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Dil ki kalam se

ये जिन्दगी ...जो कभी कहानी तो कभी गजल रही है ..!कभी मछली सी ...हाथो में है , जीने के लिए मचल रही है !! कभी गीली साबुन सी ..पकड़ना चाहो तो भी फिसल रही है !कभी थक कर बैठ रही , कभी ख़ुशी से उछल रही है ये जिन्दगी जो हर पल बदल रही है ...जितना जीया इसे, उतना हाथ से निकल रही है !ओनी पोनी जिन्दगी , आ...
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vijay
Tag :विजय पाटनी
  May 4, 2013, 10:37 am
ये दो शक्लों वाला बलात्कार मुझे पचता नहीं हैतुम्हारी राजधानी में हुआ बलात्कार अत्याचार है और हमारे कस्बें में हुआ बलात्कार चंद रुपयों का व्यपार है ?सिर्फ इसलिए की वहां मीडिया है, हाई प्रोफाइल लोग है |लाखों मोमबत्तियां और करोडो "मेल" फेशन में आ जातें है ||चार दिन सार देश...
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Tag :विजय पाटनी
  April 20, 2013, 3:29 pm
ये  दो शक्लों वाला बलात्कार मुझे पचता नहीं है तुम्हारी राजधानी में हुआ बलात्कार अत्याचार है और हमारे कस्बें में हुआ बलात्कार चंद रुपयों का व्यपार है ?सिर्फ इसलिए की वहां मीडिया है, हाई प्रोफाइल लोग है लाखों मोमबत्तियां और करोडो "मेल" फेशन में आ जातें है |चार दिन सार दे...
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Tag :विजय पाटनी
  April 20, 2013, 3:16 pm
                                                                सोचा था  उनसे बिछड़ कर जी नहीं पाएँगे,, कैसे उनका प्यार दिल से भुलाएंगे,,दफ़न कर के सीने में यादों का मंजर कैसे उन पर एक नया घरोंदा बनायेंगे।पर  मालूम ना था कि ये प्यार नहीं साज़िश है उनकी,,हमारी बर्बादी ही मंजिल है उनकी,,रब्ब मान कर पू...
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Tag :
  February 18, 2013, 5:49 pm
जब उसका जन्म हुआसब उसके आस पास थे ....घेरे थे सब उसको चारों और सेसब उसके अंदर तक झांक लेना चाहते थेउसके जर्रे जर्रे को.. पहचान लेना चाहते थेकिसी ने देख कर आह किया , किसी ने वाह कियाकिसी ने एक दो और जोड़ कर उसे अफवाह किया ||वो सुर्ख़ियों में रही कुछ दिन ...दुनियां के आसुओं से उसकी...
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Tag :विजय पाटनी
  January 13, 2013, 2:27 pm
सुनो जहमत करो, अपनी सोच को बदलने की जरा सी ...आज उसका दर्द , जो तुम्हे, महसूस नहीं हो रहा , कल वो दर्द, तुम्हे भी हो सकता है दर्द को बांधों मत किसी दायरे में ...|कुछ देर के लिए आईपॉड के इअर फ़ोन को कानों से हटा कर, सुन भी लिया करो ..की कोई दर्द से करहा तो नहीं रहा सड़क किनारे ...?तुम्हा...
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Tag :विजय पाटनी
  January 5, 2013, 3:46 pm
"अपने घर का कचरा , सड़क पे डालने के लिए दिवाली है ...मिलावट की मिठाइयाँ , गरीबों को बांटने के लिए दिवाली है ..बेजुबान जानवरों को सताने के लिए दिवाली है फटाके फोड़ के , प्रदुषण फ़ैलाने के लिए दिवाली है ..गर सरकारी अफसर हो आप तो जम कर खाने , के लिए दिवाली है ...गर हो दुकानदार, तो थोडा ...
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Tag :
  November 12, 2012, 3:36 pm
सूरज आता खाली हाथ ... चाँद खाली हाथ जाता है कुछ खुशियाँ खोजने में ...पूरा दिन निकल जाता है ||इस कद्र पड़ी है महंगाई की मार सब पर अब आम दिनों सा... त्यौहार निकल जाता है ..||झूठे वादें झूटी कसमें और बेफिजूल की रस्में इन्ही चक्करों में सबका संसार निकल जाता है ||जेब में जब आ जाता है ग...
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Tag :विजय पाटनी
  September 29, 2012, 6:18 pm
गुवाहटी कि शर्मनाक घटना के बाद , यशवंतपुर मैसूर ट्रेन में एक लड़की के साथ वही हरकत दोहराई गयी , लेकिन समाज मीडिया और आम जन सिर्फ ख़ामोशी से तमाशा देख रहें है :) जागो इंडिया जागो ||जिस के आँचल में पल कर.. बड़ा हुआ जग  आज उजड़ता हुआ उसका बदन , तार तार देख रहा है दिमाग  पर काला चश...
