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Shaken... Not Stirred

निर्मम, निष्ठुर, निर्मोह लगत हैअब यह जीवन-धारमाया तृष्णा अहं में लिप्त चिररहे काम मदमातअंखियन से कबहूँ देखा नालालसा के पारप्रीत, स्नेह, अपनत्व भूलअंसुवन दिए अपारनिज बोये, निज ही दुःख काटेपर दोष धरे संसारअजब पहेली अजब है खेला,ये जीवन मंझधारहिय में जैसे फाँस लगत हैअब र...
Shaken... Not Stirred...
Tag :कुछ कविता सी
  April 16, 2012, 12:57 am
बेखौफ़ हवा बन बह निकलेंपेड़ों की टहनी को तोड़ेंऔर डगमगाते क़दमों सेपत्तियों को रोंदे हमघोंट दें अहसासों को,पत्थर से मारेंरोशनदान में बने उस घोंसले कोकबूतरों ने कुछ अंडेजहां हैं सहेज रखे हुएतोड़ दें विश्वासों को,या निकलें हम घर से नंगे पांवचलते रहें अनवरतउस तपती हुई स...
Shaken... Not Stirred...
Tag :कुछ कविता सी
  March 6, 2012, 2:21 am
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