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यह देस विराना, हे सखी

हालात अजीब ही बन पड़े हैं...इस निराशा के दौर में शायद ही कोई यथार्थवादी होगा जिसमे कुछ बदलने की जरा भी हिम्मत बची हो...तन तो अब भी वही है यहाँ लेकिन मन जैसे जल पड़ा है किसी शीतल सपने की छांह बुनते-बुनते......लुट-पात, खूनखराबे और भ्रष्टाचार के इस दलदल में है कोई जगह जो विषाक्त न हो......
यह देस विराना, हे सखी...
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  June 13, 2012, 11:43 pm
आज बगीचे में देखा था मैंने एक तितलीऔर उसके पीछे भागती सिंड्रेलाबेताब उसे छूने को, निकट जाकर देखने को, महसूस करने को.याद आया मुझे एक ऐसा दिन भी जब यह तितली छोटी थी,अनाकर्षक, घिनौनी, एक 'कैटरपिलर' के जैसे पत्तों पर पड़ी होती थीतब इसे देखकर डर गयी थी सिंड्रेला!!!यूँ ही कभी मैं भ...
यह देस विराना, हे सखी...
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  April 12, 2012, 8:56 pm
अबकी इक अच्छा स्वप्न देखा था मैंनेदेखा था एक नया सूरज, एक नया आसमां,कुछ नए पेड़ और ढेर सारे पंछी.एक सुन्दर सुहाना सपना जहाँ कोई ग़म नहीं।कलकल करती एक नदी और किनारे परनाचते कई मोरउफ़क पर उजले बादल और जमीं पर हरियाली ही हरियालीनज़रें घुमाकर देखा तो हर जगह तुम ही तुमअचानक ...
यह देस विराना, हे सखी...
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  March 30, 2012, 7:37 pm
याद है एक बार, साथ बैठी थी तुम मेरे और एक कोरे कागज पर कोई नज़्म लिखना चाहा था मैंनेशब्द ही कम पड़ गए थे शायद या खो गया थामैं तुम्हारी आँखों के उन अनकहे शब्दों में, कुछभी ना लिख पाया और यूँ ही चली गयी तुमआकर देखो जरा, एक नज़्म लिखी है मैंनेअपनी कितनी ही हसरतें, कितनी ही ख्व...
यह देस विराना, हे सखी...
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  March 4, 2012, 8:04 pm
मेरे आँगन में एक आम का पेड़ हैबचपन में झूले डालकर खेला था मैं इनपरकहते हैं अब कुछ बीमार सा हो गया है यह,नहीं लगते अब इसपर कोई फलकाट डालेंगे इसे, आंगन में थोड़ी जगह जो मिलेगी!नहीं झूमेंगी अब इसकी पत्तियां और नहीं खेलेगी उनके बिचमेरे बचपन की याद.उड़ जायेंगे कुछ पंछी,मर जाए...
यह देस विराना, हे सखी...
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  March 2, 2012, 1:53 pm
अपनी hi mad me dub rahe,malum नहीं क्या क्या हाराjo शीतल छाँव चुनी तुमने उसमे झुलसा है जग सारा मैं लाख बुझाऊं अंगारे,मेरी हस्ती का मोल नहींaur tu bas ik शमसीर चला दे तेरे जलवे aalamaara ...
यह देस विराना, हे सखी...
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  December 29, 2011, 11:12 pm
मुझे याद है मेरा बचपनजब ग़मों से बेख़ौफ़ हर चाल में दुनिया जितता था मैं.किसी तामीर की हसरत ना थी, ना किसी दिखावे की आकांक्षा.इस बड़े से जहान में छोटी उड़ानें भरता था एक आज़ाद सेगौरैये की तरह.या की हरे मैदानों में दौड़ता जाता था बेफिक्र,बेकुफ्र.आज कुछ कदम चलना भी मुश्किल ...
यह देस विराना, हे सखी...
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  December 20, 2011, 9:23 pm
मेरे आँगन में एक आम का पेड़ हैबचपन में झूले डालकर खेला था मैं इनपरकहते हैं अब कुछ बीमार सा हो गया है यह,नहीं लगते अब इसपर कोई फलकाट डालेंगे इसे, आंगन में थोड़ी जगह जो मिलेगी!नहीं झूमेंगी अब इसकी पत्तियां और नहीं खेलेगी उनके बिचमेरे बचपन की याद.उड़ जायेंगे कुछ पंछी,मर जाए...
