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Blog: कुछ लम्हे दिल के...

Blogger: अर्चना तिवारी
स्थापित हो जाना एक ऐसी शय हैजिसे भय होता है हर पल गिराए जाने कारोपित किए जाते समय भयभीत नहीं करता भूमि का कच्चापनन ही उखड़ जाने का होता है भयउस दौरान कितनी ही बार निराई जाती हैजड़ों के आस-पास की कच्ची भूमिखर-पतवार उग जाने पर उलट-पलट दी जाती है मिट्टी भीताकि जड़ों तक पहुँ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   11:50am 14 Sep 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
अब भी याद आती हैवह।जब रोते-रोते हिचकी बंध जातीवह पास आकर पुचकारतीकभी बाँहों में भरकरढाढस बँधाती, सहलाती।अब भी याद आती हैवह।घर से दूर रहने परउसका ही साथ संबल देताउसके स्पर्श की गर्माहटकुछ पहचानी सी लगतीअनजानों में एक वही तोअपनी सी लगती।अब भी याद आती हैवह।किसी विद्य... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   9:50am 22 Aug 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
क्या?तुम प्रश्न करते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम नमन नहीं सलाम करते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम सूरज की जगह चाँद देखते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम गाय को नहीं बच्चे को बचाते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम राम नहीं ईश्वर कहते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम जय भारत नहीं जय हिंद कहते हो?तुम देशद्रो... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   2:09pm 15 Aug 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
लिखें तो क्या लिखेंहँसी लिखें, खुशी लिखेंया कि लिखें दर्द?या वो लिखें जो आता है नज़र?लेकिन, जो नज़र आता है उसे लिखा जाता है क्या?लिखा जाता है तो पढ़ा जाता है क्या?पढ़ा जाता है तो समझा जाता है क्या?समझे जाने पर परिवर्तन आता है क्या?फिर भी लिखा तो जाता ही है नाक्योंकिलिखा जा... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   4:35pm 3 Aug 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
लिखें तो क्या लिखेंहँसी लिखें, खुशी लिखेंया कि लिखें दर्द?या वो लिखें जो आता है नज़र?लेकिन, जो नज़र आता है उसे लिखा जाता है क्या?लिखा जाता है तो पढ़ा जाता है क्या?पढ़ा जाता है तो समझा जाता है क्या?समझे जाने पर परिवर्तन आता है क्या?फिर भी लिखा तो जाना चाहिए नाक्योंकि लिखा ज... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   4:35pm 3 Aug 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का पहली बार एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही उसका माथा चूमते हुए तुमने उससे दुनिया की हर ख़ुशी देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्या... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:14am 16 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
कुछ देखो-सुनो, तो बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजो जकड़ी होती हैसीमेंट से, बालू सेताकि ढह ना जाए।या तुम भी जकड़े हुए होऐसे ही सीमेंट से, बालू सेकि ढह जाओगेभड़भड़ाकर?तुम बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजिनमें पड़ी होती हैंलोहे की सरियाएंताकि ढह ना जाए।या तुम्हारे अंदर भी हैं... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:42am 9 Dec 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
मैं, नर्मदा पर खड़ा सोच रहा हूँअब लोग मेरे जिस्म को छू सकेंगेलेकिन क्या इन फौलादी ऊँचाईयों परउनके एहसास भी मुझको छू सकेंगे?मैं सोच रहा हूँरियासतों का एकीकरण किया था लेकिनक्या सियासतों का एकीकरण कर सकूँगा?प्रतीक बना हूँ एकता काक्या नफरतों को खंडित कर सकूँगा?मैं, नर्मद... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:09am 4 Nov 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
भीड़भीड़ की न कोई चेतना होती हैन ही कोई विचारभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक ही समय में दो जगह होती हैभीड़ पक्ष में होती हैभीड़ विपक्ष में होती हैभीड़ किसी की नहीं होतीभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक पल में प्रतिष्ठित करती हैभीड़ एक पल में धूल-धूसरित करती हैभीड़ बस भीड़ होती ह... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   11:09am 19 Jun 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
किताबों के कुछ पन्ने बार-बार खुल जाते हैं कुछ वो जो मन से पढ़े गए हों या फिर  वो जिन पर मोड़ पड़ गए होंकुछ के बीच बुकमार्क लगे मिल जाते हैंजो लगाए गए होते हैं याद रखने  के लिएआगे पढ़े जाने के लिएलेकिन  उन्हें  कभी पढ़ने का मौका नहीं मिलताऐसे ही किसी दिन दिख जाते हैंपन्न... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   1:36pm 1 Jul 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
