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Blog: कल्पनाओं का वृक्ष More for your Finance

Blogger: विवेक रस्तोगी
    जब से नयी तकनीक हमारे जीवन में आयी हैं फिर भले ही वे मनोरंजन के लिये हो या कार्य के लिये परंतु हमारे जीवन में निखार आया है। हमारे जीवनशैली भी तकनीक के अनुरूप बदल गयी है। पहले जिन चीजों की जरूरत हमें नहीं होती थी, वे सारी चीजें अब हमारे जीवन के लिये बेहद ही महत्वपूर... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   2:18am 15 May 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
मैं माँ को बचपन से ही देखता आ रहा हूँ, हमेशा माँ अपने बालों का ख्याल बहुत अच्छे से ऱखती आती है, पहले शिकाकाई और आँवला के पावडर से बाल धोती थी, फिर शिकाकाई का साबुन आने लगा तो शिकाकाई के साबुन का उपयोग करने लगी, और फिर धीरे धीरे माँ के बालों का कालापन जाता रहा, और उम्र अपना रं... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:17am 10 May 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
भारत में त्योहार तो बहुत होते हैं, पर क्रिकेट एक ऐसा त्योहार है जो कि भारत में लगभग हरेक दिन मनाया जाता है और भारत में क्रिकेट के दीवानों की कमी नहीं है, भारत में क्रिकेट हर गली मोहल्ले में मिल जाता है। हर भारतीय का सपना होते है कि वह भारत की टीम के लिये क्रिकेट खेले, खैर ह... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   9:14am 7 May 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    जब से स्मार्टफोन उपयोग करना शुरू किया है तब से अब तक हमने बहुत कुछ अनुभव किया और ऐसा लगता रहा कि काश हमारा यह अनुभव ओर अच्छा होता, हम जो भी चीज चाहें वह हमारे हिसाब से ही काम करे, कम्पयूटर की दुनिया में यह संभव है कि कुछ चीजों को अलग से लगाकर आप अपने अनुभव को अपने कार... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:14am 14 Apr 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    जीवन में स्वास्थ्य का अपना ही महत्व है, कहते हैं कि सुबह घूमने से हमेशा ही स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सुबह घूमने से फेफड़ों को ताजी प्राणवायु मिलती है। सुबह के समय की प्राणवायु में प्रदूषण की बहुत ही कम मात्रा होती है, जिससे हमारे फेफड़े सही तरीके से काम करते हैं... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:11am 7 Apr 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
यह अभी ड्रॉफ्ट मोड में है, अभी इसमें कई सुधार किये जाने हैं, अगर आपको लगता है कुछ और भी बिंदु जोड़े जा सकते हैं, तो अवश्य बतायें । (सर्वाधिकार सुरक्षित) जीवन से भेदभाव हटाना है, जीवन से भेदभाव हटाना है, भेदभाव ही जड़ है काम न होने देने कीजीवन के कुरूक्षैत्र में एक होकर आगे ब... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   5:37am 4 Apr 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
सूचना क्रांति के इस आधुनिक युग में #DigitalIndia सपना नहीं होना चाहिये, सूचना क्रांति को अपना काम करने का हथियार बनाना चाहिये। हमें वैश्विक स्तर पर मुकाबले में खड़े रहना है तो हमें हर जगह सूचना क्रांति का उपयोग करना होगा और पूरा भारत डिजिटलइंडिया करना होगा।सरकारी तंत्र के का... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   3:05am 29 Mar 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते |यदन्नं भक्षयेन्नित्यं जायते तादृशी प्रजा ||जैसे दीप का उजाला अँधेरे को खा जाता है, और काजल को उत्पन्न करता है, वैसे ही जिस तरह का भोजन हम ग्रहण करते हैं, वैसे ही हम उसी तरह का व्यवहार करते हैं।