यह देस विराना, हे सखी...
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  December 18, 2011, 12:43 am
तुम को पाकर खोने का यह दर्द जो मैंने जाना है,अब दिल में तेरे ठौर1 नहीं, तो दूजा कौन ठिकाना है?तुम लाख मना लेना दिल को इस दुनिया की खुशफहमी से,जब जाते जाते जा न सकूँ,तुम्हें आते आते आना है.ये दुनिया वाले कहते हैं चीर-काल रहूँ सौ साल जिउं,इक तुम ही मेरा जीवन हो, यह फक़त2 ही मैंन...
यह देस विराना, हे सखी...
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  December 15, 2011, 8:00 pm
सोचो जो अगर इस दुनिया में पैसा न होतातो यह स्वार्थी इन्सान भला कैसा होता??शायद इस दुनिया में बंटवारे ना होते,हर दिन ये झगडे इतने सारे ना होते,एक भाई भाई का दुश्मन ना होताअपनों के बीच कोई चिलमन न होताकिसी से मुहब्बत पे इतनी पाबन्दी न होती,दिलों के बिछड़ने का कारन पैसे की र...
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  December 12, 2011, 3:03 pm
मैं नहीं विश्वास करता ऐसे किसी अल्लाह, ईसा या भगवान में,जो भेद करता है मजहब में, धर्म में, इंसान मेंदेखो तो, आज इसने हमें कितना बाँट दिया है.मैं नहीं जाता किसी मंदिर, मस्जिद या दरगाह मेंजो सिखाते हमें नित नए पाखंड, बतलाते झूठे आदर्शआज इन्ही ने तो किया है इंसानों को सत्य से...
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  December 6, 2011, 7:22 pm
अभी परसों की ही तो बात है- देखा दो बच्चे आपस में लड़ रहे हैं. एक के हाँथ में बल्ला और दुसरे के हाँथ में विकेट. मार-धाड़ करने को उतारू. अगल बगल बच्चों का एक ज़खीरा लेकिन अफ़सोस की उन्हें रोकने वाला कोई भी नहीं. कोई हंस रहा है, कोई तालियाँ मार रहा है तो कोई उन दोनों को एक दुसरे ...
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  December 3, 2011, 6:02 pm
इस चित्र को मेरी बहन द्वारा कागज पर उकेरा गया है. इस चित्र को बनाने में निहित उनकी भावनाओं को मैं नहीं जनता पर इसके बारे में अपने विचारों को साझा करने की चेष्टा करता हूँ. उम्मीद है यह आपको पसंद आयेगी.एक गिरता हुआ प्याला, प्याले में बची मय की कुछ बूंदें,इनके बिच स...
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  November 30, 2011, 1:07 am
निम्नलिखित 3 चुनिन्दा शेर अफ़्गार द्वारा लिखित हैं जो उन्होंने हमसे साझा किया. उम्मीद है यह आपको भी पसंद आएंगे.1.ग़म-ए-हस्ती को मिटाने का कोई जरिया नहीं सूझतालोग कहते हैं मोहब्बत कर,उसके लिए जी,उसी के लिए मरहम तो हरदिल तैयार थे 'अफ़्गार'पर इस सफ़र में कोई राह-ए-हमसफ़र ही...
यह देस विराना, हे सखी...
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  November 24, 2011, 7:22 am
सुर्ख़ियों में रहना ठाकरे खानदान की शायद पुरानी आदत हो चुकी है. जब देखो तभी सब मिलकर जोड़-तोड़ की राजनीती में लगे रहते हैं. अब राज ठाकरे ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है.गौरतलब है की पिछले दिनों जब मुंबई की टीम भोपाल में कबड्डी खेलने गयी तो वह किसी वजह से दोनों टीमों के ब...
