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Blog: रचनाधर्मिता

Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
माँ तुम अपने साथ ले गयीमेरा बचपन भी।जब तक थीं तुममुझमें मेराशिशु भी जीवित थावात्सल्य से सिंचितमन काबिरवा पुष्पित थारंग-गंघ से हीन हो गएरोली-चन्दन भी।झिड़की, डांट-डपट भी तुम थीतुम थी रोषमयीसहज स्नेह सलिलाभी तुम थीतुम थी तोषमयीसुधियाँ दुहराती हैं खट्टी-मीठी अनब... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   7:19pm 26 Jan 2016 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
कैसी घिरीं घटायें नभ परकैसी घिरी घटायेंधूप कर रही धींगा-मस्ती छायाओं से गरमी रिसती आँचल का अपहरण कर रहीहैं मनचली हवाएं।कैसी घिरी घटायें।हंस तज गए मानसरोवर मत्स्यों का है जीना दूभर घडियालों के झुण्ड किनारों पर डूबें उतरायें।कैसी घिर... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   7:16pm 26 Jan 2016 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
सुन रहे होबज रहा है मृत्यु का संगीत!मृत्यु तन की ही नहीं हैक्षणिक जीवन की नहीं हैमर गये विश्वास कितनेपर क्षुधा रीती नहीं हैरुग्ण-नैतिकता समर्थित आचरण की जीतसुन रहे हो.....ताल पर हैं पद थिरकतेजब कोई निष्ठा मरी हैमुखर होता हास्य, जब भीआँख की लज्जा मरी हैगर्व का पाखण्ड करत... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   7:11pm 26 Jan 2016 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
उसी पुरानी हाँड़ी मेंअब कब तक भात पकायेंगे!युग बदला निर्मितियाँ बदलींसृजन और स्वीकृतियाँ बदलींबदल गये जीवन के मानकयज्ञ और आहुतियाँ बदलींपुरावशेषों को बटोर कर कब तक भूत जगायेंगे!राजा, भाँट, विदूषक बदलेदरबारी, सन्देशक बदलेबदल गये तात्पर्य अर्थ केमिथको के सँग रूपक बद... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   6:56pm 26 Jan 2016 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
तुम्हें कैसे बताऊँ...मेरे मन के विवर में तुमविचरती रागिनी सी होतुम्हें कैसे बताऊँ।प्रलय के बाद जब निर्जन भुवन में,लगे थे आदि मनु एकल यजन में,अप्रत्याशित तभी जैसेमिली कामायनी सी हो।तुम्हें कैसे बताऊँ।मधुर विश्रांति के कोमल पलों में,छुअन स्नेहिल छिपाए अंचलों में,गगन ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   6:55pm 26 Jan 2016 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
साँस-साँस चन्दन होती है, जब तुम होते होअँगनाई मधुबन होती है, जब तुम होते होजब प्रवास के बाद कभी तुम, आते हो घर मेंखुशियों के सौरभ का झोंका,लाते हो घर मेंतुम्हें समीप देख कर बरबस अश्रु छलक जातेअंग-अंग पुलकन होती है,जब तुम होते होरोम-रोम अनुभूति तुम्हारे, होने की ह... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   8:19pm 6 Jul 2015 #प्रेम
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
किसका बाट जोहती है तूनैया री!जिनको तूने पार उताराकोई तेरा हुआ सहारासबने दाम दिये नाविक कोतुझे पैर से धक्का मारासब चुप चाप सहा करती हैकभी न कहती दैया रीकेवट ने सुख लूटा सारास्वयं तरा पुरखों को ताराप्रभु तेरी गोदी में बैठेधन्यवाद क्या किया तुम्हारातुझे मुसाफ़िर भी ठग... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   1:37pm 28 May 2015 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
मित्रो! आज टमाटर खायाभावातीत परमसुख पायाबीस रूपये किलो बिक रहाथी दुकान पर मारा-मारीदैहिक, वाचिक संघर्षों केबाद लगी मेरी भी बारीएक शतक का नोट बढ़ाकरझोले का श्रीमुख फैलाया"बीस रूपये खुल्ले देनाएक किलो आडर सरकारी"टूट गया झोले का भी मनचेहरे पर छाई लाचारीबटुआ, झोला, वस्त्... Read more
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
