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शब्द और अर्थ

लो फिर आ गया मौसम त्यौहारों का व्यवहारों कालौटा फिर वृक्षों पर नये पात और नये फल लिये खेतों में एक नयी फसल लिये मौसम हल्की हल्की सर्दी गुनगुनी गुलाबी धूप का उपवन उपवन मौसम आया कौन चितेरा आँक रहा बादलों की तूलिका से यौवन के सपनों , मस्ती , अंगड़ाई ,अलसाई , काम-रूप का !!उत...
Tag :मुक्तक
  October 18, 2012, 11:54 am
दुकानें दो तरह की होती हैं . एक तो सरकारी राशन की दुकानों जैसी . वहाँ हर तरह का माल मिलता है जैसा वहीं मिल सकता है . राशन का चावल राशन जैसा , राशन की चीनी राशन जैसी , राशन का कपडा भी राशन जैसा . "राशन " खुद एक ब्राण्ड हो जाता है . आप वो चावल ले भी आयें , तो पका नहीं पाएंगे , पका लिय...
Tag :विचार
  September 14, 2012, 4:14 pm
अपने शब्द अपने कानों में आज शरीक़ हुए बेज़बानों में .फिर  दोस्तों की याद आयी ,बारिशों के मौसम, रमज़ानों में .मुल्क में आमद अच्छी नहीं ,पैसे ज़ेब में, न माल दुकानों में .बारिशों में रुक जाओ ,लुत्फ़ नहीं  मिलना तुमसे हो जैसे बेगानों में .तुम्हारी ज़बान बहुत मीठी है मिशरी स...
Tag :मुक्तक
  September 14, 2012, 3:42 pm
प्रेसीडेंसी कॉलेज अपने स्नातकीय और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले छात्रों के चयन हेतु एक नयी और दुरूह ( कठिन) ,दो चरणों की  प्रवेश परीक्षा के लिए योजना बना रहा है . यह हास्यास्पद है, क्योंकि आईआईटी जिन्होंने - एक विशिष्ट प्रवेश परीक्षा की अवधारणा क...
Tag :Entrance Examination
  June 7, 2012, 10:00 am
आदमी के चेहरे पर लिखा होता है ?कौन है ? क्या करता है ?हर चेहरा मुखौटा लगता है हँसी , उदासी मासूमियत कुटिलता , लाचारीइश्कबाज़ी के अनेक रंगों से सजा रोता-गाता चीखता-चिल्लाता डराता-धमकाता गरियाता-रिरियाता कभी भिखारी की दयनीय सूरत साधुता की पवित्र मूरत षड्यंत्र की कुट...
Tag :मुक्तक
  May 16, 2012, 6:01 pm
प्रेसीडेंसी कॉलेज अपने स्नातकीय और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले छात्रों के चयन हेतु एक नयी और दुरूह ( कठिन) ,दो चरणों की  प्रवेश परीक्षा के लिए योजना बना रहा है . यह हास्यास्पद है, क्योंकि आईआईटी जिन्होंने - एक विशिष्ट प्रवेश परीक्षा की अवधारणा क...
Tag :Entrance Examination
  May 16, 2012, 12:35 am
वर्षों से सुबह सवेरे मुँह अँधेरे ग्रीष्म, वर्षा, शीत सारे मौसम धरे साप्ताहिक दिनचर्या का अभिर्भूत अंग  प्रेरक प्रसंग  घड़ी बजाती गज़रस्वर लहरी सा फैलता आरोह संगीत अलसाए गुस्से से कुढ़ता बदमिजाज़ गला घोट टीपता बंद हो जाता साज़ अकाल-मृत्यु प्राप्त  बीच में दम तोड...
Tag :मुक्तक
  May 9, 2012, 12:15 pm
"परिस्थितियों में जो उचित हो वही करो ""यही तुम्हारा धर्म है "पाञ्चजन्य के साथ क्यों किया शंखनाद उदघोष क्या थी मंशा ? शंका - कुशंका के उचित-अनुचित के किस तराजू पर लटका कर चले गये कांटे की तरह धरती और आकाश के इन पलड़ों में मैं कब से लटका हूँ त्रिशंकु जैसा  अपने ही प...
Tag :मुक्तक
  May 3, 2012, 9:00 pm
शब्द सिक्कों की तरह  दिमाग में खन-खन बजें  आप जेब में हाथ डाल कर मन-मन गिनें  कुल कितने है ? कहाँ-कहाँ से बीने हैं ? इनसे क्या आएगा ? क्या घर चल पायेगा ? उधेड़ बुनता हूँ  असमंजस रहता हूँ  जेब में मुट्ठी बाँध रक्खी है  कोई शब्द कहीं छूटा तो नहीं ? कोई फूटा रस्ता तो नहीं ? हिसाब में ...