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  November 19, 2011, 5:34 pm
जब मैं बच्चा था, शायद दूसरी या तीसरी कक्षा में पढता था तो एक दिन शिक्षक महोदय ने हम लोगों से एक प्रश्न पूछा-"अक्ल बड़ी या भैंस?" आपके शिक्षक महोदय ने भी आपसे यह प्रश्न कभी न कभी अवश्य पूछा होगा. नहीं?? कुछ प्रश्न होते ही हैं ऐसे जो हर बार पूछे जाते हैं क्यूंकि मेरी समझ में हर श...
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  November 18, 2011, 9:14 am
जब वह पैदा हुआ तो मनाई गई खुशियाँ,बनाये गए पकवान और बांटी गयी मिठाइयाँतब दुनिया हँसी थी क्यूंकि तब वह रोया थापर मैं रोया था क्यूंकि उसकी आवाज़ में दर्द था,और शायद एक रुदन इस दुनिया में आने काफिर वह थोडा बड़ा हुआ, हँसता-खेलता बचपन आया,पर नहीं वह बच्चा नहीं था क्यूंकि वह ...
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  November 16, 2011, 10:35 pm
तुम कहते हो मैं जाहिल हूँ, आवारा हूँ,मेरी सोच,मेरे विचार महज दिखावा हैं.मैं जो भी कहता हूँ,करता हूँ , सब एक फरेब हैढूंढने को तो हम सब में हीं कितने सारे ऐब हैं.दूसरों में सिर्फ कमियां देखना एक कमजोरी है,कमियां तो सब में ही हैं,किसी में अधिक किसी में थोड़ी है.अगर स्वछंद ह...
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  November 8, 2011, 7:28 pm
आज लोकतंत्र इस तरह अपने पर पसार चुका था की अब तो जंगल में भी इसकी आहत होने लगी थी. बकरियां, भेड़ें और हिरन सरीखे कई जानवर तो महीनों से आमरण अनशन पर बैठे थे की जंगल में जल्द ही शेर की सत्ता को समाप्त कर लोकतंत्र को अपनाया जाये. पर एक बहूत बड़ी समस्या थी-पुरे जंगल में कही कोई श...
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  November 5, 2011, 7:09 pm
7  अरबबां बच्चाऔर एक नज़र डालें अपने आने वाले भविष्य पर भी आज हम 7 बिलियन यानि 7 अरब हो गए. इस बात को लेकर लोगों में गहरा मतभेद है की आखिर वह अनोखा बच्चा कौन है(उस बच्चे में इस अंक के अलवा अभी शायद ही कुछ अनोखा हो).आज लगभग 3 .5  लाख बच्चों का जन्म हुआ और हर कोई अपने बच्चे...
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  November 1, 2011, 10:32 pm
आजकल के अख़बारों और समाचार पत्रों में अक्सर यह पढ़ने सुनने को मिल जाता है की किसी बच्चे की कॉपी की जाँच गलत ढंग से हो गयी. लेकिन इस बार तो वाकया कुछ ज्यादा ही आगे वढ़ गया.जैसा मैंने एक समाचार पत्र में पढ़ा,उसके अनुसार एक बच्चे को बी-एड के किसी विषय में बहूत कम नंबर मिले जबक...
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  October 31, 2011, 8:54 pm
लीजिये एक बार फिर से दिवाली आ गयी औए यह एहसास करा गयी की आखिर यह एक साल कितनी जल्दी बीत गया. आप सभी पाठकों को मेरी तरफ से दीपों के इस पर्व की बहूत बहूत शुभकामनायें.परन्तु आज के परिप्रेक्ष्य में इस पर्व पर खुशियों से झुमने-गाने, मिठाइयाँ खाने और पटाखे जलने से इतर भी बहूत कु...
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  October 26, 2011, 8:21 pm
भरनी है मुझे एक ऊँची उडान, दे दे मुझे दो पररोक नहीं सकती मुझे तेरी बंदिशें,काट डाले मैंने वो पिंजरउड़ना है मुझे लेकर एक नयी मुस्कानकरना है खुद के एक नए जीवन का आह्वानफिरना है इस नीले गगन में उन्मुक्तसाथ लिए उत्साह, इन दुःख की कलिमाओं से मुक्त.जाना है बहूत दूर, खोजना ह...
यह देस विराना, हे सखी...
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  October 24, 2011, 2:24 pm

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  January 1, 1970, 5:30 am
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