 मधुमास यानी प्रेम का मासप्रेम शब्दों में सिमटी कोई कविता नहीं हैजिसे प्रकट करने के लिए कहा जाय प्रेम प्रकट किये जाने का मोहताज भी नहीं है  क्योंकि यह अप्रकट होकर भी संचारित हो जाता...प्रेम शर्तों में लिपटी कोई नियमावली भी नहीं हैजिसको मानने के लिए बाध्य किया जा... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   12:27pm 3 Feb 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
भोर का चाँद अधिक देर तक नहीं दिखता फिर भी उग आता है भोर मेंशायद वह जानता है कि इस पर उसका वश नहीं हैवश है तो केवल चलते रहने परवह जानता हैकि दिन में उसका अस्तित्व बेशक ना होपर रात पर तो उसी का एकाधिकार है...... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   7:14am 4 Dec 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
तुम सिर्फ़ अपने नाम तक सीमित नहीं होतुम सिर्फ़ अपने सम्मान तक सीमित नहीं होतुम सिर्फ़ अपने गान तक भी सीमित नहीं होतुम बिखरे पड़े होनदी, पहाड़, जंगल, खाड़ी, सागर, मैदान, रेगिस्तान में तुम समाए हुए होहर दिल, हर धड़कन, हर नब्ज़ मेंतुम समाए हुए हो हर आवाज़ में, हर इंकलाब मेंतुम शब्द नह... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   5:25pm 30 Nov 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
इंसान बड़ा सयाना हैवह सब जानता हैकि उसे क्या चाहिए, क्या नहींनहीं रखता कभीअपने पास, अपने आसपास ग़ैरज़रूरी, व्यर्थ की वस्तुएँउन्हें फेंक देता है उठाकरकचरे के डिब्बे में प्रतिदिन।इंसान बड़ा सयाना हैनहीं फेंकता कुछ वस्तुएँ कभीकिसी भी कचरे के डिब्बे मेंबेशक वे कितनी ह... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   7:40am 25 Sep 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
ज़िन्दगी शुरू होती है हर सुबहकुछ इस तरहरोज़मर्रा के काम जल्दी-जल्दी निपटानातैयार हो काम के लिए निकलनाठीक स्कूटर निकालते वक़्तएक स्कूल की वैन का घर के सामने रुकनाड्राइवर का मुझे निकलते हुए देखनाबच्चों का खिड़की से झाँकनाफिर एक अंजाना सा रिश्ता बन जानाऔर प्रतिदिन की आदत... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   11:50am 16 Sep 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
तुम चाहे कितना ही चुप  रहो तुम्हारी आँखों के नुकीले कोर सदा मुस्कुराते हैं....... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:06pm 14 Aug 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
दूरियाँ बतातेतसल्ली दिलातेरास्तों में गड़े मिल जाते हैंअनगिनत मील के पत्थर।दिशाएँ दिखाते, आस जगातेरास्ते पर तने मिल जाते हैंअसंख्य बोर्ड।लेकिन कुछ दूरियाँऐसी होती हैंजिनके लिएन कोई मील के पत्थर मिलेंगेन ही कोई दिशा दिखाने वाले बोर्ड।उनको स्वयं तय करना पड़ता हैभट... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   7:56am 5 Jun 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
चुभते हैं।कुछ शब्दचुभते हैं।रिश्तों के बीच हो जाती हैंजब छुटपुट झड़पेंअनजाने ही बन जाते हैंकुछ शब्दकिरकिरे नुकीले बाणजो चल जाते हैंअपनों परऔर फिरजीवन पर्यंतचुभते रहते हैं।कुछ शब्द चुभते रहते हैं।शब्द रच देते हैंएक अभेद चक्रव्यूहजिसमें फँसता जाता हैजितना भी न... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   4:42pm 31 May 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
पथराई आसपथराई आँखशायद पानी मर गया........ Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   6:38am 26 May 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
जो करीब है वो दूर बहुत है जो दूर बहुत है वही करीब है...... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   10:52am 25 May 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
जो करीब हैवो दूर बहुत है, जो दूर बहुत हैवही करीब है...... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   10:52am 25 May 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
धूप है तो क्या घटा इक रोज़ छा ही जायेगी चल पड़े हैं राह पर मंज़िल तो आ ही जायेगी आज पतझर, फूल, पत्ती, डालियों को रौंद ले जब बहार आएगी गुलशन को सजा ही जायेगी इस हवस पर आप खुश हैं एक दिन होगा यहीआपकी औकात पलभर में घटा ही जायेगीजाति, भाषा, धर्म, बोली की सियासत आग हैइस नगर ... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   12:16pm 10 Nov 2013
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