Tag :मुक्तक
  May 2, 2012, 10:01 pm
संभवामि -संभवामिसंभावनाएं हैं समय की यही विडम्बनाएं हैं युगे-युगे हर युग में किसी से नहीं मिला क्यों नहीं मिले ?मिलना चाहिए !शब्दों को अर्थ देना चाहिए देखो अर्थ के बिना परसाई जी नहीं रहे शब्द व्यर्थ रहे !पाला-पोसा बड़ा किया काम नहीं आए संभावनाएं !गर्भ का शिशु अभागा ही ड...
Tag :मुक्तक
  April 3, 2012, 12:13 pm
आधा-अधूरा थोड़ा-ज्यादा सब कुछ पढ़ा  अक्षरशःजब भी अंतराल आया स्मृति का चिन्ह रख छोड़ा फिर वहीं से पकड़ा जोड़ा मेज़ पर पड़ी हुई किताब ने फिर अचानक क्यों पूछा - "मुझे पहचानते हो ?"यही सवाल -"क्यों बार-बार,अलमारी में रक्खी किताबें भी पूछने लगी हैं ?"पंक्ति दर पंक्ति ...
Tag :मुक्तक
  April 1, 2012, 1:20 pm
एकांत में बैठ मैं तुम्हारे वक्ष से गुज़रती धडकनें देखूँ तुम मेरी आती-जाती सांसें गिनोसुनो और बताओ इस जुगलबंदी से कोई नया राग उपजा है क्या ?एक पुरानी किताब में एक खत मिला है लिखा है -"तुम मुझे प्राणों से प्रिय हो तुम्हारा प्रेम मेरे रोम-रोम में बसा है तुम्हे याद न कि...
Tag :मुक्तक
  March 22, 2012, 12:24 pm
मैनें जुबान कब खोली है मौन ही अपनी बोली है निर्मिमेष नैनों की भाषा आँखों में कैसी जिज्ञासा ज़िंदगी छल-प्रपंच-धोखा दुनिया बच्चों सी भोली है ||स्वप्न सारे थे अनूठे,ह्रदय के अभिसार झूठे,कहीं गिरे , कहीं उठे ,इससे जुड़े , उससे रूठे, बुना यही ताना-बाना झीनी-झीनी झोली है ||पूर...
Tag :मुक्तक
  March 14, 2012, 10:09 am
हाथों में है आज बरसों बाद फिर गुलाल होली मेंमुझे क्यों याद आते हैं तुम्हारे गाल होली में||बहुत दिनों से नहीं की कोई धमाल होली मेंसाली याद आती है चलो ससुराल होली में ||जाने मनचला कर गया क्या मनुहार होली मेंबिना रंग के ही हो गई गोरी पूरी लाल होली में ||चढ़ाई भांग, ठंडाई, और हु...
Tag :Holi
  March 9, 2012, 5:42 pm
व्यापार , फिर व्यापार है लक्ष्मी है चंचला कब कहाँ ठहरी है ये क्या ज्ञान की गठरी है कुबेर का खज़ाना कौन सदा महेंद्र है बदलता केन्द्र हैवक्त का पहिया दौड़ता , चलता बदलती है धुरी हारे हुए हाथी, हाथीदांत सामग्री बने सूत के वस्त्र , ऊनी कालीन इत्र , विचित्र काली मिर्च लौं...
Tag :इतिहास
  February 23, 2012, 11:30 am
सिर्फ नहीं बर्फीली हवाओं और हमारे बीच मानों हिमालय जैसे काल के मध्य खड़ा वैसे हीविन्ध्य -सतपुड़ा दुर्गम , दुष्कर , दुरूह प्रस्तर चोटियाँ एक एक खण्डकाव्य वाल्मिकी रामायण भाषा का एक अरण्य ऋषि अगस्त्य वनाच्छादितसंस्कृति वांग्मय लाँघ न पाया कोई शत्रु, दस्यु , लुटेराशब्...
Tag :इतिहास
  February 22, 2012, 11:18 pm
इतिहास फिर क्या है एक निरंतर यात्रा कुछ पड़ाव फिर आये बाली,जावा,सुमात्रा दूर-सुदूर से भरा स्वर्ण अर्जित कोषागार धन-धान्य व्यापारतक्षशिला, नालंदा और करने संचय ज्ञान-कोष अक्षय ज्ञानपिपासु व्हेनसांग , फाह्यान मेगास्थनीज, अलबरूनी यूनान-मिस्त्र-रोमा  चीनो-अरब-सारा ...
