूर बरगद की छाँव में बचपन के गाँव में दौड़ते- दौड़ते लग जाए फिर कोई काँटा और निकालने को आये मेरा सबसे अजीज़ यार - शाहिद 'अजनबी'14.05.14, '359'...
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  May 31, 2014, 11:22 am
आसमाँ पे छाई काली घटा बादल कीघटा लायी कुछ बूँदें सावन की बरसात कीभीग गया दामन मेरा इस बरसात मेंबह गए दिल के अरमां इस मनभावन बरसात मेंमन भटका कुछ इधर उधर इस बरसात सेयाद आये बीते लम्हे इस बरसात सेदिल हो गया बाग़ बाग़ उन गुजरी यादों सेहो गए दूर दिल के दुःख इन प्यारी यादों सेद...
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  May 31, 2014, 11:18 am
एक अजीब रास्ता , अलग अलग साविलगित लगी मुझेसूर्य की तड़पती धूपसूनी गलियां, एक अजीब माहौलसिसकते लोग,किसी से डर, एक अजीब सी महकअभी कोई आया , आकर गिर पड़ाकोई न उसका , कोई न मेराफिर भी मैं उसका और वो मेराबंधनों का अटूट रिश्तादिल की लगी आज फिर से तड़पीयाद आई आज वो रूहानी कविताकिसी न...
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Tag :एक अजीब रास्ता
  May 31, 2014, 11:11 am
हजार बार देखी  हैं तेरी आँखें हमने- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'01.02.14, '356'...
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  May 11, 2014, 2:18 pm
न किसी की  आँख का नूर हूँ - मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'01.02.14, '355'...
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  May 11, 2014, 2:15 pm
घड़ी तो चलती रहती हैपर वक़्त कटता नहीं- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'01.02.14, '354'...
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  May 11, 2014, 2:14 pm
ये याद भीअजीब शै हैआती है तो टूट के आती हैनहीं आतीतो मीलों तन्हाई होती है- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'30.01.13, '353'...
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  May 11, 2014, 2:12 pm
काश तुम्हें भूल पातेखुद को मशगूल पाते- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'30.01.13 '352'...
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  May 8, 2014, 8:49 pm
न कोई शाहीन सही , न तवील कारवां सहीमगर हौसलों का जखीरा तो है सही  !!- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी' 24.12.07 , '351'...
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  May 8, 2014, 3:34 pm
कभी- कभी ये भी मेरे लिए नज़्म हो जाती है -हमें बहुत खुशी हो रही है की आज हम हमारे ख़त को पुरा करने जा रहे है।हमें इतनी खुशी कभी नही हुई जितनी आज हो रही है।लग रहा है की मेरी जो तमन्ना थी वोह आज पुरी हो गई है।हमें आज पुरी तरह से ब्लॉग पर काम करना आ गया है।और यह सब मेरे प्यारे से ...
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  May 8, 2014, 3:26 pm
हमारे खतों का आगाज़- शाहिद अजनबी  15.02.09, '349'( कानपुर में लिखा गया रोज़ी  के साथ )...
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  May 8, 2014, 3:20 pm
ज़िन्दगी हमें वक्त के साथ सब कुछ सिखा देती है।रोजी - शाहिद अजनबी 28.03.09, '348'( कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ ) ...
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  May 8, 2014, 3:18 pm
मेरी डायरीये मेरी अपनी ज़िन्दगी का फ़साना हैजो कभी बयां ही न हो सका- शाहिद अजनबी 20.07.09, '347'( कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ )...
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  May 8, 2014, 3:05 pm
आज मुझे आसमान भर खुशी मिली।जिसमें मैं और सिर्फ़ मेरा शाहिद नज़र आए मैं हमेशा यही चाहूंगी.... काश खुदा ऐसा कर दे।- रुबीना फातिमा "रोज़ी" 10.08.09, '346'( मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी')(कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ)  ...
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  May 8, 2014, 3:01 pm
आज हम दोनों ग़म में हैं न जाने क्यूँ - शाहिद अजनबी21.07.09, '345'( कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ )...
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  May 8, 2014, 2:55 pm
रोज़ी बहुत "प्यारी"है मगर बहुत बेदर्द।- शाहिद अजनबी21.07.09, '344'( कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ )...
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  May 8, 2014, 2:53 pm
हाँ, थीमुझे बेइंतिहा मुहब्बतअपने नाम सेलगता था की मीठा सामगर अबनफरत घुलने लगी है उसमें।- शाहिद "अजनबी" 21.07.09, '343'(कानपुर में लिखा गया रोज़ी के साथ) ...
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Tag :थी
  May 8, 2014, 2:49 pm
हमारी दुनिया भी क्या दुनिया है की हम अपनी आंखों के सामने अपनी दुनिया लुटते हुए देख रहे हैं। अजीब बात है तुम्हारा दिल भी कैसे गवारा करता है की तुम ख़ुद बखुशी         अपनी ससुराल के लिए शोपिंग करो"- मुहम्मद शाहिद मंसूरी  'अजनबी', (कानपुर  में ...
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  May 8, 2014, 2:43 pm
वक़्त न जाने क्या सोचकर क्या लिखवा देता है-सारी डिग्रियां एक तरफमजदूर की थकन एक तरफकबीर के दोहे एक तरफग़ालिब का कलाम एक तरफअमीरे शहर की रौशनी एक तरफतीरगी में चमकता जुगनू एक तरफमयखाने की लग्ज़िशें एक तरफसुरूरे मुहब्बत एक तरफसारे ज़माने का ओढना एक तरफऔर माँ का आँचल एक तर...
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  May 8, 2014, 2:14 pm
यहाँ आदमी की नहीं ओहदे की कीमत होती हैज़िंदगी की ख़ुशी से नहीं ग़मों से जीनत होती हैदेखने मैं हर एक इन्सान अच्छा लगता हैमगर बात ये है कैसी उसकी सीरत होती है।- शाहिद "अजनबी "28.12.07, '340'  ...
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  May 8, 2014, 2:09 pm
उसमें तिश्नगी भी हैउसमें ज़िन्दगी भी हैउसमें बंदगी भी हैक्योंकि वो लड़की हैवालदैन की फिक्र भी हैबहन का दर्द भी हैहमसफ़र की तड़प भी हैक्योंकि वो लड़की हैहाथ में छाले होश नहींरो - रो के ऑंखें लाल हुईंख़ुद से वो बेखबर सी हैक्योंकि वो लड़की हैइधर माँ के दर्द की कराहउधर हमन...
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  May 8, 2014, 2:00 pm
अगर लहू है तो हरकत होनी चाहिएवरना बहने को तो समंदर बहा करते हैं- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'15.08.13 , '338'...
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  May 8, 2014, 1:33 pm
सुना है वो बदल गया,  फिर तो वो जरूर कोई आदमी रहा होगा..- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'04.07.2013, '337 ...
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Tag :सुना है वो बदल गया
  May 8, 2014, 1:15 pm
काशज़िन्दगीभी यूं हीपानी की तरह होती ....- मुहम्मद शाहिद मंसूरी 'अजनबी'04.02.2013, '336'...
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Tag :काश ज़िन्दगी
  May 8, 2014, 1:08 pm
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