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Tag :विजय पाटनी
  July 26, 2012, 11:59 am
उसकी हर हरकत का हिसाब रखते है हम दिल में,  मोहब्बत की किताब रखतें है !!वो चेहरे पर चाँद लिए घुमती है हम आँखों में.. हमेशा रात रखतें है | जब भी मिलें हमसे ..बैचैनी से मिलें वो इसलिए हर बार, अधूरी मुलाक़ात रखतें है ||पतझड़ में भी सावन सी बदली हो जाये अपने शब्दों में... हर वो बात रखते ...
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Tag :विजय पाटनी
  July 24, 2012, 11:42 am
माँ मुझे ना दे जन्म ...मैं यूँ मर मर के,  जी ना पाउंगी अच्छा होगा यदि कोख में ही मर जाउंगी !! :).....माँ , जब चाहा पापा ने अपना गुस्सा तुझ पर उतारा वजह- बेवजह तुझ को मारा !!तू चुप कर के , जो सहती है , मैं सह ना पाउंगी अच्छा होगा,  यदि कोख में ही मर जाउंगी !! :).....माँ,  जब तू ऑफिस से आने में दो ...
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Tag :विजय पाटनी
  July 17, 2012, 11:01 am
खेलती थी कूदती थी अपने मन की करती थी तितली सी थी ..अपने बाग़ में इधर उधर उडती रहती थी ||कुछ दिनों से वो गुमसुम है ... चुप चुप है लोग कहते है वैसा करती है देर रात को सोती है ...सुबह जल्दी उठती है |कुछ आवाजें उसे .... ..अक्सर टोकती रहती  है || वो ना जाने क्या क्या सोचती रहती है !! खोने की...
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Tag :विजय पाटनी
  July 9, 2012, 3:30 pm
कुछ लिखना है , कुछ ऐसा , जो अब तक ना लिखा गया हो कुछ ऐसा , जो अब तक ना ही कहा गया हो , ना ही सुना गया हो कुछ ऐसा लिखना है,  जिसे पढ़ कर काम क्रोध मोह माया सब शांत हो जाएँ कुछ ऐसा लिखना है,  की "सपनों में ही ,  हकीकत वाली रात हो जाए ............. चंद शब्दों में ही सारी बात हो जाए ||कुछ लिखना है ,...
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Tag :विजय पाटनी
  June 18, 2012, 10:55 am
पापा कितनी महंगाई है , और देखो , सरकारी अफसरों का महंगाई भत्ता बढ़ गया है , पापा कल मुझे अपने दोस्तों की पिक्चर दिखाने ले जाना है तो मेरी पॉकेट मनी भी जरा बढ़ा दो अब , और सुनिए जी मेरी किटी पार्टी वालों ने , घुमने जाने का प्लान बनाया है , तो मुझे भी इस बार दो हजार रुपये ज्यादा च...
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Tag :लघु कथा
  May 27, 2012, 10:47 am
तेरे बिना बेस्वाद जी जिन्दगी ...खाए जा रहा हूँ मै बस जीने की अपनी भूख, मिटायें जा रहा हूँ |तुझ को देख कर ...किया था वादा ...हमेशा मुस्कराने का बस वोही  अधूरी मोहब्बत ...अब तक ....निभाए जा रहा हूँ तेरे बिना बेस्वाद जी जिन्दगी ....खाए जा रहा हूँ |चाँद को देखा नहीं , तेरे चेहरे को देखने ...
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Tag :विजय पाटनी
  May 26, 2012, 4:44 pm
सर पर तगारी, या हाथ में फावड़ा हमेशा वो दिखा मुझे , धुप से लड़ता हुआ अपने से , चौगुना वजन लिए गर्म सडक पर नंगे पैर , सरपट बढ़ता हुआ |  अपने पेट की अग्न को , शांत करने खातिर खुद से हमेशा लड़ता हुआ ..वातानुकूलित भवनों में रहने वाले, लोकतंत्र से थोडा सहम थोडा डरता हुआ .. :(इस महंगाई ...
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Tag :विजय पाटनी
  May 1, 2012, 9:20 am
क्या कभी किसी की आवाज में, नमी महसूस की है ? क्या तुमने जिन्दगी में , जिन्दगी की कमी महसूस की है ?क्या महसूस हुआ है तुम्हे, किसी गैर का दर्द क्या बिताई है खुले आकाश में ,एक रात सर्द ?क्या किसी के सपनों को, अपनी जमीं दी है ?क्या किसी की आँखों को, खुशियों की नमी दी है ?क्या किसी क...
