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गत्‍यात्‍मक चिंतन : View Blog Posts
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गत्‍यात्‍मक चिंतन

पिछले माह ट्रेन से आ रही थी , रिजर्वेशन नहीं होने और भीड के अधिक होने के कारण महिला बॉगी में चढ गयी , यहां हर वर्ग का प्रतिनिधित्‍व करने वाली महिलाएं मौजूद थी , बच्चियों , युवतियों से लेकर वृद्धा तक , मजदूर से लेकर सामान्‍य गृहस्‍थ तक और नौकरीपेशा से लेकर हम जैसी महिलाओं तक...
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संगीता पुरी
Tag :
  March 7, 2013, 9:06 pm
पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष का स्‍वागत करने के , व्‍यतीत किए गए वर्ष का मूल्‍यांकण करने और नए वर्ष के लिए अपने कार्यक्रम बनाने यानि हर व्‍यक्ति के लिए महत्‍वपूर्ण दिसंबर के उत्‍तरार्द्ध और जनवरी के पूवार्द्ध में पड रही कडाके की ठंड के मध्‍य देश एक अलग ही आग में ...
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संगीता पुरी
Tag :
  January 4, 2013, 9:10 pm
बौद्ध धर्म नास्तिकों का धर्म है, इसके अनुसार कर्म ही जीवन में सुख और दुख लाता है। भारत ही एक ऐसा अद्भूत देश है जहां ईश्वर के बिना भी धर्म चल जाता है। ईश्वर के बिना भी बौद्ध धर्म को सद्धर्म माना गया है। दुनिया के प्रत्येक धर्मों का आधार विश्वास और श्रद्धा है जबकि बौद्ध ध...
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संगीता पुरी
Tag :गौतम बुद्ध
  May 6, 2012, 8:00 pm
हमारे देश में प्राचीन काल से जो दर्शन मौजूद है इसकी सबसे बडी शक्ति इसका लचीलापन है। कुछ भी विचार , जो ईश्वर, समाज या राजनीति से सम्बन्धित है, इसके दर्शन का अंग बन सकता है। सभी महापुरूषों के विचारों को सुनना , अमल करना यहां के लोगों का स्‍वभाव है। सामाजिक और राजनीतिक क्षे...
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संगीता पुरी
Tag :महापुरूष
  April 14, 2012, 5:53 pm
ईसा से 600 वर्ष पूर्व जब भारतवर्ष अंधविश्वासों के अंधेरे में डूब चुका था , ईर्ष्या और द्वेष की बहुलता थी, समाज जातिवाद के झमेले में फंसा था , धर्म पुस्तकों में सिमट कर रह गया था , धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़े, दंगा-फसाद एवं अत्याचार चरम पर थे , धर्म के नाम पर पशुबलि और हिंसा का प्...
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संगीता पुरी
Tag :कर्मवाद
  April 4, 2012, 5:02 pm
साहित्‍य शिल्‍पी में प्रकाशित मेरे द्वारा लिखी कुछ कहानियों में आपके लिए एक और कहानी .....शाम के 4 बज चुके हैं , दिन भर काम करने के कारण थकान से शरीर टूट रहा है , इसके बावजूद टेबल पर फाइलों का अंबार लगा है। पिछले एक सप्‍ताह से दो चार छह फाइले छोडकर समय पर घर चले जाने से समस्‍य...
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संगीता पुरी
Tag :मेरी कहानियां
  February 7, 2012, 7:30 am
कैलेण्‍डर में 30 दिसंबर का दिन दिखाई देते ही मन मस्तिष्‍क 1988 की यादों में जा बसता है , जहां लगभग मई के बाद से पूरे ही वर्ष विभिन्‍न पत्रिकाओं के 'गर्भावस्‍था और मातृत्‍व विशेषांक' पढते और उसके अनुसार खुद की जीवनशैली को ढालते ही व्‍यतीत कर दिए थे। ऐसा करती भी क्‍यूं न ? इस...
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संगीता पुरी
Tag :
  December 30, 2011, 5:19 am
वैसे तो पूरी दुनिया में हर देश और समाज में कोई न कोई त्‍यौहार मनाए जाते हैं , पर भारतीय संस्‍कृति की बात ही अलग है। हर महीने एक दो पर्व मनते ही रहते हैं , कुछ आंचलिक होते हैं तो कुछ पूरे देश में मनाए जानेवाले। दीपावली , ईद और क्रिसमस पूरे विश्‍व में मनाए जाने वाले तीन महत्‍...