उपरोक्त श्लोक आज भी पुरातनकाल की बात ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   8:57am 24 Mar 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    खुशी मतलब कि जब हम दिल से, आत्मा से, अंतरतम से प्रसन्न होते हैं, जिसके मिलने से हमारे रोयें रोयें खड़े हो जाते हैं और ऐसा लगता है कि दुनिया का सारा आनंद हमें मिल गया है। हम इस अवस्था को तभी प्राप्त होते हैं जब ऐसी कोई चीज हमें मिल जाये जिसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं हो... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   7:45am 22 Mar 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    घर वह होता है जहाँ हमारे माता पिता साथ रहते हैं और प्यार होता है। घर केवल चार दीवारी नहीं होता, चार दीवारी तो मकान होता है, जहाँ न अपने होते हैं और न ही प्यार होता है। मकान में लोग केवल रहते हैं पर घर में लोग जीवन को मजे लेते हुए जीते हैं। बचपन से ही इस शहर से उस शहर घू... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   4:26am 10 Mar 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    हम जीवन मे संघर्ष करते हैं, अपने लिये और अपने परिवार के लिये । सब खुश रहें, सब जीवन के आनंद साथ लें । जब हम संघर्ष करते हैं तब और जब हम संघर्ष कर किसी मुकाम पर पहुँच जाते हैं तब भी घर जाने का अहसास ही तन और मन में स्फूर्ती भर देता है। घर जाने का मतलब कि हम हमारी कामकाजी ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:59pm 5 Mar 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    कार सबका सपना होता है, कभी मेरा भी था । बीतते समय के साथ हम चीजों के लायक हो जाते हैं याने कि नालायक से लायक हो जाते हैं। हाँ पहले कभी कार वाकई हर किसी के लिये सपना होता था पर आजकल तो कार खरीदना बहुत ही आसान हो गया है, अब तो कोई भी कार लोन पर खरीद सकता है, पहले तो कार लोन ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   7:37am 28 Feb 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    बच्चों को शौच निवृत्ति सीखने में समय लगता है और इसका प्रशिक्षण उन्हें घर में ही दिया जाता है, पर अगर बच्चे बहुत ही छोटे हों तो शौच निवृत्ति का प्रशिक्षण देना मुश्किल ही नहीं असंभव है, पुराने जमाने किसी भी तरह की अन्य सुविधा उपलब्ध नहीं थी तो पोतड़ों से ही काम चला... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   3:40am 19 Feb 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    मैंने अपना पहला लेपटॉप लगभग 8 वर्ष पहले अमेरिका से मँगवाया था, फिर मुझे ऑफिस से लेपटॉप मिल गया तो हमारे लेपटॉप को बेटेलाल ने हथिया लिया और उस लेपटॉप की जो ऐसी तैसी करी है, कि उसका पहले तो कीबोर्ड तोड़ा, तभी बैटरी ने भी दम तोड़ दिया, और थोड़े दिनों बाद लेपटॉप की स्क्र... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   9:58am 24 Jan 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    प्रेम में अद्भुत कशिश होती है, प्रेम क्या होता है, प्रेम को क्या कभी किसी ने देखा है, प्रेम को केवल और केवल महसूस किया जा सकता है.. ये शब्द थे राज की डायरी में, जब वह आज की डायरी लिखने बैठा तो अनायास ही दिन में हुई बहस को संक्षेप में लिखने की इच्छा को रोक न सका। राज और व... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   6:19am 24 Jan 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    कचरा फैलाने के मामले में हम भारतीय महान हैं । और कचरा भी हम इतनी बेशर्मी और बेहयाई से फैलाते हैं जबकि हमें पता है कि यही कचरा हम सबको परेशान कर रहा है इसलिये हम सबको बड़े से बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिये, कम से कम इसकी शुरूआत गली से करनी चाहिये या घर क... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   1:55am 22 Jan 2015
Blogger: विवेक रस्तोगी