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Tag :विजय पाटनी
  April 29, 2012, 11:05 am
 लिखी सौं अर्जियां.. , उसके दर तक , एक भी , भेजी  जा ना सकी |मुरादें मेरी ...उसके दर से ..पूरी हो कर , आ ना सकी |उसे यकीन था ...वो मुझे ...इतना तोड़ देगा की मैं हाथ फैलाये , उसके  दर तक चला आऊंगा ...!पर हमसे हमारी खुशियाँ , कभी मांगी ना जा सकी |वो पत्थर का ही  था , यह भी साबित हुआ दिल की बातें ...उ...
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Tag :विजय पाटनी
  April 22, 2012, 10:29 am
बचपन कैद रहिसों के मकानों मेंरसोई में झूठे बर्तनों से ,खिलोने खेल रहें हैवो  गरीबी का भारी बोझ...अपने कोमल कन्धों पर झेल रहें है |लोग  देश के भविष्य को , कूड़ें में फेक रहें है |सब मूक बन कर , नेहरु के गुलाब कोटुकड़ा टुकड़ा, बिखरते देख रहे है |समाज चुप है , चुप सरकारें भी हैसब बचप...
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Tag :विजय पाटनी
  April 3, 2012, 11:23 am
वक्त के पन्ने रेत से, मेरे हाथ से फिसलते गयेजहाँ मौका मिला खुशियाँ थक कर बैठ गयीगम मेरे साथ, उम्र भर चलते गये |यादें सिर्फ ताउम्र साथ रहीं मेरेलोग बिछड़ते गयें ... लोग मिलतें गये |वक्त के पन्ने रेत से, मेरे हाथ से फिसलते गये |मुसाफिर से मिले, मुझसे "अपने" भी यहाँखुशियों में ल...
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Tag :विजय पाटनी
  March 29, 2012, 10:03 am
जानते हो ? तुमसे ज्यादा तो मुझे, इस घर की दीवारें जानती है ....जब तुम सुनते नहीं मेरी , मैं सब इन को सुना देती हूँ जब तुम फाइलों में उलझे,मुझे भूल जाते हो , मैं इनसे रिश्तें बना लेती हूँ |तुम जानते हो ?ये मुझे सहारा देती है ...जब बातों के भंवर में होती हूँ मैं , ये मुझे किनारा देती ह...
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Tag :विजय पाटनी
  March 9, 2012, 2:05 pm
क़ानून को हाथ में लिए खड़ी है ,आँखों पर काली पट्टी चडी है हर पुरुष उसके आगे नतमस्तक है वो गंगा है , यमुना है , सरस्वती है सब का पाप धोने के लिए बहती है हर पुरुष उनके आगे नतमस्तक है वो वैष्णो देवी मै है , वो काली है , अम्बे है,वो शेरो वाली है , वो माँ संतोषी है हर पुरुष उनके आगे नतमस...
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Tag :विजय पाटनी
  March 2, 2012, 11:21 am
अलमारी के लोकर में. तेरे ख्यालों को महफूज रखता हूँमैं कहीं भी रहूँ , आँखों में तेरी तस्वीर, जरुर रखता हूँ |एक पल भी खाली रहूँ तो, आती है तेरी यादइसलियें मैं खुद को, हमेशा मशरूफ रखता हूँ |करता हूँ घुमा फिरा के तेरी बातें सबसेदेख कितना मैं, तुझे मशहूर रखता हूँ ||चाँद में देखूं ...
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Tag :विजय पाटनी
  February 27, 2012, 11:09 am
मेरे दिल के शहर में इक नया मुसाफिर आया हैवो रास्तों को मेरे , बदलना चाहता हैऔर दिलभी , उसकी ऊँगली पकड़ कर, चलना चाहता है ||उसके आने से रास्ते दिल के महकने लगे है प्यार के पल , पंछी बन , चहकने लगें है हर "वक्त" उसके साथ, खिलना चाहता हैदिल फिर साँसों की धुन पर मचलना चाहताहै मेरे दि...
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Tag :विजय पाटनी
  February 17, 2012, 3:04 pm
बहुत दिनों बाद कुछ बहुत अच्छा लिखा है , उम्मीद है आप को पसंद आएगा , शब्दों को अपनी माँ से जोड़ कर देखना हर शब्द सांस लेता महसूस होगा :)वक्त के पार ले चल , किसी नयी दुनिया में इस बार ले चल इक अरसे से उसने देखी नहीं ख़ुशी , मुस्कराहट उसके लिए दो चार ले चल किसी नयी दुनिया में इस बार...
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Tag :विजय पाटनी
  February 4, 2012, 3:30 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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