Tag :इतिहास
  February 22, 2012, 11:03 pm
संस्कृत वेद , ऋचा , श्लोक , उपनिषद दर्शन , शास्त्रार्थ एक प्रथा सिंधु सभ्यता की लिपी अपठित , अलभचित्र सन्मुख पशुपति – नंदी मुद्रा अंकित विशेष देवता शिव सा  स्वरुप महेशरूद्र महादेव देवाधिदेव तीर्थ दुर्गम  कैलाश – मानसरोवर अट्ठारह ज्योतिर्लिंग प्राचीन अर्वाचीन देव...
Tag :इतिहास
  February 22, 2012, 12:27 am
रेगिस्तान रेत का वीरान कितने इतिहासों की स्मृति कितने कवलयतियों का श्मशान ज़िंदगी रण-बाँकुरा  या कालबेलिया बंजारा सूरज के सिर पै सवार दौड़ता घुड़सवारटापों की पुकार जिंदगी भागती रेत की आँधीसी उड़ चली कट चली    रेत के सब टीले बदलते रहे कबीले बंजारे , बंजारे किसको ...
Tag :इतिहास
  February 21, 2012, 12:32 pm
मैदान में बस गए गंगा दोआब भए पंजआब भए यहाँ वहाँ सर्वत्र भागीरथ के साठ सहस्त्र पुरखों की हड्डियों से उर्वरा भर गया सुनहरी बालियों सा सोना खरा खेती-किसानी की तुम्हारे खलिहान भए कोल्हू के बैल भए गाय को माता किए आता किए , जाता किए खता किए, खाता किए घाट नहाए , मंदिर के द्वा...
Tag :इतिहास
  February 21, 2012, 12:03 am
देह है दैहिक है दहकता है मस्तिष्क से पैर शिराओं में तरल बहता लावादेह वन में दावानल देहयष्टि पोर-पोर अंगाराएक टुकड़ा  होंठों पै अब भी दग्ध है एक टुकड़ा कनपटी से चिपका आसपास गालों तक रोम-रोम तप्त है सुर्ख हैं  रक्ताभ कपोल जिस्म का ज्वार !बहती है स्वेद की क्षीण धार !!...
Tag :प्रेम
  February 17, 2012, 3:08 pm
हम सब मुद्राएँ हैं चांदी के सिक्के हैं सोने की अशर्फियाँ हैंडालर हैं , रूपइया हैं मार्क हैं , फ्रांक हैं बुद्ध अब जेन हैजापानी येन हैयात्री ह्वेन्सांग , फाहियान शाखा महायान , हीनयान दर्शन अब युआन विषय भूगोल नहीं जी पी एस प्रद्दत है दुनिया कितनी मस्त है पृथ्वी अब गोल ...
Tag :इतिहास
  February 11, 2012, 7:14 pm
इतिहास चर्चा कभी भी कहीं भी इफ़रात से सुकरात से औने -पौने दाम टाईम पास मूँगफलीतोड़ी-फोड़ी, छिलीआड़ी-तिरछी लकीरें विहंगम पटलसबका शगल जैसे चाहो उड़ेल दो रोशनाई वृहत्तर कैनवास सीता की अग्निपरीक्षा राम का वनवास द्रौपदी का चीरहरण सावित्री का व्रत-उपवास दुर्योधन का ...
Tag :इतिहास
  February 10, 2012, 12:54 pm
मैं न तो समय हूँ , न सत्ता . न मेरे पास दिव्यदृष्टि है , न काल-यंत्र. इतिहास जो भी लिखे , जब भी लिखे , दृष्टी है , कल्पना है , टुकड़ा है , अनुमान है . मधु यामिनी पर खिंचा हुआ एक चित्र . जिसमे उपस्थित युगल के मन में क्या चल रहा है , था , आसपास उपस्थित कोई क्या लिखेगा . और युगल द्वय अगर डाय...
Tag :Hindi Kavita कवि लेखक कविता मुक्तक
  February 10, 2012, 12:12 pm
खेत की मेड़‌‍‌बहुत बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है गड़ा  है अंदर से पोला है  खोखला है  कोई आंधी नहीं गाँधी नहीं हवा का एक हल्का सा झोंका गिरा देगा हरा देगा कोई कुल्हाड़ी मत लाना .न हँसी असली न शब्द न कथनी न करनी बहत्तर छेद चलनी  मिट्टी की  गाड़ी मृच्छकटिकमचलती गड़गड़हाथो...
Tag :Poem
  February 1, 2012, 11:29 pm
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