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संगीता पुरी
Tag :शिक्षा व्‍यवस्‍था
  October 26, 2011, 5:07 am
ज्योतिष से जुड़े होने के कारण पापाजी की चर्चा अक्सर कर लेती हूँ , पर मम्मी को आज पहली बार याद कर रही हूँ . बिहार के नवादा जिले के एक गांव खत्रिया माधोपुर के एक समृद्ध परिवार में सत्‍तर वर्ष पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानि धनतेरस की संध्या  स्व करतार नार...
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संगीता पुरी
Tag :मेरी माँ
  October 24, 2011, 12:05 am
अभी कुछ दिन पूर्व ही एलबम देखते हुए 20 वर्ष पुराने इस चित्र पर नजर पडी , इसमें रोता हुआ बच्‍चा मेरा बडा सुपुत्र है , जो अभी इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष का छात्र है ,  साथ में  हमारे दो घनिष्‍टतम मित्र की दोनो बच्चियां हैं , जिसमें से एक डीवीसी में ही इंजीनियर है , इसी वर्ष फरवरी ...
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संगीता पुरी
Tag :
  October 18, 2011, 5:55 am
पिछली बार गांव गयी तो सीतामढी जिले के एक प्रखंड पुपरी में स्थित बाबा नागेश्‍वर नाथ धाम जाने का मौका मिला। शहर के बाजार के बीचोबीच एक छोटे से प्रांगन में स्थित इस मंदिर की महत्‍ता दूर दूर तक फैली हुई है। कहते हैं कि लगभग 40 वर्ष पूर्व यहां एक खेल का मैदान था। कुछ बच्‍चे मै...
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संगीता पुरी
Tag :बाबा नागेश्‍वर धाम
  August 20, 2011, 8:22 am
मेहंदी लिथेसिई कुल का काँटेदार आठ दस फुट तक ऊंचा झाडीनुमा पौधा होता है , जिसका वैज्ञानिक नाम लॉसोनिया इनर्मिस है। इसे त्वचा, बाल, नाखून, चमड़ा और ऊन रंगने के काम में प्रयोग किया जाता है। जंगली रूप से यह ताल तलैयों के किनारे उगता है , पर इसकी टहनियों को काटकर भूमि में गाड़ ...
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संगीता पुरी
Tag :मेहंदी
  August 12, 2011, 6:56 pm
हमने तो बहुत दिनों तक अपने हाथो से भाइयों को राखी बांधी , आजकल की बहनें तो शुरू से ही पोस्‍ट से राखी भेजने या ग्रीटींग्स कार्ड के द्वारा राखी मनाने को मजबूर हैं, भाई साथ रहते ही कितने दिन हैं ??  बहनों के लिए वो दिन तो अब लौट नहीं सकते , जब संयुक्‍त परिवार हुआ करते थे और राखी ...
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संगीता पुरी
Tag :राखी
  August 11, 2011, 5:33 pm
इस वर्ष के चारो सोमवार व्‍यतीत हो गए और मैं एक भी सोमवारी व्रत न कर सकी। इधर कुछ वर्षों से ऐसा ही हो रहा है , कभी काम की भीड और कभी तबियत के कारण सोमवारी व्रत नहीं कर पा रही हूं। हमारे धर्म में सावन महीने के सोमवार का बहुत म‍हत्‍व है।सावन के सोमवार कोभगवान शिव और देवी पार्व...
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संगीता पुरी
Tag :व्रत
  August 10, 2011, 12:55 am
मात्र एक खबर से पूरे घर में सन्‍नाटा पसर गया था। सुबह एक्‍सीडेंट के बाद से ही सबके कान समय समय पर फोन पर होनेवाले बातचीत में ही लगे थे , इसलिए फोन रखते हुए 'मामाजी नहीं रहें' कहनेवाले पुलकित के धीमे से स्‍वर को सुनने में मां को तनिक भी देर न लगी और वह तुरंत बेहोश होकर गि...
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संगीता पुरी
Tag :मेरी कहानियां
  June 23, 2011, 5:18 am
बच्‍चों के लिए मां का क्‍या महत्‍व है , यह उन बच्‍चों से पूछिए जिनकी माता नहीं और वे दूसरे बच्‍चों के सुख देखकर आहें भरते हैं। वैसे समय इतना गतिशील है कि किसी के होने न होने का इसपर कोई प्रभाव नहीं पडता। पिछले वर्ष 3 मई को हुई एक दुर्घटना ने एक परिवार का सब सुख तो लील लिया थ...
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संगीता पुरी
Tag :
  June 17, 2011, 4:44 am
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