गुरु तुम सम न कोई उपकारीद्वार तुम्हारे आकर पाईमैंनें सम्पति सारीगुरु तुम बिन न कोई उपकारीबुद्दि-विवेक विहीन फिरा मैंतृष्णा से सब ओर घिरा मैंहे करुणामय! तृप्त हुआ मैंपाकर कृपा तुम्हारीगुरु तुम बिन न कोई उपकारीघोर निशा में दिशाहीन सेजल से बिछुड़ी हुई मीन सेभय-व्याकुल... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   7:49am 14 Mar 2014 #भजन
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
कहते रहो कहानी बीरअपनी आँधी-पानी बीरतुम पहरे पर खड़े रहेडूब गई रजधानी बीरसारे चारण और कहारबोल रहे हैं जै जै कारमहरानी ने ठोंकी पीठडटे रहे तुम राज कुमारहैं दीवान सयाने जीपरखे और पहचाने जीलेकिन इनकी उमर हुईअब ख़ुद लो निगरानी बीरसवा अरब से ज़्यादा भालइन्द्रप्रस्थ में... Read more
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
दर्द ऐसा, बयाँ नहीं होताजल रहा हूँ, धुआँ नहीं होताअपने अख़्लाक़ सलामत रखियेवैसे झगड़ा कहाँ नहीं होताआसमानों से दोस्ती कर लोफिर कोई आशियाँ नहीं होताइश्क़ का दौर हम पे दौराँ थाख़ुद को लेकिन ग़ुमाँ नहीं होताकोई सब कुछ भुला दे मेरे लियेये तसव्वुर जवाँ नहीं होताजब तलक वो... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:11pm 12 Aug 2013 #ग़ज़ल - दर्द ऐसा
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
इन्ही मेंघों से निकलकरचंचला की श्रृंखलायेंसुपथ आलोकित करेंगीइन्हीं मेघों से झरेंगीसुधा की रसमयी बूँदेपुनः नवजीवन भरेंगीइन्हीं मेघों से फिसलकररश्मियाँ नक्षत्रपति कीइन्द्रधनु मोहक रचेंगीइन्ही मेंघों से हुआ प्रेरितपवन, सन्देश देगानेह की नदियाँ बहेंगीइन्हीं म... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:58am 11 Jul 2013 #
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
निद्रित  नहीं उनींदा सा हूँस्नात नहीं पर भीगा सा हूँजग की विषम व्यथायें कितनीनिज की पीर-कथायें कितनीउलझी मनोदशा से अपनीत्रस्त नहीं पर खीझा सा हूँयह विस्तृत आयोजन क्या हैमेरा यहाँ प्रयोजन क्या हैजीवन एक समस्या अनगिनअशक्यता में तीखा सा हूँ।विडम्बनाओं की है गठरीयं... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   4:35pm 7 Jul 2013 #मेरे गीत
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
निद्रित  नहीं उनींदा सा हूँस्नात नहीं पर भीगा सा हूँजग की विषम व्यथायें कितनीनिज की पीर-कथायें कितनीउलझी मनोदशा से अपनीत्रस्त नहीं पर खीझा सा हूँयह विस्तृत आयोजन क्या हैमेरा यहाँ प्रयोजन क्या हैजीवन एक समस्या अनगिनअशक्यता में तीखा सा हूँ।विडम्बनाओं की है गठरीयं... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   4:35pm 7 Jul 2013 #मेरे गीत
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
दो घनाक्षरियाँ होली पर ( होली २०१३ में लिखी गई)भंग की तरंग में अनंगनाथ झूम रहे, फागुनी बयार से जटा भी छितराई है।गंग की तरंग भी उमंग में कुरंगिनी सी,शैलजेश की जटाटवी को छोड़ धाई है।थाप पे मृदंग की नटेश नृत्यमान हुयेदुंदुभी रतीश ने भी जोर से बजाई है।रुद्र के निवास में वसन... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   9:35pm 15 Apr 2013 #होली
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
सभी कहते हैं इसको ख़ुदकुशी हैभीड़ सी फिर यहाँ क्यूँकर लगी हैएक पल की किसी मीठी चुभन कादर्द क्यूँ ज़िन्दगी में लाजिमी हैलामकाँ, लाइलाज़, लापरवाइन ख़िताबों का हासिल आशिक़ी हैग़फ़लतों में तमाम हो जातीचार दिन भी कहाँ अब ज़िन्दगी हैहम सुकूँ की तलाश में अक्सरचैन दुश्वार ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   5:57am 14 Feb 2013 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
