Hamarivani.com

तेवरी

पकने लगी फसल, रीझता किसानजल्दी पकी फसल, रीझता किसानली सेठ ने खरीद, पैसे उछाल करखेतों खड़ी फसल, रीझता किसानकर्जा उतर गया, सिर पर लदा हुआअच्छी हुई फसल, रीझता किसानदो रोटियाँ मिलें, दो वक़्त के लिएकुछ तो बची फसल, रीझता किसानजो पौध गल गई थी, खाद बन गईआई नई फसल, रीझता किसान(137)    ...
तेवरी...
Tag :
  July 2, 2015, 1:46 am
सारे सपने आधे, जनता परेशान हैसिर पर कुर्सी लादे, जनता परेशान हैलिए हाथ में लट्ठ अराजक टहल रहे हैंकिसकी मुश्कें बाँधे, जनता परेशान हैजल्लादों की फौज माँगने वोट चली हैइनके भाँप इरादे, जनता परेशान हैअपने हत्यारे चुनने की आज़ादी हैझुके हुए सिर-काँधे, जनता परेशान हैभरे जे...
तेवरी...
Tag :
  July 4, 2013, 11:38 pm
लोक समर्थन के चेहरे पर काजल पोत दियासहज समर्पण के चेहरे पर काजल पोत दियाएक बार उसके चेहरे के दाग दिखाए तोउसने दर्पण के चेहरे पर काजल पोत दियाराजमुद्रिका शकुंतला से भारी होती हैशुभ्र तपोवन के चेहरे पर काजल पोत दियाविवश कुन्तियाँ गंगा में कुलदीप सिराती हैंपूजन अर्चन ...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  May 2, 2012, 11:07 pm
दुर्दांत दस्यु रखवालेसब झूठे मन के कालेये नमक छिडकते पल पलछिल छिल कर छोलें छालेपत्तों की पूजा करतेजड, छाछ सींचने वालेहम मूरख औढरदानीहमने भस्मासुर पालेवे लिए गुलेल खड़े हैंगा ले, कोकिल! तू गा ले  [134]पूर्णकुंभ - सितंबर 2012 - आवरण पृष्ठ ...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  May 2, 2012, 12:31 am
अश्व हुए निर् अंकुश, वल्गाएँ ढीली थींमुँह के बल आन गिरे, राहें रपटीली थींकहते हो, आँगन में क्यों धुआँ धुआँ ही हैइस अग्निहोत्र की सब समिधाएँ गीली थींआँखें हैं झँपी झँपी औ'  कंठ हुआ नीलादोपहरी में रवि ने पीडाएँ पी ली थींये कसे हुए जबड़े, ये घुटी हुई चीखेंहैं तनी नसें साक...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  May 1, 2012, 11:26 pm
एक बार बहके मौसम में कर बैठा नादानीरह रह कर बह बह जीवन भर कीमत पड़ी चुकानीएक कटोरी दूध लिए कब से लोरी गाता हूँजब से चरखा कात रही है चंदा वाली नानीजाने कैसे लिख लेते सब रोज़ नई गाथाएँइतने दिन से जूझ रहा मैं पुरी न एक कहानीसाँझ घिरे जिसकी वेणी में बरसों बेला गूँथीपत्थर की ...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  May 1, 2012, 10:56 pm
छंद छंद गीत का प्रान हो गयाशब्द शब्द अग्नि का बान हो गयाधुंध चीर कर उगा रक्त सूर्य जोवेद औ' सनातन कुरान हो गयाबहरों की बातें विधान पर बहसराजपद गोलघर दुकान हो गयासुनते हैं अंधों की भीड़ पर अब  लाठियां चलें प्रावधान हो गयादिल्ली बाज़ार में ठोकरें पड़ींमाथे पर काला निशा...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  February 7, 2012, 12:54 am
अग्निहोत्र का दीप बरेगाज्वालाओं का मन्त्र वरेगाउगें अधेरे, लेकिन सूरजनहीं मरा है, नहीं मरेगापरात रीती पड़ी धरा कीतपी भागीरथ पुनः भरेगाराम बटोही सिंहासन तजवन प्रांतर का वरण करेगामूर्छित पड़ी हुई है पीढ़ीतू ही शब्द-सुधा बरसेगा!        [130]1/1/1982...
तेवरी...
Tag :तेवरी
  February 6, 2012, 12:57 am
दर्द से हमने जबाड़े कस लिएसिर्फ अभिनय जानकर तुम हँस दिएहैं पडी बँधुआ हमारी पीढ़ियाँरौंदिए या चुटकियों में मसलिएपालकी को सात पुश्तें ढ़ो रहींपद-प्रहारों में तुम्हारे हम  जिएयह तुम्हारे पाप का अंतिम चरणरक्त की इस कीच में तुम धँस लिएचीखने से कुछ नहीं होगा ; गलेअब हमा...
तेवरी...
Tag :
  September 24, 2011, 12:39 am
देशद्रोहियों के हैं पहरे देश मेंज़हरों के सागर हैं गहरे देश मेंलालकिले पर आज़ादी विकलांग हैप्यासी आवाजों के बहरे देश मेंएक तिरंगा है गुंबज पर; सड़कों पररंग बिरंगे झंडे फहरे देश मेंअंधे के कंधे पर लंगड़ा भाई हैयही यात्रा होती ठहरे देश मेंआँगन आँगन दीवारें हैं, खाई है...
तेवरी...