    बच्चों के साथ छुट्टियों पर जाना ही बेहद सुकूनभरा अहसास होता है, और बच्चे छुट्टियों को अपनी शैतानी और असीमित ऊर्जा से छुट्टियों को यादगार बना देते हैं। बच्चों को कितना भी बोलो पर वे कहीं पर भी और कभी भी चुपचाप नहीं बैठ सकते, पता नहीं उनकी इस असीमित ऊर्जा को स्रोत ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   4:11am 18 Dec 2014
Blogger: विवेक रस्तोगी
    जीवन संघर्ष का एक और नाम है, जिसमें हमें हर चीज सीखनी पड़ती है, फिर भले ही वह चाव से हो या मजबूरी में । हाँ एक बात है कि जब हमें कोई चीज नहीं आती तो हमें ऐसे लगता है कि यह चीज सीखना कितना दुश्कर कार्य है और हमें उस चीज को सीखने में, जीवन में उतारने में अपने अंदर के डर से ... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   11:02am 13 Dec 2014
Blogger: विवेक रस्तोगी
    दोस्तों के साथ कॉलेज के दिनों के बिताये दिन कुछ अलग ही होते हैं, कोई किसी की बात का बुरा नहीं मानता और फिर बाद में भले ही कोई कितना बड़ा आदमी बन जाये पर कॉलेज के दिनों के साथियों से तो पुराने अंदाज और पुराने तरीके से ही बात की जाती है। कुछ लोग बदल जाते हैं और वे लोग द... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:08am 12 Dec 2014
Blogger: विवेक रस्तोगी
   अभी दो दिन के लिये हम सप्ताहांत में उज्जैन आये तो हमने अपने बहुत पुराने सुख के साथी (मित्र के वाक्य) को याद किया और वो एकदम हमारे पास आ गये। वे हमारे उन मित्रों में से हैं जिनके साथ हमने अपनी जिंदगी के बहुत से यादगार पल गुजारे हैं।    जब बात ऐसे ही चलने लगी तो कहने लगे यार ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:03pm 30 Jun 2013
Blogger: विवेक रस्तोगी
थोड़ा समय मिला तो समाचार देखे, एक पट्टी घूम रही थी.. (निजी समाचार चैनल पर)------------------------------------------------------------मदद करने वाली पंचायतों का उत्तराखंड सरकार सम्मान करेगी ।अभी तक तबाही से उबरे भी नहीं हैं, बचाव कार्य पूरे भी नहीं हुए हैं और इनके राजनीति चालू हो गई है। जनता बचाव कार्य से खुश न... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:30am 28 Jun 2013
Blogger: विवेक रस्तोगी
    मुंबई में आये हुए आज लगभग २२ दिन पूरे हो गये, अभी तक इधर से उधर भागाभागी, आपाधापी मची हुई थी, मुंबई को समझने में ही इतना समय निकल गया । नई जगह नये लोग नया प्रोजेक्ट बहुत कुछ समझने के लिये होता है । वैसे मुंबई अपने लिये नई नहीं है, परंतु अब जिधर रहते हैं वह उपनगर नया है, आसपा... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:30am 27 Jun 2013
Blogger: विवेक रस्तोगी
आज दोपहर २.२२ समय को हमें ब्लॉग लिखते हुए ८ वर्ष पूर्ण हो जायेंगे और सफ़लता पूर्वक ९ वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इन ८ वर्षों में बहुत से अच्छे दोस्त ब्लॉगिंग के कारण मिले हैं, केवल ब्लॉगिंग के कारण ही लगभग हर शहर में कहने के लिये अपनी पहचान है।४-५ वर्ष पहले जब मुंबई में ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:30am 25 Jun 2013
Blogger: विवेक रस्तोगी
    सुबह मित्र को फ़ोन किया कि इस सप्ताहांत का क्या कार्यक्रम है, उनसे मैं शायद ३ वर्षों बाद मिल रहा था और ये मित्र मेरे आध्यात्मिक जीवन में बहुत महत्व रखते हैं। ये आध्यात्म को इतने गहरे से समझना और किसी और की जरूरत को समझने वाले मैंने वाकई बहुत ही कम लोग देखे हैं। उन्होंन... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:22am 23 Jun 2013
Blogger: विवेक रस्तोगी
    जीवन बहुत कठिन है और जीवन में कई तरह की कठिनाइयाँ पल पल पर आपका इंतजार करती हैं, जिससे जूझते हुए हम जीवन को सुखद एवं सफ़ल बनाते हैं। जीवन में कई आपातकाल भी आते हैं, जहाँ ना अपने काम आते हैं और ना ही पराये काम आते हैं। इसके लिये हमें खुद ही तैयारी करनी पड़ती है, सोचना पड़ता है... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:55am 19 Jun 2013
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