ख़्वाब ही था ज़िन्दगी कितनी सहल हो जायेगीतुम जो गाओगे रुबाई भी ग़ज़ल हो जायेगीइतने आईनों से गुज़रे हैं यक़ीं होता नहींअज़नबी सी एकदिन अपनी शकल हो जायेगीमर्हले ऐसे भी आयेंगे नहीं मालूम थाउम्र भर की होशियारी बेअमल हो जायेगीहै बहुत मा’कूल फिर भी शक़ है मौसम पर मुझेतज्... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   4:32pm 17 Dec 2012 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
दिल मुसाफ़िर ही रहा सूये-सफ़र आज भी हैहाँ! तसव्वुर में मगर पुख़्ता सा घर आज भी हैकितने ख्वाबों की बुनावट थी धनुक सी फैलीकूये-माज़ी में धड़कता वो शहर आज भी हैबाद मुद्दत के मिले, फिर भी अदावत न गयीलफ़्जे-शीरीं में वो पोशीदा ज़हर आज भी हैनाम हमने  जो अँगूठी से लिखे थे मिलकर... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:17pm 11 Dec 2012 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
शहर मुझको तेरे सारे मुहल्ले याद आ्ते हैंदुकाँ पर चाय की बैठे निठल्ले याद आते हैंम्यूनिसपैलिटी के बेरोशन चराग़ों की कसम मुझकोउठाईगीर जेबकतरे चिबिल्ले याद आते हैंतबेलों और पिगरी फार्म का अधिकार पार्कों परखुजाती तन मिसेज डॉग्गी औऽ पिल्ले याद आते हैंमैं हाथी पार्क क... Read more
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
आकुल हो तुम बाँह पसारेकिन्तु देहरी पर रुक जातेअसमंजस में पाँव तुम्हारेअवहेलना जगत की करताहै, मन का व्याकरण निरालाकिन्तु रीतियों की वेदी परजलते स्वप्न विहँसती ज्वालासब कुछ धुँधला-धुँधला दिखतानयन-नीर की नदी किनारेआकुल हो तुम बाँह पसारेसमझौतों में जीते-जीतेमरुथल ह... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:38pm 4 Dec 2012 #मेरा गीत संग्रह
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
जग तू मुझे अकेला कर दे।इच्छा और अपेक्षाओं मेंस्वार्थ परार्थ कामनाओं मेंश्लिष्ट हुआ मन अकुलाता ज्योंनौका वर्तुल धाराओं मेंसूना कर दे मानस का तटअब समाप्त यह मेला कर देजग तू मुझे अकेला कर दे।सम्बन्धों के मोहजाल मेंगुँथा हुआ अस्तित्व हमाराचक्रवात में तृण सा घूर्णितख... Read more
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
कब किसी ने प्यार चाहाआवरण में प्यार के,बस, देह का व्यापार चाहाप्रेम अपने ही स्वरस की चाशनी में रींधता हैशूल कोई मर्म को मीठी चुभन से बींधता हैहै किसे अवकाश इसकी सूक्ष्मताओं को निबाहेलोक ने, तत्काल विनिमय का सुगम उपहार चाहाकब किसी ने प्यार चाहाप्रेम अपने प्रेमभाजन मे... Read more
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
व्यर्थ की संवेदनाओं से डराना चाहते हैंसुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैंमेरे जीवन की समस्याओं के साये में कहींअपने कुत्तों के लिये भी अशियाना चाहते हैंधूप से नज़रे चुराते हैं पसीनों के अमीरकिसके मुस्तकबिल को फूलों से सजाना चाहते हैंमेरे क़तरों की बदौलत जिनक... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:18am 10 May 2012 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
 यद्यपि मैंने जीवन हारामैं बीता कल हुआ तुम्हाराघिरती हैं सुरमई घटायेंसंध्या के कंधों पर फिर सेसरक गया आशा का सूरजआशंकाओं भरे क्षितिज सेपूछ रहा अपने जीवन सेक्या इच्छित था यही किनारा?मैं बीता कल हुआ तुम्हारामिला अयाचित जो धन उसकेरक्षण में सब शक्ति लगा दीकिन्तु चंचल... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:37pm 2 May 2012 #मेरा गीत संग्रह
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी
जी को जी भर रो लेने दोआँखों को जल बो लेने दोकिसी और को बतलाना क्यामन थक जाये सो लेने दोकिसने समझी पीर पराईफिर क्यों सबसे करें दुहाईजिससे मन विचलित है इतनाहै अपनी ही पूर्व - कमाईछिछले पात्र रीतते-भरतेक्षण-क्षण, नये रसों में बहतेतृष्णा की इस क्रीड़ा को हमशोक-हर्ष से देखा ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:00am 27 Mar 2012 #गीत
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