Tag :
  August 24, 2011, 1:33 am
युधिष्ठिरी-यात्रा के नग हैंव्रण-छालों से छाए पग हैंरोती रहे न्याय की पुस्तककुर्सी के क़ानून अलग हैंबाज़ों के पंजे घातक, परबागी आज युयुत्सु विहाग हैंतूफानी धाराएँ मचलींकागज़ की नावें डगमग हैंशंखनाद गूँजा, मंदिर कीदीवारों के कान सजग हैं     [127]20 नवंबर 1981...
तेवरी...
Tag :
  July 31, 2011, 12:53 am
घर बगिया खलिहान सजग हैंदीवारों के कान सजग हैंचुग न सकोगे मेरी फसलेंजब तक खड़े मचान सजग हैंशीश महल के स्वप्न बिखरतेकच्चे सभी मकान सजग हैंचक्र व्यूह शोषण के टूटेंतीखे तीर कमान सजग हैंभाग्य विधाता! अधिनायक! सुन;जन गण के जय गान सजग हैं!!    [126]20 नवंबर 1981  ...
तेवरी...
Tag :
  July 31, 2011, 12:39 am
'कल धमाके में मरा जो , कौन था?'  पूछा जभीयों सुबह बोली सहम कर, 'एक भोला आदमी'हो गया साबित बहुत हल्का सभी के सामनेयार! जब सच की तुला में आज तोला आदमीभर दिया बारूद तुमने खाल में उसकी स्वयंक्यों शिकायत यदि पटाखा और गोला आदमीएक कोने से मसर्रत, एक कोने से रमादेखते युग की हथेली पर...
तेवरी...
Tag :
  July 14, 2011, 8:29 pm
हो गया है देखिए कितना कमीना आदमीयह घड़ा है देखिए चिकना कमीना आदमीलाल नीली पगड़ियाँ औ' धवलवर्णी टोपियाँओढ़, चूनर छीनता फ़ितना कमीना आदमीबालकों का खून पीता, औरतों को नोचताआदमी को लूटता  इतना कमीना आदमीडाकखाने खा रहे यूँ चिट्ठियों को, बेशरमदोस्त जासूसी करें, लिखना - क...
तेवरी...
Tag :
  July 14, 2011, 8:16 pm
गूँगों के गाँव में अंधों का राज हैचिड़िया दबोचता पजों में बाज़ हैकमज़ोर हाथ वे पतवार खे रहेलहरों में डोलता इनका जहाज़ हैलो चल पडी हवा छाती को चीरतीमौसम ने आज फिर बदला मिज़ाज हैअंबर में फिर कहीं बिजली चमक उठीतांडव के राग में य' किसका साज़ हैगिद्धों की मच गई हर ओर चीत्का...
तेवरी...
Tag :
  June 25, 2011, 2:41 am
गन्ने की पोर में विष कौन भर गयाजिसने भी रस पिया पीते ही मर गयाकोल्हू में आ गया कर्जा उतारनेबस रह गया वहीं वापस न घर गयाबोगी में लादकर कुछ लोग चल दिएपौ फटते काफिला मिल के नगर गयाचंपा के हाथ में हाँसी दरांतियाँअचपल को पलकटी देकर किधर गयाअब और तान कर कंकड़ न फेंकिएलहरों के...
तेवरी...
Tag :
  June 25, 2011, 2:11 am
सुनिए नई कमान लाया है शिकारीखतरे में आसमान; आया है शिकारीहै धाँय धाँय धाँय या हाय हाय हायबन करके कोहराम छाया है शिकारीवे बाज़ बच गए उत्सव में जिन्होंनेपंजों से रक्त-राग गाया है शिकारीआँसू के आचमन, चीखों के मंत्र हैंनिर्दोष-रक्त में न्हाया है शिकारीकोंपल प' चक्रधर जो ए...
तेवरी...
Tag :
  June 25, 2011, 1:51 am
गली गली में शोर हैकुर्सी वाला चोर हैअंग अंग में पीव, योंकसक रहा हर पोर हैयह लो, खतरा आ गयाअंबर में घनघोर हैबीच शहर में आ चुकासाँप निगलने मोर है खून पूर्व में छा रहाहोने वाली भोर है    [120]6 /11 /1981  ...
तेवरी...
Tag :
  June 12, 2011, 3:47 am
आप कितने पाप लाएआज तक गिनने न आएझील खारी हो गई हैआप हैं जब से नहाएआप थे पत्थर, सुमन नेव्यर्थ ही आँसू बहाएआपके होठों हमाराखून है, छुटने न पाएआप अब संन्यास ले लेंआग घर में लग न जाए     [119]6 /11 /1981...
तेवरी...
Tag :
  June 12, 2011, 3:33 am
ये बड़े जो दीखते हैंखून से हम सींचते हैंएक जुगनू छोड़कर वेयह अँधेरा चीरते हैंचीख कर दो चार नारेशून्य मन  को जीतते हैंएक विप्लव के विपल मेंदमन के युग बीतते हैंसंयमी हम ठोकरें खानियम द्रोही सीखते हैं.    [118]6/11/1981 ...
तेवरी...
Tag :
  June 12, 2011, 3:14 am
दीप से छत जल रही हैआस्था हर छल रही हैगिरगिटी काया पहन कररोशनी खुद छल रही हैआँख में आहत सपन कीमौन पीड़ा पल रही हैभूमि के रस कलश सारेधूप पीती चल रही हैमानसूनी यह हवा अबसूर्य को क्यों खल रही हैकाट दो इस देह से, जोएक बाजू गल रही है    [117]6/11 /1981   ...
तेवरी...
Tag :
  June 12, 2011, 2:59 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167804)